दुनिया के कुछ बड़े साइंटिस्ट्स के साथ कुछ अजीब चीजें हो रही हैं। कुछ वैज्ञानिकों की आधी रात को कार हादसों में मौत हो गई और कुछ अचानक ही गायब हो गए। हालांकि इन सभी साइंटिस्ट में एक बात कॉमन देखने को मिली। इन सब ने मिलिट्री टेक्नोलॉजी के सबसे नए क्षेत्रों में काम किया है। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हाइपरसोनिक हथियार, न्यूक्लियर रिसर्च और स्पेस डिफेंस शामिल है।
यह सभी घटनाएं किसी साजिश की तरफ इशारा कर रही हैं। इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि महज एक इत्तेफाक है या कोई सोची समझी साजिश। अमेरिका में ऐसे 11 वैज्ञानिकों की पहचान हुई जिनकी असामान्य परिस्थितियों में मौत हो गई या वह लापता हो गए। इस लिस्ट में ताजा नाम है एक युवा रिस्चर का। ब्रिटिश अखबार द मिरर के मुताबिक एमी एस्क्रिच की 11 जून 2022 को अमेरिका के हस्टन विल में मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि वैज्ञानिक ने खुद पर गोली चलाई थी। अधिकारियों ने इस पर विस्तार से कुछ नहीं बताया जिससे उनकी मौत को लेकर कई सवाल अधूरे रह गए हैं। सभी वैज्ञानिक न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी, स्पेस रिसर्च और एडवांस हथियारों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में काम कर रहे थे।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट बताती है कि 2022 की शुरुआत से कई जानेमाने वैज्ञानिक और रिस्चर या तो लापता हो गए या फिर उनकी मौत असामान्य परिस्थितियों में हुई। इनमें से कई वैज्ञानिक लॉस एलमोस नेशनल लैबोरेटरी, नासा की जेट प्रोपोर्शनल लैबोरेटरी और एमआईटी जैसे संस्थानों से जुड़े थे। यह मुद्दा अब राजनीतिक गलियारों तक भी पहुंच गया है। रिपब्लिकन नेता एरिक बर्लिंसन ने इन घटनाओं को विदेशी साजिश की तरफ इशारा बताया है। एक्स पर उन्होंने लिखा हम न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी एडवांस हथियारों और स्पेस के मामले में चीन, रूस और ईरान के साथ मुकाबला कर रहे हैं। इस बीच हमारे टॉप साइंटिस्ट्स लगातार गायब हो रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस स्थिति को काफी गंभीर मामला बताया है। साथ ही उम्मीद भी जताई है कि यह महज एक इत्तेफाक हो सकता है। फिलहाल फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन माने एफबीआई ने इस मामले की जांच भी शुरू कर दी है। चीन से भी ऐसे ही मामले सामने आ रहे हैं। चीनी और विदेशी मीडिया की रिपोर्ट से पता चलता है कि इसी तरह के संवेदनशील क्षेत्रों में काम करने वाले कम से कम नौ वैज्ञानिकों की मौत हुई है। ज्यादातर मामलों में मौत की वजह एक्सीडेंट या अचानक बीमारी बताई गई है। कुछ मामलों में तो वजह ही नहीं बताई गई है। अमेरिकी अखबार न्यूज़ वीक के मुताबिक इन नौ मामलों में एक मामला फेंग यांगे का भी है।
वे नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी में 38 साल के प्रोफेसर थे। जिनकी जुलाई 2023 में बीजिंग में एक कार दुर्घटना में मौत हो गई थी। चीनी सेना के घटनाक्रम पर नजर रखने वाले एक रिसर्चर ने बताया कि इस मामले में कुछ पहलू अजीब लग रहे हैं। इनमें दुर्घटना का समय और उनकी मौत के बारे में सरकार की तरफ से दी गई जानकारी शामिल है। रिस्चर ने कहा फैन ताइवान से जुड़े एआई सिमुलेशन के पीछे का बहुत बड़ा दिमाग थे। यह बहुत अजीब बात है कि यह दुर्घटना आधी रात को हुई। एआई सिमुलेशन का मतलब कंप्यूटर के भीतर एक ऐसी दुनिया तैयार करना है जहां एआई मॉडल यह सीख सके कि असली दुनिया में चीजें कैसे काम करती हैं।
रिसर्च ने सरकारी बयानों में इस्तेमाल की गई शब्दावली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा सड़क दुर्घटना में जान गवाने वाले किसी व्यक्ति के लिए आमतौर पर यह नहीं कहा जाता कि उसने अपनी जान का बलिदान दिया है। आपको बता दें फिलहाल अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं है कि अमेरिका, चीन, रूस या कई अन्य देश के वैज्ञानिकों को निशाना बनाने के लिए कोई ऑपरेशन चला रहा है। पहले भी इस तरह की घटनाएं सामने आ चुकी है। उदाहरण के लिए ईरान के न्यूक्लियर एक्सपर्ट को इजराइल कई सालों से टारगेट कर रहा है। आरोप है कि देश के न्यूक्लियर प्रोग्राम को धीमा करने की कोशिश है। इस खबर में फिलहाल इतना ही। खबर पर आप क्या सोचते हैं? कमेंट बॉक्स खुला है। हमें जरूर बताएं। खबर लिखी है मेरे साथी अर्पित कटिहार ने। मैं हूं शिवानी। बने रहिए द लन टॉप के साथ। शुक्रिया।