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संन्यासी बनकर अपने घर भिक्षा मांगने पहुंचे थे योगी आदित्यनाथ फिर पिता ने…

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज अपना 54वां जन्मदिन मना रहे हैं। आज देश उन्हें एक सख्त प्रशासक गोरक्ष पीठाधीश्वर और बड़े जननेता के रूप में जानता है।

उनकी कहानी राजनीति से पहले त्याग की कहानी है। सत्ता से पहले साधना की कहानी है। योगी आदित्यनाथ का जन्म 5 जून 1972 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के पंचूर गांव में हुआ था।

उनका नाम अजय बिष्ट था। पिता आनंद सिंह बिष्ट वन विभाग में रेंजर थे और मां सावित्री देवी गणी। परिवार बड़ा था। चार भाई तीन बहनों के बीच वह दूसरे नंबर की संतान हैं। पंचूर गांव आज भी पहाड़ों की सादगी को समेटे हुए हैं। उस दौर में वहां आधुनिक सुविधाएं नहीं थी। स्कूल जाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी।

लेकिन योगी आदित्यनाथ पढ़ाई में तेज थे और अनुशासन उनके स्वभाव का हिस्सा था। योगी आदित्यनाथ ने गणित में स्नातक की पढ़ाई की है। उन्होंने हेमवती नंदन बहुगुणा यूनिवर्सिटी से बीएससी मैथमेटिक्स की डिग्री हासिल की है।

जानकार बताते हैं कि उन्हें गणित के कठिन सवाल हल करना बहुत प्रिय है। पढ़ाई के दौरान उनमें सामाजिक और धार्मिक विषयों के प्रति रुचि बढ़ने लगी और यही वह समय था जब उनके जीवन की दिशा बदलने लगी। योगी आदित्यनाथ के जन्मदिन के अवसर पर वह दिलचस्प किस्सा जानेंगे जब उनके परिवार को पहली बार पता चला कि उनका बेटा सन्यासी बन गया है। साल 1990 के दशक की शुरुआत थी।

योगी आदित्यनाथ युवा थे और भविष्य को लेकर उनके परिवार की अपनी उम्मीदें थी। लेकिन उनके मन में कुछ और चल रहा था। राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान वह गोरखपुर के प्रसिद्ध संत महंत अवैद्यनाथ के संपर्क में आए। पहली मुलाकात ने योगी आदित्यनाथ को गहराई से प्रभावित किया। वे बार-बार गोरखपुर आने लगे। धीरे-धीरे उनका झुकाव आध्यात्मिक जीवन की ओर बढ़ता चला गया।

फिर अचानक एक दिन 21 साल की उम्र में वह अपने घर से अपने जीवन की नई यात्रा पर निकल गए। परिवार को लगा कि बेटा नौकरी या पढ़ाई के सिलसिले में बाहर गया है। किसी को अंदाजा नहीं था कि उनका बेटा जीवन की बिल्कुल अलग राह चुन चुका है। परिवार को लगा बेटा नौकरी या पढ़ाई के सिलसिले में बाहर गया है। किसी को अंदाजा नहीं था कि वह बेटा जीवन की बिल्कुल अलग राह चुन चुका है। लेखक प्रवीण कुमार अपनी पुस्तक योद्धा योगी में लिखते हैं। योगी आदित्यनाथ को अपने गांव पंचूर से गोरखपुर निकले लगभग 6 महीने का अधिक समय हो गया था।

लेकिन उनके बारे में घर वालों के पास कोई सूचना नहीं थी। वह कौन सी नौकरी कर रहे हैं? किस जगह रह रहे हैं? इस बीच सीएम योगी की बड़ी बहन पुष्पा ने अपने पिता को बताया कि गोरखनाथ मंदिर जाइए।

वहां आपको सारी जानकारी मिल जाएगी। दरअसल पुष्पा शादी के बाद दिल्ली शिफ्ट हो गई थी। उन्होंने हिंदी अखबार में छोटी सी खबर पढ़ी कि गोरखपुर के सांसद और गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत अवैद्यनाथ ने अपने उत्तराधिकारी के नाम की घोषणा की है और वह योगी आदित्यनाथ हैं और पौड़ी के रहने वाले हैं। इस जानकारी के बाद सीएम योगी के पिता गोरखपुर निकले। वहां जाकर उन्होंने देखा कि गोरखपुर मंदिर में एक भगवाधारी सन्यासी अपना सिर मुड़ाए फर्श की सफाई का मुआयना कर रहा था।

तब जाकर उनके पिता को पता चला कि उनका बेटा गोरखनाथ मठ में सन्यासी बन चुका है और उसका नाम रखा गया है योगी आदित्यनाथ। यह घटना सीएम योगी के जीवन की सबसे रोचक घटनाओं में से एक मानी जाती है। मां सावित्री देवी को जब पता चला तो उन्हें विश्वास नहीं हुआ कि बेटा सन्यासी बन गया है। लेकिन जब नाथ परंपरा के नियमों के अनुसार योगी आदित्यनाथ कुछ समय बाद अपने गांव पहुंचे और अपने मां से भिक्षा मांगी। यह पल उस मां के लिए बहुत भावुक कर देने वाला था। जिस बेटे को उन्होंने बचपन से पाला, वह अब भगवावेश धारण कर चुका था।

गोरखनाथ मठ में योगी आदित्यनाथ ने कठोर अनुशासन, साधना और धार्मिक अध्ययन का जीवन अपनाया। वे गौ सेवा करते, धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करते और मठ की गतिविधियों में सक्रिय रहते। महंत अवैद्यनाथ ने बहुत जल्दी समझ लिया कि यह युवा साधु साधारण नहीं महंत अवैद्यनाथ एक अनुशासित और प्रभावशाली उत्तराधिकारी की तलाश में थे और योगी आदित्यनाथ ने उनकी यह तलाश पूरी कर दी। कुछ ही सालों में वह गोरखनाथ मठ के सबसे प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए।

26 साल की उम्र में उन्होंने भारत की राजनीति में कदम रखा और सबसे कम उम्र के सांसद बनने का गौरव हासिल किया। जहां अधिकांश युवा इस उम्र में करियर की शुरुआत करते हैं, वहीं योगी आदित्यनाथ ने 26 की उम्र में इतिहास रचने का काम किया।

1998 में वे गोरखपुर से लोकसभा चुनाव जीते। उस समय संसद के सबसे युवा सांसदों में शामिल हुए। इसके बाद उन्होंने लगातार पांच बार लोकसभा का चुनाव जीता और पूर्वांचल के बाद पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक मजबूत पहचान बनाई। यह सफर इसलिए असाधारण है क्योंकि वह किसी राजनीतिक परिवार से नहीं आए थे। उनकी सबसे बड़ी पूंजी, उनकी जनसपर्क क्षमता और गोरक्षपीठ की सामाजिक पहुंच थी। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी योगी आदित्यनाथ का परिवार गांव में साधारण जीवन जीता है। उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं रहे हैं।

मां सावित्री देवी बेहद साधारण महिला हैं। भाई और बहनें भी सरल जीवन जीते हैं। परिवार ने कभी राजनीतिक शक्ति का सार्वजनिक प्रदर्शन नहीं किया। परिवार ने कभी नहीं जताया कि उनका बेटा, उनका भाई देश की सबसे बड़ी जनसंख्या वाले राज्य का मुख्यमंत्री है और यही कारण है जो योगी आदित्यनाथ को अन्य राजनेताओं से अलग बनाता है। योगी आदित्यनाथ की कहानी को केवल राजनीति के चश्मे से नहीं देखा जा सकता है। यह उस युवा की कहानी है जिसने पहाड़ों की सादगी से निकलकर आध्यात्मिक जीवन चुना जिसने परिवार, घर और व्यक्तिगतओं से ऊपर एक अलग रास्ता अपनाया। पंचूर से निकले अजय बिष्ट पहले योगी बने फिर महंत सांसद और अब देश के सबसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री लेकिन इस पूरी यात्रा में एक चीज स्थाई रही वो है अनुशासन।

शायद यही कारण है कि उनके समर्थक उन्हें केवल नेता नहीं बल्कि एक ऐसी यात्रा का प्रतीक मानते हैं जिसमें एक साधारण ग्रामीण युवक अपनी आस्था, अध्ययन और संकल्प के बल पर राष्ट्रीय पहचान हासिल करता है। 5 जून को जब योगी आदित्यनाथ अपना जन्मदिन मना रहे हैं। तब यह कहानी भी याद की जाएगी कि कभी एक मां अपने बेटे के नौकरी पर जाने की प्रतीक्षा कर रही थी और कुछ महीनों बाद उसे पता चला कि उसका बेटा दुनिया की नहीं सन्यास की राह अपना चुका है और वही आज करोड़ों लोगों के लिए योगी आदित्यनाथ है।

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