यह तस्वीर बाबा नीम करौली के परिवार जनों की है। इस तस्वीर में बाबा के दोनों बेटे और उनकी बेटी कुर्सियों पर बैठे हुए हैं। साथ में पीछे उनकी पोतियां भी खड़ी नजर आ रही हैं। लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि एक ओर पूरी दुनिया बाबा नीम करौली के के लिए उनके बताए मार्गों पर चलने के लिए लालायित है।
वहीं दूसरी तरफ बाबा नीम करौली का परिवार बाबा की जन्मस्थली को लेकर विवादों में घिरता नजर आ रहा है। इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर सिनेमाघरों तक हर तरफ बाबा नीम करौली पर बनी फिल्म हनुमान अंश की चर्चा है। यह फिल्म 100 करोड़ की कमाई भी पार कर चुकी है। लेकिन जिस घर में बाबा का बचपन बीता उसे लेकर बड़ा विवाद शुरू हो गया है।
बाबा का परिवार क्या मांग कर रहा है? बाबा की जन्मस्थली को लेकर यूपी सरकार क्या बड़ा प्लान कर रही है? यूपी में फिरोजाबाद से करीब 15 कि.मी. दूर अकबरपुर नाम के गांव में बाबा नीम करौली का जन्म हुआ। जिस घर में बाबा का जन्म हुआ वह उनका पुश्तैनी घर है। घर में जिसकी देखभाल रखरखाव श्री ठाकुर हनुमान ट्रस्ट करता है। लेकिन जो ट्रस्ट अब तक बाबा के घर को संभाल रहा था, उसके सचिव संजय गुप्ता पर संपत्ति पर करने के आरोप लगाए गए हैं।
और यह आरोप बाबा की छह पोतियों ने लगाए हैं। उन्होंने फिरोजाबाद के को एक शिकायत भरा पत्र दिया है जिसमें यह तमाम आरोप लगाए गए हैं। बाबा नीम करौली का बचपन का नाम लक्ष्मीारायण शर्मा है। बाबा के दो बेटे हैं और एक पहले बेटे का नाम अनेक शर्मा है और दूसरे का नाम है धर्मनारायण शर्मा और जिन छह पोतियों ने से शिकायत की है, वह धर्मनारायण शर्मा की ही बेटियां हैं। है। अखबार के मुताबिक पूरे विवाद पर उन्होंने नीम करौली बाबा के पोते धनंजय शर्मा से बात की और वह कहते हैं जब यह मंदिर बनाया गया था तब पिताजी और चाचा जी ने कहा था कि हमारे जाने के बाद मकान ट्रस्ट को दे देना।
उस वक्त कोई लिखापढ़ी नहीं हुई थी। इसलिए कोई प्रमाण नहीं है। वो मकान सिर्फ 450 स्क्वायर फीट में बना हुआ है। कोई करोड़ों की संपत्ति नहीं है। महाराज जी का नाम इतना बड़ा है। इस तरह के विवाद से सिर्फ उनका नाम ही खराब होगा। लेकिन इस रिपोर्ट में यह भी पता लगा है कि यूपी पर्यटन विभाग गांव में 5 हेक्टेयर जमीन पर कॉरिडोर बनाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए जमीन भी चिन्हित कर दी गई है।
किया जाएगा। लेकिन जिन पोतियों ने ट्रस्ट के सचिव पर आरोप लगाए हैं उनका कहना है हम चाहते हैं कि करके सरकार अपने स्तर पर एक ट्रस्ट बनाए जिसमें फिरोजाबाद के पदेन अध्यक्ष टुंडला के और एक अन्य अधिकारी हो। अकबरपुर के अन्य लोग भी हो। ऐसा होने से यह अधिकारी लगातार बदलते रहेंगे।
किसी के अंदर परमानेंट वाली सोच नहीं आएगी। नीमकरली बाबा की जन्मस्थली पर यूपी पर्यटन विभाग का विशेष फोकस है। यहां करीब 9 करोड़ की लागत से भी बन रहा है। इसमें मल्टीपर्पज हॉल, सांस्कृतिक ब्लॉक और एक आधुनिक एग्बिशन हॉल बनाया जा रहा है।
एग्बिशन हॉल में नीम करौली बाबा से जुड़ी चीजें रखी जाएंगी। तो यह पूरे विवाद की कहानी है जो इस वक्त सोशल मीडिया से लेकर अखबारों और समाचार पत्रों में छाया हुआ है। हालांकि बाबा ने हमेशा यही संदेश दिया था कि लोभ लालसा से इंसान को हमेशा दूर रहना चाहिए।
लड्डू लेते हैं वो आप बाबा के सामने रखते हैं और खुद ही उसे वापस लाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। यानी आपको मंदिर की तरफ से आप मंगलवार को जाएंगे तो आपको चने मिल जाएंगे। वहां पर जो ध्यान का क्षय है वहां पर ध्यान करने के लिए हनुमान चालीसा मिलेगी। कोई भी चीज वहां पर कोई भी इस प्रकार की व्यवस्था नजर नहीं आएगी। तो हमेशा से बाबा नीमकरली महाराज ने यही संदेश दिया है कि वो ध्यान करें। अपने आंतरिक शक्ति को पहचानने की कोशिश करें। तभी वो जहां भी गए हैं वहां मेडिटेशन सेंटर बनाए गए हैं।