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शबाना रजा और मनोज बाजपाई की लव स्टोरी, सच जो कोई नहीं जानता

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लेट 90ज में इस खूबसूरत मासूम चेहरे वाली एक्ट्रेस ने बड़े पर्दे पर एक फिल्म से दस्तक दी जिसकी प्यारी मुस्कान पर लाखों यंगस्टर्स अपना दिल हार बैठे। अपनी शोहा गांव से इन्होंने फैंस के दिलों में एक खास जगह बना ली और एक के बाद एक कई फिल्मों में तब के बड़े स्टार्स के साथ लीड रोल प्ले किया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पहली ही फिल्म में शूटिंग के दौरान एक छोटी सी गलती की वजह से डायरेक्टर विधु विनोद चोपड़ा ने इनका हाथ दांत से काट लिया था। जिससे ये खूब रोई थी। जुदाई से डरता है दिल, मौत से क्या? आपको पता है कि यह फेमस एक्टर मनोज वाजपेयी की दूसरी पत्नी है और अलग धर्म होने के बावजूद इन दोनों ने एक तरकीब लगाकर अचानक शादी कर ली थी। और क्या आप यकीन करेंगे कि नेहा के नाम से फिल्मों में लॉन्च की गई इस अभिनेत्री का असली नाम नेहा नहीं बल्कि शबाना रजा था जो नाम जबरदस्ती बदल कर रख दिया गया था। तो क्यों नेहा को अचानक बॉलीवुड में काम मिलना बंद हो गया? और लीड एक्ट्रेस के तौर पर कई बड़े स्टार्स के साथ काम करने वाली इस एक्ट्रेस ने क्यों कहा कि मैं मिसेज वाजपेयी बनकर ही खुश हूं। बताएंगे इनकी जिंदगी के और भी अनसुने किस्से।

आप बने रहिए हमारे साथ। दोस्तों आज के एपिसोड में हम बात कर रहे हैं करीम फिल्म से बॉलीवुड में एंट्री करने वाली 90ज की एक्ट्रेस नेहा उर्फ़ शबाना रज़ा की। तो सबसे पहले जानेंगे कि कौन थी शबाना? क्या था इनका फैमिली बैकग्राउंड? और कैसे आउटसाइडर होने के बावजूद इन्होंने एक बड़े बैनर से अपने करियर की शुरुआत की। शबाना रजा का जन्म 18 अप्रैल 1975 को गुजरात के नांदेड़ में एक मुस्लिम परिवार में हुआ था। हालांकि कुछ रिपोर्ट्स यह दावा करती है कि इनका जन्म दिल्ली में हुआ था। [संगीत] इनकी मां का नाम शकीला रजा था जो एक हाउसवाइफ थी और पापा एक सिविल इंजीनियर थे। शबाना की एक छोटी बहन भी थी। शबाना ने अपनी पढ़ाई दिल्ली से ही पूरी की जहां इनके पापा जॉब करते थे। बताते हैं कि फेमस एक्टर सौरभ शुक्ला शबाना के पापा के दोस्त थे। उन्होंने ही एक बार शबाना के पापा से कहा कि फिल्म मेकर विधु विनोद चोपड़ा एक फिल्म बना रहे हैं जिसमें मैं काम कर रहा हूं। उसमें लीड एक्ट्रेस के रोल के लिए विधु को एक फ्रेश चेहरे की तलाश है और अपनी शबाना उस रोल में बिल्कुल फिट बैठेगी। शबाना के पापा को भी फिल्मों में इंटरेस्ट था तो उन्हें यह मौका अच्छा लगा। उन्होंने बेटी से पूछा तो शबाना ने कहा कि मुझे ना ज्यादा फिल्मों के बारे में पता है ना ज्यादा इंटरेस्ट है लेकिन आप लोग जैसा सजेस्ट करें। बस फिर क्या था? बात बन गई, पैकिंग हुई और शबाना अपने पेरेंट्स के साथ मुंबई जा पहुंची। वहां शबाना विधु विनोद चोपड़ा से मिली। यह फिल्म थी 1998 में रिलीज हुई करीब जिसमें लीड एक्टर बॉबी देओल को कास्ट किया गया था। क्योंकि शबाना एक्टिंग के बारे में कुछ नहीं जानती थी तो विधु ने इन्हें डांस और अभिनय की ट्रेनिंग लेने के लिए कहा। शबाना ने मुंबई में 2 महीने तक किशोर नमित कपूर की एक्टिंग क्लास ज्वाइन की जहां रतिक रोशन भी इनके साथ क्लासेस ले रहे थे। फिर ऑडिशन दिया और सेलेक्ट हो गई। फिल्म में शबाना की गर्ल नेक्स्ट डोर वाली इमेज थी जिसमें यह परफेक्टली फिट बैठ रही थी।

आप महान है बिजू जी इस मतलबी बेरहम दुनिया में दूसरों [संगीत] के लिए कौन इतना सोचता है? सोचना चाहिए नेहा जी। चोरी-चोरी जब नजरें मिली चुरा लो ना दिल मेरा। इन गानों में शबाना की मासूमियत और दिलकशी ऐसी रही कि दर्शक फिदा हो गए। चर चोरी जब नजरें मिली चोरचोर फिर नींदें चुरा लो ना दिल मेरा। सनम बना लो ना अपना सनम। [संगीत] इस फिल्म की शूटिंग के समय का एक अजीब वाक्या और जबरन शबाना का नाम बदलने को लेकर विवाद इनकी चर्चा डिटेल में हम आगे करेंगे। फिलहाल बात करते हैं फिल्म की तो यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई। लेकिन इसमें शबाना अपने मासूम चेहरे और अदाओं से सबका दिल जीतने में कामयाब रहीं। माहिया कीथत यही जग की मधुर मुस्कान वाली शबाना को इसके बाद कई फिल्मों के ऑफर मिल गए। जिसमें इन्हें अगली फिल्म मिली 1999 में रिलीज हुई अजय देवगन की अपोजिट होगी प्यार की जीत। कौन है वो छपछप के बुलाए जो इस फिल्म में और भी कई कलाकार थे। लेकिन शबाना मेन एक्ट्रेस थी। तुम्हारा भोलापन, तुम्हारी सादगी, तुम्हारी अच्छाई मेरे लिए दुनिया की सबसे अनमोल दौलत है। और फिर औरत अपने पति में एक अच्छा इंसान ढूंढती है।

यह फिल्म एवरेज चली। लेकिन इसके कुछ गाने सुपरहिट रहे। मिल लबाके सबसे। शबाना ने इसके अगले साल 2000 में फिल्म फिजा में एक खास रोमांटिक किरदार किया जिसमें इनके अपोजिट रतिक रोशन थे। फिल्म में करिश्मा कपूर और जया बच्चन जैसे मजे हुए कलाकार भी थे। नहीं अम्मा तुम्हें मेरी कसम वो नहीं कुछ और सही जी नहीं उठा देख [संगीत] रहा है। इस फिल्म का गाना आजा माहि में शबाना रतिक रोशन के साथ नजर आई जो एक हिट गाना बना और इन दोनों की केमिस्ट्री भी लाजवाब नजर आई। आहिस्ता पुकार सब सुन लेंगे बस लबों से। साल 2001 में नेहा की तीन फिल्में रिलीज हुईं। दो हिंदी और एक तमिल। इनमें एक फिल्म थी एहसास द फीलिंग जिसमें सुनील शेट्टी इनके साथ हीरो थे। हालांकि यह फिल्म ज्यादा चली नहीं पापा का फोन आया था न्यूयॉर्क से। उन्होंने एक लड़का देखा है मेरे लिए और वह चाहते हैं कि मैं उसे एक बार मिलूं इसलिए मैं आपसे मिलने चली आई। दूसरी हिंदी फिल्म रही प्रकाश झा डायरेक्टेड राहुल, जिसे दर्शकों और क्रिटिक्स ने बेहद सराहा। छेड़ना मुझको मेरे महबूब जाने दे। इसमें शबाना ने एक तलाकशुदा महिला का शानदार रोल प्ले किया। जो [संगीत] अपने बच्चे के गम में दिन रात हालातों और जज्बातों से लड़ती है। बहुत हो गया आकाश। तुम इस तरह से बात नहीं कर सकते मुझसे। आखिर मां हूं और दोबारा उस रिश्ते का हक जताया तो बहुत महंगा पड़ेगा तुम्हें। साल 2003 में शबाना एक कन्नडा फिल्म स्माइल में काम करती दिखी। साल 2004 में शबाना की एक रोमांटिक थ्रिलर फिल्म

आई मुस्कान, जिसमें इनके अलावा आफताब शिवदासानी और ग्रेसी सिंह भी थे। कहीं ऐसा ना हो कि दोनों एक दूसरे के इंतजार में अधूरे रह जाए। ऐसा नहीं होगा। विश्वास है तुम्हें? हां। साल 2005 में शबाना दीपक रामसे की एक मल्टीस्टारर फिल्म में नजर आई जो थी कोई मेरे दिल में है। इसमें इनके साथ प्रियांंशु, राकेश बापट और दिया मिर्जा आदि कलाकार भी थे पर फिल्म चली नहीं। [संगीत] सच समीर सिमरन ने तुम्हें इतनी ऊंचाई तक पहुंचा दिया कि जहां मैं तुम्हें छू भी नहीं सकती। इसके बाद शबाना ने 2006 में एक बार फिर दीपक रामसे की ही हॉरर फिल्म आत्मा में काम किया जो कि फ्लॉप रही। लेकिन अमन तुमने यह बहुत गलत किया। मुझे लाकर यहां रख दिया और कौन ख्याल रखता होगा तुम्हारा? मुझे पता है तुम केयरलेस हो। क्या करूं? केयर करने वाली जो घर पे नहीं है। बस अब ज्यादा बातें मत बनाओ। 2009 में शबाना की फिल्म एसिड फैक्ट्री आई जो तब इनकी आखिरी फिल्म साबित हुई। इस एक्शन थ्रिलर फिल्म में फरदीन खान, इरफान खान, मनोज वाजपेई आदि कई कलाकार थे। व्हाट आर यू टॉकिंग अबाउट? सार्थक का फोन आपके पास कैसे आया? यह बेकार की डिटेल्स है। यह मैं नहीं बता पाऊंगा। देखिए आप जो भी हैं मुझे इतनी इज्जत देने की जरूरत नहीं है। मैडम मैं छोटा-मोटा आदमी हूं। छोटे-मोटे काम करता हूं। क्या चाहते हो? इस फिल्म के बाद शबाना ने एक्टिंग करियर को अलविदा कह दिया। इस तरह कुल मिलाकर नेहा और शबाना का बॉलीवुड में सफर सिर्फ नौ फिल्मों का ही रहा। हालांकि शबाना ने तमिल और कन्नाडा फिल्मों में भी काम किया। शबाना जब फिल्मों में काम कर रही थी तो भी इन्हें उतनी ज्यादा फिल्में नहीं मिल रही थी जितनी कि मिलनी चाहिए थी। लेकिन इसके पीछे कई वजह बताई जाती हैं। एक तो यह कि यह आउटसाइडर थी। दूसरी वजह यह कि इनकी इंडस्ट्री में उतनी ज्यादा नेटवर्किंग नहीं थी, जिस वजह से इन्हें कॉल आए और फिल्में दी जाएं। तीसरी वजह यह थी कि यह जबरदस्ती की पार्टियों में जाकर वहां शो ऑफ करना या उनमें शामिल होना जरूरी नहीं समझती थी। साथ ही शबाना ना ही किसी फिल्म मेकर के [संगीत] स्टूडियो के बार-बार चक्कर लगाती ना ही उन्हें मस्का लगाती और फिर इनकी शादी ने रही सही कसर भी पूरी कर दी। चलिए अब बात करते हैं शबाना रजा की पर्सनल लाइफ की। तो IMDb जैसे कुछ सोर्सेस के मुताबिक शबाना की जिंदगी में फिल्मी दुनिया में सबसे पहले एक्टर डायरेक्टर अभय चोपड़ा और विक्रम चोपड़ा की एंट्री हुई थी। दोनों का अफेयर भी रहा लेकिन फिर जल्द ही दोनों अलग हो गए। यह विधु विनोद चोपड़ा के भतीजे थे। इसके बाद शबाना की मुलाकात हुई मनोज वाजपेयी से। साल 1998 में फिल्म सत्य के प्रीमियर की एक पार्टी में मनोज वाजपेयी और शबाना रजा की पहली मुलाकात हुई। [संगीत] वहां शबाना को बिना मेकअप,

बालों में ढेर सारा तेल और आंखों पर चश्मा चढ़ाए देख मनोज इनकी सादगी पर मर मिटे और इनसे बात की। शबाना को भी मनोज का नेचर अच्छा लगा। बातें, [संगीत] मुलाकातें और फिर ढेर सारा वक्त बिताने का दौर चल पड़ा। कई साल दोनों का यह रिश्ता यूं ही चलता रहा। बाद में दोनों [संगीत] मुंबई में लिव इन में रहने लगे। अब प्लानिंग हुई साथ में घर खरीदने की। जिसके लिए होम लोन लेना था तो बैंक में पता चला कि पति-पत्नी होने पर ही साथ में लोन मिल सकेगा। फिर क्या था? मनोज और शबाना ने शादी की प्लानिंग शुरू कर दी। पर मनोज जानते थे कि दूसरे मजहब की लड़की से शादी करना इतना आसान नहीं होगा और इनकी फैमिली इतनी आसानी से नहीं मानेगी क्योंकि उस दौर का बिहार का एक मिडिल क्लास [संगीत] ब्राह्मण परिवार उस हिसाब से इनके माता-पिता की भावनाओं को भी समझा जा सकता है। मनोज ने सबको घर दिखाने के बहाने मुंबई बुलाया और फैमिली को बताया कि यह शादी करने वाले हैं। शबाना ने भी अपने परिवार में ऐसे ही जल्दबाजी में सबको बताया। शबाना की फैमिली ने तो ज्यादा अपोज नहीं किया लेकिन मनोज वाजपेई के माता-पिता गांव से शादी करना चाहते थे। साथ ही अपनी बिरादरी की लड़की की ख्वाहिश थी। लेकिन मनोज वाजपेयी की पहली शादी घर वालों की मर्जी से ही हुई थी। फिर भी वह शादी टूट गई थी और पहली पत्नी से उनका तलाक हो गया था। तो पिता ने इस बार बेटे पर ज्यादा दबाव नहीं बनाया और खामोश हो गए। मनोज और शबाना ने आनन-फानन में दोनों परिवारों को राजी कर बिना ज्यादा देरी किए शादी कर ली। यह [संगीत] 2006 का साल था। हालांकि मनोज का फैसला सही साबित हुआ और शबाना ने हमेशा इनका पूरा साथ दिया। शादी के बाद शबाना के लिए करियर में काफी कुछ बदलने लगा था। अब इन्हें लीड एक्ट्रेस के तौर पर फिल्में मिलनी अचानक बंद हो गई। 2006 में शबाना ने शादी की थी। जिस साल इनकी एक फिल्म आई थी आत्मा और इसके बाद 2007 और आठ में इनकी एक भी फिल्म रिलीज नहीं हुई। साल 2009 में यह एक फिल्म एसेट फैक्ट्री में जरूर नजर आई, लेकिन इस मल्टीस्टारर फिल्म में इनका बस एक छोटा सा रोल था। थक हारकर शबाना ने फिल्मों को अलविदा [संगीत] कह दिया और बुझे मन से घर बैठ गई। इसके 2 साल बाद 2011 में शबाना ने एक बेटी को जन्म दिया जिसका नाम अवा यलियाला रखा गया और फिर यह बेटी की परवरिश में बिजी हो गई। शबाना ने अपने छोटे से बॉलीवुड करियर में रितिक रोशन, अजय देवगन, सुनील शेट्टी और बॉबी देओल जैसे फेमस एक्टर्स के साथ काम किया और लगभग इन सभी फिल्मों में नेहा ने लीड रोल का ही किरदार निभाया। वहीं इनमें से ज्यादातर बड़े डायरेक्टर्स की फिल्में रही। लेकिन फिर क्यों इन्हें इंडस्ट्री ने अचानक काम देना बंद कर दिया? तो वैसे तो इसके कई रीजन हो सकते हैं। लेकिन सबसे बड़ी वजह मानी जाती है कि तब एक्ट्रेसेस के साथ होने वाला भेदभाव काफी ज्यादा था। शादी हुई नहीं कि फिल्म मेकर से लेकर को एक्ट्रेस भी उनके साथ काम करने को लेकर कतराने लगते थे और अगर एक्ट्रेस मां बन गई तब तो उसका करियर समझो पूरा ही ठप हो गया।

साथ ही तब ज्यादातर परिवारों में उनसे घर वाले भी यही उम्मीद रखते थे कि अगर शादी हो गई तो चाहे वह जितनी अच्छी कलाकार ही क्यों ना हो उसे अब [संगीत] घर संभालना चाहिए और बच्चों की परवरिश पर ध्यान देना चाहिए। यही वजह रही कि पहले के दौर में ज्यादातर एक्ट्रेसेस का करियर 30-35 साल के बाद लगभग खत्म ही हो जाता था। इसी का शिकार शबाना भी होनी जबकि इनके पति मनोज वाजपेयी ने भी 1998 में इन्हीं के साथ अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। लेकिन वो आज भी एक्टिव हैं और बॉलीवुड में उन्हें शादी या बच्चे की वजह से कभी काम मिलना कम नहीं हुआ। वो आज फिल्मों से लेकर ओटीटी पर एक जाना माना नाम है। वहीं शबाना उर्फ नेहा को दुनिया लगभग भूल चुकी है। नेहा तब लीड रोल निभाया करती थी। जबकि मनोज वाजपेयी को लीड रोल पाने के लिए लंबा स्ट्रगल करना पड़ा। शबाना अच्छी कलाकार भी थी और खूबसूरत भी और अपने काम में पंक्चुअल भी थी। पर अफसोस इनका करियर बेवक़ गुमनामी की भेंट चढ़ गया। हालांकि कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि शबाना किसी बॉलीवुड या खेमे का हिस्सा नहीं बन पाई और इसका नुकसान भी इन्हें हुआ। क्योंकि बॉलीवुड में ग्रुपिज्म हमेशा से हावी रहा है। खासकर अगर आप आउटसाइडर हैं तो आपके लिए तो यह मस्ट है वरना तुरंत बाहर कर दिए जाएंगे। [संगीत] शबाना ने एक इंटरव्यू में कहा था कि मैं एक्टिंग को लेकर हमेशा से बहुत दीवानी थी। लेकिन मेरी एक कमी यह है कि मैं रोल मांगने के लिए दरवाजे दरवाजे नहीं घूम सकती। [संगीत] कुछ समय बाद मेरे पास जब अच्छे रोल आने बंद हो गए तो मैं अभिनय करने से पीछे हट गई।

[संगीत] मैं सिर्फ मिसेज मनोज वाजपेयी बनकर ही खुश थी। हालांकि नेहा की इन बातों को इनके दिल का दर्द या अंदर की खीज के तौर पर देखा जा सकता है। चलिए अब फिल्म इंडस्ट्री में शबाना रजा के कुछ अनुभवों की बात करते हैं। तो इन्होंने साल 2008 में रेडिफ को दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि पहले ही फिल्म के समय फिल्म के डायरेक्टर विधु विनोद चोपड़ा ने जबरदस्ती इनका नाम शबाना से बदलकर नेहा कर दिया था। शबाना ने कहा था कि मैं कभी नेहा नहीं थी। हमेशा से शबाना थी। मुझ पर नाम बदलने का दबाव बनाया गया। [संगीत] मेरे पेरेंट्स ने बहुत प्राउडली मेरा नाम शबाना रखा था। नाम बदलने की कोई जरूरत नहीं थी। पर किसी ने मेरी नहीं सुनी। [संगीत] फिर जब मैं वापस अपना पुराना नाम चाहती थी तो भी किसी ने मेरी नहीं सुनी थी। मैंने अपनी पहचान खो दी थी। बता दें कि शबाना रजा को हमेशा नेहा नाम कचोटा रहा। उन्हें लगता था कि वह किसी और की जिंदगी जी रही हैं। यही वजह रही कि साल 2011 में जब इन्हें फिल्म अलीबाग में काम करने का मौका मिला तो इन्होंने [संगीत] फिल्म मेकर संजय गुप्ता से कहकर अपना असली नाम इस्तेमाल किया। शबाना ने तब कहा था कि इन्हें ऐसा महसूस हो रहा था कि इस नाम से क्रेडिट मिलने के बाद इनकी खोई हुई पहचान वापस मिल गई है। अपनी पहली फिल्म करीब से जुड़ा शबाना का एक और बुरा एक्सपीरियंस [संगीत] रहा जिसके बारे में शबाना ने भले कभी कुछ नहीं कहा लेकिन कुछ समय पहले बॉबी देओल का साल 2001 में दिया गया एक इंटरव्यू जमकर वायरल हुआ था [संगीत] जिसमें उन्होंने करीब फिल्म का एक हैरान कर देने वाला किस्सा सुनाया था। बॉबी ने बताया था कि डायरेक्टर विधु विनोद चोपड़ा न्यू कमर शबाना रजा से काफी सख्त थे।

विधु उन्हें लगातार डांटा करते थे। मुझसे कुछ नहीं कहता था क्योंकि मैं धर्मेंद्र का बेटा था। एक सीन के लिए नेहा को पहाड़ों से नीचे आकर मुझे अपना बाया हाथ देना था। लेकिन वो लगातार कंफ्यूज हो रही थी। जब उसने कई टेक देने के बाद भी सीधा हाथ ही बढ़ाया तो विधु ने नेहा से अपना सीधा हाथ काटने को कहा। इसके बावजूद वह सही हाथ नहीं बढ़ा सकी तो गुस्से में विधु ने खुद उनका सीधा हाथ दांतों से काट लिया। बताया जाता है कि उस वक्त विधु, विनोद चोपड़ा, शबाना पर सबके [संगीत] सामने बुरी तरह चिल्लाए भी थे। तो ऐसा होता है बॉलीवुड में नई एक्ट्रेसेस के साथ बिहेवियर। पर्दे पर सपनों की दुनिया और पर्दे के पीछे जिल्लत और अपमान का घूंट भी पीना पड़ता है। तो यह थी कहानी 90ज की एक खूबसूरत और टैलेंटेड एक्ट्रेस शबाना उर्फ़ नेहा की। आपको इनकी कौन सी फिल्म सबसे ज्यादा पसंद है? कमेंट सेक्शन में लिखकर जरूर बताइएगा। साथ ही अपनी [संगीत] राय भी दीजिएगा कि आखिर क्या वजह रही कि इतनी होनहार होने के बावजूद नेहा का करियर ज्यादा आगे तक नहीं चल सका। [संगीत] तो चलिए कुछ और नए किस्से कहानी के साथ अगले एपिसोड में आपसे फिर होगी मुलाकात।

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