शुभेंदु अधिकारी ईश्वर नाम में शपथ बंगाल में पहली बार बीजेपी का कमल खिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले शुभेंदु अधिकारी असल मायने में बंगाल के अधिकारी बन गए हैं। शुभेंदु अधिकारी का नाम आज बंगाल के घर-घर में गूंज रहा है। लोग उनके सियासी दाव पेच के तो कायल है ही लेकिन उनकी निजी जिंदगी को लेकर भी बहुत कुछ जानना चाहते हैं।
आज यानी 9 मई को शुभेंदु अधिकारी ने सीएम पद की शपथ ले ली है। उन्होंने पीएम मोदी के पैर छूकर आशीर्वाद भी लिया जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। आज हम बात करेंगे शुभेंदु अधिकारी की पर्सनल लाइफ को लेकर। उन्होंने आखिर शादी क्यों नहीं की? वो किस परिवार से आते हैं और वो कितने पढ़े लिखे हैं? आखिर उनके पास कितनी दौलत है? दरअसल सार्वजनिक मंचों पर शुभेंदु अधिकारी से उनकी शादी को लेकर सवाल किए जाते हैं।
शुभेंदु के करीबियों और राजनीतिक एनालिसिस्ट का मानना है कि उन्होंने बहुत कम उम्र में ही खुद को जनता को समर्पित कर दिया था। शुभेंदु स्वामी विवेकानंद के आदर्शों पर चलते हैं और उनका मानना है कि एक पूर्णकालिक राजनेता के लिए परिवार की जिम्मेदारियां बाधा बन सकती हैं। मीडिया में छवि खबरों के मुताबिक शुभेंदु ने अपनी पूरी जिंदगी बंगाल के लोगों और खासकर मैदिनीपुरी की मिट्टी के लिए न्योछावर कर दिया है।
उनका जन्म 15 दिसंबर 1970 को पूर्वी मैदिनीपुर के कांत में एक राजनीतिक परिवार में हुआ था। वह 55 साल के हैं। उनके लिए उनका निर्वाचन क्षेत्र ही उनका घर है और वहां की जनता ही उनका परिवार। इसी त्याग ने उन्हें जनता के बीच दादा यानी बड़े भाई की छवि दी है। चलिए अब बात करते हैं शुेंदु अधिकारी के असली परिवार की। शुेंदु का ताल्लुक काथी के उस गौरवशाली अधिकारी परिवार से है जिसका नाम भारत के स्वतंत्रता संग्राम में बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है।
उनके पूर्वजों ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में अहम भूमिका निभाई थी। इनके पिता शिशिर अधिकारी खुद एक दिग्गज राजनेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे हैं। राजनीति सुेंदु के रंगों में दौड़ती है। उनके भाई दिवेंदु और सोमेंदु भी राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हैं। इस परिवार का मैदिनीपुर और आसपास के जिलों में इतना प्रभाव है कि उनके सपोर्ट के बिना वहां सत्ता की कल्पना करना भी मुश्किल है। वह दो बार लोकसभा सांसद, तीन बार विधायक और 5 साल तक पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं। चलिए अब जानते हैं कि आखिर कितने पढ़े लिखे हैं शुभेंदु दादा।
उनकी शुरुआती शिक्षा का के एक स्थानीय स्कूल में हुई। जिसके बाद उन्होंने हायर एजुकेशन की तरफ रुख किया। सुेंदु ने काथी पीके कॉलेज से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की और उसके बाद मास्टर ऑफ आर्ट्स की डिग्री हासिल की। उनकी यह हायर एजुकेशन ही है कि वह विधानसभा के अंदर आंकड़ों और तथ्यों के साथ ममता सरकार को घेरने में माहिर माने जाते हैं। इतिहास और राजनीति की गहरी समझ उन्हें एक विजनरी लीडर बनाती है। इतने ऊंचे पद पर पहुंचने के बाद भी शुभेंदु की लाइफस्टाइल बहुत सादा है।
सफेद कुर्ता और पायजामा उनकी पहचान है। वह सादा शाकाहारी भोजन पसंद करते हैं और धार्मिक कामों में उनकी गहरी रुचि रहती है। चलिए अब बात कर लेते हैं शुभेंदु अधिकारी के पास कितनी दौलत है।
बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में नामांकन के वक्त निर्वाचन आयोग में जमा किए गए शुभ हिंदु के हलफनामे के मुताबिक उनके पास सिर्फ ₹12,000 नकद हैं। उनके नाम पर कोई कार नहीं है और ना ही उन्होंने किसी सोने के आभूषण की जानकारी दी है।
हलफनामे के मुताबिक उनकी कुल घोषित संपत्ति करीब ₹85 लाख है। उन पर किसी तरह का कर्ज भी नहीं है।