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अगर इतनी ही जल रही है, तो अपने दम पर बाहर निकालो-जयशंकर..

Hindi Post

भारत का कुछ अच्छा हो और यह बुड्ढा जलन महसूस ना करे ऐसा होगा ही नहीं। यह इतना खतरनाक बुड्ढा है कि एक दफा चाइना पर भरोसा दिखाया जा सकता है। लेकिन इस पीटर नवारो पे नहीं। जी हां, आपको इसका नाम अच्छी तरीके से याद होगा। बीते दिनों यानी जब ट्रंप ने टेरिफ वॉर शुरू कर दिया था, तब इस पीटर नवारो का नाम काफी चर्चा में रहा था। क्योंकि भारत पे टेरिफ लगाने का प्रस्ताव इसी पीटर नवारू ने ट्रंप के आगे पेश किया था।

यह बुड्ढा शुरू से ही भारत विरोधी सोच का रहा है। आज इसके आधी से ज्यादा लकड़ियां श्मशान घाट पहुंच चुकी है। लेकिन इसके अंदर का भारत विरोधी कीड़ा है कि मर नहीं रहा। अब मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं क्योंकि आज मुझे यह पोस्ट देखने को मिली। देखिए जरा गौर से इस पोस्ट को देखिए। इसे अमेरिकी न्यूज़ एजेंसी न्यूयॉर्क टाइम्स ने पब्लिश की है और जिसमें यह कहा गया है कि अमेरिका के ट्रेट एडवाइजर पीटर नवारो के मुताबिक भारत ईरान को पीठ-पीछे समर्थन देकर इस युद्ध में अमेरिका और इजराइल की परेशानियां बढ़ा रहा है।

भारत ईरान को बैक फाइट सपोर्ट कर रहा है। जी हां, पीटर ने भारत पे सीधे-सीधे आरोप लगाए हैं कि भारत अमेरिका और इजराइल के खिलाफ ईरान की मदद कर रहा है। जिस वजह से ईरान इस युद्ध में अभी भी टिका हुआ है। अब पीटर ने ऐसा तर्क क्यों दिया? क्योंकि हाल ही में भारत के तीन गैस टैंकर और एक ऑयल टैंकर हॉर्मोस्ट्रेट से सुरक्षित भारत पहुंचे। जिसमें लाखों टन एलपीजी गैस और 80000 टन कच्चा तेल मौजूद था।

और यह जहाज इसलिए हॉर्मोस्ट्रेट से बिना किसी खरोच के बाहर निकल पाए क्योंकि इन पर भारत का ध्वज लगा था। जबकि अन्य किसी भी देश के जहाजों को ईरान हॉर्मोन स्ट्रेट क्रॉस नहीं करने दे रहा। यानी कि यह साफ है कि ईरान और भारत की मिलीभगत है। इसीलिए तो भारत के जहाज सुरक्षित बाहर जा रहे हैं। जबकि अमेरिकी या यूरोप के जहाजों को जलाया जा रहा है।

इस पर सब देशों को विचार करना चाहिए कि भारत अमेरिका और अरब देशों के साथ डबल गेम खेल रहा है। भारत एक धुर देश है जिस पर किसी ने भी भरोसा नहीं करना चाहिए। अब दोस्तों, यह सबको पता है कि ईरान क्यों भारतीय जहाजों को हार्मोस्ट्रेट से बाहर जाने दे रहा है। एक तो भारत ईरान का दुश्मन नहीं दोनों देश कई दशकों से एक दूसरे का साथ देते आए हैं। ऐसे कई मौके आए थे

जब भारत ने ईरान को मानवीय सहायता प्रदान की थी और आज भी जब ईरान के जंगी जहाज भारत में खराब हो पड़ा है तो भारत ईरान के 250 नौ सैनिकों को पनाह दे रहा है। जिसकी कदर अमेरिका को नहीं होगी लेकिन ईरान को जरूर है और यही कारण है कि ईरान भारत को लेकर नरमी दिखा रहा है।

बल्कि मैं तो कहूंगा कि ईरान भारत का सम्मान करता है। इसीलिए भारत इजराइल का सच्चा दोस्त होकर भी ईरान ने भारत को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाया। जबकि अमेरिका के मंत्रीगण यही चाहते हैं कि सारी दुनिया इस युद्ध में कूद पड़े। अमेरिका के इशारे पे ईरान पे बमबारी करें। इस पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी कहा कि ईरान भारत को कुछ मामलों में छूट दे रहा है।

इसका मतलब यह नहीं कि हम इजराइल या अमेरिका को धोखा दे रहे बल्कि यह युद्ध हमारा है ही नहीं। तो आप कैसे कह सकते हैं कि हम अमेरिका के खिलाफ ईरान का साथ दे रहे हैं। जयशंकर साहब ने तो यह भी कहा कि अमेरिका हर किसी के साथ युद्ध करता रहेगा तो क्या अमेरिका के पीठ पीछे हम भी सबको हमारा दुश्मन बनाते रहे। भारत कभी भी युद्ध के पक्ष में नहीं रहा है। इस विवाद को बातचीत से भी सुलझाया जा सकता है।

लेकिन पीटर जैसे लोग अगर इस युद्ध के सलाहकार होंगे तो यह युद्ध हमेशा जारी रहेगा। मेरे हिसाब से अगर हम कुछ भी नहीं कर रहे तो भी हमें इस युद्ध में घसीटा जा रहा है। भारत की आलोचना की जा रही है तो हमें भी पीटर जैसे लोगों पर मुंहतोड़ एक्शन लेनी चाहिए। वैसे भी यह साफ दिख रहा है कि ईरान अमेरिकी जहाजों को हर्मोस्ट स्ट्रेट पर जला रहा है और भारतीय जहाजों को जाने दे रहा है।

यह बात पीटर नवारो को काफी चुभ रही है। इसीलिए वह भारत की आलोचना करके अपनी भड़ास निकाल रहा है। हालांकि जयशंकर साहब ने भी पीटर नवारो का मुंह अच्छी तरीके से बंद कर दिया है। बाकी इस बुड्ढे को लेकर आप भी अपनी भड़ास कमेंट बॉक्स में जरूर निकालें।

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