खामिनेई इज बैक। ईरान ने यह लिखते हुए पूर्व सुप्रीम लीडर आया अली खामिनई का एक वीडियो जारी किया है। वीडियो में दिखाया गया है कि खामिनई एक छोटी बच्ची को दुलार रहे थे। उसके साथ खेल रहे थे। तभी उनके ऊपर हमला कर दिया गया। जिस बिल्डिंग में खामिनई थे धमाके के बाद वहां धुआं और मलवा नजर आने लगा। वीडियो में उनकी स्पेशल लाल अंगूठी मलबे में गिरी दिखाई गई है। वीडियो के अगले सीन में अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को खुश होते दिखाया गया। जिसके बाद एक शख्स हमले वाली जगह पहुंचता है
और मलबे से वह लाल अंगूठी अपनी उंगली में पहन लेता है। इसके बाद मलबे में ईरान का झंडा लहराते हुए नजर आता है। जिस शख्स ने अंगूठी अपने हाथ में पहनी वो अयातुल्लाह अली खामई के बेटे और ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुस्तफा खामेनई है। वीडियो के अगले सीन में ट्रंप के पास एक फोन जाता है। फोन पर सामने वाला शख्स ट्रंप से कहता है खामेनई इज बैक। यह सुनकर ट्रंप को डरा हुआ दिखाया जाता है
वीडियो में इसके बाद मुस्तफा हमले का आदेश देते हैं। जिसके बाद ईरान से सैकड़ों की संख्या में मिसाइलें दागी जाती हैं। बता दें कि यह वीडियो एआई से बनाया गया है। कुछ लोग ईरान की तरफ से जारी इस वीडियो को प्रोपेगेंडा बता रहे हैं। लेकिन ईरानी मीडिया ने इसे खामिनई की वापसी बताया है। आप जानते ही हैं कि मुस्तफा खामिनई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर बना दिया गया है
लेकिन सबके मन में एक ही सवाल उठ रहा है कि आखिर मुस्तफा खामई हैं कहां? युद्ध शुरू होने से लेकर अब तक मुस्तफा खामेनई किसी के सामने नहीं आए हैं। सामने आई हैं तो बस उनसे जुड़ी कुछ खबरें। खबरों में बताया गया कि हमलों के दौरान मुस्तफा खामई घायल हो गए हैं। अंग्रेजी अखबार द सन की रिपोर्ट के मुताबिक मुस्तफा कोमा में हैं। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि हमले में उन्होंने अपना एक पैर खो दिया है।
उनके पेट और लीवर में भी गंभीर चोटें आई हैं। फिलहाल उनका इलाज चल रहा है। लेकिन इस बात में कितनी सच्चाई है यह किसी को नहीं पता। ऐसा इसलिए क्योंकि ईरानी मीडिया ने मुस्तबा की एक नई तस्वीर पोस्ट की है। वह तस्वीर आपको अपनी स्क्रीन्स पर दिख रही होगी। देखने में यह तस्वीर एकदम ओरिजिनल लगती है। लेकिन बीबीसी से जुड़े शायन सरदारी जाहिद की रिपोर्ट के मुताबिक यह तस्वीर फेक है या यूं कहें कि एआई से बनाई गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक Google के सेंथ आईडी टूल ने इस तस्वीर में कुछ डिजिटल वाटरमार्क पकड़े हैं। उनसे यह साबित होता है कि इस तस्वीर को Google के एi टूल की मदद से बनाया गया है। यह भी पता चला कि यह कोई नई खींची गई फोटो नहीं है। रिवर्स इमेज की मदद से पता चला कि यह मुस्तफा की कई साल पुरानी तस्वीर है जब वह एक सरकार समर्थक रैली में शामिल हुए थे।
एआई की मदद से पुरानी फोटो के बैकग्राउंड और आसपास खड़े लोगों को हटाकर इसे फ्रेश पोर्ट्रेट में कन्वर्ट कर दिया गया है। इस बीच 12 मार्च को ईरानी टीवी चैनल्स पर युद्ध के बाद मुस्तफा खामेनई का पहला बयान भी दिखाया गया। लेकिन बयान के वक्त भी मुस्तफा स्क्रीनंस पर नहीं थे बल्कि उनके बयान को पढ़कर बताया गया।
अब मुस्तफा के बयान तो आ रहे हैं लेकिन वो खुद कहीं नहीं नजर आए। वहीं उनकी आई तस्वीर ने कई और सवाल खड़े कर दिए हैं। मुस्तफा कहां है?क्या सच में उनका इलाज चल रहा है? उनके साथ क्या हुआ? यह सब फिलहाल सवाल ही बने हुए हैं। इस खबर में इतना ही।