ईरान के खिलाफ इसराइल और अमेरिका ने मिलकर जॉइंट ऑपरेशन चलाया। लेकिन अब अमेरिका ने इजराइल के साथ ही दगाबाजी कर दी है। 18 मार्च को ईरान में दुनिया के सबसे बड़े नेचुरल गैस फील्ड साउथ पार्ट्स पर अटैक हुआ। ईरान की 70% गैस की आपूर्ति यहीं से होती है। देश में बिजली पैदा करने के लिए यहीं से गैस का इस्तेमाल होता है। यह ईरान का इकोनॉमिक पिलर है।
ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक इजराइल और अमेरिका ने मिलकर यह अटैक किया है। इस हमले में कई गैस टैंक्स और रिफाइनरीज के कुछ हिस्सों को नुकसान भी पहुंचा है। लेकिन ट्रंप ने इस दावे को गलत ठहरा दिया है। हमला इजराइल ने किया है या अमेरिका ने या दोनों ने मिलकर इस पर प्रेसिडेंट ट्रंप की तरफ से आई है सफाई। ट्रुथ सोशल पर उन्होंने लिखा मिडिल ईस्ट में जो हालात हैं
उसे देखकर इसराइल ने गुस्से में ईरान के साउथ पार्ट्स गैस फील्ड पर हमला कर दिया है। हालांकि हमला गैस फील्ड के एक छोटे हिस्से पर ही हुआ है। अमेरिका के पास इसकी कोई जानकारी नहीं थी और ना ही इसमें क़तर की कोई भूमिका थी। क़तर को तो पता भी नहीं था कि ऐसा कोई हमला होने वाला है। यह बात ईरान को भी नहीं पता थी कि क़तर की इसमें कोई गलती नहीं है। इसके चलते ईरान ने मासूम क़तर पर हमला कर दिया।
अब इजराइल साउथ पार्ट्स पर कोई और हमला नहीं करेगा जब तक कि ईरान नासमझी में क़तर जैसे निर्दोष देश पर हमला करने का फैसला नहीं करता। ईरान को यह सुनिश्चित करना होगा कि क़तर पर अब एक भी हमला ना हो। अगर ईरान नहीं माना तो इजराइल की सहमति हो या ना हो। अमेरिका ईरान का वो हश्र करेगा जो उसने कभी सोचा भी नहीं होगा। अमेरिका ईरान पर पूरे फोर्स से हमला करेगा।
प्रेसिडेंट ट्रंप ने कहा कि ईरान का पार्स गैस फील्ड भविष्य के लिए बहुत अहम है। लेकिन अगर क़तर के एलएनजी पर हमला हुआ तो वह ऐसा करने में पीछे नहीं हटेगा। इस मामले की जानकारी रखने वाले एक शख्स ने अमेरिकी न्यूज़ एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस को नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि इजराइल ने अमेरिका को ईरान के साउथ पार्ट्स पर अटैक करने की जानकारी दी थी। लेकिन अमेरिका ने इस हमले में हिस्सा नहीं लिया।
अमेरिका इस हमले के पक्ष में था या नहीं इस बारे में उन्होंने कोई भी जानकारी नहीं दी है। साउथ पार्ट्स ईरान के लिए कितना मायने रखता है? अब इसे समझेंगे। नक्शे में इस गैस फील्ड को देखिए। 9700 स्क्वायर कि.मी. में फैला है। इसका एक हिस्सा ईरान में है जो साउथ पार्ट्स कहलाता है और एक हिस्सा क़तर में है जिसे नॉर्थ फील्ड कहते हैं। मतलब दो देश इस गैस फील्ड को शेयर करते हैं। दोनों ही देशों के लिए यह बेहद अहम है।
ईरान अपनी जरूरत की जितनी भी गैस पैदा करता है, उसका 3/4 हिस्सा इसी एक जगह से आता है। इसका इस्तेमाल बिजली पैदा करने के लिए होता है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी आईईए के मुताबिक ईरान की लगभग 80% बिजली नेचुरल गैस से बनती है। जिसका एक बड़ा हिस्सा इसी गैस फील्ड से आता है। अगर इस गैस फील्ड की मैन्युफैक्चरिंग में कोई भी रुकावट आती है तो सीधा असर ईरान के घरों की बिजली, कारखानों के कामकाज और फ्यूल की सप्लाई पर पड़ेगा।
यही वजह है कि ईरान ने इसके जवाब में क़तर, सऊदी अरब और यूएई की एनर्जी फैसिलिटी पर हमला किया। ईरान ने क़तर के रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी पर मिसाइल दागी। यहां दुनिया का सबसे बड़ा लिक्विफाइड नेचुरल गैस प्लांट एलएनजी है जिसे हमले में निशाना बनाया गया था। उसी दिन कुछ ही घंटों के अंतराल पर यूएई के हबशान गैस फैसिलिटी और व फील्ड को निशाना बनाया गया।
अब बात इस जंग की कर लेते हैं। यह जंग 28 फरवरी को शुरू हुई थी। तब से लेकर अब तक ईरान के कई तेल भंडार को निशाना बनाया गया है और ईरान ने भी जवाबी कारवाही में खाड़ी देशों पर हमले किए। इस बीच तेल की सप्लाई बाधित हो गई और अब तेल की कीमत बढ़कर $10 प्रति बैरल हो गई है।