Cli

14वीं मंजिल से गिरकर भी चेहरे की हड्डी क्यों नहीं टूटी? दिशा सालियान मामले के अनसुलझे रहस्य

Uncategorized

क्या महज 6 दिनों के फासले पर माया नगरी के दो चमकते चेहरों का यूं अचानक हमेशा के लिए खामोश हो जाना सिर्फ एक इत्तेफाक था या फिर किसी सच को दफनाने की सोची समझी साजिश थी। आखिर 14वीं मंजिल की ऊंचाई से गिरने के बावजूद चेहरे की एक भी हड्डी ना टूटना और तमाम सबूत रातोंरात गायब हो जाना विज्ञान का कौन सा करिश्मा था? सुशांत सिंह राजपूत अपनी उस आखिरी रात देर रात 2:00 बजे किसे फोन करके अपनी कौन सी बेबसी बताना चाहते थे और वे अपनी आखिरी सांसों से पहले इंटरनेट पर दिशा सालियान का नाम पागलों की तरह बार-बार क्यों ढूंढ रहे थे। ऐसा क्या था जो सुपरस्टार को भीतर ही भीतर इस कदर डरा रहा था कि वे कांपते हुए कहने लगे थे कि उन्हें किसी बहुत बड़े जाल में फंसाया जा रहा है। और जिस मामले को पूरे 6 साल तक एक दुर्घटना बताकर फाइलों में रफादफा किया जा रहा था। उसी केस पर हाईकोर्ट ने पुलिस जांच के परखच्चे उड़ाते हुए सीबीआई के हाथों में फाइल थमा दी। यह वह चुभते हुए सवाल हैं जिन्होंने पिछले 6 सालों से सबकी नींद उड़ा रखी है। दोस्तों जब भी हिंदी सिनेमा के इतिहास के सबसे विवादित पन्नों को पलटा जाएगा तो साल 2020 के जून का महीने हमेशा लोगों के ज़हन में गूंजेगा। जब दो अलग-अलग अपार्टमेंट्स में एक ऐसी स्क्रिप्ट तैयार हो रही थी जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया। इस पूरी दास्तान का पहला चौंकाने वाला मोड़ 8 जून 2020 की आधी रात को मुंबई के मालाड इलाके से सामने आया। रीजन गैलेक्सी नाम की एक इमारत की 14वीं मंजिल पर उस रात एक प्राइवेट पार्टी चल रही थी। इस फ्लैट में 28 साल की दिशा सालयान अपने मंगेतर और टीवी अभिनेता रोहन राय और कुछ करीबी दोस्तों के साथ मौजूद थी। दिशा फिल्म इंडस्ट्री में कोई अनजान चेहरा नहीं थी। वे सेलिब्रिटी मैनेजमेंट और पीआर की दुनिया का एक जाना माना नाम थी जो सुशांत सिंह राजपूत के साथ-साथ भारती सिंह और वरुण शर्मा जैसे कई नामचीन सितारों के कामकाज को संभाल चुकी थी।

बिल्डिंग के बाहर लॉकडाउन का सन्नाटा था। लेकिन अचानक देर रात सन्नाटे को चीरती हुई एक आवाज आई और कुछ ही पलों में दिशा सालियान 14वीं मंजिल से नीचे जमीन पर बेजान हालत में पाई गई। चौकीदार और आसपास के लोग जब मौके पर पहुंचे तो वहां का मंजर देखकर हर कोई दंग रह गया। लेकिन असली चौंकाने वाला खेल तो इसके बाद शुरू हुआ जब पुलिस स्टेशन की टीम मौके पर पहुंची। कानून के जानकारों का मानना है कि इतनी ऊंचाई से गिरने पर तुरंत पड़ताल होनी चाहिए थी। लेकिन पुलिस ने इसे केवल एक एक्सीडेंटल डेथ मानकर कागजी कारवाई तक सीमित कर दिया। पुलिस का शुरुआती दावा था कि दिशा नशे की हालत में थी और संतुलन बिगड़ने की वजह से खिड़की से नीचे आ गिरी। शुरुआत में यह थ्योरी जितनी सीधी दिखाई दे रही थी, आगे चलकर इसमें उतने ही गहरे झोल नजर आने लगे। उस रात इमारत के कैमरों में देर रात 1:00 बजे से 2 सवा5 बजे के बीच कुछ पुलिसकर्मियों की रहस्यमई आवाजाही दर्ज हुई थी। जबकि स्टेशन डायरी में उनकी रवानगी का कोई ऑफिशियल रिकॉर्ड मौजूद नहीं था। यही नहीं, घटना स्थल का पंचनामा तुरंत तैयार करने के बजाय पूरे 9 घंटे की देरी से अगली सुबह बनाया गया। सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि 14वीं मंजिल से गिरने के बावजूद मौके पर जो फॉरेंसिक सबूत जैसे खून वगैरह मिलने चाहिए थे वे नदारद थे। बाद में जब इस पर सवाल उठे तो यह दलील दी गई कि सुबह की बारिश में सबूत धुल गए थे। पर मौसम विभाग के रिकॉर्ड बताते हैं कि उस दिन बारिश सुबह पौ:45 बजे के आसपास शुरू हुई थी। यानी घटना के लगभग 6 घंटे बाद। लेकिन मलार की इस घटना को अभी महज छ दिन ही बीते थे कि 14 जून 2020 की दोपहर ने पूरे देश को हिला कर रख दिया। बांद्रा वेस्ट के रोड पर डुप्लेक्स फ्लैट से एक ऐसी खबर आई जिस पर किसी को यकीन नहीं हुआ। 34 साल का वो चमकता हुआ सितारा जिसने एमएस धोनी, छिछोरे और काई पोचे जैसी फिल्मों से करोड़ों दिलों में अपनी खास जगह बनाई थी। अपने कमरे में बेजान हालत में पाया गया। कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था

जिसे बाद में चाबी वाले की मदद से खोला गया था। जो नौजवान हमेशा किताबों, सितारों, क्वांटम फिजिक्स और जिंदगी के बड़े फलसफों की बातें करता था जिसकी डायरियों में अपने जीवन के 50 बड़े सपनों की लिस्ट दर्ज थी, वो अचानक इस तरह अपनी जीवन लीला समाप्त कर लेगा। यह बात किसी के गले नहीं उतर रही थी। कमरे से कोई भी अंतिम नोट बरामद नहीं हुआ था। मुंबई पुलिस ने इसे पहली नजर में डिप्रेशन के चलते खुद को नुकसान पहुंचाने का मामला माना और शव को तुरंत कूपर अस्पताल भेज दिया गया। कूपर अस्पताल में उस रात जो प्रक्रिया अपनाई गई उसने संदेह की आग को और हवा दे दी। विशेषज्ञों ने सवाल उठाए कि पोस्टमार्टम का काम नियमों को दरकिनार करते हुए इतनी जल्दबाजी में क्यों निपटाया गया? अब सवाल यह उठता है कि 8 जून से 14 जून के बीच का वह छ दिन का फासला क्या वाकई एक इत्तेफाक था या फिर उन छ दिनों में पर्दे के पीछे कोई बहुत बड़ा खेल चल रहा था। सुशांत के साथ उस फ्लैट में रह रहे उनके सहयोगी सिद्धार्थ पिठानी ने बाद में जांच एजेंसियों को बताया कि दिशा की मौत की खबर सुनते ही सुशांत बुरी तरह घबरा गए थे। वे फूट-फूट कर रोए थे और तनाव की वजह से उनकी तबीयत इतनी बिगड़ गई थी कि वे अचेत हो गए थे। सुशांत बार-बार एक ही बात दोहरा रहे थे कि कुछ लोग उन्हें इस मामले में जबरन घसीटने और फंसाने की कोशिश कर रहे हैं। सुशांत का यह डर सिर्फ उनका वहम नहीं था बल्कि फॉरेंसिक जांच में जब उनके मोबाइल और लैपटॉप की सर्च हिस्ट्री खंगाली गई तो बेहद चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। उन पांच दिनों में सुशांत ने इंटरनेट पर बार-बार दिशा सालियान का नाम सर्च किया था। वे लगातार यह ट्रैक कर रहे थे कि मीडिया में दिशा के मामले को लेकर क्या बातें सामने आ रही हैं और क्या किसी साजिश के तहत उनका नाम इस केस से जोड़ा जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने Google पर डिप्रेशन और कानूनी पेचीियों के बारे में भी लगातार सर्च किया था। 13 जून की उस आखिरी रात सुशांत ने देर रात करीब 2:00 बजे दो बेहद खास फोन कॉल किए थे।

पहला फोन उनकी करीबी मित्र रिया चक्रवर्ती को गया। जो 8 जून को ही उनका फ्लैट छोड़कर अपने घर जा चुकी थी और दूसरा फोन उनके पुराने दोस्त और अभिनेता महेश शेट्टी को गया था। लेकिन बदकिस्मती से दोनों ही फोन रिसीव नहीं हुए। सुशांत उस रात किससे संपर्क साधना चाहते थे और क्या बात बताना चाहते थे यह राज आज भी हवा में तैर रहा है। सुशांत की इस अचानक विदाई ने बॉलीवुड के उस चमकीले मुखौटे को उतार फेंका जिसे दुनिया फिल्म इंडस्ट्री कहती है। बिहार के एक छोटे शहर से निकलकर अपनी मेहनत के दम पर बॉलीवुड के एलिस्टर्स में शामिल होने वाला यह नौजवान कई बड़े प्रोडक्शन हाउसेस और नेपोटिज्म सिंडिकेट की आंखों में खटकने लगा था। इंडस्ट्री के गलियारों से छनकर यह खबरें बाहर आने लगी कि कैसे एक आउटसाइडर को अलग-थलग करने के लिए बड़े-बड़े कैंप एक्टिव हो गए थे। सुशांत के खिलाफ मीडिया में ऐसा नरेटिव सेट किया जा रहा था जिनमें उन्हें अनप्रोफेशनल और मानसिक रूप से अस्थिर साबित करने की होड़ मची थी। कई बड़े प्रोजेक्ट साइन होने के बाद अचानक उनसे छीनकर स्टार किड्स की झोली में डाल दिए गए थे। इसके बाद मुंबई के थानों में वह नजारा देखने को मिला जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। संजय लीला भंसाली, आदित्य चोपड़ा की यशराज फिल्म्स के आला अधिकारी महेश भट्ट और करण जौहर जैसे फिल्मी दुनिया के कर्ताधर्ताओं को पूछताछ के लिए पुलिस स्टेशन के चक्कर काटने पड़े। जांच में यह बात सामने आई कि सुशांत को कई बड़ी फिल्मों से बाहर किया गया था। लेकिन इंडस्ट्री के तमाम बड़े सितारों ने इस पूरे घटनाक्रम पर एक रहस्यमई चुप्पी साध रखी थी। जिसने नेपोटिज्म और बॉयकॉट कल्चर के उस बदसूरत चेहरे को पूरी तरह बेनकाब कर दिया जो किसी संवेदनशील कलाकार को मानसिक रूप से तोड़ने के लिए काफी था। एक तरफ मुंबई पुलिस थी जो इस मामले को जल्द से जल्द सिर्फ एक डिप्रेशन की थ्योरी में समेटने की कोशिश कर रही थी। वहीं दूसरी तरफ पटना में बैठे सुशांत के 74 वर्षीय बुजुर्ग पिता के के सिंह थे। मुंबई पुलिस के रवैया से आहत होकर जब उनके पिता ने पटना के राजीव नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई तो पूरे देश में हलचल मच गई। उस शिकायत में रिया चक्रवर्ती और उनके करीबियों पर सुशांत को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने, गलत तरीके से गैरकानूनी नशीली दवाइयां देने और उनके बैंक खाते से करीब ₹15 करोड़ की भारी रकम की हेराफेरी करने के सीधे आरोप लगाए गए। इसके बाद पटना से जब बिहार पुलिस की एक विशेष टीम सबूत जुटाने मुंबई पहुंची तो बिहार के पुलिस अधिकारियों को ऑटो रिक्शा में भटकना पड़ा और उन्हें केस डायरी देने से साफ मना कर दिया गया। मामला तब और ज्यादा तूल पकड़ गया जब पटना से जांच की कमान संभालने पहुंचे आईपीएस अधिकारी विनय तिवारी को मुंबई एयरपोर्ट पर उतरते ही क्वारेंटाइन के नाम पर जबरन हाथ पर मोहर लगाकर एक गेस्ट हाउस में बंद कर दिया गया। इस घटना ने पूरे देश में यह संदेश दिया कि सिस्टम किसी बहुत बड़े सच को सामने आने से रोकने की पूरी कोशिश कर रहा है। आरोप यहां तक लगे कि दिशा सालियान की उस आखिरी पार्टी में कुछ ताकतवर राजनीतिक हस्तियां भी मौजूद थी। जब शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे का नाम इन चर्चाओं में उछला तो उन्होंने एक आधिकारिक बयान जारी कर इन तमाम बातों को अपनी छवि खराब करने की राजनीति करार देते हुए सिरे से खारिज कर दिया। और आखिरकार हाईकोर्ट ने पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी। सीबीआई के मैदान में उतरते ही इस केस ने एक ऐसा मोड़ लिया जिसने ग्लैमर जगत के बड़े-बड़े महलों की नींद उड़ा दी। ₹15 करोड़ की पड़ताल करने जब ईडी की टीम उतरी तो उन्होंने रिया चक्रवर्ती और उनके भाई के फोन डाटा को खंगाला। वहां से WhatsApp की कुछ ऐसी चैट सामने आई जिसने पूरे देश को हैरान कर दिया। उन चैट्स में नशीले पदार्थों के लेनदेन और पार्टियों के जिक्र पाए गए। इसके तुरंत बाद इस केस में एनसीबी की जोरदार एंट्री हुई। एनसीबी ने ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू की और रिया चक्रवर्ती तथा उनके भाई शौविक चक्रवर्ती को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया। इसके बाद मुंबई में एनसीबी के दफ्तर के बाहर हर रोज ऐसा नजारा दिखने लगा मानो पूरा बॉलीवुड कटघरे में खड़ा हो। दीपिका पादुकोण, श्रद्धा कपूर, सारा अली खान और रकुलप्रीत सिंह जैसी इंडस्ट्री की टॉप अभिनेत्रियों को तलब किया गया और घंटों तक तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। जो चेहरे विज्ञापनों और फिल्मों में चमकते थे, वे जांच एजेंसियों के सवालों के सामने असहज नजर आए। लेकिन इस पूरे ड्रामे और 24ों घंटे चलने वाले मीडिया सर्कस के बीच कई गंभीर विश्लेषकों ने यह सवाल उठाया कि क्या इस पूरे नशीले पदार्थों के एंगल को जानबूझकर इतना बड़ा तूल दिया गया ताकि सुशांत और दिशा की मौतों का मूल सवाल कहीं हाशिए पर चला जाए। लोग टीवी स्क्रीन पर चैट्स और सेलिब्रिटीज की आवाजाही देखने में उलझ गए और उधर मुख्य मामले की फाइलों पर एक बार फिर धूल जमने लगी। जनता के भारी दबाव के बीच सीबीआई ने एम्स के फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. सुधीर गुप्ता की अगुवाई में एक विशेष मेडिकल बोर्ड का गठन किया। इस बोर्ड का काम कूपर अस्पताल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, विरा जांच और बांद्रा स्थित फ्लैट के फॉरेंसिक नमूनों की दोबारा जांच करना था।

एम्स की टीम ने फ्लैट का मुआयना किया। पंखे और बिस्तर की दूरी का कंप्यूटर सिमुलेशन किया और तमाम टॉक्सिकोलॉजिकल पहलुओं को परखा। महीनों की जांच के बाद एम्स की रिपोर्ट ने किसी भी प्रकार के जहर या बाहरी साजिश के दावों को खारिज करते हुए इसे दम घुटने से हुई मौत करार दिया। इसी रिपोर्ट के आधार पर और करीब 4 साल की लंबी पड़ताल के बाद मार्च 2025 में सीबीआई ने अदालत में अपनी क्लोजर रिपोर्ट पेश कर दी जिसमें कहा गया कि सुशांत की मौत में किसी तीसरे पक्ष द्वारा किए गए आपराधिक षड्यंत्र का कोई ठोस कानूनी सबूत नहीं मिला है। हालांकि सुशांत के परिवार और उनके वकीलों ने इस क्लोजर रिपोर्ट को मानने से साफ इंकार कर दिया और अदालत में इसके खिलाफ विरोध याचिका दाखिल करने का फैसला किया। उधर दूसरी तरफ जब पूरा देश सुशांत के केस पर बहस कर रहा था तब मुंबई के एक कोने में एक पिता अपनी 28 साल की बेटी के खोने के दर्द में घुट रहा था। दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान ने शुरुआत में पुलिस के कहे अनुसार इसे एक हादसा मान लिया था। क्योंकि वे अपनी बेटी के नाम को किसी राजनीतिक विवाद में नहीं घसीटना चाहते थे। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया और पुलिसिया जांच के गहरे विरोधाभास सामने आते रहे। एक पिता की अंतरात्मा ने चैन से बैठना छोड़ दिया। सतीश सालियान ने बॉम्बे हाई कोर्ट्स में एक याचिका दायर की। इस याचिका में उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि 8 जून की उस रात उनकी बेटी के साथ उस फ्लैट में बेहद गंभीर, शारीरिक दुष्कर्म और अमानवीय अपराध किया गया था। और उसके बाद साक्ष्यों को मिटाने के लिए उसे 14वीं मंजिल से नीचे फेंक दिया गया। पिता ने दावा किया कि इस मामले में फिल्म जगत और सत्ता के बेहद ताकतवर चेहरे शामिल थे। जिन्हें बचाने के लिए सिस्टम ने 5 साल तक उन्हें अपनी ही बेटी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट तक नहीं सौंपी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने जब सतीश सालियान की इस याचिका पर सुनवाई शुरू की तो उन्होंने मुंबई पुलिस की छ साल की जांच के ऐसे परखच्चे उड़ाए जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी। अदालत ने अपने 44 पन्नों के आदेश में पुलिस की जांच में छह बड़ी कमियों को हाईलाइट किया। अदालत ने सबसे पहला सवाल यह उठाया कि अगर कोई व्यक्ति 12वीं या 14वीं मंजिल से सीधे जमीन पर गिरता है तो उसके चेहरे की एक भी हड्डी ना टूटना और केवल थोड़ी पर मामूली खरोच होना फिजिक्स के खिलाफ है। दूसरा घटना स्थल पर चश्मदीदों द्वारा भारी चोट और रक्त बहने की बात कहने के बावजूद पुलिस को वहां से खून क्यों नहीं मिला? और बारिश का जो बहाना बनाया गया वो मौसम विभाग के आंकड़ों से पूरी तरह खारिज हो गया। क्योंकि बारिश घटना के 6 घंटे बाद शुरू हुई थी। अदालत ने तीसरी कमी कपनों को लेकर उठाई। जहां पंचनामे में शव की स्थिति नग्न हालत में थी। जबकि अस्पताल की तस्वीरों में शरीर पर कपड़े साफ नजर आ रहे थे। चौथी कमी गिरने को लेकर थी। दरअसल शव बिल्डिंग से लगभग 25 फीट दूर पाया गया था। जो यह साफ संकेत देता था कि शरीर को किसी बाहरी दबाव या धक्के से फेंका गया होगा। क्योंकि सामान्य रूप से गिरने पर शव बिल्डिंग की दीवार के बेहद करीब गिरता है।

पांचवी कमी यह थी कि पुलिस ने छ साल तक बिना कोई प्राथमिकी दर्ज किए केवल एक्सीडेंटल डेथ की जांच को जानबूझकर क्यों खींचा और छठी कमी घर वालों से दस्तावेजों को छिपाना और घटना की रात सीसीटीवी में दिखे पुलिसकर्मियों का केस डायरी में कोई रिकॉर्ड ना होना था। इन तमाम झोलों को देखते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अदालत ने मुंबई पुलिस से यह केस पूरी तरह छीनकर सीबीआई को सौंप दिया। हाईकोर्ट ने सीबीआई को सख्त निर्देश दिए कि वह तुरंत मालवाणी थाने से केस डायरी और तमाम फॉरेंसिक रिकॉर्ड अपने कब्जे में ले।

पिता सतीश सालियान का बयान दर्ज करें और नए सिरे से जांच करें। अदालत ने यह भी साफ कर दिया कि प्राथमिकी दर्ज होने का मतलब यह नहीं है कि कोई पहले दिन ही दोषी हो गया। जब तक कि ठोस सबूत ना मिल जाए। इस फैसले के बाद जब पिता सतीश सालियान अदालत से बाहर निकले तो उनकी आंखों में आंसू थे। उन्होंने कहा कि अपनी बेटी को खोने के बाद उनके पास जश्न मनाने का कोई कारण नहीं है। लेकिन 6 साल के घने अंधेरे के बाद आज पहली बार इंसाफ की एक किरण दिखाई दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जहां एक तरफ सीबीआई सुशांत के मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर चुकी है, वहीं दूसरी तरफ अब उसी सीबीआई को दिशा सालियान के मामले में नए सिरे से गंभीर जांच करनी होगी। यह फैसला सिर्फ दिशा सालियान की जीत नहीं था। बल्कि यह उस हर इंसान की उम्मीद थी जो यह जानता है कि जिस सिस्टम ने मलाड के उस दिशा सालियान मामले में इतनी बड़ी लापरवाही बरती। ठीक उसी सिस्टम ने 6 दिन बाद सुशांत सिंह राजपूत मामले को भी संभाला था। जब एक मामले में इतना बड़ा झोल और लापरवाही साबित हो सकती है तो दूसरे मामले को अंतिम सत्य कैसे माना जा सकता है? यह फैसला इस बात की गवाही दे रहा था कि 2020 में जो भी हुआ था, वो एक बहुत बड़े षड्यंत्र का हिस्सा था। जिसके मोहरे आज भी बेनकाब होने बाकी हैं। दोनों मामलों की कड़ियां एक बार फिर कानूनी रूप से एक दूसरे के सामने आ खड़ी हुई हैं। क्या दिशा मामले की यह नई जांच सुशांत सिंह राजपूत की मौत के उन पन्नों को भी दोबारा खोलने पर मजबूर करेगी जिन्हें व्यवस्था ने बंद मान लिया था। यह सवाल आज भी पूरे देश की अंतरात्मा में गूंज रहा है। और सच क्या है? यह आने वाले दिनों की जांच ही तय करेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *