सोनम को देख के उसको और बढ़ावा मिला है। जैसे राजा को में फेंका गया था। उसी तरह से इस लड़की ने भी मतलब है ना उस लड़के को में फेंका है। और जब तक ये लड़की उनको नहीं मिलेगी जब तक ये लड़की सुधरने वाली नहीं है। सोनम को भी दी जाए, मुस्कान को भी दी जाए, वो धार वाली लड़की को भी दी जाए। मतलब और है ना यह सिया को भी दी जाए। क्योंकि इनको फांसी देना बहुत जरूरी है क्योंकि ऐसे में देश सुधरने वाला नहीं है क्योंकि बच्चे बहुत डर रहे हैं शादी से किस कारण से डर रहे इस ऐसे तरह की लड़की मतलब हमको मिल गई तो ये कह सकते हैं कि ये सोनम की पूरी कहानी उसने पढ़ी होगी देखी होगी उसके बाद ही कदम उठाया हां ये सोनम को देख के ही करा होगा क्योंकि सोनम जेल से बाहर घूम रही है आज क्योंकि सोनम 11 महीना में से बाहर कैसे आ सकी सोनम की सुनवाई अभी तक क्यों नहीं हो रही सोनम को जेल में क्यों नहीं डाला जा रहा है? जिस तरह से सोनम साल भर में छूट गई उसको भी ऐसा लगा होगा कि हम भी छूट जाएंगे। सबूत नहीं मिल पाएंगे। पहले तो उसने यही सोचा है कि सोनम से और बेस्ट तरीके आजमाऊं मैं पकड़ाने वाली नहीं हूं। मतलब ऊपर बैठा है भगवान। सब देखता है क्या कि किसी की मां का बेटा तो क्या तुम आजाद घूम सकती हो क्या?
मतलब पकड़ाओगी तो सर ही मगर है ना पकड़ाने से कुछ नहीं होता। जेल जाने से कुछ नहीं होता। जब तक उनको नहीं क्योंकि हमारे बेटे मारे गए हैं। हम मां का दर्द हम जानते हैं। उस मां पे क्या बीत रही वो मैं जानती हूं क्योंकि मैं इस बस से गुजर चुकी हूं। आज मेरे को इतनी तकलीफ होती है तो उस मां को कितनी तकलीफ हो रही होगी। जब तक हमारे बच्चे उनको मतलब सजा नहीं मिलेगी ना तो ये कड़ी से कड़ी सजा दे रहे हैं ना पे चढ़ा रहे हैं। तो मतलब हम मां उनको कैसा न्याय मिलेगा? हमको अभी तक न्याय नहीं मिला। अच्छा ये जो लड़की है सिया पूना वाली उसके माता-पिता भी कह रहे हैं कि सिया को ने अगर की है तो उसको सख्त सजा मिले।
हां तो उसके माता-पिता कह रहे हैं तो मतलब हो सकता है उसके माता-पिता को नहीं मालूम होगा। इसीलिए कह रहे हैं या तो उनको मालूम होगा कि सिया गलत है तो उसको दी जाए और उसके माता-पिता ने भी सही फैसला लिया है तो उसको फांसी दी जाए। इसी तरह सोनम का परिवार भी कह रहा था कि अगर सोनम कसूरवार है तो उसको सख्त सजा मिले लेकिन बाद में उसकी जमानत करवा दी।
हां देखो उसी समय मतलब दे दिया दे देना चाहिए मतलब मेरा कहने का मतलब यही है इस सिया को भी अभी दे दो सोनम को वापस में डालो क्योंकि सोनम बाहर है तो मतलब है ना और आजादी मिल रही है दूसरी लड़कियों को आजादी मिल रही है तो मेरा कहने का मतलब यही है कि इनको भी दी जाए मतलब सो सिया जो है उसको छोटी सोनम कहा जा रहा है तो सिया को छोटी सोनम इसलिए कहा जा रहा है कि सिया की चाल ढाल पूरी सोनम से मिल रही है।
सिया जब जेल से निकल पुलिस पकड़ के ले जा रही है सिया को तो सिया है ना सोनम जैसी चल रही है और छोटू सी सिया इसलिए किया जा रहा है कि सोनम जैसे ही करा है उसने क्योंकि जैसे सोनम ने राजा को बनाई थी ऐसी इसने भी तीन-चार बार बनाई उसको मानने के लिए और इतनी मीठी मतलब बोल रही है जैसे सोनम मीठी बोलती थी इसी तरह की ये सिया ने भी मीठी बोल बोल के वो लड़के को फंसाया जैसे राजा के साथ ये सोनम रही उसी तरह से पूरा के पूरा मामला यही आ रहा है तो इसलिए इसको छोटी सिया बोले ही जाएगा। क्यों नहीं बोला जाएगा इसको?
तो यह सिया है ना सोनम जैसी है। ये परवरिश और संस्कार की कमी नजर आती है आजकल की लड़कियों में। देखो परवरिश और संस्कार की कमी तो इसलिए आती है कि जो मां मतलब उनको संस्कार दे रही है तो मां को थोड़ा सोचना चाहिए कि बेटा हम तुम्हारी शादी यहां तय कर रहे हैं तो अपन को उसको निभाना है उसको तोड़ना नहीं है तो यह बातें उनकी मां क्यों नहीं बता रही उनको को