साल 2013 शुभेंदु अधिकारी के पर्सनल असिस्टेंट प्रदीप झा फुटपाथ पर मृत पाए गए। साल 2018 शुभेंदु अधिकारी के बॉडीगार्ड शुभ्रता चक्रवर्ती ने अपनी जान दे दी। साल 2021 शुभेंदु अधिकारी के सहयोगी और ड्राइवर पुलक लाहरी की मौत। साल 2026 शुभेंदु के पर्सनल असिस्टेंट चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पिछले 13 सालों में शुभेंदु के चार करीबियों की रहस्यमई तरीके से मौत हो चुकी है। शुरुआत से यह सभी मामले समझने के लिए चलते हैं 13 साल पीछे।
3 अगस्त 2013 शुभेंदु टीएमसी यानी तृणमूल कांग्रेस के सदस्य थे। तम लोग सीट से सांसद भी थे। उसी दौरान उनके पर्सनल असिस्टेंट प्रदीप झा कोलकाता के स्ट्रेंग रोड पर एक फुटपाथ पर मृत पाए गए। प्रदीप झा ने शुभेंदु के पीए के साथ टीएमसी विधायक हाजी नरुल इस्लाम के भी पीए के तौर पर काम किया था। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदीप झा की उम्र 42 साल थी और वह बारासा के चरक डांगा के रहने वाले थे। 3 अगस्त की सुबह पुलिस को एक फोन आता है। फोन करने वाले ने बताया कि सड़क पर एक शख्स बेहोश पड़ा है। पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची तो वह शख्स प्रदीप झा थे। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि मौत के दौरान प्रदीप झा नशे में थे। उनके पेट में लगभग 700 मिलीलीटर शराब पाई गई थी। श्वास नली में खाने के कुछ पार्टिकल्स फंसे हुए थे और उनके चेहरे पर चोट के निशान भी थे। हालांकि आधिकारिक तौर पर प्रदीप की मौत की वजह की अभी तक कोई पुष्टि नहीं हो पाई है। इस घटना को 5 साल बीत चुके थे। साल था 2018। इस दौरान शुभेंदु राज्य के परिवहन मंत्री थे। 13 अक्टूबर को खबर आई कि शुभेंदु अधिकारी के घर के पास पुलिस बैरेक्ट में उनके बॉडीगार्ड शुभ्रता चक्रवर्ती के सिर में गोली लगी है। उन्हें तुरंत अस्पताल में एडमिट कराया गया। लेकिन इलाज के दौरान अगले दिन ही उनकी मौत हो गई। पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू की।
शुरुआत में पुलिस ने बताया कि शुभ्रता चक्रवर्ती ने अपनी जान दे दी। लेकिन सुब्रता की पत्नी सुपर्णा चक्रवर्ती को शक था कि उनकी हत्या हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुपर्णा ने शुभेंदु को इस मौत का जिम्मेदार ठहराते हुए साल 2021 में नए सिरे से जांच की मांग की। इसके बाद मामला सीआईडी के पास पहुंचा। सीआईडी ने धारा 302 यानी हत्या और धारा 120 बी यानी आपराधिक साजिश के तहत एफआईआर दर्ज की। जांच के दौरान सीआईडी ने शुभेंदु अधिकारी के घर के पास की बैरक में सीन रिकंस्ट्रक्ट किया और कई पुलिसकर्मियों से पूछताछ की।
बताया गया कि पूछताछ के वक्त शुभेंदु घर पर मौजूद नहीं थे। इस मामले ने तब और तूल पकड़ा जब शुभेंदु टीएमसी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए। बीजेपी ने उस दौरान शुभ्रता की मौत को राजनीतिक बदले की भावना बताया तो टीएमसी ने कहा कि मौत का सच सामने आना चाहिए। हालांकि इस मामले में भी अब तक कोई पुष्ट जानकारी सामने नहीं आ पाई है। इस मामले की जांच चल ही रही थी कि शुभेंदु के एक और करीबी की मौत की खबर सामने आई। साल था 2021। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव चल रहा था। शुभेंदु नंदीग्राम सीट से मैदान में थे। वही सीट जहां से ममता बनर्जी भी चुनाव लड़ रही थी। चुनाव हुआ नतीजे आए। ममता को हराकर शुभेंदु चुनाव जीत गए। इसके कुछ समय बाद खबर आई कि नंदीग्राम क्षेत्र के काउंटिंग एजेंट और शुभेंदु के ड्राइवर पुलक लाहरी की मौत हो गई। पुलक को शुभेंदु का करीबी माना जाता था। वह टीएमसी के दिनों से शुभेंदु के साथ थे। बीजेपी में शामिल होने के बाद भी उनके साथ जुड़े रहे। मीडिया रिपोर्ट्स में पुलक की मौत को अननेचुरल बताया गया और बाकी मामलों की तरह इसमें कोई अपराधी पकड़ा नहीं गया। ना ही जांच में कोई पुख्ता अपडेट आया।
अब 2026 में इन मामलों में शुभेंदु के पीए चंद्रनाथ रथ का नाम भी शामिल हो गया है। 6 मई की रात 10:30 बजे गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चंद्रनाथ कोलकाता के मध्यम ग्राम में स्कर्पियो से अपने घर लौट रहे थे। ड्राइवर गाड़ी चला रहा था। चंद्रनाथ बगल में बैठे हुए थे। तभी एक कार और दो बाइक पर सवार तीन हमलावर उनकी Scorpio का पीछा करते हैं। दोहरिया जंक्शन के पास कार उनकी Scorpio से आगे निकल गई और सामने जाकर गाड़ी रोक दी। Scorpio ड्राइवर को भी गाड़ी रोकनी पड़ी।
जब तक चंद्रनाथ और उनके ड्राइवर कुछ समझ पाते बाइक सवार हमलावर बाई तरफ से आए और फायरिंग शुरू कर दी। वारदात के बाद हमलावर वहां से फरार हो गए। गंभीर हालत में चंद्रनाथ को अस्पताल ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। कुल मिलाकर पिछले 13 सालों में शुभेंदु के चार करीबियों की हत्या हुई है। एक फुटपाथ पर मृत मिला, एक की गोली लगने से मौत हुई। एक की अननेचुरल डेथ बताई गई और अब एक की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई। हर केस के बाद सवाल उठे। राजनीति भी हुई। आरोप-प्रत्यारोप भी चले। लेकिन इतने साल बाद भी ज्यादातर मामलों में सच्चाई पूरी तरह सामने नहीं आ पाई है। फिलहाल इस खबर में इतना ही। खबर लिखी है हमारी साथी रक्षा ने। मेरा नाम है नेहा दीमान। देखते रहिए द ललन टॉप। शुक्रिया।