सनी देओल ने हाल ही में खुलासा किया कि गदर 2 से पहले उन पर करीब ₹56 करोड़ का कर्ज था। उन्होंने माना कि वह दौर उनके करियर का सबसे मुश्किल वक्त था। जब फिल्में नहीं मिल रही थी, पैसे नहीं थे और कर्जदार दरवाजे पर खड़े थे। लेकिन जब गदर टोप 500 करोड़ पार कर गई तो सनी ना सिर्फ उस कर्ज से उभरे बल्कि एक नई ऊंचाई पर पहुंचे। सनी देओल की यह कहानी बॉलीवुड में कोई पहली नहीं है। इस इंडस्ट्री में ऐसे कई बड़े नाम हैं जिन्होंने फाइनेंशियल क्राइसिस का सबसे बुरा दौर देखा लेकिन हार नहीं मानी। आइए जानते हैं उन पांच दिग्गज एक्टर्स के बारे में जिनका वो क्राइसिस का वक्त और उससे उभरने की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है। [संगीत] अमिताभ बच्चन जिन्हें बॉलीवुड का शहंशाह कहा जाता है। 1990 के दशक के मिडिल में एक ऐसी गहरी खाई में जा गिरे थे जहां से निकलना नामुमकिन लग रहा था। एक नेशनल आइकॉन, एक लेजेंड और उन पर करीब ₹90 करोड़ का कर्ज। 55 मुकदमे अदालतों में चल रहे थे। कर्जदार रोजाना दरवाजा खटखटाते थे।
उनका मशहूर बंगला प्रतीक्षा बेचने की नौबत आ गई थी। बैंक खाते में जीरो बैलेंस था। यह सब हुआ उनके उस सपने की वजह से जो अमिताभ बच्चन कॉरपोरेशन लिमिटेड के रूप में 1996 में शुरू हुआ था। एबीसीएल का मकसद था भारतीय मनोरंजन को एक नई दिशा देना। फिल्म प्रोडक्शन, इवेंट मैनेजमेंट, डिस्ट्रीब्यूशन सब एक ही छत के नीचे लेकिन कंपनी तेजी से डूब गई। 1999 तक एबीसीएल को बोर्ड फॉर इंडस्ट्रियल एंड फाइनेंशियल रिकंस्ट्रक्शन के पास जाकर खुद को सिख कंपनी घोषित कराना पड़ा। अमिताभ ने एक इंटरव्यू में बताया था, मैं दिवालिया हो गया था। सब कुछ चला गया था। बैंक बैलेंस जीरो था। कंपनी डूब गई थी और रोजाना कर्जदार दरवाजे पर थे। यह बेहद जिल्लत की बात थी। अभिषेक बच्चन ने भी एक पडकास्ट में बताया था कि उस वक्त वह बॉस्टन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे थे। उन्होंने पढ़ाई बीच में छोड़कर वापस आने का फैसला किया था क्योंकि पिता के मुश्किल वक्त में उनके साथ रहना जरूरी था।
लेकिन उन्हें रोका गया। एक रिपोर्ट के मुताबिक धीरूभाई अंबानी ने अपने बेटे अनिल को कहा था कि अमिताभ की मदद करो। लेकिन अमिताभ ने वह मदद कबूल नहीं की। फिर महानायक की वापसी हुई। दो मोर्चों पर वो यश चोपड़ा के पास गए और मोहब्बतें फिल्म मिली और फिर आया इंडियन टेलीविजन का सबसे कामयाब शो कौन बनेगा करोड़पति जिसने सब बदल दिया। इस शो के 85 एपिसोड के लिए अमिताभ को ₹15 करोड़ मिले। साथ ही ICICI बैंक जैसे बड़े इंडोर्समेंट ने एक-एक करके कर्ज चुकाने का रास्ता खोला। अमिताभ ने अपना पूरा 90 करोड़ का कर्ज चुका दिया और नए सिरे से शुरुआत की। आज उनकी कुल दौलत ₹1600 करोड़ से ज्यादा आंकी जाती है। उनकी इन्वेस्टमेंट्स को लेकर आए दिन खबरें देखने को मिलती हैं। कभी पॉजिटिव तो कभी नेगेटिव। हालांकि यह उतना ही सच है कि सदी के महानायक ने बेहद गंभीर आर्थिक संकट से खुद को कामयाबी से उभारा था। 1990 के दशक में गोविंदा बॉलीवुड के सबसे बड़े स्टार्स में से एक थे। हीरो नंबर वन, राजा बाबू, कुली नंबर वन, साजन चले ससुराल। डेविड धवन के साथ उनकी जोड़ी ने एक के बाद एक ब्लॉकबस्टर फिल्में दी। लेकिन जब यह दौर खत्म हुआ तो खत्म होते-होते बहुत खुश ले गया। 2001 में जब गोविंदा ने सियासत में कदम रखा और मुंबई नॉर्थ से सांसद बने, तो उनका फिल्मी करियर धीरे-धीरे पीछे झुकने लगा। वो इंडस्ट्री से थोड़ा दूर चले गए। 2004 में जब वो वापस आए, तो हालात बदल चुके थे। लगातार कई फिल्में फ्लॉप हुई, ऑफर आने बंद हो गए। एक वक्त ऐसा आया जब अर्निंग ज़ीरो हो गई थी।
गोविंदा ने एक इंटरव्यू में बताया था कि पिछले 14-15 सालों में उन्होंने काफी इन्वेस्टमेंट किया था और वहां नुकसान उठाया। उनके करीब ₹16 करोड़ डूब गए। उन्होंने यह भी इल्जाम लगाया था कि उनकी फिल्मों को थिएटर नहीं मिले और कुछ लोग उनका करियर तबाह करना चाहते थे। उनके अच्छे दिनों के साथ ही तक उनसे दूर हो गए थे। एक रिपोर्ट के मुताबिक डेविड धवन ने एक बार उनके सेक्रेटरी को साफ कह दिया था कि वह गोविंदा के साथ काम नहीं करना चाहते। यह बात गोविंदा ने खुद स्पीकर ऑन रखकर सुनी थी। लेकिन फिर गोविंदा की भी वापसी हुई। साल 2007 में फिल्म पार्टनर से जिसमें सलमान खान थे। इसे उन्हीं डेविड धवन ने बनाया था जिन पर उन्हें त्याग देने का इल्जाम था। फिल्म सुपरहिट रही और गोविंदा एक बार फिर पांव पर खड़े हो गए। कभी खबरें चला करती थी कि गोविंदा का घर तक गिरवी रखा हुआ है। अब खबरें आती हैं कि गोविंदा नई प्रॉपर्टी खरीद रही हैं। इस लिस्ट में अगला नाम है जग्गू दादा उर्फ जैकी श्रॉफ। 1980 और 90 के दशक में जैकी श्रॉफ बॉलीवुड के ग्लैमरस सितारों में से एक थे। हीरो रामल लखन परिंदा खलनायक एक से बढ़कर एक फिल्में उनकी अलग ही फैन फॉलोइंग थी। आज भी है। लेकिन साल 2000 के बाद ऑफर कम होते गए और 2003 में बूम जैसी फिल्म की नाकामी के बाद एक के बाद एक झटके लगे। फिल्म को उनकी पत्नी आयशा श्रॉफ ने प्रोड्यूस किया था। यह इतनी बड़ी डिजास्टर रही कि आयशा और जैकी को अपने एसेट्स बेचने पड़े। यह बुरा दौर लंबा चला। 2008 में जब देश भर में मंदी का दौर था, जैकी श्रॉफ भी उसी की चपेट में आए। पैसों की तंगी इतनी बढ़ी कि उन्होंने फिल्म प्रोड्यूसर दोस्तों से कर्ज लिया। लेकिन जब चुकाने का वक्त आया तो उनके पास पैसे नहीं थे। दोस्तों ने कानूनी कारवाई की चेतावनी दी और जैकी श्रॉफ और उनकी प्रोडक्शन कंपनी के खिलाफ मुकदमा दायर किया। हालात बेहद नाजुक हो गए। माली बोझ इतना था कि उन्हें अपने फ्लैट तक बेचने पड़े। मुंबई में जो जायदाद थी वो एक-एक करके बिकती चली गई। टाइगर श्रॉफ ने भी एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके फ्लैट का फर्नीचर तक बिकने की नौबत आ गई थी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक उस मुश्किल वक्त में जग्गू दादा के काम आए सलमान खान। उन्होंने ना सिर्फ उनकी मदद की बल्कि प्रोड्यूसर से बात करके मामले को अदालत से बाहर निपटाया। जैकी श्रॉफ ने खुद एक इंटरव्यू में इस बात को कुबूल किया था। इसके बाद से जैकी श्रॉफ ने कैरेक्टर रोल्स करना शुरू कर दिया। बहुत सारा काम किया और धीरे-धीरे अपनी मजबूत पहचान फिर से बनाई। वो दौर आखिरकार बीत ही गया। राज कपूर हिंदी सिनेमा के शोमैन थे। श्री 420 आवारा संगम जैसी उनकी फिल्में पूरी दुनिया में पहुंचती थी। रशिया जैसे देशों में उनकी जबरदस्त फैन फॉलोइंग थी। लेकिन 1970 में एक ऐसी फिल्म आई जिसने उन्हें तबाही की कगार पर ला खड़ा किया। मेरा नाम जोकर यह फिल्म राज कपूर का सबसे बड़ा सपना थी। उन्होंने इसे बनाने में 6 साल लगा दिए थे। यह उनकी जिंदगी की सबसे पर्सनल फिल्म थी। एक जोकर की कहानी जो हर दर्द पर हंसता है। इस फिल्म की लंबाई लगभग 5 घंटे थी जिसमें दो इंटरवल थे। फिल्म राज कपूर का बेहद एंबिशियस प्रोजेक्ट था। लेकिन दर्शकों ने इसे नकार दिया और फिल्म बुरी तरह से फिट गई। जो पैसा राज कपूर ने लगाया था वो डूब गया। फाइनेंससेसर पीछे हट गए। अगली फिल्मों के लिए कोई पैसा लगाने को तैयार नहीं था। प्रेम चोपड़ा ने एक इंटरव्यू में बताया था राज कपूर साहब खत्म हो गए थे। उनका सब कुछ बिक गया था। उन्होंने आर के स्टूडियो तक गिरवी रख दिया था और उन्हें खानदान की जायदाद तक बेचनी पड़ी थी। ऋषि कपूर ने भी अपनी आत्मकथा खुल्लम खुल्ला में लिखा है कि वो दौर कपूर परिवार पर बहुत बुरा बीता था। लेकिन राज कपूर ने हार नहीं मानी। उन्होंने एक और जोखिम उठाया इस बार एक लव स्टोरी बनाई दो नए चेहरों के साथ। 1973 में बॉबी आई, ऋषि कपूर और डिंपल कपाडिया लीड रोल में थे।
यह फिल्म उस साल की सबसे बड़ी हिट बनी और उसने मेरा नाम जोकर से हुए सारे नुकसान की भरपाई कर दी। मेरा नाम जोकर ने बाद में एक कर्ट क्लासिक का दर्जा पाया। आज ये फिल्म राज कपूर के सबसे बड़े क्रिएशंस में गिनी जाती है। मिथुन चक्रवर्ती की कहानी शायद बॉलीवुड की सबसे ज्यादा दृढ़ता की कहानी है। डिस्को डांसर, अग्निपथ, प्यार का मंदिर जैसी फिल्मों से मिथुन ने 1980 के दशक में हिंदी सिनेमा पर राज किया। एक वक्त ऐसा था जब वो एक महीने में कई फिल्मों की शूटिंग एक साथ करते थे। लेकिन 1993 से 1998 के बीच एक ऐसा बुरा दौर आया कि उनकी लगातार 33 फिल्में फ्लॉप हो गई। एक ऐसा सिलसिला जो किसी भी एक्टर को तोड़ कर रख सकता है। मिथुन ने एक रास्ता निकाला। वो मुंबई छोड़कर ऊटी चले गए और वहां मोनार्क होटल शुरू किया। उनका आईडिया था कि फिल्मों की शूटिंग ऊटी में होगी। टीम उनके होटल में रहेगी। वो उस फिल्म में काम करेंगे और सबका फायदा होगा। यह फार्मूला एक हद तक चला लेकिन होटल बिजनेस उन्हें उतना मुनाफा नहीं दे पाया और माली तंगी बनी रही। उन पर होटल के इंटीरियर डेकोरेशन के पैसे ना चुकाने के आरोप भी लगे थे। लेकिन फिर मिथुन चक्रवर्ती के करियर का दूसरा दौर आया। डांस इंडिया डांस जैसे शोज़ के जरिए वो टीवी के दर्शकों तक पहुंचे। गोलमाल 3 जैसी फिल्मों से बड़े पर्दे पर सेकंड इनिंग शुरू की और फिर सब ठीक होता गया। बाद में वो पॉलिटिक्स में भी गए और लगभग 3 साल तक राज्यसभा सांसद रहे। सनी देओल से लेकर अमिताभ बच्चन तक इन सभी सितारों की कहानी एक ही बात कहती है कि गिरना बुरा नहीं, हार मान लेना बुरा है। फाइनेंसियल क्राइसिस ने इन सबको तोड़ा नहीं बल्कि और मजबूत बनाया और यही बात इन्हें सिर्फ बड़ा एक्टर नहीं बल्कि बड़ा इंसान भी बनाती है। आपको यह एपिसोड कैसा लगा हमें कमेंट करके जरूर बताइए और देखते रहिए एम बॉलीवुड। [संगीत]