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विदेश में कूड़ा उठाने के लिए मजबूर हुआ टीवी का हेंडसम एक्टर,दिव्यांका से है खास रिश्ता, नाम चौंका देगा।

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बॉलीवुड और टीवी की दुनिया बाहर से देखने में जितनी खूबसूरत और अच्छी लगती है, उसमें काम करने वाले स्टार्स की लाइफ हालांकि उससे अलग होती है। आप इसका अंदाजा इस बात से खुद ही लगा सकते हैं कि एक एक्टर जो इस इंडस्ट्री में अपना नाम बनाने के लिए आया उसी एक्टर को पेट पालने के लिए ऐसे ऐसे काम करने पड़े जिन्हें सुनकर आप भी चौंक जाएंगे।

कभी बार में टेबल साफ की कभी फैक्ट्री में काम किया और तो और पिज़्ज़ा डिलीवर करने का काम तक करना पड़ा। तो कौन है यह एक्टर? क्यों उसके सामने ऐसे काम करने की मजबूरी आ खड़ी हुई? आइए आपको आज इस रिपोर्ट में बताते हैं। सबसे पहले आपको इस एक्टर के बारे में बताएंगे जो हाल ही में शादी के पूरे 10 साल बाद पिता बना है। नाम है इनका विवेक दैया।

टीवी की दुनिया में इशिता के नाम से जानी जाने वाली एक्ट्रेस दिव्यांका त्रिपाठी के पति। अब आपको बताते हैं कि दिव्यांका के पति विवेक की वो कहानी जो उनकी ग्लैमरस जिंदगी से बिल्कुल अलग है। खुद विवेक दहिया ने हाल ही में अपने इस अनसुने दौर का किस्सा सुनाया है और इसे सुनने के बाद आपको भी उनकी कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं लगने वाली है।

दरअसल विवेक दैया ने एक इंटरव्यू में बताया कि जब वह करीब 18 साल के थे तब पढ़ाई करने के लिए यूके चले गए। उस उम्र में ज्यादातर बच्चे पढ़ाई, दोस्तों और अपनी जिंदगी को एंजॉय करने के बारे में सोचते हैं। लेकिन विवेक का फोकस कुछ और था। वो चाहते थे कि विदेश में रहते हुए अपने खर्चे खुद उठाएं और पिता पर फाइनेंशियल डिपेंडेंट ना रहे। इसीलिए उन्होंने अपना सीवी प्रिंट कराया और शहर में घूम-घूम कर अलग-अलग दुकानों और जगहों पर नौकरी के लिए उसे देना शुरू भी कर दिया। लेकिन विदेश में बिना अनुभव के नौकरी मिलना इतना आसान नहीं था। विवेक ने बताया कि उस वक्त शुरुआती नौकरी पाने के लिए लोग अपनी सीबी में भारत में एनजीओ में काम करने जैसी बातें भी लिख देते थे क्योंकि बिना एक्सपीरियंस के अच्छी नौकरी मिलना मुश्किल होता था और फिर उन्हें एक बार में काम करने का मौका मिला। बार में नौकरी मिली लेकिन सोचा कुछ और था।

विवेक ने बताया कि उन्हें एक बार में बार टेंडर की नौकरी की उम्मीद थी। उन्हें हमेशा लगता था कि बार में काम करना काफी ग्लैमरस होगा। लेकिन असलियत का पहला दिन ही कुछ अलग निकला। मैनेजर ने उन्हें बार टेंडर का काम नहीं दिया बल्कि रात के समय वहां मदद करने के लिए कहा।

काम शुरू हुआ तो हाथ में कॉकटेल का ग्लास नहीं बल्कि और कपड़ा आया। उन्हें टेबल साफ करनी थी और यहीं उनके साथ एक ऐसा वाक्य हुआ जिसे शायद वह आज भी भूल नहीं पाए हैं। एक टेबल साफ करते समय वहां एक कपल बैठा हुआ था। विवेक ने टेबल पर किया लेकिन गलती से लड़की के पैर पर चला गया। उन्हें उस वक्त इसका एहसास भी नहीं हुआ। लेकिन लड़की के बॉयफ्रेंड ने गुस्से में उनकी कॉलर पकड़ ली। मामला बढ़ता देखकर सिक्योरिटी को बीच में आना पड़ा।

विवेक ने माफी मांगी और बाद में मैनेजर ने भी उन्हें सावधानी से काम करने की हिदायत दी। रात बढ़ी तो काम भी बदलता गया। विवेक और उनके दोस्त को फर्श से टूटी हुई तक उठाने पड़े। कुछ देर तक लगातार झुककर काम करने के बाद दोनों को एहसास हुआ कि अगर पूरी रात ऐसा करना पड़ा तो और का तो बुरा हाल हो जाएगा। इसके बाद मैनेजर ने उनसे कूड़ेदान से कचरा उठाने के लिए कहा।

विवेक के दोस्त ने उसी वक्त नौकरी छोड़ने का फैसला कर लिया। विवेक ने बताया कि उन्होंने यूके में सिर्फ बार में ही काम नहीं किया था बल्कि काम किया। इसके अलावा की फैक्ट्री में भी नौकरी की। कॉल सेंटर में भी काम किया। उनकी इस कहानी में अभी एक और दिलचस्प किस्सा है जो कि पिज़्ज़ा डिलीवरी का है। विवेक भैया ने बताया कि उन्होंने बॉय के तौर पर भी काम किया था।

लेकिन यहां कहानी में ट्विस्ट था। जिस गाड़ी से वो पिज़्ज़ा पहुंचाने जाते थे, वो कोई आम कार नहीं थी। वो अपनी BMW लग्जरी कार से पिज़्ज़ा डिलीवर करते थे। सोचिए ग्राहक ने दरवाजा खोला। सामने डिलीवरी बॉय खड़ा है लेकिन पीछे खड़ी है BMW कार।

ग्राहकों के लिए यह नजारा काफी चौंकाने वाला होता था। विवेक ने बताया कि ग्राहक अक्सर हैरान रह जाते थे कि पिज़्ज़ा डिलीवर करने के लिए BMW से कोई कैसे पहुंच सकता है। लेकिन इसके पीछे की भी एक कहानी है। विवेक को कार्स का शौक था और उन्होंने बताया कि विदेश में छोटे-मोटे काम करके सेकंड हैंड BMW खरीदने के लिए पैसे बचाना संभव होता था। उन्होंने करीब 15 साल पुरानी सेकंड हैंड BMW खरीदी थी। यानी एक तरफ वो अपनी पढ़ाई और रोजमर्रा के खर्च निकालने के लिए अलग-अलग काम कर रहे थे और दूसरी तरफ अपनी पसंद की कार का सपना भी पूरा कर रहे थे। विवेक के मुताबिक इन तमाम कामों ने उन्हें सिर्फ पैसा कमाना नहीं सिखाया बल्कि जिंदगी को समझने का मौका भी दिया।

उन्होंने कहा कि अलग-अलग नौकरियों से उन्हें डिसिप्लिन काम करने का तरीका, प्रोफेशनलिज्म और वर्क एथिक्स सीखने को मिले। विवेक की जिंदगी में आगे चलकर एक्टिंग का दौर आया। उन्होंने मॉडलिंग और फिर एक्टिंग की तरफ अपने कदम बढ़ाए। मुंबई पहुंचने के बाद यहां भी रास्ता उनके लिए आसान नहीं रहा। एक पुराने इंटरव्यू में विवेक ने बताया था कि शुरुआती दौर में उन्हें सैकड़ों ऑडिशन देने पड़े थे और कई बार रिजेक्शन का सामना भी करना पड़ा।

लेकिन धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाई। उन्हें टीवी पर काम मिलने लगा और फिर यह है मोहब्बत जैसे शो ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई। इसके बाद विवेक की जिंदगी का एक और बड़ा चैप्टर शुरू हुआ। दिव्यांका त्रिपाठी के साथ उनका रिश्ता। दिव्यांका उस वक्त टीवी की बेहद पॉपुलर एक्ट्रेसेस में से शामिल थी और दोनों की जोड़ी को ऑडियंस ने खूब पसंद किया। आज दोनों अपनी प्रोफेशनल लाइफ के साथ-साथ अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर भी चर्चा में रहते हैं। लेकिन विवेक की यह कहानी इसलिए खास है क्योंकि आज जब लोग सिर्फ एक टीवी स्टार या फिर दिव्यांका त्रिपाठी के पति के तौर पर उन्हें देखते हैं तो उनके पीछे छिपी यह मेहनत शायद ही बहुत कम लोगों को पता होगी। विवेक की कहानी सुनने में अजीब जरूर है लेकिन यही वह दौर था जिसने विवेक को सिखाया कि कोई भी काम छोटा नहीं होता और अपने पैरों पर खड़े होने के लिए मेहनत करने में शर्म बिल्कुल नहीं करनी चाहिए।

आज कैमरे के सामने खड़े होकर अपनी कहानी सुनाते हुए विवेक के पास शोहरत है, पहचान है और एक सक्सेसफुल करियर है। पर्सनल लाइफ में भी वह खूब खुश हैं।

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