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सोनम वांगचुक ने सुबह में ये क्या एलान कर दिया?मचा बवाल!

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हम इस समय जंतरमंतर के पास खड़े हैं। आज 20 जुलाई है। सुबह-सुबह 6:00 बजे के आसपास सोनम वांगचुक पर्यावरणवि और साइंटिस्ट और एजुकेशनिस्ट जो इस समय सदर जंग अस्पताल में भर्ती हैं।

उन्होंने 23 दिनों से खाना नहीं खाया है और आज 20 जुलाई के दिन उन्होंने एक नया बयान जारी किया है। उन्होंने कहा है कि तीन शर्तें हैं। अगर वह पूरी हो गई तो मैं आज के दिन अपना अनशन तोड़ सकता हूं। आई रिपीट सोनम वांगचुक ने कहा है कि वो अपना अनशन आज के दिन तोड़ सकते हैं। लेकिन उसके लिए यह इन तीन शर्तों में से कोई एक शर्त पूरी हो जानी चाहिए। हम आपको बता देते हैं सोनम वाचुक ने शर्तें क्या रखी हैं।

यह रिटन बयान है। उनके हाथ से लिखा हुआ। आप अपनी स्क्रीन पे देख सकते हैं। उन्होंने कहा है पहली शर्त अगर सरकार ये जिम्मेदारी लेती है कि जो एजुकेशन सिस्टम में हाल फिलहाल की जो असफलताएं हैं सरकार उसकी अगर अकाउंटेबिलिटी लेती है। उसकी जिम्मेदारी लेती है जिसमें पेपर लीक वगैरह भी शामिल हैं।

तो या तो फिर दूसरी शर्त क्या है वो? इट इज द लीडरशिप ऑफ सीजेपी रीच द इफ द लीडरशिप ऑफ सीजेपी रीचेस द डोर स्टेप ऑफ द पार्लियामेंट वेयर ऑनरेबल एमपीज एंड लीडर्स ऑफ द वेरियस पार्टीज असोर अस दैट दे विल टेक अप द इशू इन द पार्लियामेंट यानी दूसरी शर्त ये है कि सीजेपी का जो आज मार्च है संसद भवन की ओर जाने वाला अगर वहां पर वो पहुंच जाते हैं वहां पे दूसरे सांसद और नेताओं उनसे मुलाकात कर लेते हैं सीजेपी के लोगों से और यह भरोसा दिलाते हैं कि हम इस मुद्दे को उठाएंगे संसद भवन में तो भी मैं अपना अनशन तोड़ सकता हूं। तीसरा इफ माय हेल्थ एंड अदर फैक्टर्स डू नॉट परमिट दिस देन द ऑनरेबल एमपीज एंड लीडर्स ऑफ डिफरेंट पार्टीज विजिट दिस हॉस्पिटल एंड गिव द अबव एश्योरेंसेस।

यानी तीसरी शर्त यह है कि अगर मेरी तबीयत साथ नहीं देती है और दूसरे फैक्टर्स भी इसमें शामिल होते हैं तो उस दिशा में दूसरे जो अन्य एमपीज हैं वो अस्पताल आए। नेता नेता वगैरह अस्पताल आए मुझसे मिले और मुझे यह भरोसा दिलाएं कि वह इस मुद्दे को संसद भवन में उठाएंगे। यानी इन तीन शर्तों पे सोनम वांगचुक अपना आमरण अनशन खत्म कर सकते हैं आज के दिन।

उन्होंने नीचे लिखा है सोनम वांगचुक 19 जुलाई यानी कल रात का मैसेज है। फ्रॉम द इललीगल डिटेंशन एट सफदरजंग हॉस्पिटल वेयर माय फ्रीडम ऑफ मूवमेंट स्पीच एंड ऑल कम्युनिकेशन आर रिस्ट्रिक्टेड।आप यह स्क्रीन पर भी देख सकते हैं।

लेकिन मैं आपको एडिट में के समय हमारे साथी शुभम से आग्रह करूंगा कि एडिट के समय इसको स्क्रीन पर भी दिखा दें। ध्यान रहे कि इन तीन शर्तों में वो शर्त शामिल नहीं है जिस पर सोनम वांगचुक ने अपना आमरण अनशन शुरू किया था। वो शर्त थी कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होना चाहिए। लेकिन इन तीन शर्तों में कहीं भी वो शर्त मेंशन नहीं है।

वो इस शर्त पे अपना अनशन खत्म करने को एग्री कर गए हैं कि उनके मैटर को नीट के मुद्दे को या एजुकेशन सिस्टम के मुद्दे को या तो सरकार मान ले कि हमारी गलती है या इस पे संसद भवन में बात हो जाए। आई रिपीट धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की बात अब सोनम मांगचुक की ओर से नहीं की जा रही है।

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