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क्यों श्रीदेवी को बचपन में शरब पिलाई गई थी? वजह जानकर होश उड़ जाएंगे।

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श्रीदेवी हिंदी सिनेमा की एक ऐसी अभिनेत्री थी जिनका फिल्मी सफर पांच दशकों के कलाकारों के साथ रहा है हा ना पाएगी ये लड़की श्रीदेवी की फिल्मों की फेहरिस्त इतनी लंबी है क्योंकि श्रीदेवी ने अपने दौर के लगभग सभी बड़े अभिनेताओं के साथ अपनी जोड़ी बनाई जिनमें राश खन्ना अमिताभ बच्चन ऋषि कपूर मिथुन चक्रवर्ती अनिल कपूर यहां तक कि सनी देवल सलमान खान और शाहरुख खान जैसी हस्तियां भी इनके साथ काम करने से अपने आप को रोक नहींपाए हिंदी सिनेमा में अभिनेत्रियों की अति लोकप्रियता की अगर बात करें तो शायद श्रीदेवी का नाम सबसे ऊपर माना जाएगा बली में म बहुत देखो दिल के तोड़ बहुत है रस्ता मुड़ जाने वाला है मेन रोड आने वाला है श्रीदेवी हिंदी सिनेमा की वो अभिनेत्री रही है जिनका कोई भी फिल्मी बैकग्राउंड नहीं था मि मिठे गीत मितवा श्री देवी का पदार्पण फिल्मों में बाल कलाकार के रूप में हुआ और देखते ही देखते वह अपने घर की कमाई करने वाले सदस्यों में शुमार हो गए।

मस्ती से छई है क्या बताऊ कितने ड़ गई लेकिन दोस्तों क्या आपको पता है कि श्रीदेवी को शराब की लत उनकी मां ने ही बचपन में लगाई थी जब उनको शराब का मतलब भी नहीं पता था जानेंगे इस वीडियो में क्यों तू ना जा मेरे बादशाह एकवा के लिए एक वाला तोड़ श्रीदेवी ने अपने जीवन में दो शादियां की और दूसरी शादी में तो श्रीदेवी पर अपने ही दोस्त के पति चुरा लेने का आरोप तक लग गया था आसुओं की रात दिन रवानिया है अपने ही दोस्त के पति से शादी करने के बाद भी श्रीदेवी बहुत खुश नहीं रही क्योंकि अपने जीवन की 54 वर्ष की अवस्था में श्रीदेवी की हो गई और उन्हीं के पति पर लगा था उनकी हत्या का आरोप नहीं मैं नहीं आप दिल एक है दो आज वीडियो में हम जानेंगे श्रीदेवी से जुड़े उन तमाम महत्त्वपूर्ण बातों को और समझने की कोशिश करेंगे कि आखिर क्यों अब तक नहीं सुलझ सकी श्रीदेवी के मौत की गुत्थी और क्यों श्रीदेवी और जयप्रदा साथ में काम तो करती थी।

लेकिन आपस में बातचीत नहीं करती थी और इस बातचीत को शुरू करवाने के लिए राजेश खन्ना और जितेंद्र साहब ने कौन सा जदन किया और क्या वह अपने इस मंशा में कामयाब हुए क्या श्रीदेवी और जयप्रदा आपस में बात कर शुरू की जानेंगे इस मजेदार किस्से को तो बने रहिए हमारे साथ आज के इस दिलचस्प में श्री के शुरुआती जीवन के बारे में 13 अगस्त 1963 को तमिलनाडु के शिवाकाशी में जन्मी श्री अम्मा यंगर अयप्पन नाम की इस बच्ची के पिता तमिल थे जबकि मां तिरुपति से थी जो आंध्र प्रदेश में है पिता अयप्पन यंगर पेशे से वकील थे जबकि मां राजेश्वरी यंगर एक घरेलू महिला थी।

इस दंपति के जीवन में कुछ ऐसी घटना घटी यानी श्रीदेवी फिल्मों में काम करने लगी श्रीदेवी की पहली फिल्म थी 1967 में जो कि एक तमिल भाषा में थी फिल्म का नाम था कंधन करुणाई जिसमें उन्होंने मुर्गन देवता की भूमिका निभाई थी काला मगल इस फिल्म के मुख्य कलाकार थे शिवाजी गणेशन और जयललिता जो पहले अभिनेत्री और बाद में राज नेत्री बनी फिल्म कंधन करुणाई तो बहुत हिट रही और श्रीदेवी के पास तो अब फिल्मों की झड़ी सी लगने लगी आने वाले कई वर्षों में उन्होंने तमिल तेलुगु और मलयालम भाषाओं की दर्जनों फिल्मों में बतौर बाल कलाकार शानदार अभिनय किया।

कई बार तो इनकी प्रतिभा को ध्यान में रखकर उन फिल्मों में इन्हें केंद्र की भूमिका दी गई फिल्मों में लगातार काम करने से घर में चार पैसे अतिरिक्त आमदनी होने लगी और इस तरीके से वह अपने परिवार का खर्चा उठाने लगी लेकिन नन्ही श्रीदेवी जब शूटिंग के थका देने वाले शिफ्ट से वापस लौटती थी तो वह थकान से चूर रहती थी कहते हैं श्रीदेवी नींद में में भी अपनी थकान की वजह से बहुत कराहती थी जिससे परिवार वालों की नींद खराब हो जाया करती थी और उनके परिवार ने इसी परेशानी से छुटकारा पाने के लिए श्रीदेवी की मां उन्हें शराब पिलाने लगी अब तो हालत यह हो गई।

कि श्रीदेवी को बगैर नींद ही नहीं आती थी और इस तरह शराब पिलाते पिलाते श्रीदेवी कब शराब पीने लग गई यह श्रीदेवी को पता ही नहीं चला और किस तरह शराब ने श्रीदेवी को पी लिया इस वीडियो में आगे बताई गई है श्रीदेवी जब 13 साल की उम्र में थी तो उन्होंने एक तमिल फिल्म की थी फिल्म का नाम था मुंदरू मद चू इस फिल्म में उन्होंने अपने से 13 साल बड़े रजनीकांत की सौतेली मां की भूमिका निभाकर सबको चौका दिया था यह फिल्म 1976 में रिलीज हुई थी और इस फिल्म में कमल हसन साहब भी थे बाद में साउथ की फिल्मों में कमल हसन और श्रीदेवी की जोड़ी बहुत ही लोकप्रिय हुई जिसे बाद में हिंदी सिनेमा ने भी इस जोड़ी को रिप ट किया फिल्म का नाम था।

सदमा जब श्रीदेवी की प्रतिभा की ख्याति बढ़ने लगी तो बहुत से हिंदी निर्माता निर्देशक भी थे जो उनकी इस प्रतिभा को नोटिस कर रहे थे और वर्ष 1972 में आई हिंदी फिल्म रानी मेरा नाम से उनकी बॉलीवुड में एंट्री हुई 1975 में आई हिंदी फिल्म जूली में भी उनका एक छोटा सा किरदार था और इस छोटे से किरदार से भी श्रीदेवी ने लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा था हिंदी सिनेमा में बतौर नायिका श्रीदेवी का सफर शुरू हुआ 1979 में आई फिल्म सोवा सावन से जंगली लंगूर कहीं का करवा द ना पतंग ओहो अमोल पालेकर के साथ बनी इस फिल्म का निर्देशन किया था।

कन्नड़ फिल्मों के मशहूर निर्देशक भारती राजा ने लेकिन यह फिल्म कुछ खास नहीं चली दोस्तों और फिल्म के इस परिणाम से श्रीदेवी वापस दक्षिण भारतीय फिल्मों में व्यस्त हो गई दोस्तों उन दिनों तेलुगु फिल्मों के एक बड़े निर्देशक थे कि राघवेंद्र राव जिन्होंने साउथ की कई सुपरहिट फिल्मों में श्रीदेवी को मुख्य भूमिकाएं दी थी निर्देशक के राघवेंद्र राव अब उन तमाम साउथ इंडियन फिल्मों का हिंदी में रिमेक करना चाहते थे ऐसे में उन्होंने एक स्ट्रेटजी बनाई उस स्ट्रेटजी के तहत उन्होंने हीरो तो बॉलीवुड से लिया लेकिन हीरोइन के तौर पर उन्होंने श्रीदेवी को ही उतारने की ठ और दोस्तों उनकी यह स्ट्रेटेजी तुरुप का पत्ता साबित हुई और इस तुरुप के पत्ते की पहली फिल्म थी फिल्म हिम्मत वाला नों में सपना सपनों में सचना सचना पे दिला गया।

फिल्म हिम्मत वाला 1981 में आई तेलुगु फिल्म उड़की मुना गाड़ू की हिंदी रिमेक थी और दोस्तों इस फिल्म में एक खास बात यह थी कि इस फिल्म के तेलुगु वर्जन में हीरोइन थिंग जया प्रदा लेकिन हिंदी में राघवेंद्र राव ने जया प्रदा की जगह श्रीदेवी को उतारा ता ताकी ताकी ताकी ता रे जने में आंखों में फिल्म हिम्मत वाला से श्रीदेवी की एक ऐसी ग्लैमरस छवि बना दिया जिससे दर्शक मंत्र मुग्ध हो गए वाह वाह वाह खेल शुरू हो गया वाह वाह वाह खेल शुरू हो गया फिल्म हिम्मत वाला सुपरहिट रही और इस फिल्म से श्रीदेवी का जलवा ऐसा बिखरा कि उनके पास फिल्मों के ऑफर की झड़ी सी लग गई नहीं मैं नहीं आप दिल एक है और दोस्तों उस साल 1981 में श्रीदेवी की विभिन्न भाषाओं में 20 से भी ज्यादा फिल्में रिलीज हुई हम झूमते झूमता है।

सारा जहां निर्देशक के राघवेंद्र राव ने अपनी स्ट्रेटजी को जारी रखा उन्होंने इसी स्ट्रेटजी के तहत दूसरी फिल्म बनाई फिल्म का नाम था जानी दोस्त दोस्तों फिल्म जानी दोस्त तेलुगु फिल्म आदाब सिम्हालु का रिमेक था तेलुगु फिल्म में उनके साथ थी जया प्रदा जबकी जानी दोस्त में उनकी कोस्टार थी परवीन बवी 1983 में ही के राघवेंद्र राव ने अपनी एक और तेलगु फिल्म का रिमेक किया जिसका नाम था जस्टिस चौधरी साथ मेरे आओगी आइसक्रीम खाओगी 1983 में कई अन्य निर्देशकों की फिल्म में श्रीदेवी का जलवा दिखा उन निर्देशकों के नाम थे के बपैथी नारायण राव और के रेड्डी इन फिल्मों में श्रीदेवी के ग्लैमरस छवि को ही कैश किया गया लेकिन वाकई में श्रीदेवी के अभिनय की गहरी छाप दिखी बालू महेंद्रा की फिल्म सदमा में जिंदगी गले लगा ले जिंदगी हालांकि फिल्म सदमा भी एक तमिल फिल्म मुंदर पिराई की रिमिक थी नहीं पता तो पता क्या तुझे तूने नहीं रखा तो और किसने रखा फिल्म सदमा से श्रीदेवी का टॉलीवुड और बॉलीवुड दोनों ही फिल्म इंडस्ट्री में उनके अभिनय की धूम मच गई साल 1984 में के राघवेंद्र राव की फिल्म तोहफा में श्रीदेवी नजर आई और इस फिल्म में भी श्रीदेवी और जितेंद्र की जोड़ी को खूब सराहा गया मेरे न नेरा डी रमा की प्रोड्यूस की हुई फिल्म 1982 में आई तेलुगु फिल्म देवता का हिंदी रिमेक थी और दोस्तों यही वह फिल्म थी जिसमें अब तक दक्षिण भारतीय फिल्मों में उनकी कोस्टार रही जया प्रदा को भी श्रीदेवी के साथ सिल्वर स्क्रीन पर उतारा गया था।

प्यार का तोफा तेरा बना है जीवन मेरा दिल के सहारे मैंने पा लिए दोस्तों श्रीदेवी और जया प्रदा को कई वर्षों तक दर्शकों ने उन्हें एक दूसरे की प्रतिद्वंदी के तौर पर दे देखा हालांकि इन दोनों का अंदरूनी रिश्ता उतना ही रोचक था यह ऑफिशियल तो दोनों एक दूसरे की पूरक मानती थी लेकिन दोनों के बीच कभी भी बातचीत नहीं होती थी यहां तक कि दोनों को 1984 में आई फिल्म मकसद की शूटिंग के दौरान उनके कोस्टार रहे जितेंद्र और राजेश खन्ना साहब ने इन दोनों को जब आपस में बात करते नहीं देखा तो इन दोनों को एक मस्ती सूझी और वह मस्ती यह थी कि जितेंद्र और राजेश खन्ना साहब ने दोनों को एक कमरे में बंद कर दिया कि यह लोग शायद अब आपस में बातचीत करें लेकिन जितेंद्र और राजेश खन्ना के मंशा पर तप पानी फिर गया जब उन्हें यह पता चला कि एक कमरे में बंद होने के बावजूद दोनों ने आपस में बातचीत फिर भी नहीं की श्रीदेवी और जितेंद्र की जोड़ी इतनी लोकप्रिय थी कि दोनों एक दूसरे के साथ 16 फिल्मों में अभिनय कर चुके थे और उन 16 फिल्मों में 13 फिल्में सुपरहिट रही श्रीदेवी की 1984 में कई फिल्में आई जिनमें एक थी जाग उठा इंसान और इस फिल्म से श्रीदेवी के जीवन में एक नए स्टार की एंट्री हुई और वह स्टार थी मिथुन चक्रवर्ती आए पर्वतों पे झूमती घटा मैं नाचू तू कहते हैं इस फिल्म के सेट पर श्रीदेवी मिथुन से प्यार कर बैठी।

हालांकि मिथुन उस दौरान योगिता बाली के पति थे लेकिन फिर भी श्रीदेवी के इश्क में ऐसे पागल हुए कि सब कुछ भूल बैठे कि वोह शाद शुदा है तेरा हुस्न कुदरत का एक शाहकार तू भी बेकरार और इन दोनों के रिश्ते की खबरें मीडिया में चर्चाएं आम होने लगी कहा तो यहां तक जाने लगा कि दोनों ने गुपचुप शादी भी कर ली है और एक साथ रहने भी लगे हैं दोनों ने कई फिल्मों में साथ काम किया जिनमें से कुछ फिल्में हिट थी तो कुछ सुपरहिट भी रही समय यूं ही बीतता चला गया वर्ष 1987 88 आते-आते दोनों के बीच दूरियां बढ़ने लगी और इन दोनों ने इस गुमनाम रिश्ते को अलविदा कह दिया इमोशनल पॉइंट ऑफ व्यू से तो श्रीदेवी बहुत हताश थी

लेकिन अपने प्रोफेशनल लाइफ में श्रीदेवी अब सुपरस्टार का दर्जा हिंदी सिनेमा में पा चुकी थी और उसी दौरान उनकी एक फिल्म रिलीज हुई 1986 में जो श्रीदेवी के लाइफ का टर्निंग पॉइंट था और वो फिल्म थी नगीना मैं तेरी दुश्मन दुश्मन तू मेरा मैं नागन तू जिसकी सफलता ने सारे रिकॉर्ड बनाए हरमेश मल्होत्रा की इस फिल्म में वैसे तो ऋषि कपूर अमरीश पुरी जैसे दिग्गज कलाकार भी मौजूद थे लेकिन श्रीदेवी के अभिनय और उनके नृत्य ने उन सभी कलाकारों पर हावी कर दिया श्रीदेवी लगातार सफलता की सीढ़ी चढ़ती जा रही थी और उसी दौर में 1987 में अनिल कपूर के साथ श्रीदेवी की फिल्म आई मिस्टर इंडिया जिसने सफलता के वो झंडे गाड़े कोई नहीं है बस तुम हो साथ कहनी थी तुमसे जोल की कि मिस्टर इंडिया हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक ब्लॉकबस्टर साबित हुआ फिल्म मिस्टर इंडिया की सफलता ने श्रीदेवी के करियर के साथ-साथ उनकी जिंदगी की भी दिशा बदल दी कहती है मुझको हवा हवाई हवा हवाई हवा हवाई ह अरे करते हैं हम प्यार मिर इंडिया से फिल्म के निर्माता थे बोनी कपूर जिनकी पत्नी मोना से श्रीदेवी की गहरी दोस्ती हो गई थी।

दोस्तों जब मिथुन चक्रवर्ती से श्रीदेवी का अलगाव हुआ तो वह बोनी कपूर की पत्नी मोना ही थी जिन्होंने श्रीदेवी के उमड़ती भावनाओं को संभाला था और वह बोनी कपूर की पत्नी मोना ही थी जिन्होंने श्रीदेवी को अकेला नहीं छोड़ा और वह श्रीदेवी को अपने साथ घर लेकर आ गई बोनी कपूर और मोना कपूर के घर में श्रीदेवी इमोशनली तो हील होने लगी इस इमोशन ने एक रिश्ता बनाया बोनी कपूर और श्रीदेवी का जो कि प्रोफेशनल फ्रंट पर भी यह रिश्ता बहुत सफल साबित हुआ शुरुआती दिनों में तो श्रीदेवी बोनी कपूर को भाई की तरह मानने लगी थी और कहा तो यह भी जाता है कि उन्होंने उनकी कलाई पर राखी भी बांधी थी श्रीदेवी बोनी कपूर और अनिल कपूर की यह तिकड़ी हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई फिल्मों में योगदान दिया।

इसके अलावा श्रीदेवी के जी में एक और सफल फिल्म आई और फिल्म का नाम था चांदनी मेरे हाथों में न न चूड़िया यश चोपड़ा निर्देशित फिल्म चांदनी ने तो श्रीदेवी को घर-घर में स्थापित कर दिया दोस्तों 1989 में ही एक बेहद चर्चित फिल्म रिलीज हुई जो कि एक ब्लॉकबस्टर साबित हुई और वह फिल्म थी हरमेश मल्होत्रा की फिल्म चालबाज से आई है ना जाने को जाएगी इस फिल्म ने श्रीदेवी को उस स्थान पर लाकर खड़ा कर दिया जहां बड़े-बड़े अभिनेता उनके कद के आगे बौने नजर आने लगे थे फिल्म में रजनीकांत और सनी देवल जैसे हीरो भी थे लेकिन समीक्षकों का कहना था कि दोनों नहीं भी होते तो फिल्म की लोकप्रियता पर कोई खास असर नहीं पड़ता फिल्म चांदनी की सफलता के बाद यश चोपड़ा ने 1991 में श्रीदेवी के साथ एक फिल्म बनाई फिल्म का नाम था लमहे इस फिल्म को दर्शकों की मिलीजुली प्रतिक्रिया मिली चूड़िया खनक गई आत्मा मोरनी बाबा बोले आ रात फिल्म लमहे को उस साल के पांच फिल्म फेयर अवार्ड मिले जिनमें श्रीदेवी को मिला सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार 1992 में एक और फिल्म आई और इस फिल्म के नायक थे अमिताभ बच्चन खुदा गवा खुदा गवा कहा जाता है कि इस फिल्म में दो सुपर स्टार्स ने काम किया एक अमिताभ बच्चन और दूसरी सुपरस्टार थी।

श्रीदेवी मैं ही भर के देख लूं तेरी तस्वीर मैं इस फिल्म में श्रीदेवी ने पठान लड़की का एक जीवंत किरदार निभाया था दोस्तों बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक यह फिल्म अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में लगातार 10 हफ्तों तक हाउसफुल रही थी अगले साल यानी 1993 में उन्होंने कपूर फैमिली के साथ एक बड़े बजट की फिल्म का जिसका नाम था रूप की रानी चोरों का राजा सतीश कौशिक द्वारा निर्देशित की गई इस फिल्म में उनके हीरो थे अनिल कपूर और इसे प्रोड्यूस किया था बोनी कपूर ने का राजा दोस्तों इस फिल्म ने बहुत अच्छा कारोबार नहीं किया।

जिसके कारण बोनी कपूर भारी कर्ज में डूब गए और दोस्तों यही वो दौर था जब बोनी कपूर को श्रीदेवी ने इमोशनल सपोर्ट दिया और यही वह क्षण थे जहां वह एक दूसरे के बहुत करीब आ गए समय बीतता चला गया 1994 में आई फिल्म लाडला जिसमें उन्होंने अनिल कपूर के साथ अभिनय किया था फिल्म ने बढ़िया कारोबार किया इस फिल्म के निर्देशक थे राज कवर जिसके साथ बोनी कपूर ने मिलकर 1996 में फिल्म बनाई थी जुदाई फिल्म ने बढ़िया कारोबार किया और दोस्तों इसके ठीक बाद एक खबर आई कि श्रीदेवी ने बोनी कपूर से श कर ली है कहते हैं श्रीदेवी इस शादी के लिए इसलिए दबाव में थी क्योंकि वह प्रेग्नेंट हो चुकी थी शादी के बाद उन्होंने फिल्मों से ब्रेक ले लिया हालांकि उनकी पहले शूट की गई फिल्में अगले साल तक रिलीज होती रही और इस तरह श्रीदेवी और मोना का रिश्ता हमेशा हमेशा के लिए कटू हो गया श्रीदेवी ने दो बेटियों को जन्म दिया जिनका नाम नवी और खुशी है श्रीदेवी ने साल 2004 में एक बार फिर फिल्मों में कमबैक किया और फिल्म का नाम था।

मेरी बीवी का जवाब नहीं री मिया का जवाब नहीं दोस्तों उसी साल उन्होंने टीवी इंडस्ट्री की तरफ भी रुख किया मानी मानी टीवी सीरीज मालिनी अयर से जिसमें उन्होंने 189 एपिसोड में काम किया इस सीरीज के बाद श्रीदेवी ने एक लंबा ब्रेक लिया और उसके बाद वह नजर आई वर्ष 2012 में सिल्वर स्क्रीन पर फिल्म इंग्लिश विंग्लिश में [संगीत] चंद श्रीदेवी का रूप और सौंदर्य बिल्कुल बदल चुका था इसके बाद भी वह कुछ प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनी लेकिन उनका मुख्य ध्यान था बेटी नवी को फिल्मों में लॉन्च करना श्रीदेवी ने अपने लंबे करियर के दौरान राष्ट्रीय पुरस्कार चार फिल्म फेयर पुरस्कार तीन फिल्म फेयर साउथ पुरस्कार तमिलनाडु स्टेट फिल्म पुरस्कार केरल फिल्म पुरस्कार और फिल्म फेयर लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित की गई इसके अलावा श्रीदेवी को वर्ष 2013 में पद्मश्री से भी नवाजा गया था समय यूं ही बीत रहा था श्रीदेवी का करियर यूं ही धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था।

इसी बीच एक खबर आई कि श्रीदेवी की एक रहस्यमय हो गई है और इस रहस्य से आज तक पर्दा नहीं हट पाया दोस्तों यह रहस्य है सात समंदर पार की जहां उनकी मृत्यु हुई फरवरी 2018 में एक पारिवारिक शादी में श्रीदेवी हिस्सा लेने यूएई पहुंची थी शादी थी अनिल कपूर और बोनी कपूर की बहनोई संदीप मारवा के बेटे मोहित मारवा की शादी का वन्यू था यूएई के रसल खैमाह में श्रीदेवी ने हर एक कार्यक्रम में परिवार वालों के साथ बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था वह हर आयोजन में संगीत पर थिरक भी नजर आई थी इसके बाद बोनी कपूर तो लखनऊ में फिल्म प्रमोशन संबंधित एक बैठक में हिस्सा लेने भारत आ गए लेकिन श्रीदेवी रसल खैमाह में यूएई की राजधानी दुबई में आकर रुक गई कहा जाता है कि श्रीदेवी दुबई में अपनी बहन से मिलने और बेटी नवी के लिए शॉपिंग करने के लिए रुक गई थी।

श्रीदेवी एक बिजनेस चलाना चाह रही थी जिसके लिए उन्हें दुबई में मीटिंग्स भी करने थे श्रीदेवी दुबई के एमिरेट्स टावर के होटल जुमैरा में कमरा नंबर 2201 में ठहरी थी होटल के इसी कमरे में 24 फरवरी की रात उनकी मौत हो गई दोस्तों श्रीदेवी के मौत के इस दास्तान के कई वर्जन आए इसके कई कारण कहे गए सबसे पहले बात उस आधिकारिक रिपोर्ट की जो दुबई पुलिस ने जारी की इस रिपोर्ट के मुताबिक श्रीदेवी की मौत एक्सीडेंटल ड्राउनिंग यानी दुर्घटना वश पानी में डूब जाने से हुई थी रिपोर्ट के मुताबिक 24 फरवरी की शाम को बनी कपूर सरप्राइज विजिट पर डुप्लीकेट चाबी के जरिए दाखिल हुए और श्रीदेवी ने खुश होकर उनका स्वागत किया दोनों ने तय किया कि वह किसी रेस्तरां में चलकर खाना खाएंगे रिपोर्ट के मुताबिक बोनी कपूर ने कहा कि जब देर तक उनकी पत्नी बाथरूम से बाहर नहीं निकली तो उन्हो उन्होंने श्रीदेवी को कई बार बुलाया जब भीतर से कोई आवाज नहीं आई तो बुनी कपूर ने दरवाजा धक्का देकर खोला श्रीदेवी को बाथ टब में गिरा पाया।

उन्होंने श्रीदेवी को टब से बाहर निकाला और घबराकर अपने दोस्त को फोन किया दोस्त के आने के बाद बोनी कपूर ने हॉस्पिटल को संपर्क किया और डॉक्टरों ने उन्हें मृत्य घोषित कर दिया दुबई में छपी एक वेबसाइट के मुताबिक यह कहानी पूरी तरह सही नहीं थी वेबसाइट ने सवाल उठाया था कि बोनी कपूर ने जब श्रीदवी को डूबा हुआ देखा तो उन्होंने सबसे पहले होटल की इमरजेंसी सेवा को क्यों नहीं बुलाया दुबई की मीडिया ने यह भी सवाल उठाया था कि बोनी कपूर को डुप्लीकेट चाबी से श्रीदेवी के कमरे में घुसने की क्या जरूरत पड़ गई थी और क्या दोनों के बीच किसी बात पर बहस हुई थी ।

सवाल यह भी उठा था कि क्या कोई वहां तीसरा शख्स भी मौजूद था केरल के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने इस दुर्घटना को सवालों के घेरे में लेते हुए कहा था कि यह मानना असंभव है कि 5 फुट 7 इंच की कोई महिला 5 फुट 1 इंच के टब में डूब जाए उनका कहना था कि ऐसा तभी हो सकता है जब किसी ने उन्हें जबरन डुबोया हो होटल के एक कर्मचारी ने दावा किया कि बोनी कपूर के दुबई आने के पहले ही श्रीदेवी की मौत हो चुकी थी हालांकि दुबई पुलिस ने उस कर्मचारी का कोई बयान नहीं लिया मुंबई के ही एक फिल्म मेकर ने भारत के सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका तक दायर कर दी और यह दावा किया कि श्रीदेवी का एक ऐसा बीमा रखा था जिसके मुताबिक उसके संबंधियों को उसका भारी भरकम हुआ हो जा तभी मिल सकता है जब उनकी मौत यूएई में ही हो याचिकाकर्ता के मुताबिक यह रकम 240 करोड़ की थी और उसी के लालच में ही श्रीदेवी की हत्या करवाई गई थी।

हालांकि इस याचिका को भी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया बहरहाल दुबई पुलिस ने श्रीदेवी की फाइल क्लोज कर दी तो 27 फरवरी को उनका शौ अनिल अंबानी के निजी विमान से भारत आया 28 फरवरी 2018 को उनका अंतिम संस्कार मुंबई के विले पार्ले क्रिमिनेट यम में कर दिया गया दोस्तों कई साल बीत जाने के बाद भी श्रीदेवी की एक रहस्य है लेकिन उनकी यादें भारतीय फिल्म दर्शकों के दिलों में हमेशा जीवित रहेगी हिंदी सिनेमा को श्रीदेवी जैसी अभिनेत्री फिर कब मिलेगी यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब हर सवाल करने वाले के जहन में ऑलरेडी है जिसका जवाब है अभी नहीं

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