Cli

केतन केस: ढाई महीने बाद पुलिस को सिया – चेतन के खिलाफ मिला बड़ा सबूत, जानकार चौंक जाएंगे।

Uncategorized

ढाई महीने पहले वाली वही सिया जो लगातार मीडिया में सुर्खियों में थी। वही केतन जो सिया के गया वही चेतन जिससे सिया प्यार करती थी और जिससे शादी करना चाहती थी। 18 जून को जब पुणे के हुई तब तक पुणे में हर एक को यही मालूम था कि ये एक है।

केतन के घर वालों को यहां तक कि सिया के घर वालों को केतन के रिश्तेदारों को सिया के रिश्तेदारों को सिर्फ तीन लोग ऐसे थे जिन्हें सच्चाई मालूम थी। इनमें से दो लोग तो ऑलरेडी पुलिस की कस्टडी में और इस वक्त पुणे की अलदा जेल में बंद है।

यानी कि सिया और उसका दोस्त या प्रेमी कहे चेतन। तीसरा शख्स कौन था? उस तीसरे शख्स तक पुणे पुलिस पहुंची भी। उसी दौरान जून में ही तफ्तीश के दौरान जब सिया और चेतन पुलिस की में थे। वो तीसरा 22 साल का एक लड़का था। चेतन के स्कूल टाइम का फ्रेंड। पुलिस उस वक्त उसके पास गई क्योंकि जब पूछताछ की पुलिस ने सिया से और चेतन से तो उन्हें कुछ कुलू मिला। उन्होंने हरीश को बुलाया।

उससे लंबी पूछताछ हुई। कई बार पूछताछ हुई लेकिन कोई सबूत नहीं था। इसलिए पुलिस ने हरीश को जाने दिया सॉरी रितेश को। क्योंकि रितेश 18 जून को उस किले पर भी मौजूद नहीं था। पुलिस को लगा कि करेंगे जमानत मिल जाएगी।

कल को छूट जाएगा और अगर रितेश छूट गया तो फिर उसका असर सिया और चेतन के केस पर भी पड़ेगा। लेकिन पुलिस कोशिश में लगी रही। 18 जून को किसी को पता नहीं। 19 जून को किसी को पता नहीं। 20, 21, 22 तक पता नहीं।

23 जून को सिया के फादर इन लॉ ने पहली बार पुलिस में कंप्लेंट की और 23 जून को चेतन और सिया की होती है। और तब पता चलता है ये नहीं पत्। लेकिन उससे पहले 19 जून को दो लोगों के बीच में मैसेज पर बातचीत हो रही थी। एक था चेतन और दूसरा रितेश।

दोनों दोस्त स्कूल के टाइम थे। जब शुरू के चार दिन कुछ नहीं हुए बल्कि 18 जून को भी कुछ नहीं हुआ। तो 19 जून को रितेश ने पूछा चेतन से कि केतन की कैसे हुई? क्या सब कुछ के हिसाब से हुआ? और दोनों WhatsApp पर मैसेज में बात कर रहे हैं। कॉल नहीं कर रहे हैं।

उधर से चेतन ने उसको मैसेज पर जवाब दिया कि किले पर गए वैसे ही किया जैसा हमने किया था और फिर वहां से केतन को दे दिया गया और अभी तक सब यही मान रहे हैं। है और यही माने तो अच्छा है। ये सारी चैट थी। पूछताछ में तो ये सच्चाई निकल कर आई लेकिन सबूत था नहीं।

अब पुणे पुलिस ने चेतन और सिया दोनों के मोबाइल अपने कब्जे में लिए। फिर देखा कि उसमें से बहुत सारे कॉल या बहुत सारे चैट डिलीटेड डिलीट कर दिए गए तो पुलिस ने उन्हें में भेजा ये पता करने के लिए कि क्या डिलीटेड हो सकते हैं वापस हासिल किए जा सकते हैं और लैब में भेज दिया गया

धीरे-धीरे वक्त बीता 4 सितंबर यानी अभी लास्ट फ्राइडे को से रिपोर्ट आई चेतन के मोबाइल के कॉल और डिटेल और मैसेजेस की कामयाब रही उसके डिलीटेड मैसेज को वापस हासिल करने में और वो मैसेजेस जब पुणे पुलिस ने पढ़ना शुरू किया तो जिस सबूत की तलाश दो ढाई महीने पहले से कर रहे थे वो उनके हाथ लग गया।

उनमें वह मैसेज भी शामिल था जो चेतन ने रितेश के साथ चैट पर किया और उस मैसेज की लाइनें अपने आप में एक सबूत थी कि चेतन ने सिया के साथ मिलकर यह किया और इस साजिश में रितेश शामिल था क्योंकि उस मैसेज में कब कितने बजे कहां क्या हुआ 18 जून को यह सारी जानकारी चेतन रितेश को दे रहा था क्योंकि रितेश उससे पूछ रहा था कि कैसे हुआ किसी किसी को शक तो नहीं हुआ।

तुम लोग ऊपर गए। किसी ने देखा तो नहीं। फिर वहां पर जाकर क्या हुआ? केतन को कैसे दिया? ये सारी बातें ये चैट जो डिलीट हो गई। अब जब ये वापस रिट्रीव हो गई सारी चैट तो पुलिस के पास एक पुख्ता सबूत था। फ्राइडे यानी 4 सितंबर को से ये मिला और उसी के फौरन बाद पुलिस ने आखिरकार रितेश को जाकर कर लिया। गिरफ्तार करने के बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया।

कोर्ट ने 12 सितंबर तक उसे पुलिस में भेज दिया। यानी केतन केस और उसकी साजिश में शामिल होने के इल्जाम में कुल तीन लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। सिया, चेतन और अब रितेश। सिया और चेतन पहले से ही अलवदा जेल में है पुणे की।

अभी रितेश पुलिस हिरासत में रहेगा 12 तक। और इसके बाद वह भी न्यायिक हिरासत में भेज दिया जाएगा शायद उस जेल में। अब सवाल यह है कि ढाई महीने लगभग हो चुके हैं। तीन महीने यानी 90 दिन के अंदर पुणे पुलिस को दाखिल करनी यानी आरोप पत्र दाखिल करना है। तो ढाई महीने बाद यह क्यों? तो मैंने आपको वही बताया कि शुरुआत में पुलिस को जानकारी थी। सबूत नहीं था। और अब यह चैट एक सबूत है। इस चैट से पुणे पुलिस को एक साथ कई फायदे हुए। क्योंकि इस केस में कोई चश्मदीद नहीं है।

पूरा केस यानी परिस्थिति जन्य सबूतों पर खड़ा है। ऐसे में यह उम्मीद थी कि दिया, हुआ, फिसल गया, शॉक में गिरा। बहुत सारे सवाल उठ सकते थे कोर्ट में लेकिन अब पुलिस के सामने है कि चेतन और सिया ने जानबूझकर केतन को और अपने एक तीसरे हमराज से उसके बारे में उन्होंने सारी बातें शेयर की और वो है रितेश।

यह काफी काम आएगा कोर्ट में। और जो हमारे सोर्सेस हैं उनका यह भी कहना है कि शायद पुणे पुलिस इस बात पर गौर कर रही है कि क्यों ना रितेश को सरकारी गवाह बना लिया जाए। वादा माफ गवाह। उसकी दो तीन वजह है। पहली में शामिल था।

लेकिन वह 18 जून को किले चेतन के साथ नहीं गया। लेकिन उसे सब कुछ पता है। अब इस केस में कोई विटनेस है नहीं। लेकिन रितेश एक ऐसा विटनेस है जो केतन के से पहले और हो जाने के बाद की सारी जानकारी रखता था और चेतन उसे दे रहा था। यानी वह एक बहुत ही इंपॉर्टेंट विटनेस है।

अगर वह सरकारी गवाह बनने के लिए तैयार हो गया और पूरे पुलिस ने उसे बनाने के मन अपना बना लिया तो फिर यह केस सिर्फ में नहीं होगा। इसमें एक विटनेस होगा। जो बताएगा कि पूरी और कैसे हो रही थी।

अब यहां यह सवाल है कि अगर साजिश में शामिल ही था रितेश तो फिर 18 जून को मारने के लिए केतन को उन लोगों के साथ क्यों नहीं गया? तो जो पुणे पुलिस के उन्होंने बताया कि जो शुरुआत हुई साजिश की अब क्योंकि उससे पूछताछ हुई है तो शुरुआत में जब सगाई हुई तब तक सब ठीक था। सगाई के बाद यह हुआ था कि अभी काफी वक्त है तब तक कोई रास्ता निकाल लेंगे। ये सिया का भी मानना था और ये चेतन का भी मानना था। औरकि चेतन का बहुत ही करीबी दोस्त था रितेश तो वो भी अक्सर अक्सर इन लोगों की मीटिंग में शामिल होता।

कभी कैफे में कभी कहीं और ये लोग डिस्कस करते कि ये शादी रुकनी चाहिए क्योंकि हम दोनों को करनी है और वो भी अपने आईडिया देता रहता लेकिन सगाई के फौरन बाद यकीन नहीं था सिया को कि इतनी जल्दी शादी की तारीख का ऐलान हो जाएगा और वो शादी की तारीख का ऐलान भी हो गया शायद नवंबर में ही करना था।

तो जैसे ही शादी की तारीख का ऐलान हुआ तो सिया और चेतन दोनों परेशान हो गए कि अब तो वक्त कम है शादी का ऐलान हो चुका तारीख निकल चुकी है। कार्ड अब बटने शुरू होंगे। परिवार का क्या होगा? ऐसे वक्त में शादी टूटे। तो उनका यह था कि नवंबर से बहुत पहले ही यह काम खत्म करना है।

तो इन तीनों ने मिलकर उसमें रितेश भी एक अहम में शामिल था। अलग-अलग प्लान बनाना शुरू किया। इन्होंने बहुत सारी फिल्में भी देखी, नेट पर भी देखा, ढूंढा कि ऐसी कोई जिस पर किसी को शक ना हो और लगे।

शर्त ये था लगे। तो उन्हें कुछ समझ में नहीं आया। अच्छा तीनों फर्स्ट टाइमर में डर भी रहे हैं। तब एक और बनी थी और वो साजिश ये थी कि अगर केतन को कोई ऐसी चोट लग जाए जिससे वो शादी तक फिट ना हो पाए तो शादी की तारीख आगे बढ़ सकती है या टल सकती है।

तो ये हुआ कि कैसी चोट। तो फिर ये तय हुआ कि अगर उसके हाथ पैर तुड़वा दिए जाए हो। हाथ और बाकी उसमें काफी वक्त लगेगा। फिर उससे पहले बहुत सारे शादी के फंक्शन होते हैं। वह सारे फंक्शन भी वो अटेंड नहीं कर पाएगा। तो घर वालों को मजबूरन उसकी इस घायल हालत को देखते हुए शादी की तारीख को आगे बढ़ानी पड़ेगी।

तो ये तीनों तैयार हो गए थे कि केतन के देते हैं। क्योंकि करने में तब भी ये डर रहे थे कि कहीं पकड़े ना जाए। दिल में चोट तो होता ही है। तो यह हुआ कि देते हैं और उसके बाद शादी अपने आप तारीख टल जाएगी।

लेकिन इसके बाद मुसीबत और परेशानी ये आई इन तीनों के साथ कि हाथ पैर तोड़ेगा कौन? अब चेतन या चेतन का दोस्त रितेश ये काम कर नहीं सकते थे क्योंकि केतन उन्हें जानता था। चेतन को पहले से भी और तो आप एक मतलब वो तो देख रहा है। तो वह तो गवाही दे देगा कि किसने , किसने । अब यहां पर आया कि किसी को दे दिया जाए का तो यह आया कि उसमें भी अगर भेद खुल गया तो पता चल जाएगा कि किसने दी है। तो इन्होंने तमाम तरकीब लगाई।

लेकिन लगा कि नहीं इसमें फंसने का ज्यादा खतरा है। इसलिए इन लोगों ने फिर ये आईडिया ड्रॉप कर दिया। फिर यह हुआ क्या? तो आखिर में फिर वही तय हुआ कि एक ऐसी जो लगे और इत्तेफाक से पहले आपको कहानी में बता ही चुका हूं कि किले में कई बार गया था केतन। एक बार सिया को ले गया बदकिस्मती से और सिया ने वो जगह देख ली। वहीं उसे आईडिया मिला।

उसी आईडिया पर सबसे पहले सिया ने ही चेतन और रितेश से यह डिस्कस किया कि हाथ पैर में खतरा है। लेकिन अगर कहीं ऊंचाई पहाड़ी से नीचे देकर गिरा दे तो बड़ी आसानी से कह सकते हैं कि ये है।

पैर फिसल गया या ऐसा ही कुछ। तो इसमें लोगों को शक नहीं होगा। और सिया ने कहा कि अगर मैं साथ होंगी तो ये भी शक नहीं होगा क्योंकि वो क्या कर सकती है? मंगेतर है तो कहते हैं कि तीनों इस बात पर राजी हो गए कि यह आईडिया ठीक है। फिर उसके बाद कई तारीखें आई गई। आखिरी फाइनल हुआ 18 जून जब सिया और केतन को जाना था केला। तो यही थी कि तीन लोग अलग से जाएंगे। मतलब केतन और सिया तो है ही है लेकिन सिया जानते हुए भी रहेगी केतन के साथ पर उसके साथ दो और साथी होंगे।

एक होगा चेतन और एक होगा रितेश अब जाना है सिया और चेतन को तो चेतन और रितेश पीछे पीछे फॉलो करेंगे और जब जरूरत पड़ेगी वो आगे आएंगे और फिर बाकी का काम पूरा करेंगे 17 जून को यह मीटिंग होती है फाइनल और 17 जून को यह भी मीटिंग होती है कि अब 18 जून को या 17 जून की शाम के बाद एक दूसरे को कोई कॉल नहीं करेगा।

कोई मैसेजेस नहीं करेगा ताकि अगर पुलिस को शक हो इंक्वायरी हो, जांच शुरू हो तो फोन के जरिए कोई एक दूसरे तक पहुंच ना पाए। तो उस मीटिंग के बाद 17 जून को तीनों ने आपस में फोन करना बंद किया और ना कोई मैसेज और यह था कि 18 जून को जाना है। लेकिन 18 जून की सुबह रितेश ने धोखा दे दिया। वो डर गया।

वो घबरा गया कि मैं गया और कहीं कुछ हो गया पकड़ा जाऊंगा। मर्डर है। तो फिर ऐन वक्त पर पीछे हट गया। लेकिन प्लान को सिया और चेतन ने आगे बढ़ाया। वो लोग गए और फिर उसी तरीके से उन्होंने दे दिया। अब 18 जून को जब दिया और दोपहर होते यह खबर फैल गई। सिया के रिश्तेदारों में, केतन के रिश्तेदारों में और चेतन वहां से निकल आया।

लेकिन फोन करना नहीं था उस दिन। मैसेज करना था। तीनों ने एक दूसरे से ये सौदा तय कर रखा था। तो 18 जून की रात तक यही खबर थी कि केतन का हो गया। वो उसकी हो गई। 19 जून की अब तारीख आती है। अब इधर यह है कि अभी तककि ये मामला कहीं से तो था नहीं। एक था। तो सिया के घर में भी मातम और केतन के घर में भी मातम और लोग सिया से हमदर्दी जता रहे हैं कि अभी शादी होनी थी।

अभी सगाई हुई और देखो उससे पहले ही केतन की । तो अब सिया उस सिचुएशन में थी कि रिश्तेदारों से घिरी थी। ना वो फोन कर सकती थी ना मैसेज। उधर रात होने के बाद तक सुबह जब क्लियर हो गया अगले दिन 19 तब चेतन को लगा कि अब इस केस में कुछ नहीं है।

सभी ने मान लिया ये है। तो थोड़ा सा उसमें कॉन्फिडेंस आया कि वो बच गया और इसी के बाद उसने रितेश को मैसेज किया। रितेश उधर इंतजार कर रहा है। एक की खबर उस तक भी आ गई। लेकिन कैसे हुआ? क्या हुआ? कोई कुलू तो नहीं छोड़ा, कोई सबूत तो नहीं छोड़ा। तो तब चेतन ने मैसेज किया रितेश को कि सब कुछ ठीक है। सब हो गया। फिर उसने पूछा कैसे हुआ?

तब चेतन ने 18 जून की सुबह से लेकर केतन को नीचे गिराने तक की पूरी कहानी मैसेज पर उसको बता दी। कि ऐसे-ऐसे हुआ। हम ऐसे गए, ऐसे किया। यह सब कुछ हो गया। अब यह लोग बेफिक्र थे। लेकिन तीन चार दिन बीते। उसके बाद सिया का कुछ बर्ताव ऐसा था कि घर वालों को शक हुआ।

खासतौर पर केतन की बहन को, फिर उसके फादर को और यह लोग 23 तारीख को जाकर लिखवाते हैं और 23 को जब लिखाते हैं तो पुलिस चेतन और सिया को गिरफ्तार कर लेती है। इधर जब लिखी जा रही थी तब तक चेतन को यह खबर मिल गई कि फादर और सिस्टर अब डाउट कर रहे हैं कि यह मर्डर है। उसे लगा कि कहीं पकड़े ना जाए।

तो उसने आननफानन में अपने मोबाइल के सारे मैसेजेस डिलीट कर दिए और उनमें वो मैसेज भी था जो उसने रितेश को किया था। इसके बाद पुलिस पकड़ती है फोन ले जाती है। पूछताछ में पुलिस के पास कैमरे और कई ऐसी जानकारी थी जिससे फिर रितेश के बारे में जानकारी मिली कि रितेश सिया और चेतन मिलते थे।

लेकिन शुरुआत में पूरे पुलिस को यही लगा कि ये दोनों का प्रेम संबंध था। दोनों एक दूसरे से प्यार करते थे। वो दोस्त था हो सकता है शादी कराने में मदद करवा रहा हो। तो इसी सिलसिले में रितेश से पूछताछ की गई। लेकिन क्योंकि 18 जून को रितेश की मौजूदगी कहीं और थी। उसका मोबाइल लोकेशन और विटनेस जो बता रहे थे कि ये से बहुत दूर था। तो

था नहीं इसलिए पुलिस ने उसको कहा कि छोड़ो क्योंकि कुछ सबूत तो है नहीं जिस वक्त हुआ केतन का लेकिन मोबाइल फोन था। अब सारा दारोमदार था टीम पर और टीम ने वक्त लिया क्योंकि यह 18 जून का मामला है। 23 जून को हुआ। 25 या 26 जून को मोबाइल में गया। डाटा रिट्रीव करना था। लेकिन डिलीटेड मैसेज रिट्रीव हो गए और अब मिले चार तारीख को और उसके बाद आखिरकार केतन केस में तीसरी हो गई। बेशक रितेश मौका पर मौजूद नहीं था लेकिन की में हर कदम पर शामिल था।

उसे पता था केतन के होने से पहले भी पता था कि इसका होना और केतन के के बाद भी पता था कि उसका कैसे हुआ। तो एक तो उसने पुलिस को नहीं बताया। दूसरा इस में बराबर का था, शामिल था। तो इसलिए जो भी चार्जेस जो कहते हैं पुराना जो बी में आप शामिल हो तो आप पर भी सेम वही लगेंग जो उन पर लगेंग जिन्होंने अपने हाथ से किया यानी जो चेतन और सिया पर लगेंग उन्हीं का सामना अब रितेश को भी करना पड़ेगा।

हालांकि वो कत्ल वाले दिन जहां हुआ वहां से दूर था लेकिन में शामिल था। रितेश के इस की इस और इस चैट के वापस हासिल करने के बाद पुणे पुलिस को अब एक तरह से एक उम्मीद नजर आई है कि इस केस में वो को कड़ी से कड़ी दिला पाएंगे। उसकी वजह यह है कि अब तक कोई नहीं, कोई एक तरह से विटनेस नहीं लेकिन अब विटनेस है।

करीब 80 दिन तो हो चुके होंगे। 90 दिन के अंदर दाखिल करनी है। पुणे पुलिस के जो है उनके हिसाब से दाखिल थोड़ा और पहले ही हो जाती। लेकिन अबकि रितेश की हुई है तो नए पन्ने उस में जोड़े जा रहे हैं। लेकिन 16 सितंबर से पहले पुणे पुलिस दाखिल कर देगी। 16 सितंबर से पहले आज छ यानी अगले 10 दिनों के अंदर एक बार दाखिल हो गए उसके बाद शायद फास्ट ट्रैक कोर्ट में इस मुकदमे की सुनवाई होगी।

और जैसा कि केतन के घर वालों ने महाराष्ट्र के से मिलकर फरियाद की थी कि वह चाहते हैं कि उनकी तरफ से यह केस मशहूर वकील उज्जवल निगम लड़े और खुद इसी में बैठकर उज्जवल निगम जी ने ये कहा था कि हां उन्हें यह मैसेज मिला है और वो इस केस की पैरवी करेंगे।

लेकिन चार्जशीट जब दाखिल हो जाएगी उसके बाद तो यानी के 16 सितंबर तक दाखिल होगी। दाखिल होने के बाद फिर आरोप तय होंगे तो सारी जब वो पढ़ेंगे उज्जवल निगम उसके बाद उनकी एंट्री होगी और फिर फास्ट ट्रैक कोर्ट में कितना फास्ट मुकदमा चलता है ये आने वाले वक्त में पता चलेगा लेकिन पहले तो की कहानी क्या होती है वो सामने आए और उसके बाद उज्जवल निगम साहब की एंट्री तो आने वाले वक्त में कोर्ट रूम का माहौल थोड़ा डिफरेंट और अलग होगा।

लेकिन पुणे पुलिस के लिए ऐन दाखिल करने से पहले एक बड़ी और अच्छी खबर आई कि वो डिलीटेड चैट वापस रिट्रीट किया और रितेश नाम के उस लड़के को किया। इससे केस उनका और मजबूत हो गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *