सूरज हुआ मध्यम चांद जलने तुझे देखा तो ये जाना सनम रंग दे तू मोहे गेरू टिप टिप बरसा पानी आज मेरी जिंदगी में पहलीप बार बॉलीवुड में अक्सर कोई जोड़ी सुपरहिट होती है तो फिल्म मेकर्स लगातार इस जोड़ी को ही अपनी फिल्मों में कास्ट करते हैं। फिर चाहे बात रेखा जितेंद्र की हो या श्रीदेवी जितेंद्र की या फिर अनिल कपूर और माधुरी दीक्षित की। मार गई मुझे तेरी जुदाई कस गई ये तन। ये जो हल्का हल्का सुरू है सब तेरी नजर होरी तेरे अंग अंग में रंग के ए ताकी ओ ताकी ओ ताकी ताकी ताकी रे तब से तुम हो मेरी वरना इन जोड़ियों ने एक साथ दो नहीं बल्कि दर्जनों फिल्मों में सात काम किए हैं। लेकिन बॉलीवुड में एक ऐसी सुपरहिट जोड़ी भी रही है जिसके साथ ऐसा नहीं हुआ। वो श्रीदेवी और संजय दत्त की जोड़ी है। साल 1993 में आई फिल्म गुमराह में श्रीदेवी और संजय दत्त साथ नजर आए थे। प्यार का सलाम ओ सनम। यह फिल्म सुपरहिट थी और ऑडियंस ने इस जोड़ी पर भी दिल खोलकर प्यार लुटाया था। लेकिन इसके बाद यह दोनों कभी और किसी फिल्म में साथ नजर नहीं आए। यहां तक कि इस फिल्म में भी श्रीदेवी संजय दत्त के साथ काम करने को तैयार नहीं थी। आइए आइए। आइए ना। ठीक से देख लीजिए। ये आपकी लिस्ट का दूसरा आइटम बंग स्विमिंग पूल के साथ। लेकिन उन दिनों एक्ट्रेस का करियर कुछ खास नहीं चल रहा था। जिस वजह से उन्हें यह फिल्म करनी पड़ी थी। कहा जाता है कि इस फिल्म की शूटिंग के दौरान दोनों स्टार्स कभी भी एक दूसरे से ऑफ कैमरा बात तक नहीं करते थे। दोनों के बीच काफी कड़वाहट थी और इसी वजह से श्रीदेवी कभी भी संजू बाबा के साथ काम नहीं करना चाहती थी। अब आप सोच रहे होंगे कि इन दोनों के बीच आखिर ऐसा क्या हुआ था कि यह दोनों आपस में बात तक नहीं करते थे। दरअसल यह वाक्या श्रीदेवी की दूसरी फिल्म हिम्मतवाला के सेट का है। सपनों में सपना सपनों में सजनी सजनी पे दिल। संजय दत्त उन दिनों फिल्मों की दुनिया में नए-नए आए थे और वह श्रीदेवी के बहुत बड़े फैन हुआ करते थे।
लेकिन उस वक्त संजय दत्त अक्सर नशे में डूबे रहते थे और ऐसा ही कुछ हिम्मतवाला के सेट पर भी हुआ। जब एक्टर को पता चला कि श्रीदेवी फिल्म के सेट पर हैं तो वह नशे की हालत में ही उनसे मिलने चले गए थे। इतना ही नहीं एक्ट्रेस को सेट पर ना देख संजू बाबा सीधे उनके मेकअप रूम में जा पहुंचे थे। नशे में डूबे एक्टर को अचानक सामने देख श्रीदेवी काफी घबरा गई थी। तुमने जितना कहना था कह दिया। मैंने जितना सुनना था सुन लिया। अपनी क्लॉथ और और उस दिन के बाद से उन्होंने कभी भी संजय दत्त के साथ काम ना करने की ठान ली थी। ठंडे-ठंडे झोंके जब बालों को सहलाए तब भी हमने बहाने से छुपके जमाने से बंदर का मुंह लाल होता है ना? हां। डर के मारे निकला। ये लो। फिल्म शर्मा की याददाश्त खोई हुई मासूम लड़की का किरदार हो या फिर फिल्म मिस्टर इंडिया में हवाहवाई गाकर अपने चुलबुलेपन से दर्शकों को सिनेमा के जादू का एहसास करवाने की बात। आई कहती है मुझको हवा। श्रीदेवी ने सिल्वर स्क्रीन पर निभाए अपने हर किरदार से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। क्या नाम है इसका? हाय प्रसाद। क्या बोला? हाय प्रसाद। बहुत अच्छा नाम है। श्रीदेवी का नाम एक ऐसी अभिनेत्री के रूप में लिया जाता है जिन्होंने अपने दिलकस अदाओं और दमदार अभिनय से 80 और 90 के दशक में दर्शकों पर अपनी छाप छोड़ी। चूड़ियां छन छन चूड़ियां छक गई। श्रीदेवी का जन्म 13 अगस्त 1963 को तमिलनाडु के एक छोटे से गांव मीनम पट्टी में हुआ। श्रीदेवी ने महज 4 साल की उम्र में एक तमिल फिल्म में अभिनय किया था। तब शायद ही किसी ने सोचा हो कि यही बाल कलाकार एक दिन हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में स्टार का दर्जा पाएगी। जब मैं उदास होती हूं तो वहां जाती हूं जहां तुम्हें ले जा रही हूं। तुम उदास होते हो तब क्या करते हो? मैं तो उदास ही नहीं होता। जब तुम कभी अकेले होगे तो उदास भी होने लगोगे।
साल 1976 तक श्रीदेवी ने कई साउथ इंडियन फिल्मों में बतौर बाल्य कलाकार काम किया। आंशाला बेबी क्लास बतौर अभिनेत्री उन्होंने अपने करियर की शुरुआत तमिल फिल्म मुंदू मोदी जी से की। श्रीदेवी ने अपने तीन दशक के लंबे करियर में लगभग 300 फिल्मों में काम किया। ये जो गा रही है इसका मतलब यह है मोर जब आधी रात को बोलता है तो मेरे दिल में कटार सी लगती है। इनमें से 63 हिंदी, 62 तेलुगु, 58 तमिल और 21 मलयालम फिल्में शामिल हैं। यानी दिल दिया। खुदा खुदा श्रीदेवी ने अपनी शादी के लगभग 15 साल के बाद गौरी सिंधे के निर्देशन में बनी फिल्म इंग्लिश विंग्लिश के साथ कमबैक किया। माजी ला ला सॉरी फादर माय इंग्लिश नॉट अगर आपको कोई प्रॉब्लम नहीं हो तो हम हिंदी में बात कर सकते हैं प्लीज ऑफ कोर्स मिस गुड बोले पर मेरा हिंदी उतना चलेगा श्रीदेवी को भारत सरकार ने कला के क्षेत्र में दिए गए उनके योगदान को देखते हुए पद्मश्री से भी सम्मानित किया है। श्रीमती श्रीदेवी कपूर सिनेमा इसके अलावा उन्हें चालबाज और लम्हे के लिए बेस्ट अभिनेत्री का फिल्म फेयर पुरस्कार भी दिया गया था। फॉर द बेस्ट एक्ट्रेस ब्यूटीफुल एंड द ब्राइटेस्ट श्रीदेवी। हिंदी फिल्मों में बतौर अभिनेत्री श्रीदेवी ने अपने सीने करियर की शुरुआत साल 1979 में आई फिल्म सोलवा सावन से की। कल मैं शहर जा रही हूं। टीचर्स ट्रेनिंग के लिए अप्लाई किया था। तो बुलावा आ गया है। तो तुम कल इस वक्त ट्रेन में बैठी जा रही होंगी। इस फिल्म को दर्शकों ने नकार दिया। श्रीदेवी वापस दक्षिण भारतीय फिल्मों की ओर लौट गई। साल 1983 में श्रीदेवी ने एक बार फिर फिल्म हिम्मतवाला के जरिए बॉलीवुड में कदम रखा और फिर यहीं की होकर रह गई। में सपना सपना में सजना सजना पे दिल आ गया। फिल्म की सफलता के बाद बतौर अभिनेत्री वो हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने में कामयाब रही। इस फिल्म में उनके अपोजिट बॉलीवुड के जंपिंग जैक यानी कि जितेंद्र मुख्य भूमिका में थे। ये क्या बदतमीजी है? बदतमीजी की बच्ची एक बेजुबान को जानवर की तरह मार खिलवा दी। एक गरीब लड़की की सालगिरह की खुशियों को बर्बाद कर दिया। और खुद यार इस कार्टून के साथ हंसी। साल 1986 में रिलीज फिल्म नगीना श्रीदेवी के सीने कैरियर की महत्वपूर्ण फिल्म साबित हुई। इस फिल्म में श्रीदेवी ने इच्छाधारी नागिन का किरदार निभाया।
इस फिल्म का गीत मैं तेरी दुश्मन दुश्मन तू मेरा में श्रीदेवी ने अपनी बेहतरीन डांसिंग स्किल्स का भी परिचय दिया। मैं तेरी दुश्मन दुश्मन तू मेरा मैं नाग खास बात यह है कि इसके बाद भी नागनागिन जैसी फेंटसी पर कई फिल्में बनी गली गली तेरी याद में सजना लेकिन किसी को भी नगीना जैसी सफलता हासिल नहीं हो सकी साल 1987 में आई फिल्म मिस्टर इंडिया थी तुमसे जो दिल की बात कहता हूं मिस्टर इंडिया श्रीदेवी की सबसे कामयाब फिल्म साबित हुई। अल्लाह झूठे हैं तेरे बच्चे बच्चे तेरे बच्चे बच्चे तेरे बच्चे क्यों सोचती हो इनको भला है दिल के बड़े सच्चे बच्चे मेरे बच्चे साल 1989 में श्रीदेवी के सीने करियर की एक और महत्वपूर्ण फिल्म चालबाज रही है किसी की इस फिल्म में श्रीदेवी ने दो जुड़वा बहनों की भूमिका अदा फेंक दी थी। ये क्या है? जी खाना है जी। कहां से लाया जी? दुकान से नहीं मैंने खुद बनाया है। मैंने सोचा आपको भूख लगी होगी। अच्छा है जी। हां, ठीक है। ठीक है। बॉलीवुड में यूं तो हमेशा ही एक्टर को एक्ट्रेस से ज्यादा फीस मिलती है। लेकिन 80 और 90 के दशक में प्रोड्यूसर, डायरेक्टर श्रीदेवी को फिल्में हिट कराने का सबसे बड़ा फार्मूला मानते थे। यही वजह है कि उस दौर में श्रीदेवी ऐसी एक्ट्रेस थी जिन्हें सबसे पहले बतौर फीस ₹1 करोड़ मिले थे। आज भले ही बॉलीवुड में सलमान का नाम चलता हो। मेरी मैंने कोई कभी देखा। सलमान के साथ चंद्रमुखी और चांद का टुकड़ा जैसी फिल्मों में काम किया। मैंने देखे लाखों मुखड़े ना देख है तेरा इंतजार छा रहा है प्यार का नशा दिल चुरा के ना जा दिल तू ना जा मेरे बादशाह एक के लिए हाथ मेरा चूड़ियां बॉलीवुड की पहली फेमस सुपरस्टार श्रीदेवी का करियर जिस मुकाम पर रहा है,
उनकी पर्सनल लाइफ के चर्चे भी उतने ही आम रहे हैं। श्रीदेवी को चाहने वालों की कोई कमी नहीं थी। उनके दीवाने बॉलीवुड में भी थे और टॉलीवुड यानी कि साउथ की फिल्म इंडस्ट्री में भी थे। सुरमई अंखियों में ना नमूना एक सपना श्रीदेवी ने बहुत से फिल्म स्टार्स के साथ काम किया। कुछ फिल्म स्टार्स तो ऐसे भी रहे जिनके साथ श्रीदेवी ने एक दो नहीं बल्कि कई फिल्में की हैं। नहीं कटते ये दिन ये रात कहनी थी। कभी मैं कहूं कभी अरे नैनों में सपना सपनों में सजनी सजन के गोरी तेरे अंग अंग में रूप रंग के ऐसे ही एक फिल्म स्टार हैं जो श्रीदेवी से उम्र में थोड़े बड़े थे लेकिन इनके साथ श्रीदेवी की जोड़ी को खूब पसंद किया जाता था। इनका नाम है रजनीकांत जिन्हें अब लोग फिल्मी दुनिया का थलाइवा भी कहते हैं। क्या रे सेटिंग किया है? वेंगई का बेटा अकेला खड़ा है। हिम्मत है तो सब एक साथ आओ।
श्रीदेवी और रजनीकांत ने एक साथ करीब 19 फिल्मों में काम किया था। अरे रातों का भूत है। बातों से नहीं मानेगा। किया था। श्रीदेवी जब महज 13 साल की ही थी तभी वह रजनीकांत की मां का किरदार अदा कर चुकी थी। मुंदू मुदीचू में रजनीकांत श्रीदेवी से उम्र में 13 साल बड़े थे। फिर भी उन्हें श्रीदेवी से प्यार हो गया था। उम्र का फासला ज्यादा होने की वजह से कई बार रजनीकांत उनके लिए बहुत प्रोटेक्टिव भी हो जाते थे। दोनों में दोस्ती भी बहुत अच्छी हो चुकी थी। जिसे रजनीकांत जल्द से जल्द शादी में बदलना चाहते थे। रजनीकांत के साथी के बालचंद्र के अनुसार जब श्रीदेवी 16 साल की ही थी तभी रजनीकांत ने उनसे शादी का फैसला कर लिया था। वो इसके लिए उनकी मां से बात करने को भी तैयार थे। इसके लिए उन्होंने श्रीदेवी के घर होने वाले गृह प्रवेश का मौका चुना था। रजनीकांत और के बालचंद गृह प्रवेश के मौके पर श्रीदेवी के घर भी गए। लेकिन उसी समय बिजली गुल हो गई। इसे रजनीकांत ने अपशकुन माना और फिर बिना बात किए ही वापस लौट आए। श्रीदेवी के प्रति अपने अधूरे प्यार के बावजूद रजनीकांत ने उनके साथ एक मजबूत दोस्ती बनाए रखी।