सिम कार्ड यूज़र्स हो जाए सावधान। आपकी एक छोटी सी गलती आपको 3 साल की जेल और ₹50 लाख तक के जुर्माने के जाल में फंसा सकती है। जी हां, आपके नाम पर जारी मोबाइल नंबर अगर किसी और के हाथ में है तो अब इसे हल्के में लेना आपको भारी पड़ सकता है।
दूरसंचार विभाग यानी ने 21 सितंबर को नई एडवाइज़री जारी कर मोबाइल यूज़र्स को एक बड़ी चेतावनी दी है। कुछ उल्लंघनों में टेलीकम्युनिकेशंस एक्ट 2023 के तहत 3 साल तक की जेल और ₹50 लाख तक के जुर्माने का प्रावधान बताया गया है।
दूरसंचार विभाग की नई एडवाइज़री के बाद मोबाइल यूज़र्स के लिए यह जानना बेहद जरूरी हो चुका है कि आखिर कौन सी गलती अपराध बन सकती है और अब सवाल यह भी है कि क्या आपको पता भी है कि आपके नाम पर इस वक्त कितने सिम एक्टिव है? कहीं आपकी जानकारी के बिना कोई अनजान नंबर तो नहीं चल रहा।
दरअसल सरकार ने साफ किया है कि अपने डॉक्यूमेंट्स पर जारी सिम को किसी दूसरे व्यक्ति को देना, बेचना या किराए पर देना कानूनी परेशानी खड़ी कर सकता है। खासकर अगर उसी सिम का इस्तेमाल साइबरफ्रॉड या किसी अपराध में हो गया तो जांच की आंच उस व्यक्ति तक भी पहुंच सकती है जिसके नाम पर सिम जारी है।
यानी सिम किसी और के हाथ में लेकिन कागजों पर नाम आपका तो जिम्मेदारी से बचना इतना आसान नहीं होगा। और यही वजह है कि सरकार अब लोगों से कह रही है कि आज ही चेक कीजिए आपके नाम पर कितने मोबाइल नंबर चल रहे हैं। इसके लिए संचार साथी पोर्टल या ऐप पर नो योर मोबाइल कनेक्शन सुविधा उपलब्ध है। अपना मोबाइल नंबर डालिए। ओटीपी से लॉग इन कीजिए और सामने आ जाएगी आपके नाम से एक्टिव सभी मोबाइल कनेक्शंस की जानकारी। अब जरा सोचिए अगर लिस्ट में ऐसा नंबर दिखाई दे जिसे आपने कभी लिया ही नहीं। या कोई ऐसा सिम हो जिसका इस्तेमाल आप नहीं करते तो उसे नजरअंदाज मत कीजिए। पोर्टल पर ऐसे नंबरों को नॉट माय नंबर या रिपोर्ट करने कीसुविधा दी गई है।
यानी अनजान सिम दिखा तो तुरंत कार्यवाही कीजिए क्योंकि आपके नाम पर चल रहा कोई अनजान नंबर आगे चलकर आपके लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है। सरकार की यह सख्ती अचानक से नहीं आई है। छत्तीसगढ़ में सामने आए एक मामले में एक सिम एजेंट पर लोगों के दस्तावेजों [संगीत] का गलत इस्तेमाल कर उनकी जानकारी के बिना 25 सिम एक्टिवेट करने का मामला सामने आया। डीओटी ने एजेंट को ब्लैक लिस्ट किया है और रीफिकेशन में फेल होने के बाद सभी 25 नंबर बंद कर दिए हैं। सवाल है कि अगर लोगों को समय रहते अपने नाम पर चल रहे नंबर्स की जानकारी मिल जाती तो क्या ऐसी स्थिति से बचा जा सकता था? मामला सिर्फ सिम तक सीमित नहीं रहा। सरकार ने आईएमईआई नंबर से छेड़छाड़ और कॉलिंग आईडी बदलने पर टूल्स के इस्तेमाल को लेकर भी चेतावनी दे दी है।
मोबाइल की एक यूनिक पहचान होती है। इसे बदलने या छेड़छाड़ करने की कोशिश टेलीकम्युनिकेशन एक्ट्स की धारा 42 के तहत अपराध हो सकती है। इसी तरह कॉलिंग लाइन आइडेंटिफिकेशन यानी को बदलने वाले टूल या तरीके का इस्तेमाल भी प्रतिबंधित है। यानी फोन हो, सिम हो या कॉलिंग आईडी। टेलीकॉम पहचान से खिलवाड़ अब गंभीर कानूनी जोखिम बन सकता है।
अब सवाल उठता है कि आपके नाम पर आखिर कितने सिम रखे जा सकते हैं? मौजूदा नियमों के मुताबिक आमतौर पर एक व्यक्ति के नाम पर अधिकतम नौ मोबाइल कनेक्शनहो सकते हैं। वहीं जम्मू कश्मीर, असम और उत्तरपूर्वी राज्यों में यह सीमा छह कनेक्शन की है। सरकार टेलीकॉम कंपनियों को डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफार्म से जोड़ रही है ताकि नया सिम जारी करने से पहले यह जांचा जा सके कि ग्राहक के नाम पर पहले से कितने नंबर एक्टिव हैं।
सरकार ने सिस्टम को और सख्त बनाने के लिए डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफार्म में नया फीचर भी जुड़ा है। तय सीमा से ज्यादा सिम रखने वाले लोगों की पहचान करने में यह सिस्टम मदद करेगा ताकि डीलर अतिरिक्त कनेक्शन जारी करने से पहले सावधानी बरत सके। टेलीकॉम कंपनियों को अपने सिस्टम को इस सरकारी प्लेटफार्म से पूरी तरह जोड़ने के लिए 30 नवंबर 2026 तक का समय दिया गया और अगर आपको अपने फोन की असलियत पर भी शक है तो उसका आईएमईआई नंबर भी चेक किया जा सकता है।
फोन पर स्टार# 06# डायल करके आईएमईआई नंबर देखिए और संचार साथी के चेक जेन्युइननेस ऑफ योर मोबाइल हैंडसेट विकल्प पर जाकर उसे वेरीफाई कीजिए। यहां फोन के ब्रांड मॉडल और निर्माता से जुड़ी जानकारी आप देख सकते हैं। तो सवाल सिर्फ यह नहीं कि आपके हाथ में कौन सा सिम है?
सवाल यह भी है कि आपके नाम पर कौन-कौन सा सिम चल रहा है? क्योंकि आज के डिजिटल दौर में आपकी पहचान से जुड़ा एक अनजान मोबाइल नंबर भी आपके लिए बड़ी परेशानी की वजह बन सकता है। इसीलिए एक बार संचार साथी पर जाकर अपनी पूरी लिस्ट जरूर चेक कीजिए। कहीं आपके नाम पर कोई ऐसा नंबर तो नहीं चल रहा जिसके बारे.