कपूर खानदान का नाम आते ही हमारे जहन में कई बड़े सितारों के चेहरे घूमने लगते हैं। राज कपूर, ऋषि कपूर, रणबीर कपूर, करीना कपूर और करिश्मा कपूर। लेकिन इसी खानदान में एक ऐसा सितारा भी हुआ जिसने अपने अंदाज से हिंदी सिनेमा की पूरी तस्वीर बदल दी।
पर्दे पर अपनी मस्ती, डांस और रोमांस से लोगों के दिल जीतने वाले इस एक्टर की जिंदगी के पीछे छिपा था दर्द का एक ऐसा किस्सा जिसे सुनकर आप भी भावुक हो जाएंगे। एक ऐसा सितारा जो एक दिन में 100 सिगरेट तक पी जाता था। जिसकी जिंदगी में पहली पत्नी को खूनी का गहरा सदमा आया और जिसकी सेहत ने आखिरकार उसका साथ छोड़ दिया। जी हम बात कर रहे हैं बॉलीवुड के फेमस एक्टर शमी कपूर की। 21 अक्टूबर 1931 को जन्मे शमी कपूर ने अपने अनोखे अंदाज से हिंदी सिनेमा में एक अलग पहचान बनाई।
जंगली कश्मीर की कली और तीसरी मंजिल जानवर जैसी फिल्मों में उनके अंदाज का जादू ऐसा चला कि दर्शक उनके दीवाने हो गए। लेकिन उनकी निजी जिंदगी की कहानी पर्दे पर दिखाई देने वाली उनकी मस्ती से बिल्कुल अलग थी।
शमी कपूर की जिंदगी में सबसे बड़ा दर्द तब आया जब उन्होंने अपनी पहली पत्नी गीता बाली को खो दिया था। गीता बाली सिर्फ उनकी पत्नी नहीं बल्कि उनकी जिंदगी का बेहद अहम हिस्सा थी। दोनों की प्रेम कहानी भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं थी। लेकिन साल 1965 में चेचक के कारण गीता बाली का निधन हो गया, और शमी कपूर की दुनिया उजड़ गई। इस सदमे का असर उनकी जिंदगी पर भी पड़ा और उनकी दूसरी पत्नी नीला कपूर ने एक इंटरव्यू में बताया कि गीता बाली के निधन के बाद श्मी कपूर ने शराब पीना काफी कम कर दिया था।
हर साल 1 जनवरी से 21 जनवरी तक वो शराब से दूर रहते क्योंकि इन तारीखों से उनकी पहली पत्नी की बीमारी और निधन की यादें जुड़ी थी। लेकिन शमी कपूर की जिंदगी में सिर्फ यह दर्द नहीं था। उनकी एक ऐसी आदत भी थी जिसने उनकी सेहत पर बुरा असर डाला। वो आदत थी सिगरेट पीने की। एक दिन में 100 सिगरेट। नीला कपूर के मुताबिक शमी कपूर 1 दिन में 100 सिगरेट पी लेते थे। सोचिए जिस इंसान ने अपनी जिंदगी में इतनी शोहरत और कामयाबी हासिल की वो अंदर ही अंदर अपनी सेहत को कितना नुकसान पहुंचा रहा था। लेकिन फिर उनकी जिंदगी में आया कंप्यूटर। वो घंटों कंप्यूटर पर समय बिताने लगे और इसी दौरान उन्होंने सिगरेट पीना छोड़ दिया। उनकी जिंदगी में आया यह कि बड़ा बदलाव था। हालांकि तब तक उनके फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंच चुका था।
साल 2003 में शमी कपूर की तबीयत काफी बिगड़ गई और उनके फेफड़ों की हालत इतनी ज्यादा खराब हो गई कि उन्हें अस्पताल में करीब 1 महीने तक वेंटिलेटर पर रहना पड़ा। इलाज के दौरान उन्हें स्टेरॉइड और एंटीबायोटिक्स दिए गए और बाद में उनकी किडनी पर भी असर पड़ा और उन्हें डायलिसिस की जरूरत पड़ने लगी और एक वक्त ऐसा आया जब इस शानदार कलाकार की जिंदगी अस्पतालों और इलाज के बीच सिमट कर रह गई।
लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी जिंदगी जीने की कोशिश जारी रखी। 14 अगस्त 2011 को 79 साल की उम्र में शमी कपूर ने दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके जाने से हिंदी सिनेमा ने एक ऐसा कलाकार खो दिया जिसकी बराबरी करना आज भी आसान नहीं है। उनकी नकल करने की कोशिश कई एक्टरों ने की लेकिन उनका अंदाज, उनका डांस और पर्दे पर उनकी जैसी एनर्जी कोई नहीं ला सका। आज भी जब कोई मुझे जंगली कहे जैसे गाने सुनाई देते हैं तो शमी कपूर का वही मस्त मौला अंदाज आंखों के सामने आ जाता है। एक ऐसा सितारा जिसने पर्दे पर हमेशा जिंदगी को खुलकर जिया लेकिन असल जिंदगी में अपनों को खोने का दर्द और गंभीर बीमारी झेली।
शमी कपूर भले ही आज हमारे बीच नहीं है लेकिन हिंदी सिनेमा में उनका नाम हमेशा जिंदा रहेगा।