Cli

CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने PM को लेकर ये क्या बोल दिया, मचा बवाल!

Uncategorized

हमारे साथ इस समय सीजेपी के प्रवक्ता जुड़ गए हैं। सौरभ दास हमारे साथ जुड़ गए हैं। उनसे हम बातचीत करते हैं क्योंकि छात्रों के एक लंबे आंदोलन के बाद आखिरकार कुछ बदलाव हमें देखने के लिए मिले जिसमें शिक्षा मंत्री का इस्तीफा शामिल था। सौरभ बहुत स्वागत है आपका। क्या एक इस प्रोटेस्ट को इतने दिनों तक लीड करने के बाद एक छात्र की बेहतरी को देखते हुए क्या आप चाहेंगे कि पार्लियामेंट में इस चीज पर चर्चा हो? जो कानून लेकर आ रहे हैं उस पर चर्चा हो। देखिए पार्लियामेंट में तो सब कुछ के ऊपर चर्चा होना चाहिए।

स्पेशली जो यूथ के इश्यूज है युवाओं के मुद्दे तो आई थिंक टॉप प्रायोरिटी पे डिस्कस होना चाहिए। लेकिन देखिए मैं कोई नहीं होता बोलने के लिए कि जो गवर्नमेंट है और जो अपोजिशन है उनके बीच में क्या पॉलिटिकल कॉल हो संसद कैसे चले वो उनके ऊपर पूरे तरीके से डिपेंडेंट डिपेंडेंट है वो लोग चुन के गए हैं उनको पता है अपने रिस्पांसिबिलिटीज और उनको ये भी पता है कि पूरा देश देख रहा है लेकिन डेफिनेटली एक समाधान निकल निकलना चाहिए बीच में मेनली तो देखिए सरकार को सरकार का रिस्पांसिबिलिटी होता है हाउस को चलाना तो सरकार को भी सोचना चाहिए कि अपोजिशन क्या मांगे रख रही है उस पे कैसे डिस्कशन हो पाए। सौरभ यह बात कही जा रही है कि जो पुलिस एक्सेस हुए हैं स्टूडेंट्स प्रोटेस्टर्स पर उस चीज पर क्या आप भी चाहते हैं कि उस पर क्लेरिटी रहे क्या आपको इस तरह के स्टूडेंट्स मिल रहे हैं जो कह रहे हैं कि उन पर एफआईआर अभी हो रही है? जी बिल्कुल। अब देखिए पुलिस ब्रूटैलिटी पे भी होनी चाहिए चर्चा। साथ-साथ आपको पता होगा जो जेपी नड्डा जी थे और डॉ. जितेंद्र सिंह हमारे प्रेस कॉन्फ्रेंस में जो फाइनल टॉक्स था जिसमें रेजिग्नेशन का भी एक्सेप्ट हो गया था डिमांड। एंड साथ-साथ जो दूसरे दो मुख्य डिमांड थे कि एफआईआर्स नहीं होंगे किसी भी प्रोटेस्टर्स के खिलाफ। जो एफआईआर है वो विड्रॉ होंगे। एंड साथ-साथ फ्यूचर में भी कोई एक्शन नहीं लिया जाएगा। किसी भी प्रोटेस्टर्स के खिलाफ, किसी भी चीज के लिए। वो उस उसके उसके लिए जो गारंटी थी एंड एक पत्र आना था गवर्नमेंट से वो कल ड्यू है। लेकिन अभी जितना हमें रिपोर्ट्स मिल रहा है पूरे देश भर से बिहार, आसाम, वेस्ट बंगाल इन तीनों जगह से हमें पता चल रहा है कि काफी ज्यादा क्रैकडाउन हो रहा है।

बच्चों को डिटेन किया जा रहा है। मास एफआईआर्स फाइल हुए। बिहार में जैसे 500 एफआईआर फाइल हुए हमें पता चला है एंड बहुत स्ट्रिक्ट प्रोविजंस लगाए गए हैं। तो देखिए वह जो गारंटी सरकार ने दिया था हमें उस पे सरकार को अमल करना चाहिए। दे शुड ऑनर द वर्ड दैट दे हैव गिवन टू द यूथ ऑफ दिस कंट्री। एंड उसमें यह भी बोला गया था कि सिर्फ दिल्ली में एफआईआर्स नहीं सारे भाजपा और भाजपा के एलय वाले जो स्टेट्स है वहां पे भी सेम जो गारंटी है वह लागू होगा। तो हम वेट कर रहे हैं वो लेटर का कल तक आ जाना चाहिए वो लेटर हमारे पास। हम बट सौरव एक और चीज कही जा रही है ना कि जो अभी बीजेपी के नेता कह रहे हैं कि स्टूडेंट्स के ऊपर नहीं हो रहा है बल्कि जो आपराधिक तत्व हैं उनके विरुद्ध हो रहा है। तो क्या आप लोग वो सारी चीजें देखेंगे या आपके पास कंफर्म्ड इंफॉर्मेशन है कि जो प्योर स्टूडेंट्स हैं जो सिर्फ इस प्रोटेस्ट में शामिल हुए या फिर आपको लग रहा है कि कुछ सिर्फ एक टर्मिनोलॉजी का फर्क हो रहा है यहां पर। देखिए वही प्रॉब्लम है कि सरकार क्या करेगी कि वह बोलेगी हम डिसाइड करेंगे कौन स्टूडेंट है कौन असामाजिक तत्व है हम यह नहीं चाहते कि कोई भी असामाजिक तत्व जिसने माहौल बिगाड़ने का कोशिश किया था उसके खिलाफ कुछ ना हो लेकिन जब यह आप तरह एक तरह से लिबर्टी सरकार या पुलिस को दे दोगे तो वो अच्छे लोगों के खिलाफ भी यूज़ करेगा एंड वही हो रहा है अभी बिहार में आसाम में वेस्ट बंगाल में एंड दिल्ली में भी बहुत सारे जैसे जनपद सीपी में आप जाएंगे आएंगे तो पुलिस वाले जो खुद को वाले बोल रहे हैं, स्पेशल सेल वाले बोल रहे हैं, वह धमका रहे हैं बच्चों को रोड पे कि आपका तो हम लोगों ने फेशियल रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी से आपका पता लगा लिया है। आपको किसी और मुकदमे में फंसाएंगे। फिर आप देखना क्या करेंगे। आपका सफाया करेंगे। यह सब हो रहा है। तो ऐसा क्रैक एक तो उन्होंने फिजिकल ब्रूटल क्रैकडाउन किया था 20 जुलाई को। अब देखा जा रहा है कि इंटरनेट पे भी क्रैकडाउन किया जा रहा है। बहुत सारे जो इन्फ्लुएंसर्स थे जिन्होंने अच्छे तरीके से कंटेंट बनाया था एंड पूरा को उन्होंने रिकॉर्ड किया था उनका अकाउंट भी डिलीट कर रही है सरकार। ये सब नहीं करना चाहिए।

देखिए हमने जेपी नड्डा जी को और जितेंद्र सिंह जी को बोला था मीटिंग में कि ट्रस्ट डेफिसिट है। लोगों का भरोसा नहीं है आपके सरकार में। युवाओं को भरोसा नहीं है। तो भरोसा बढ़ाने के लिए आप कुछ तकनीक सोचिए। अब अगर ये सब करेंगे सरकार एंड जो बात रखी गई थी जो गारंटी दिया गया था उस पे अमल नहीं करेंगे तो श्वेता जी आप बताइए फिर युवा क्या सोचेगा क्या वो फिर से रोड पे नहीं आएगा सो मैं दो चीज आपसे समझना चाहती हूं एक जो आपने कहा फेशियल रिकॉग्निशन वाली बात मैंने देखा कि जो दिल्ली पुलिस की तरफ से उनके एक्स पर पोस्ट किया गया है कि यह चीजें सही नहीं है। हम ऐसा कुछ नहीं कर रहे हैं। क्या अगेन जो आप ट्रस्ट डेफिसिट की बात कर रहे हैं क्या उसमें यह चीज़ फिट होती है कि आपको भरोसा है कि अगर वह कह रहे हैं कि हम नहीं फ़ेशियल रिकग्निशन का इस्तेमाल कर रहे हैं इस चीज़ के लिए।

दूसरी चीज़ वो यह भी कह रहे हैं कि हम वो सोशल मीडिया अकाउंट से वो पोस्ट हटा रहे हैं जिनमें प्रधानमंत्री को लेकर कुछ ओबसीन बातें कही गई हैं। ऐसी बातें कही गई हैं जो नहीं कहनी चाहिए उस प्लेटफार्म पर। तो क्या इन दो चीजों पर आपका आपकी राय मैं जानना चाहती हूं। क्या इन दो चीजों से आप आश्वस्त हैं? देखिए वही है। फिर से बात वही आ जाती है कि आप अगर थोड़ा सा भी लिबर्टी देंगे इन सब चीजों के लिए क्या ऑफेंसिव है? क्या कोई मजाक ऑफेंसिव है या कोई स्टेटमेंट ऑफेंसिव है? आपके लिए जो ऑफेंसिव है वो शायद हमारे लिए ऑफेंसिव नहीं है। एंड वाइसवरसा तो ये इतना अगर आप ब्रॉड तरीके से उनको पावर दे देंगे ना कि कुछ भी ऑफेंसिव हुआ तो वो हटा देंगे। तो वो तो डायरेक्टली एक सेंसरशिप के तरह ही उस टूल को यूज करेंगे। एंड वही हो रहा है।

अभी अगर किसी ने हल्का सा मजाक भी कर दिया प्रधानमंत्री के ऊपर प्रधानमंत्री जी भगवान तो है नहीं तो ऑब्वियसली मजाक लोग करेंगे। वो लोकतंत्र का हिस्सा है वो चीज करना टिप्पणी करना। लेकिन अगर ऐसा कंटेंट हटाया जा रहा है तो मुझे तो यह नहीं समझ में आ रहा है। इतना इस सरकार ने सेंसरशिप किया है पिछले सालों में भी हमेशा उससे भी ज्यादा फिर कंटेंट बनता है। स्ट्राइसेंड इफेक्ट बोलते हैं इसको। सरकार को पढ़ लेना चाहिए। आपने युवाओं को गारंटी दिया। उस गारंटी में आपको अमल करने का फोकस रहना चाहिए। रादर देन अडॉप्टिंग दी टैक्टिक्स कि हम कैसे सेंसरशिप कर दें। हम कैसे एफआईआर में फंसा दें। हम तो बहुत क्लियर है कि हम हमें जो गारंटी दिया है वो सिर्फ कॉकरोच जनता पार्टी को नहीं दिया है। आपने देश के वो लाखों लाखों युवाओं को दिया है जो रोड पे उतरे थे। अगर आप उस पर अमल नहीं करते हैं तो फिर युवाओं को फिर से सोचना पड़ेगा कि फिर से उनको क्या रोड पर आने का आवश्यकता पड़ेगा क्योंकि आप इस चीज को इस तरीके से इंसल्ट नहीं कर सकते हो आप युवाओं का। नहीं जो बातें आप लोगों की तरफ से ही कही गई थी ना उसे ही मैं दोहराना चाहूंगी कि ये वो उम्र होती है बच्चों की जब उन्हें मेहनत करके अपना जीवन बनाना चाहिए।

कभी भी जरूरत नहीं पड़नी चाहिए कि वो सड़कों पर निकले। ना वो बच्चे चाहते होंगे ना उनके मां-बाप चाहते होंगे और खैर राजनेता तो अलग कारणों से नहीं चाहेंगे कि वो निकलें। लेकिन इसमें नंबर वन मैं ये आपसे जानना चाहती हूं कि जो आप कह रहे हैं कि अलग-अलग स्टेट से या फिर दिल्ली से भी इस तरह की बातें आ रही हैं कि जो एफआईआर हैं वो हो रही हैं जो नहीं होनी चाहिए। ये क्या आप लोग एक कंपाइल करके तब आप इंतजार करेंगे। क्या आप सरकार से पहले बात करेंगे? उसके बाद आगे फैसला करना चाहेंगे या फिर आप सीधे तौर पर यह देख रहे हैं कि क्या होता है अभी कितने एफआईआर्स और यह कौन तय करेगा कि यह आपराधिक लोगों के विरुद्ध हो रहे हैं या फिर आम छात्रों के विरुद्ध हो रहे हैं। देखिए सबको पता है अगर कोई अटेम्प्ट टू मर्डर करता है तो ऑब्वियसली कोई उसको सपोर्ट नहीं करता है। लेकिन आप छात्रों के ऊपर उसका झांसा देते हुए अगर आप एफआईआर फाइल करके उनको ऐसे झूठे मुकदमों में फंसाओगे तो तो फिर सही बात नहीं है। अगर आप 500 एफआईआर फाइल कर रहे हो बिहार में छात्रों के खिलाफ तो ऑब्वियस सी बात है कि ऐसा कोई मतलब कि देखिए एक हुई है वो हत्या तो हुई है पुलिस के तरफ से उन्होचलाया था तो उनके तरफ से हुई है हत्या एक छात्र की उसके लिए क्या किया आपने तो बस उनको सस्पेंड कर दिया उनके खिलाफ क्या क का केस लगा या का केस लगा क्या? नहीं लगा। आप छात्रों के ऊपर इतना ज्यादा वो प्रेशर डाल रहे हो। आप ये एफआईआर फाइल कर रहे हो। देखिए ये सब करके ना आप सोसाइटी में एक तरह से केओस मचाना चाह रहे हो। सरकार क्या केओस चाहती है? सरकार क्या ये चाहती है कि युवाओं को लगे कि सरकार हमारी दुश्मन है। सरकार को तो युवाओं के लिए काम करना चाहिए। ट्रस्ट बिल्ड करने पे काम करना चाहिए।

ये नहीं कि 500 एफआई फाइल करके उनका जिंदगी खराब करें। युवा अगर रोड पे थे एंड वो डे वन पे सरकार को सुन लेना चाहिए था कि उनकी मांगे क्या है। ये नहीं कि 36 दिन हो गए संसद मार्च और उसके बाद वो मंजूरी दी उन्होंने जो भी डिमांड्स थे। तो पूरा एक तरह से फोकस आप देखेंगे ना सरकार का टॉप टरवी है ऊपर नीचे है एक हालांकि आपने कहा कि आप यह नहीं कह सकते कि संसद के भीतर क्या करें सब लेकिन अगर एक देश की जनता के रूप में देश के युवा के रूप में आप एक अपील कर सकते हैं सांसदों से कि एक लीक प्रूफ सिस्टम बनाया जाए तो क्या आप यह चाहेंगे कि चर्चा हो ताकि सबको पता चले कि प्रावधान मजबूत है या नहीं और उन्हें बदलकर और मजबूत करने की ज़रूरत है या नहीं? देखिए बिल्कुल चर्चा होनी चाहिए। जो कानून है उसमें क्या संशोधन होना चाहिए जिससे यह लीक प्रूफ सिस्टम बने।

एजुकेशन सेक्टर में और क्या रिफॉर्म्स आनी चाहिए जिससे बच्चों का फ्यूचर और ब्राइट दिखे। इन सारे चीजों पर चर्चा होनी चाहिए। एंड इस पे भी चर्चा होनी चाहिए कि जो 20 जुलाई को पुलिस ने ब्रूटिटी दिल्ली में की सर फोड़े 30-40 सर सर फोड़े। एक दो लोगों को उन्होंने अंधा बना दिया। दिया पैेट गन यूज़ करके। पैेट गन का यूज़ करने का किसने ऑर्डर दिया? हाथ कैसे तोड़े? पैर कैसे तोड़े? आपने यह जो इतने सारे प्रोटेस्टर्स थे उनका खाना पानी, सैनिटेशन फैसिलिटी सब बंद करने का कैसे किसने आर्डर दिया? ये सारे चीजों पे जवाब लेना चाहिए सरकार से। एंड दोनों साइड से एक होलिस्टिक डिस्कशन होना चाहिए। क्योंकि यह बहुत अहम मुद्दे हैं। भले ही जंतरमंतर से बच्चे अभी के लिए चले गए हो लेकिन ज्यादा टाइम लगेगा नहीं वापस आने के लिए। एंड देश का जो युवा है वो जाग चुका है। वो एकजुट हो चुका है एंड बहुत ज्यादा एकता है। आप अगर आज Instagram खोल के देखेंगे तो आप देखोगे लोग कैसे जंतरमंतर को एक तरह से मिस कर रहे थे क्योंकि एक सेंस ऑफ फ्रेटरनिटी आया था जंतरमंतर के वजह से। लोग लोग यूनाइटेड थे।

युवा यूनाइटेड था तो सरकार को बहुत बड़ी लर्निंग इससे लेनी चाहिए। सांसदों को भी लेनी चाहिए। बहुत बड़ी लर्निंग एंड इस युवाओं का भरोसा रखते हुए जो गारंटीज बोले हैं उसको रखते हुए आगे बढ़ना चाहिए। क्योंकि अगर आपने जो गारंटी दिया पूरे देश भर में दिया हमारे साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करके दिया अगर वो गारंटीज पे आप अमल नहीं करेंगे और जो डेडलाइंस के अंदर आप अगर अमल नहीं करेंगे तो युवा फिर से रोड पे निकलेगा। मैं यह सरकार को आपके माध्यम से बता देना चाहता हूं।

बहुत शुक्रिया सौरभ दास प्रवक्ता सीजेपी के हमारे साथ जुड़ रहे हैं और बहुत साफ शब्दों में उन्होंने कह दिया है कि जो आश्वासन दिए गए हैं अव्वल उन्हें पूरा करने की आवश्यकता ने

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *