[संगीत] अयोध्या के राम मंदिर में कथित तौर पर करोड़ों रुपए की चोरी को लेकर एसआईटी की जांच तीसरे दिन भी जारी है। एसआईटी की टीम तीन दिन से अयोध्या में डेरा डाले हुए हैं। इस दौरान कई लोगों से पूछताछ, रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज सब कुछ खंगाले गए। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल कि आखिर करोड़ों लोगों की आस्था के इतने बड़े केंद्र में कैसे करोड़ों की चोरी हो गई? किसने की और इसका जिम्मेदार आखिर है कौन? सारे सवालों का जवाब मिलेगा आपको इस वीडियो में। नमस्कार, मैं हूं आकांक्षा और आप देख रहे हैं N 18 का डिजिटल प्लेटफार्म। अयोध्या में जिस भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए राम भक्तों को 500 साल का लंबा इंतजार करना पड़ा। जिस प्रभु श्री राम के मंदिर के लिए सैकड़ों राम भक्तों ने बलिदान दिया। जिस राम मंदिर को बनवाने के लिए करोड़ों श्रद्धालुओं ने अपनी पूरी जमा पूंजी समर्पित कर दी और जिस राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद भारत ही नहीं पूरी दुनिया के राम भक्तों ने बढ़-चढ़कर दान दिया। राम भक्तों के इसी दान पर डाका डाले जाने के आरोप लग रहे हैं। राम मंदिर से करोड़ों का चढ़ावा गायब होने का दावा किया जा रहा है और इसे सनातनियों की आस्था से बड़ा खिलवाड़ बताया जा रहा है।
अयोध्या के राम मंदिर की दान पेटी से कथित चोरी को लेकर एसआईटी की जांच जारी है। आज तीसरे दिन एसआईटी की टीम राम मंदिर पहुंची। बीते दो दिनों में 70 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की जा चुकी है। सैकड़ों सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा चुके हैं। बैंक रिकॉर्ड्स भी खंगाले जा रहे हैं। इसी बीच बीजेपी के पूर्व सांसद हैं बृजभूषण शरण सिंह। उन्होंने बेहद बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अब यह मामला केवल ट्रस्ट तक ही सीमित नहीं है बल्कि केंद्र और राज्य सरकार तक की बात है। इसके अलावा उन्होंने कहा है कि बिना आग के धुआं नहीं उठता। बृजभूषण शरण सिंह ने निरपेंद्र मिश्रा को बेगुनाह भी बताया है। सवाल यह कि सनातनियों की आस्था से जुड़ा है तो यूपी की योगी सरकार भी अब एक्शन में आ चुकी है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने ठान लिया है कि प्रभु श्री राम के गुनाहगारों को बख्शा नहीं जाएगा। राम मंदिर से क्या-क्या चुराया, कैसे चुराया? सीसीटीवी के सामने की पूरी कहानी सामने आएगी और जिसके लिए योगी सरकार ने बकायदा एसआईटी का गठन किया। यह एसआईटी जांच कर रही है। अब तक 70 से ज्यादा लोगों से पूछताछ हो रही है। एक-एक संदिग्ध से बंद कमरे में पूछताछ हुई। अन्य संदिग्धों के पास से लाखों रुपए कैश मिलने का दावा किया गया है। लेकिन जांच में जिन छह संदिग्धों पर शिकंजा कसा जा रहा है, उनमें कुछ नाम ऐसे भी हैं जिनका खुलासा होने के बाद करोड़ों का चढ़ावा गायब होने पर बवाल मचाने वालों के सुर बदलने लगे हैं। सबसे पहले बात राम मंदिर के करोड़ों का चढ़ावा गायब होने के मामले से जुड़े छह संदिग्ध किरदारों की जो एसआईटी के रडार पर हैं। पहला किरदार टिन्नू यादव। आपने इनका नाम काफी सुना होगा। यह श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय के सहयोगी हैं और यही राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे को बैंक में जमा करने का काम करते थे।
एक वक्त था जब टिन्नू यादव ऑटो चलाते थे और अब इनके पास ₹50 करोड़ से ज्यादा की प्रॉपर्टी है और इसी वजह से यह एसआईटी के रडार में आए हैं। दूसरा किरदार है मनीष यादव का। यह टिन्नू यादव के भतीजे हैं। राम मंदिर में चढ़ावा गिनने वालों में यह शामिल है। आरोप है कि टिन्नू यादव ने ही अपने भतीजे मनीष यादव के यहां पर नौकरी लगवाई थी। मनीष यादव की निशानदेही पर ₹36 लाख कैश मिलने का दावा किया जा रहा है। तीसरा किरदार है केडी तिवारी का। राम मंदिर में दान में मिली सोने चांदी की मूर्तियां और गहनों की देखरेख की जिम्मेदारी इनके पास थी। हाल ही में इन्होंने ₹1.5 करोड़ की लगभग जमीन खरीदी है। 5 करोड़ की संपत्ति जुटाने का इनके ऊपर आरोप लगा है। चौथा किरदार है राजेश पाठक। चढ़ावे में आए नोटों की गिनती करने वाले कर्मचारियों में यह शामिल है और पिछले 5 से छ सालों में इनकी लाइफस्टाइल में अचानक बदलाव देखा गया और इसलिए यह भी शक के दायरे में है। पांचवा किरदार है लवक कुश का। चढ़ावे में आए नोटों की गिनती करने वालों में यह शामिल है और घर से ₹1 लाख कैश बरामद हुए और उसके बाद अब यह भी एसआईटी की रडार में हैं। छठा किरदार है अनुकल्प मिश्रा का। लवकुश के जीजा हैं। नोटों की गिनती यह भी करते थे। हाल ही में करीब ₹65 लाख का घर खरीदने और गांव में एक फार्म हाउस बनवाने की वजह से यह एसआईटी की रडार में है। तो एक तरफ प्रभु श्री राम के गुनाहगारों का सच सामने लाने के लिए सीएम योगी एक्शन के मोड में हैं। उसका भी असर दिखने मिला है। आरोपियों पर शिकंजा कसा जा रहा है। लेकिन एसआईटी जांच पर राम मंदिर से करोड़ों का चढ़ावा गायब होने को लेकर सबसे पहले मोर्चा खोलने वाले अखिलेश यादव के सुर बदलते हुए दिख रहे हैं। जिस अखिलेश यादव ने इसे सनातनियों की आस्था से खिलवाड़ बताया था। सुप्रीम कोर्ट से दखल देने की मांग की अब वह इस मामले की एसआईटी जांच को सनातन का अपमान बताने लगे हैं। कैमरा बंद करके फैसला लेने की दलील दे रहे हैं। राम मंदिर में चढ़ावे के नियम और उनकी कमियां कहां पर क्या रह गई हैं
वो भी आपको बताते हैं। देखिए नियम यह है कि चढ़ावे की सीसीटीवी की निगरानी में रोजाना गिनती हो। इसमें कमी यह देखी गई कि श्रद्धालु गिनती नहीं देख सकते थे। ना ही सीसीटीवी फुटेज जारी होते हैं। दूसरा नियम यह है कि रकम रजिस्टर में लिख के लॉकर में रखा जाए और अगले दिन बैंक में जमा कराया जाए। लेकिन सबसे बड़ी जो लापरवाही थी या कहीं गलती या फिर जानबूझ के ये किया गया कि चढ़ावा की कोई आधिकारिक जानकारी नियमित रूप से सार्वजनिक नहीं की जाती थी। नियम यह भी है कि ऑडिट के बाद ही चढ़ावे की पूरी जानकारी सार्वजनिक हो। पिछली बार दिसंबर 2025 में जानकारी दर्ज की गई थी और कमी इसमें यह है कि दिसंबर 2025 से लेकर के जून 2026 तक कितना चढ़ावा आया यह किसी की जानकारी में ही नहीं है। नियम यह भी है कि अधिकतर बड़े मंदिरों में ऑडिट का काम अंदरूनी लोग या फिर सरकार करती है। लेकिन यहां पर चढ़ावे की रकम के ऑडिट का पूरा काम प्राइवेट कंपनी टीसीएस को सौंपा गया। बता दें कि फिलहाल अयोध्या राम मंदिर के दान पात्रों से धनराशि चोरी होने के अभावों पर उत्तर प्रदेश सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा एक्शन लिया। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर त्वरित संज्ञान लेते हुए शासन ने एक हाई प्रोफाइल जांच दल का गठन किया है। लखनऊ के मंडल आयुक्त विजय विश्वास पंत जो कि आईएएस हैं।
उनकी अध्यक्षता में तीन सदस्य उच्च स्तरीय समिति इस पूरे मामले की जांच कर रही है। यह प्रशासनिक जांच भी होगी। की पुलिसियां भी और वित्तीय पहलुओं की जांच की जा रही है। वहीं अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के कर्मचारी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव ने अपने ऊपर तमाम आरोपों पर सफाई दी है। टिन्नू ने एक वीडियो जारी किया और कहा है कि मैं 1993 में विश्व हिंदू परिषद से जुड़ा। जो जमीन की कीमत ₹50 करोड़ बताई जा रही है वो उन्होंने साल 2008 में खरीदी थी और उस पर निर्माण जो उन्होंने करवाया वो साल 2015 और 16 में हुआ। यानी कोर्ट का फैसला राम मंदिर केस आने से पहले ही उनका मकान बन चुका था। उन्होंने यह भी दलील दी कि वो ऑटो चलाकर कमाई करते हैं। मंदिर ट्रस्ट में सेवा करने के लिए हमको लगाया गया था। हम बस मंदिर परिसर में रहते थे और सेवा करते थे। जैसे कहां पंखा टंगवाना है, कहां साफ सफाई करानी है और कहां पानी दिखवाना है। जो लोग यह कह रहे हैं कि नोट गिनने वालों की तलाशी कैसे होती है। वहां कितने लोग हैं उस बारे में मैं नहीं बता पाऊंगा क्योंकि उस विषय से मेरा कोई लेना देना नहीं है। अब देखना होगा कि किस तरीके से टिन्नू यादव अपने आप को एकदम निर्दोष करार दे रहे हैं। लेकिन करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र में जिस तरह चोरी हुई है कब तक गुनहगार सामने आते हैं और आगे ऐसी वारदात ना हो पाए इसके लिए सरकार को क्या करना चाहिए और ऐसे गुनहगारों को क्या सजा मिले आप भी कमेंट सेक्शन पर अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें|