रसिक दुलारी शरण मूलरूप से मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले थे। करीब दो वर्ष पहले वह वृंदावन आए और संत प्रेमानंद महाराज से दीक्षा ली। दीक्षा के बाद उन्होंने अपना नाम दीपक लोढ़ी से बदलकर रसिक दुलारी शरण रख लिया था। इसके बाद वह वृंदावन में ही रहकर साधु जीवन व्यतीत कर रहे थे।
स्वजन ने बताया रसिक के परिवार में दो भाई और एक बहन हैं। उनकी मां करीब एक वर्ष पहले वृंदावन आई थीं। परिवार का कहना है कि दीक्षा लेने के बाद रसिक से मुलाकात नहीं हो पा रही थी। मां ने बताया वह बेटे से मिलने के लिए पहले भी वृंदावन आई थीं, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी।
हादसे के खबर मिलने के बाद स्वजन पहुंचे वृंदावनरसिक के बहनोई सोनू पटेल ने बताया कि हादसे की सूचना मिलने के बाद परिवार के लोग वृंदावन पहुंचे। उन्होंने बताया कि शाम करीब पांच बजे आश्रम पहुंचने के बाद परिवार को बैठाकर रखा गया। रात करीब नौ बजे तक रसिक से मुलाकात नहीं कराई गई।
पोस्टमार्टम हाउस में शव देखकर मां और बहन फूट-फूटकर रोने लगीं।मां ने कहा, दो साल पहले से हुई थी आखिरी बार बातमां ने कहा कि दो वर्ष पहले बेटे से आखिरी बार बात हुई थी। उन्होंने मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। स्वजन ने आरोप लगाया कि दीपक फोन नहीं रखते थे। आश्रम के लोग मिलने नहीं देते थे। वहीं सीओ वृंदावन संदीप सिंह का कहना है कि परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की भी जांच की जा रही है।