गुरु अबे किसका टाइम खराब आ गया बे दिल है मेरा दीवाना [संगीत] जय बाबू ये परदेसी है बेचारा बंबई में कदम रखते ही बेशारा 13 नवंबर 1992 बॉलीवुड के इतिहास का वो शुक्रवार जब थिएटर के बाहर लंबी लाइनें लगी थी। एक तरफ बॉलीवुड के नए नवेले सितारे शाहरुख खान जो दीवाना की सफलता के बाद अपनी नई फिल्म राजू बन गए जेंटलमैन के साथ आए थे। क्या हुआ ये इसे क्या हुआ इसको इसे क्या हुआ इसका [संगीत] तो बच गया बाजा दिखा दे मलेरिया हुआ यारिया हुआ व दूसरी तरफ खड़े थे भारतीय सिनेमा के असली सुपरस्टार जनता के चहेते मिथुन चक्रवर्ती अपनी फिल्म घर जमाई के साथ [संगीत] [संगीत] ओ [संगीत] [संगीत] इंडस्ट्री के पंडितों को लगा था कि शाहरुख खान का नया सितारा चमकेगा और मिथुन दा का दौर ढल जाएगा। लेकिन जब बॉक्स ऑफिस के आंकड़े सामने आए तो हर कोई हैरान रह गया। मिथुन दा ने ना केवल शाहरुख खान की फिल्म को पछाड़ दिया बल्कि यह भी साबित कर दिया कि असली बॉक्स ऑफिस किंग कौन है?
नेकलेस मिल गया। कहां से मिल गया? तुम्हारी बहन के गले में। और साथ में तुम्हारा बहनोई भी था। [संगीत] मैं नहीं मानता। तुम तो यह भी नहीं मानोगे कि तुमने खुद हमारी ऑफिस से ₹5 लाख चुराए। आज की इस वीडियो में हम बताएंगे 13 नवंबर 1992 की उस ऐतिहासिक क्लैश की पूरी कहानी कैसे मिथुन दा के जलवे के आगे शहरूप का जादू फीका पड़ गया। तो चलिए जानते हैं दोस्तों। तू मेरे साथ-साथ आसमान से आगे चल। नई है मंजिलें नई है रास्ते [गाना गाने की आवाज़] नईनई है [संगीत] जिंदगी कहानी की शुरुआत समझने के लिए हमें 1992 के दौर में जाना होगा। यह वो दौर था जब बॉलीवुड में बदलाव की हवा चल रही थी। अगर हम बात करें तो जून 1992 में शाहरुख खान की फिल्म दीवाना रिलीज़ हुई थी। फिल्म सुपरहिट रही और शाहरुख रातोंरात यूथ आइकॉन बन गए। राजू बन गए जेंटलमैन। उनकी तीसरी फिल्म थी जिसे अजीज मिर्जा डायरेक्ट कर रहे थे। फिल्म का बजट काफी हाई था। खासकर शहरी और क्लास ऑडियंस के बीच। दिल है मेरा दीवाना [संगीत] है दिल है मेरा दीवाना मेरी मंजूर है [संगीत] पर जाना जरूरी। वहीं दूसरी फैक्ट की बात करें। दूसरी तरफ मिथुन चक्रवर्ती उस मुकाम पर थे जहां उन्हें किसी शहरी हाइप की जरूरत बिल्कुल भी नहीं थी। 80 के दशक से शुरू हुआ उनका राज 90 के दशक में भी कायम था। मिथुन दा की फैन फॉलोइंग सिंगल स्क्रीन और मास ऑडियंस के बीच भगवान जैसी थी।
दोस्तों 13 नवंबर 1992 को जब यह फिल्म दोनों आमने-सामने आई तो यह मुकाबला सिर्फ दो फिल्मों का नहीं था। यह मुकाबला था मास बनाम क्लास का। [संगीत] अपना बना रहना हमारा [संगीत] अपना राजू हीरो है पर हम के बन गए जेंटलमैन [संगीत] राजू बन गए जेंटलमैन पहले बात करते हैं राजू बन गए जेंटलमैन की तो इसमें शाहरुख खान जूही चावला अमृता सिंह और नाना पाटकर जैसे कलाकार नजर आए थे। थीम की बात करें तो यह एक एंबिशियन नौजवान की कहानी थी जो दार्जिलिंग से मुंबई इंजीनियर बनने आता है और शहर के ग्लैमर में खो जाता है। चला जा इधर मेरा बैग तो उठा लो आराम से जय बाबू आपका डिनर अरे सुन जय बाबू ये परदेसी है बेचारा बंबई में कदम रखते ही बेशहा होगा अपील की बात करें तो यह फिल्म मुख्य रूप से मेट्रो शहर मल्टीप्लेक्स संस्कृति के शुरुआती दर्शकों और एलिट क्लास के ध्यान में रखकर बनाई गई थी। हमेशा लड़ती रहती हैं? फिर फिर क्या कर रहे हो आप? गुंडा लोफर। अरे आप आप गुंडा लोफर किसे कह रही हैं? जानती है आप? मेरी मजबूरी है जो आपकी बदतमीजी बर्दाश्त करता आ रहा हूं तब से मैं। ये ये ये देखिए ये देखिए ये ये जूता फटा हुआ है मेरा।
अब तसल्ली हुई आपको? अरे मैं पहले से ही परेशान हूं और आप गुंडा लॉफर क्यों दे जा रही हैं? मैं गुंडा लॉफर नहीं हूं मैडम गुंडा लॉफर नहीं हूं। मैं इंजीनियर हूं इंजीनियर। वहीं बात करें मिथुन चक्रवर्ती की घर जमाई की तो इसमें मिथुन चक्रवर्ती, वर्षा उस गावंकर, कादर खान, शक्ति कपूर जैसे कलाकार नजर आए थे। थीम की बात करें तो यह एक क्लासिक फैमिली एक्शन ड्रामा फिल्म थी। इसमें सास बहू के झगड़े, कॉमेडी, पारिवारिक भावनाएं और मिथुन दा के धमाकेदार एक्शन सब कुछ था। उसी लड़की को देने शहर नहीं गए थे। सारी रात उसके घर गुजारने के बाद सुबह मैंने तुम्हें उसके घर से निकलते हुए खुद अपनी आंखों से देखा है। चुप क्यों हो? बोलो। क्या रिश्ता है तुम्हारा उस लड़की के साथ? काश मैं बता सकता। उसके साथ मेरा क्या रिश्ता है? मैं बताती हूं। उस आवारा बदचलन औरत के साथ तुम्हारा बिस्तर का रिश्ता है। अगर अपील की बात करें तो भारत की असली ऑडियंस सिंगल स्क्रीन, छोटे शहर, कस्बे और गांव जहां लोग सिर्फ मनोरंजन, डायलॉग बाजी और एक्शन देखने आते थे। [संगीत] जब दोनों फिल्में पर्दे पर उतरी तो शुरुआती रिएक्शन ने ही सब कुछ साफ कर दिया। मुंबई और दिल्ली जैसे बड़े शहरों के कुछ सेंटर्स पर राजू बन गए। जेंटलमैन ने अच्छी शुरुआत की लेकिन भारत के बाकी 80% हिस्से में जो हुआ उसकी कल्पना ट्रेड एनालिस्ट ने कभी नहीं की होगी। [संगीत] पलट।
क्या बात है क्या बात है बात करें ओपनिंग डे और पहला वीकेंड की तो मिथुन दा की घर जमाई ने बी और सी सेंटर्स के थिएटरों में हाउसफुल कर दिया दोस्तों जहां शहरुख की फिल्म देखने के लिए सिर्फ गिने-चुने शहरी दर्शक पहुंच रहे थे वहीं घर जमाई के शो के लिए टिकट खिड़की पर लाठियां चल रही थी दिल लगाते हैं। ये सच है कि वो दिल लगाते [संगीत] हैं। और वहीं कमाई और बजट की बात करें तो राजू बन गया जेंटलमैन ने अपने पूरे लाइफ टाइम में लगभग ₹ करोड़ की कमाई की और इसे केवल एवरेज या फिर अबव एवरेज का फिल्म टैग का प्राप्त हुआ। दोस्तों डॉक्टर परेशान है [संगीत] साहे बढ़ती ही जाती है हर। वहीं मिथुन चक्रवर्ती के घर जमाई ने अपनी लागत से कई गुना ज्यादा कमाई करते हुए बॉक्स ऑफिस में 3 करोड़ से भी ज्यादा का कारोबार किया और इसे हिट का दर्जा प्राप्त हुआ। मैं आपसे पूछ रहा हूं बताइए यह सच है या झूठ? [संगीत] रुक जाइए मामा जी। छोड़ दो। छोड़ दो मुझे। मुझे जिंदा रहने का कोई अधिकार नहीं है। मामा जी मुझे छोड़ दो। मामा जी। अरे मिथुन दा की फिल्म में कादर खान के साथ उनकी कॉमिक टाइमिंग और उनके एक्शन सींस ने ऐसा जादू चलाया कि लोग बार-बार थिएटर की तरफ खींचे चले आए। अरे [संगीत] आइए इस क्लैश से क्या साबित हुआ?
हम बताते हैं। दोस्तों शाहरुख खान भले ही आगे चलकर बॉलीवुड के किंग खान बने। लेकिन 1992 में मिथुन ने यह साफ कर दिया कि असली बॉक्स ऑफिस किंग वही होता है जिसका कब्जा पूरे देश के सिनेमाघरों पर होता है। बरखा आई है बदली तेरी बाहों में क्यों क्यों शर्मा है बात करें पहले फैक्ट की तो सिंगल स्क्रीन्स की ताकत मिथुन दा की सबसे बड़ी ताकत थी उनकी मास अपील उनका नाम ही बीसी सेंटर्स में टिकट बिकवाने के लिए काफी था। वहीं दूसरी फैक्ट की बात करें तो कंसिटेंसी 1992 मिथुन दा ने एक दो नहीं बल्कि कई हिट फिल्में दी। वे उस दौर में लो बजट और हाई रिटर्न की फिल्मों से सबसे बड़े ग्रांटेड स्टार माने जाते। तीसरा है स्टारडम का दबदबा। शाहरुख जैसे उभरते हुए सुपर सेंसेशन को उनकी रिलीज़ डेट पर सीधे मुकाबले में हराना यह दिखाता है कि मिथुन चक्रवर्ती का स्टारडम कितना मजबूत था। हे भाई ये क्या है? सॉरी साहब रिजेक्शन लेटर्स हैं। क्यों नौकरी नहीं मिली क्या? अरे कहां तुम्हारे शहर में मिलती है नौकरी हमको? 13 नवंबर 1992 की यह जंग इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई जहां एक तरफ शाहरुख खान ने इस असफलता से सीख कर आगे चलकर डर और बाजीगर जैसी फिल्मों में अपना परचम लहराया। वहीं मिथुन चक्रवर्ती ने यह साबित कर दिया कि जनता का प्यार और बॉक्स ऑफिस का सिंहासन किसी की हाइप से नहीं बल्कि जन-जन के जुड़ाव से मिलता है। आपको क्या लगता है? क्या 90 के दशक में मिथुन दा जैसा मास स्टारडम कोई और हासिल कर पाया? अपनी राय कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं। अगर वीडियो पसंद आया हो तो इसे लाइक करें, दोस्तों के साथ शेयर करें और ऐसे ही बॉलीवुड के ऐतिहासिक किस्सों के लिए हमारे चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूलें। धन्यवाद दोस्तों।