तेंदुआ को बिल्ली समझकर पाल रहे थे। अजीबोगरीब है मामला। हमारे देश में भी जो है ना छत्तीसगढ़ के बस्तर से बहुत रोचक खबर आई है। एक तरफ वन विभाग और गांव वालों की मेहनत थी तो दूसरी तरफ बेजुबान जानवर की ममता और इंतजार। यकीन मानिए एक जंगली [संगीत] जानवर से जुड़ी ये कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है। आखिर किस तरह एक तेंदुए का बच्चा इंसानों के बीच पहुंच गया और कैसे उसे अपनी मां से मिलाया गया इसकी पूरी कहानी आपको विस्तार से बताऊंगा।
देखिए। चित्रकूट रेंज की पहाड़ी में तेंदुए का छोटा शावक भटक रहा था। इसी दौरान दो युवक वहां घूमने [संगीत] फिरने पहुंचे और उनकी नजर उस श्रावक पर पड़ी। लेकिन रात के अंधेरे में दोनों ने इसे बिल्ली का बच्चा समझ लिया क्योंकि इसके शरीर पर बिल्ली जैसी [संगीत] धारियां और धब्बे थे। साथ में बिल्ली के बच्चे जैसा ही गोलमटोल और प्यारा था। इसीलिए दोनों युवक इस बच्चे को उठाकर [संगीत] अपने गांव ले आए। इन युवकों ने श्रावक को खिलाया पिलाया और चटाई बिछाकर बढ़िया सुला दिया। तस्वीरों में देखिए कैसे तेंदुए का बच्चा इंसानों के घर में चैन की नींद सो रहा। हमारे सहयोगी तामेश्वर सिन्हा ने गांव में जाकर दोनों लड़कों से बातचीत की है।
पहले तामेश्वर की रिपोर्ट फिर पूरी कहानी देखिए। ये दोनों युवक ही घूमने गए थे स्टार घाट। तो दोनों युवक को लगा कि यह बिल्ली है। इसलिए यह उठा के अपने घर ले आए पालिंग करीब। बिल्ली का बच्चा लगा। हां। तो लाए घर में आए। अच्छा दिख रहा था तो पालेंगे बोल के। हां मैं ही पकड़ा। क्यों म्यू कर रहा था? नहीं कर रहा था लेकिन ऐसे लगा। प्यारा दिख रहा था। पालेंगे बोल के। पहले तो ये लोग फोटो खींचे थी। फोटो के माध्यम में वायरल हो गया। तो मैं मेरे को फोन आया वो विभाग से तो मैं एक बार पता किया वहां पे। तो बाकी मैं लोग लाए थे इसमें। एक तरफ तो गांव वाले बहुत खुश थे और श्रावक को पालना चाहते थे। लेकिन वन विभाग को जैसे ही इसकी खबर मिली तो अधिकारी हैरान रह गए।
तुरंत [संगीत] मौके पर टीम भेजी गई। पूरी जानकारी जुटाई गई और संयुक्त टीम बनाकर रेस्क्यू का प्लान तैयार किया गया। फिर दोनों युवकों के निशानानदेही पर रात भर अभियान चलाया गया और जैसे ही मादा तेंदुआ का लोकेशन मिला वैसे ही श्रावक को ठीक उसी जगह पर छोड़ा गया जहां से उसे उठाया गया था। लेकिन यह ऑपरेशन इतना भी आसान नहीं था। ऐसा इसलिए कह रहा हूं क्योंकि पहली बार मैं मादा तेंदुआ अपने बच्चे तक नहीं पहुंच पाई। इसी दौरान पता चला कि सिर्फ एक बच्चा नहीं है बल्कि तेंदुए के दो श्रावक हैं। ऐसे में गांव वालों की मदद से संयुक्त टीम ने दूसरे बच्चे को खोजने की मुहिम शुरू की और जल्द ही दूसरा शावक भी मिल गया। जिसके बाद दोनों को सुरक्षित जगह पर रखा गया। फिर निगरानी के लिए वहां कैमरा लगाया गया और अंत में ऑपरेशन सफल हुआ। मादा तेंदुआ सुरक्षित अपने श्रावकों के पास पहुंच गई और ममता के इस मिलन का वीडियो भी [संगीत] कैमरे में कैद हो गया जिसमें मादा तेंदुआ अपने दोनों बच्चों को दुलार करते नजर आई। क्या कह रहे हैं वन विभाग के अधिकारी सुनिए।
दिल्ली के बच्चा समझ के हम लोग उठा के लेके आ गए। सटीक पॉइंट हमको मिला कि हां यहीं से उठाया गया था। रात में लगभग 4:00 बजे उधर रिलीज़ किया गया। अगले दिन हम लोग अह पूरी टीम अह वापस से इस अह जगह पे गए। हम लोगों ने वहां पे जाके देखा तो श्रावक वहीं पे था। हम लोगों ने यही डिसाइड किया कि एक ट्राई और करते हैं। इसके दूसरे श्रावक को ढूंढते हैं। दूसरे श्रावक की तलाश चालू की। तो लगभग हमको कुछ समय बाद वो दूसरा श्रावक मिल गया। उसी के पास हमने इसको रिलीज किया। हम लोगों ने ट्रैप कैमरा वगैरह की वीडियोस निकाली तो उसमें दिखा कि उसने दोनों बच्चों को दूध पिलाते हुए भी मिली। अच्छा काम किया है डीएफओ साहब आपने। कुल मिलाकर एक बच्चा अपनी मां से मिल गया और किसी को कोई खतरा [संगीत] नहीं हुआ। इस सफल ऑपरेशन के लिए वन विभाग की टीम को बहुत बधाई। साथ में गांव वालों को भी उनके सहयोग के लिए बधाई। लेकिन तेंदुआ को गांव में मत लाइए भाई। वो भी बिल्ली समझ के।