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महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के साथ हो गया सबसे बड़ा खेला!

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आज की बात अब हर शाम सोमवार से शुक्रवार 8:30 बजे से नमस्कार, मैं हूं अमित कुमार पाल। दोपहर के 12:00 बज रहे हैं और वक्त है प्रहार का। बुलेटिन की शुरुआत इस वक्त की सबसे बड़ी खबर के साथ कर रहे हैं। उद्धव सेना में टूट पर मुर लग चुकी है। नौ में से छह सांसदों ने बगावत कर दी है। उद्धव ठाकरे को 5 साल में दूसरी बार बड़ा झटका लगा है। बड़ी खबर है कि उद्धव सेना के बागी छह सांसदों ने अलग गुट बना लिया है। वेब जारी होने के बाद भी छह सांसद आज संसदीय दल की बैठक में शामिल नहीं हुए। यह मीटिंग संसद भवन के पार्टी ऑफिस में बुलाई गई है। जिसमें से सिर्फ तीन लोकसभा के सांसद ही मौजूद थे। वहीं बागी छह सांसदों ने अलग गुट बनाकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लेटर सौंप दिया है। जिन छह सांसदों ने उद्धव सेना से अलग होकर अपना गुट बनाया है उसमें परभनी से संजय जाधव, यवतमाल वाशिम से संजय देशमुख, मुंबई उत्तर पूर्व से सांसद संजय दीना पाटिल, शिरडी से सांसद भाऊ साहेब वाकचरे, हिंगोली से सांसद नागेश पाटिल और उस्मानाबाद से सांसद ओम राजे निंबालकर शामिल हैं। वहीं पर अनिल देसाई, अरविंद सावंत और राजा भाऊ वाजे मीटिंग में पहुंचे थे। संजय राउत ने कहा है कि जो सांसद नहीं आए हैं वो बेईमान और गद्दार हैं। जो आएंगे वो हमारे नहीं आएंगे वो बेईमान गद्दार। देख लेंगे जो आएंगे वो हमारे आएंगे वो बेईमान गद्दार। तो यहां पर संजय राउत को आप देख रहे हैं। संजय राउत ने इससे पहले भी जब करीब 11:00 बजे एक प्रेस ब्रीफ किया था या प्रेस मीटिंग की उस दौरान भी उन्होंने कहा था कि वो बता देंगे कि किस तरह से पार्टी तोड़ी जाती है। यानी कि उन्होंने धमकी दी थी और जो उनका बॉडी लैंग्वेज था उससे साफ था कि जो यह सांसद है छह सांसद यह शायद शामिल नहीं होंगे। उनको पहले से ही इसका अंदेशा लग चुका था। उद्धव सेना में विद्रोह से जुड़ी एक और बड़ी खबर आ रही है। जो सांसद मीटिंग में नहीं पहुंचे उनके खिलाफ एक्शन की तैयारी कर रहे हैं। सांसदों की मीटिंग के लिए उद्धव सेना की तरफ से विप जारी किया गया। अब विप का उल्लंघन करने वाले सांसदों पर कारवाई होगी। देखिए आज का आज की बात बस इतनी है अरविंद जी कि आज आपने जो विप बजाया है विप दिया है सबको हम इंतजार करेंगे हां और तुरंत एक्शन शुरू होगी नासिक से सांसद राजा भाऊ वाजे भी उद्धव कैंप के साथ हैं। राजा भाऊ वाजे मीटिंग में भी मौजूद हैं।

मीटिंग से पहले वाजे ने कहा है कि उनका बाकी छह सांसदों से कोई संपर्क नहीं है। अभी जिस जिन्होंने संपर्क किया था उनसे बात कीजिए आप। मैंने किसी संपर्क मेरे संपर्क में कोई नहीं है। मैं मैं पार्टी के साथ हूं। मैं पार्टी के संपर्क में हूं। नेतृत्व के संपर्क में हूं। वो जो बोलेंगे वो मैं करूंगा। जो बैठक है दीना पार्टी तथा वो मुझे बाकी के लोगों के बारे में कुछ मालूम नहीं। अब मेरे सहयोगी सचिन चौधरी हमारे साथ जुड़ गए हैं। सचिन आखिरकार वही हुआ जो कहा जा रहा था। जो ऑपरेशन टाइगर है वो तो सक्सेसफुल हो गया। छह जो सांसद है अलग गुट जा रहे हैं बनाने के लिए और एक बार फिर से यूबीटी सेना यूबीटी टूट गई। जी बिल्कुल। पिछले एक घंटे से यहां पर संसद भवन में जो शिवसेना यूबीटी का दफ्तर है वहां पर उनकी बैठक चल रही है और बैठक में लोकसभा से तीन और राज्यसभा से एक संजय राउत ऐसे चार ही सांसद वहां पर मौजूद है। अह उद्धव ठाकरे ने अनिल देसाई को फोन करके उनसे जानकारी ली है और आगे की दशा जो है दिशा उसके कारवाई को लेकर और उस पर चर्चा की जाएगी। पार्टी की तरफ से जो सूत्र बता रहे हैं कि उनको कारण शो कॉज नोटिस एक दिया जाएगा कि आखिर वह विप जारी होने के बावजूद इस बैठक में क्यों नहीं शामिल हुए और फिर उनके जवाब से संतुष्ट ना होने के कारण फिर उन पर उनके ऊपर जो है आगे कानूनी कारवाई की जाएगी। लेकिन जैसे हम पहले से बता रहे हैं कि जो छह सांसद है जिसमें मराठवाड़ा से हिंोली से नागेश पाटिल आष्टीकर परभनी से संजय यादव धारा शिव से ओमराजे निंबालकर मुंबई से संजय दीना पाटिल जी शिरडी से भाऊ साहब वाकचर और यवतमाल से संजय देशमुख ये छह सांसद शुरू से हमने जिनका नाम लिया था वो आज के बैठक में नहीं आए सचिन आपने जिन छह सांसदों का नाम लिया है पहली चीज एक तो है कि जो विप जारी होने की बात हो रही है क्या उसका उसका वाकई में कोई कानूनी आप कह सकते हैं कि कारवाई होगी और उसका कोई बड़ा हम देखते हैं कि कोई परिवर्तन देखने को मिल सकता है जो उनकी मौजूदा अभी स्थिति है जो छह इस वक्त सांसद है उस पर क्या पड़ने जा रहा है लेकिन साथ ही महाराष्ट्र की पॉलिटिक्स में या फिर उद्धव सेना की पॉलिटिक्स में ये कितना बड़ा डेंट है जी देखिए बिल्कुल डेंट है क्योंकि पहले जो पार्टी में फूट हुई थी उसमें तब उस वक्त शिवसेना जॉइंट शिवसेना के 18 एमपीस थे। उसमें से 12 एमपी जो है फूट के साथ एकनाथ शिंद के साथ आ गए थे और बाद में रविंद्र वायकर और एक सांसद जुड़ गए थे। 13 सांसद उनके साथ में थे और 40 से ज्यादा उनके साथ विधायक जुड़ गए थे। उसके बाद जब चुनाव हुए तो एक बार फिर से उद्धव ठाकरे के जो है नौ सांसद चुनकर आए थे और शिंदे शिवसेना दो से कम पड़ गई थी। के सात सांसद हैं। लेकिन अब यह छह सांसद जो है अलग गुट बनाकर इनको स्पीकर मान्यता देते हैं। इनका अगर विलय अह शिवसेना एकनाथ शिंद पार्टी में करने की जो प्रोसेस जो है जारी है अगर वह सही में कामयाब हो जाती है तो कांग्रेस के सबसे ज्यादा सांसद रहेंगे महाराष्ट्र में 14 और उसके बाद शिंद शिवसेना के सबसे ज्यादा सांसद रहेंगे 13 और उद्धव ठाकरे कहीं ना कहीं यहां पर एकनाथ शिंद की आप कह सकते हैं कि जो स्थिति है और मजबूत हो जाएगी लोकसभा में और साथ ही साथ एनडीए के अंदर भी और दूसरी ओर जो जानकार यह भी बता रहे हैं कि जो वेब जारी किया गया है यहां पर सेना यूबीटी की ओर से अपने सांसदों को लेके वह तभी लागू हो हो सकता है जब संसद से जुड़ी हुई कोई प्रक्रिया हो और इस वक्त ना ही संसद इस वक्त सेशन चल रहा है और ना ही कोई ऐसी कोई प्रक्रिया संसद के सदन में चल रही है

तो उन पर शायद यह विफ का कोई असर ना देखने को मिले। बहरहाल महाराष्ट्र बंगाल के बाद अब उत्तर प्रदेश का भी अब आपको हाल बताते हैं जहां पर खेला होने जा रहा है। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओबी राजभर ने आज बड़ा दावा किया है। ओपी राजभर ने कहा है कि पूर्वांचल के सपा सांसद पार्टी से बगावत करने के लिए तैयार हैं। पूर्वांचल के कई सपा सांसद खुश नहीं है। वह लगातार दिल्ली के संपर्क में हैं। उधर राजभर के अलावा यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी दावा कर दिया। उन्होंने कहा कि सपा के 25 से ज्यादा सांसद टूटने के लिए तैयार बैठे हैं। मौर्य ने कहा कि गनीमत यह है कि बीजेपी उन्हें ले नहीं रही है। सबसे पहले सुनिए ओपी राजभर ने क्या कहा। आप देखिएगा पूर्वांचल के बहुत से जैसे अखिलेश यादव जी पीडीए पीडीए चिल्लाते हैं ना नाम तो दलितों का लेते हैं लेकिन दलितों के साथ बड़े पैमाने पर अत्याचार करते हैं। पिछड़ों के साथ बड़े पैमाने पर अत्याचार पूर्वांचल के बहुत से ऐसे सांसद हैं जो दिल्ली संपर्क बनाए हुए हैं और कि हम आपकी पार्टी में आ रहे हैं। हम सत्ता के साथ रहना चाहते हैं। ऐसे तमाम लोग घूम रहे हैं। ऐसे हम लोग झूठ नहीं बोल रहे हैं। आपने एमएलसी के चुनाव में देखा जब राज्यसभा का चुनाव था तो तमाम इनके कई विधायक इनके साथ इनसे नाराज लोग स्वेच्छा से भारतीय जनता पार्टी में चले गए। अखिलेश जी की बात कर लें, चाहे डिंपल जी की बात कर लें, चाहे उनके परिवार के रामगोपाल जी के बेटे हो, चाहे शिवपाल जी के बेटे हो। यही चार पांच लोगों को और कुछ दो चार छह लोग और हैं। इनको छोड़ दीजिए तो सारे लोग तो इनका साथ छोड़ने को तैयार हैं। सब लोग दुखी हैं। खुद अखिलेश जी कह रहे हैं कि जो डरपोक है वो चले जाएंगे और जो साहसी हैं, हिम्मती हमारे साथ रहेंगे। अखिलेश जी का बयान है। अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी के ओपी राजभर की इन बातों को हल्के में ले रही थी। लेकिन राजभर के बाद केशव प्रसाद मौर्य ने भी सपा में टूट की खबर दे दी और संकेत दे दिया। अखिलेश की टेंशन और बढ़ा दी। सपा में तो अभी 25 26 सांसद टूटने को तैयार बैठे हैं। हम लोग तोड़ ही नहीं रहे हैं। हम लोग तो 27 में जानते हैं वो अपने आप ही टूट के चले जाएंगे। समाजवादी पार्टी का संचालन श्री अखिलेश यादव की साइकिल नहीं कर सकती। वो साइकिल सैफाई जा सकती है लेकिन सत्ता की गलियारे में नहीं चलेगा। और पार्टी में टूट की खबर पर शिवपाल यादव ने भी कहा। शिवपाल की ओर से कहा गया कि कोई भी सांसद नहीं टूटेगा। बीजेपी झूठ फैला रही है। यह कहना है शिवपाल यादव का। देखिए समाजवादी पार्टी का कोई भी सांसद टूटेगा नहीं। और यह लोग अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए। इनकी टीआरपी बढ़े और अब चुनाव आने वाले हैं तो इनकी सीटों की बार्गेनिंग बढ़े। और फिर वार्निंग करके उनको जो भी सीटें मिले उनसे पैसे कमाए और यहां तक कि मुझे तो लगता है कि इन लोगों को ट्वीट करने का भी पैसा भारतीय जनता पार्टी देती हो तो इसलिए इस तरीके की यह बातें करते हैं। और इस पर बात करने के लिए हमारे साथ विशाल प्रताप सिंह जुड़ गए हैं।

विशाल देखिए सियासत में जब इस तरह की अफवाहएं उड़ती है तो ऐसा नहीं होता कि पूरी तरह से उनको खारिज कर दिया जाए। कहीं ना कहीं चर्चा तो होती है तभी बात फैलती है। लेकिन साथ ही अब जब ओम प्रकाश राजभर यह कह रहे हैं कि जो बलिया के लाल हैं उन्होंने ही इसका नेतृत्व किया है बागियों का तो फिर यह कौन हैं और किस तरह से वह नेतृत्व कर सकते हैं? देखिए इशारा उन्होंने बहुत साफ कर दिया है ओम प्रकाश राजभर ने कि बलिया के लाल हैं तो आखिर कौन होंगे? कल असल में ब्राह्मण समाज की महत्वपूर्ण बैठक थी समाजवादी पार्टी के कार्यालय में और इसमें बहुत सारे लोग मौजूद थे। ब्राह्मण समाज के तमाम नेता मौजूद थे। फिर वो चाहे गोरखपुर से विनय शंकर तिवारी हो, चाहे वो माता प्रसाद पांडे हो, चाहे वो बलिया के सांसद सनातन पांडे हो। जब सनातन पांडे से भी हम लोग की बातचीत हुई तो उनका यह कहना है कि जिस तरीके के आरोप ओम प्रकाश राजभर लगा रहे हैं, वह इस बार विधानसभा तक नहीं पहुंच पाएंगे। यानी कि जो नाराजगी है जो गुस्सा है वो बहुत ज्यादा है और इस बात को लेकर के इतना ज्यादा है कि आप अंदाजा लगाइए कि जो जहूराबाद विधानसभा आती है जहां से ओम प्रकाश राजभर चुनकर के विधायक आते हैं वो दरअसल बलिया लोकसभा के अंदर ही आती है और ऐसे में जब उत्तर प्रदेश का चुनाव बहुत करीब आ गया है तो ऐसे समय में इस तरीके के मोमेंटम की बात करना इस तरीके से टूट की बात करना निश्चित तौर पर दिखाती है कि आने वाले दिनों में समाजवादी पार्टी और जो भारतीय जनता पार्टी है इसके बीच में जबरदस्त तरीके से ना सिर्फ चुनावी वार होगी बल्कि जो सोशल मीडिया मीडिया पे चल रहा है, जो Twitter पे चल रहा है, उसकी भी वार देखने को मिल रही है। हालांकि समाजवादी पार्टी के जो सीनियर नेता हैं, वह लगातार इस बात से इंकार कर रहे हैं कि कोई भी हमारे पार्टी का सांसद बिल्कुल नहीं टूटना जा रहा है। सब लोग पीडीए से जबरदस्त तरीके से इंटैक्ट हैं। लेकिन ओम प्रकाश राजभर अभी भी लगातार नहीं रुक रहे हैं। वह एक के बाद एक ट्वीट किए जा रहे हैं जो यह साबित करने के लिए काफी है कि ओम प्रकाश राजभर लगता है कि कुछ ना कुछ लोगों के टच में जरूर हैं। लेकिन यह सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक स्टंट है या फिर इसमें कुछ सच्चाई भी है या आने वाले दिन में ही पता चलेगा। लेकिन इस बात से इंकार है विशाल अगर ये राजनीतिक स्टंट है अफवाही है तो ऐसे में फिर तमाम हम देख रहे हैं कि बड़े-बड़े नेता पहले अखिलेश यादव फिर शिवपाल यादव आके बयान भी दे रहे हैं ये सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है

जो आपने इस समय बोला अमित कि अगर शिवपाल सिंह यादव, अखिलेश यादव, रामगोपाल यादव इन सबको बाहर आकर के बयान देना पड़ रहा है तो निश्चित तौर पर वह भी चाहते हैं कि अपने ना सिर्फ वोटर्स को कंसोलिडेट रखें बल्कि अपने जो सांसद हैं, अपने जो विधायक हैं उनको भी इंटैक्ट रखने की जरूरत होती है। क्योंकि चुनाव से ठीक पहले अगर इस तरीके की कोई टूट होती है तो उसका सीधा जो असर होता है वह पार्टी के मोमेंटम पे पड़ता है। उनके पुरानी जो चुनावी राजनीति होती है रणनीति होती है उसके ऊपर असर पड़ता है। तो कोई भी पार्टी फिलहाल इस समय टूट का जो खतरा है वो अपने ऊपर नहीं लेना चाहती है। वजह सबसे बड़ी यह है कि उत्तर प्रदेश के चुनाव को अब कुछ महीने का वक्त बचा है। इसीलिए मोमेंटम कम से कम हाथ से ना जाने पाए। मोमेंटम हाथ से दूर ना जाने पाए। पार्टी को मजबूत रखा जाए। अपने जो वोट्स हैं उनको कंसोलिडेट किया जाए। इसीलिए फिलहाल समाजवादी पार्टी इस तरीके से आगे बढ़कर के इन सभी सवालों के जवाबों को दे रही है ताकि ना सिर्फ पार्टी में टूट को रोका जा सके बल्कि पूरी ईमानदारी और मेहनत के साथ चुनाव में जनता के सामने जाया जा सके। विशाल आगे तो एक और व्यक्ति को आना पड़ा है क्योंकि जिस तरह से ओम प्रकाश राजभर ने अपने ट्वीट के जरिए बलिया के लाल का जिक्र किया था। और बलिया के लाल का भी हम बता देते हैं कौन है। क्योंकि टूट की खबर के बीच पूर्वांचल के जो बलिया से सांसद है सनातन पांडे उन्हीं को बताया जा रहा है कि एक तरह से चिन्हित किया गया या फिर उनकी ओर ही इशारा किया गया। अब सनातन पांडे कह रहे हैं कि देश के लिए जो होगा वो करेंगे लेकिन बीजेपी में नहीं जाएंगे। देश के लिए देश की जहां-जहां आवश्यकता पड़ेगी देश को बचाने के लिए गरीबों, मजलूमों, किसानों, दलितों, अदलित पिछड़े अपने समाज के लोगों की रक्षा करने के लिए भारत के संविधान की रक्षा करने के लिए भारत के लोकतंत्र को बचाने के लिए अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ेगी तो भी मैं तैयार हूं। कौन सा है जो भारत के लोकतंत्र पर जो आघात हो रहे हैं उस पर बोलने का काम करता हूं? कौन सांसद है कि अपने पदों से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी के कुकर्मों का जवाब देना चाहता है।

भारतीय जनता पार्टी अपने मिशनियों का उपयोग जो है विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए करती है। और ये बात बहुत दिनों तक चलने वाली नहीं है। ओम प्रकाश जी को मैं इतना ही कहूंगा कि अपने दायरे में रहे और अपने दायरे में रहकर कोई बात करें। अब सनातन पांडे से हमारे सहयोगी शोएब रजा ने भी बात की है। आइए आपको सुनाते हैं। मेरे साथ इस वक्त समाजवादी पार्टी के सांसद सनातन पांडे जी मौजूद हैं। सनातन जी जब से ओपी राजभर का जो पोस्ट आया है और उन्होंने कहा है कि जो बागी बलिया के बागी हैं वह एक नेतृत्व करेंगे। बागी सांसदों के गुट का। चर्चाएं तेज हो गई है कि आप नेतृत्व करने वाले हैं। क्या टीएमसी और शिवसेना के टूट के बाद समाजवादी पार्टी में टूट होने वाली है? मुझे कोई भी ऐसी जानकारी नहीं है कि समाजवादी पार्टी में टूट होने वाली है। और टूट के बाद जो है हम उसका नेतृत्व करेंगे। जैसा ओम प्रकाश राजभर ने कहा है इतना ही शब्द मेरे दिल को बहुत पीड़ा पहुंचा रहा है। हम किसी राजा महाराजा का बेटा नहीं है। किसी पूंजीपति का बेटा नहीं हूं। हमारे पिता मामूली बस के कंडक्टर थे। हमको उन्होंने इंजीनियर बनाया। हम राजनीति में सेवा के भाव से आए। गरीब, दलित, पिछड़े, कमजोर लोगों की सेवा करने के लिए और शुरू से ही बाय बर्थ मेरे मन में कभी किसी जात के प्रति छूत की भावना नहीं रहेगी। समाजवाद से ही परिवार चलता है। समाजवाद से ही देश चलता है। समाजवाद से ही एक व्यवस्था चलती है। इस तरह के आरोप सरकार के मंत्री के द्वारा लगाया जाना मुझे बहुत आहत कर रहा है क्योंकि लोग लोग क्योंकि मैं एक ऐसे पद पर हूं संवैधानिक पद पर हूं कि मैं कुछ कह नहीं पा रहा हूं। जी इतना जरूर है जी कि ओम प्रकाश राजभर सरकार के मंत्री हैं।

उनका कहना का मतलब होता है कि सरकार कह रही है इस तरह के आक्षेप ना लगाएं क्योंकि मरता क्या नहीं करता? सिर्फ वो नहीं कह रहे हैं। केशव प्रसाद मौर्य भी कह रहे हैं। उनसे आपकी मुलाकात भी हुई थी। क्यों यह सब हो रहा है? क्या इसके पीछे आपको नजर आता है? फिर अगर आप कह रहे हैं केशव प्रसाद मौर्या हम कल जहाज से आ रहे थे। वह जो है वहां जहां जहां जिस कमरे में हम लोग बैठे हुए थे जो लाउंज बना होता है उसमें वह जा रहे थे बाथरूम में मैं वहां कोने में अकेले बैठा हुआ था आज मंत्री पोर्टल के नाते मैं खड़ा हुआ हैं और उनको मैंने प्रणाम किया मुझको प्रणाम किए इसके बाद कोई राजनीतिक नाम उनसे जान पहचान भी नहीं है कभी मैं उनसे मिला भी नहीं हूं कभी उनके दल में रहा भी नहीं हूं तो कोई आगे बात होने का सवाल कहां था? देखिए सनातन जी ने कुछ ऐसी बातें कही है जिसमें उन्होंने कहा कि राष्ट्र के हित में जो भी होगा वो करने के लिए तैयार हैं। लेकिन फिर उन्होंने यह भी बताया कि वो विपक्ष के नेता हैं वो भाजपा के साथ जा नहीं सकते हैं। लेकिन साथ में उनसे यह भी जब पूछा गया कि मुलाकात को लेकर जो उनकी केशव प्रसाद मौर्य के साथ हुई उस पर भी उन्होंने कहा कि अब उनसे मुलाकात उनकी हुई तो है। वह भले ही प्लेन में हुई हो। लेकिन बंगाल में जिस तरह से एक-एक करके नेता जो दीदी की कसमें खाया करते थे। उन्होंने जैसे पलटी मारी है उसके बाद से जो यूपी से खबरें आ रही है। उसको बहुत हल्के में तो लिया नहीं जा सकता। अब सपा की टूट पर बोले मंत्री संजय निषाद ने क्या कहा? हमारे संपर्क में सपा के ज्यादातर सांसद हैं। सरकार के जो मंत्री हैं वो कह रहे हैं समाजवादी पार्टी के तमाम सांसद और विधायक उनके टच में हैं। कल केशव प्रसाद मौर्य ने भी कहा कि 20 से 25 सांसद हैं जो ज्वाइन करना चाहते हैं। भारतीय जनता पार्टी। इस तरह के आरोप और इस तरह के बयान आपके सहयोगी दल के द्वारा भी आ रहे हैं।

देखो कोई भी राजनीतिक व्यक्ति होगा चाहे विधायक हो चाहे सांसद हो चाहे नहीं बना है उसका एक ही काम है हमें संवैधानिक अधिकार दिलाना और संवैधानिक अधिकार क्यों दिलाना क्योंकि संविधान में सम्मान सुरक्षा समृद्धि समानता स्वावलंबन सब है सुख है तो ये सारी चीजें तभी संभव है जब हम सरकार के संविधान कौन लागू कराएगा सरकार और सरकार के साथ रहेंगे तभी हो पाएगा अब सरकार आए थे सरकार बनाने लोग सरकार बन नहीं पाई तो अब बाहर रहेंगे तो जनता उनसे कहती है ना कि साहब कोई हमें हमें आपने वादा किया था तो सारे ज़्यादातर सांसद विधायक क्या पता हमारे पास भी संपर्क में है कि साहब हमको किसी तरह दिल्ली ले चलो अब दिल्ली बात कराइए अब बंगाल में जो सियासी उथल-पुथल शुरू हुई है उसका असर अब पूरे भारत पे पड़ता हुआ दिख रहा है चाहे महाराष्ट्र हो या फिर इस वक्त उत्तर प्रदेश की बात करें लेकिन एक बार फिर से बंगाल की बात कर लेते हैं क्योंकि यहां पर दीदी को एक और झटका लग गया है क्योंकि टीएमसी की ओर से हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। कोलकाता हाईकोर्ट ने उस याचिका को एक तरह से आप कह सकते हैं कि झटका दे दिया दीदी को क्योंकि बंगाल विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इंकार किया गया है। यानी कि ऋतुब्रतो बनर्जी ही अब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहेंगे।

आपको बता दें कि बाकी गुट के नेता ऋतु प्रतो बनर्जी ने शुभ देव को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने के खिलाफ फैसला लिया और अपने साथ 60 जो विधायक हैं उनके सिग्नेचर लेके सीधा स्पीकर से मिले और उन्होंने दावा कर दिया कि वही एलओपी है यानी कि लीडर ऑफ द अपोजिशन है। अब इसको चैलेंज किया गया ममता बनर्जी की ओर से हाईकोर्ट में। अब हाईकोर्ट ने क्या कहा? हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगाने से मना कर दिया। आज से बंगाल विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत हो गई है और ऐसे में यह फैसला जब आया है तो मतलब साफ है कि शोभोन देव नहीं ऋतुबतो बनर्जी ही इस वक्त टीएमसी की या फिर कह सकते हैं बागी गुट का नेतृत्व करेंगे और एलओपी के तौर पर वो बैठेंगे। दी हाई कोर्ट हैज़ नॉट पास्ड एनी एंट्री मॉडल बट हाई कोर्ट एडमिटेड दी पिटीशन डायरेक्शन फॉर एफिडेविट्स हैव बीन गिवन एंड द मैटर विल कम अप फॉर फाइनल हियरिंग

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