उत्तराखंड में बारिश ने मचाई भारी तबाही। पहाड़ों पर ऐसा सैलाब आया कि पुल, सड़कें [संगीत] और घर तक इसकी चपेट में आ गए। चमोली की नीति घाटी से लेकर देहरादून और हरिद्वार तक हालात बिगड़ते जा रहे हैं। सबसे खौफनाक तस्वीरें चमोली की नीति घाटी से सामने आई [संगीत] है।
दमक नाले में अचानक आए तेज सैलाब ने करीब 40 मीटर लंबा बेली ब्रिज बहा दिया। पुल बहने के दौरान बीआरओ की स्कर्पियो [संगीत] समेत तीन वाहन इसकी चपेट में आए। स्कर्पियो में सवार बीआरओ [संगीत] कर्मचारी एन के पंकज कुमार के बहने की सूचना दी। इसकी तलाश के लिए एनडीआरएफ की टीम लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है। पुल टूटने से सिर्फ एक रास्ता नहीं टूटा बल्कि नीती घाटी के करीब [संगीत]
17 गांव का संपर्क प्रभावित हो गया है। सेना की अग्रिम चौकियों तक जाने वाला रास्ता [संगीत] भी बाधित है। एनडीआरएफ के 27 जवान रेस्क्यू में लगाए गए हैं। जिनमें से 15 जवान खासतौर पर लापता कर्मचारी [संगीत] की तलाश कर रहे हैं। लेकिन मुसीबत सिर्फ चमोरी तक सीमित नहीं है। बद्रीनाथ हाईवे पर पागल नाली के पास मलवा आने से यात्री फंस गए। उत्तरकाशी में गंगोत्री हाईवे पर होल्डर गिरने से रास्ता बंद हुआ है।
देहरादून के चंद्रबनी में 80 से ज्यादा [संगीत] घरों में पानी घुस गया और 200 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। कारगी के चांचक में नदी किनारे बने तीन मकान भी ध्वस्त हो गए। हरिद्वार में सड़कें घुटनों तक पानी में डूब गई। रुकड़ी में भी कई सड़कें तालाब बन गई। लगातार बारिश और भूस्खलन से 1400 से ज्यादा गांव में बिजली सप्लाई प्रभावित हुई है। मौसम विभाग ने चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है
और कई दूसरे जिलों में [संगीत] भी भारी बारिश की चेतावनी है। यानी पहाड़ों पर बारिश अभी नहीं है और खतरा भी टला नहीं है। प्रशासन अलर्ट पर है। रेस्क्यू टीमें मैदान में है और लोगों से नदी नालों और पहाड़ी रास्तों [संगीत] से दूर रहने की अपील की गई है। न्यूज़ रिपोर्ट ind.com