तो दिल्ली में आंदोलन खत्म होने के बाद सीजेपी की तरफ से बयान भी सामने आया। सी बीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने यह ऐलान किया कि आंदोलन का सिलसिला यहीं खत्म नहीं होने वाला है। सौरव [संगीत] दास कह रहे हैं कि यह तो बस एक ट्रेलर है।
पिक्चर अभी बाकी है। हम पूरे देश [संगीत] में जाएंगे और देश की सभी समस्याओं का समाधान करेंगे। ये बड़ी बात बीजेपी [संगीत] की तरफ से कही गई है। देश के युवा जाग चुके हैं। ये बस एक ट्रेलर है। पिक्चर अभी बाकी है। देश के युवा जग चुके हैं। देश के युवा इस देश में जितने समस्याएं हैं
उनको हल करेंगे। हम एज अ पार्टी एज अ मूवमेंट ऑब्वियसली ये खत्म नहीं हो रहा है। अब हम लोग देश भर जाएंगे। युवाओं की बात सुनेंगे। युवाओं के लिए सबसे बेस्ट जो पॉलिसी होगा वो हम लोग लाएंगे एंड हम लोग सब लोगों से जवाबदेही सब लोगों से अकाउंटेबिलिटी मांगते रहेंगे। अभी तो बस शुरू हुआ है। आगे बहुत कुछ करना है। देश के युवा जाग चुके हैं।
देश के युवा अब नहीं रुकेंगे। तो देश के युवा अब नहीं रुकेंगे। यह बात सौरव दास कह रहे हैं। 36 दिन चले आंदोलन के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया। लेकिन यह भी विडंबना है कि तीन दशक [संगीत] पहले उड़ीसा में पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन से ही वो सियासत की बुलंदियों पर चढ़ना शुरू हुए थे। [संगीत] इतिहास कभी-कभी राजनीति के पन्नों पर ऐसा चक्रव्यूह रचता है जहां अतीत और वर्तमान आमने-सामने खड़े हो जाते हैं।
तस्वीर का एक सिरा करीब तीन दशक पुराना है। जहां एक युवा छात्र नेता पेपर लीक के खिलाफ सड़क पर उतरा था और पुलिस की लाठियों से उसकी हड्डियां तक टूट गई थी। और दूसरी तरफ वो तस्वीर जहां वही नेता केंद्र सरकार में शिक्षा मंत्री बना लेकिन पेपर लीक के मुद्दे पर हुए छात्रों के आंदोलन के कारण उसे इस्तीफा देना पड़ा। इतिहास का जैसे एक चक्र पूरा हो गया। [संगीत] साल 1997 जगह भुवनेश्वर। साल 1997 में जब केंद्र में अटल बिहारी वाजपेई की सरकार राजनीतिक उथल-पुथल से गुजर रही थी और ओसा में जानकी वल्लभ पटनायक के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी। उसी दौर में राज्य में एक परीक्षा का प्रश्न पत्र लीक