यह जबलपुर क्रूज हादसे के कुछ सेकंड पहले की वीडियो है। जब क्रूज डूबने वाली थी उससे कुछ सेकंड पहले जो यात्री थे उन्होंने यह वीडियो बनाई थी। उसमें देखिए एक मां अपने बेटे को लेकर बैठी है आराम से। इन्हें नहीं पता कि कुछ सेकंड बाद यह बोट डूबने वाली है और इन सबकी जान चली जाएगी।
अब तक नौ लोगों की हो चुकी है और अभी भी चार से ज्यादा लोग जो है लापता हैं। यह पहली वीडियो थी और साफ-साफ दिशा निर्देश है कि बिना सेफ्टी जैकेट के आप ट्रैवल नहीं कर सकते। आप नहीं घूम सकते। और यह दूसरी तस्वीर देखिए। यह दूसरी तस्वीर उस वक्त की है जब यह नाव डूबने लगी थी। जब ये फ्रूट शिप डूबने लगी थी तब लोगों को लाइव जैकेट बांटा जा रहा था। लाइफ जैकेट बांटा जा रहा था। उसके साथ-साथ वीडियो भी बनाई जा रही थी। यह तस्वीरें दोनों तस्वीर देखिए।
पहली तस्वीर इसमें देखिए कैसे आराम से लोग जो हैं हंस खेल रहे हैं वीडियो बना रहे हैं। सेम ऐसा ही सिचुएशन मथुरा में था। मथुरा वाले केस में भी आराम से लोग बैठे थे। भजन कीर्तन कर रहे थे। वीडियो बना रहे थे। लोगों को नहीं पता था क्या कुछ होने वाला है। लेकिन यहां एक शख्स ने नोटिस किया था तेज हवाओं को। उसने वहां के जो कैप्टन है शिप के क्रूस के उन्हें बताया था कि तेज हवाएं चल रही है। आप वापस से किनारे की तरफ ले जाओ। लेकिन कैप्टन ने उसकी बात को नजरअंदाज कर दिया। जिसके बाद तेज हवाएं आई और शिप डगमगा गई।
जैसे ही पानी में डूबने वाली थी, लोगों ने चिल्लाना शोर मचाना शुरू कर दिया। तब इन्होंने लाइफ जैकेट जो पैक था, उसे खोलकर एक-एक लोगों को बांटने लगे। एक बार ये पूरी तस्वीर देखिए। दोबारा एक बार तस्वीर देखिए। दिया आपने उस बोट की तस्वीर देखी। कैसे लोग उसमें बैठे हैं। आपने एक चीज नोटिस की होगी कि उसमें एक मां अपने बच्चे को लेकर बैठी है। वो चार साल का बच्चा है और 40 साल की मरीना अपनी फैमिली के साथ घूमने आई थी। दिल्ली से इनकी फैमिली जो है वो घूमने आई थी।
हुई थी किसी से आप लोगों की वहां पर मैरीना से की बात हुई थी जी जी मेरी मेरी वाइफ से बात हुई थी। हां। जब शिप डूबा नहीं था उस टाइम मेरे ख्याल से 5:30 6 बजे का टाइम था तो वो वीडियो दिखा रहे थे पूरा और बहुत अच्छा लग रहा था। एंजॉय कर रहे थे सारे गाना चल रहा था। मैरीना जी से बात हो रही थी? हां मैरीना तो आपकी क्या लगेंगे?मेरी जो वाइफ है उनकी बहन है। बड़ी बहन है। ठीक है। तो बहुत अच्छा था माहौल वहां पे और इतने में मैं अपने बेटे को ट्यूशन छोड़ने गया 5:00 बजे और मैं आया हूं वहां से 5:30 करीब आया हूं। तो वो बहुत जोर से चिल्लाने लगी। 5:30 से 6:00 बजे का टाइम होगा। तो मैंने पूछा क्या हो गया? उनका फोन आया। वह ऐसे बोल रही है कि मुझे बचा लो प्रेयर करो मेरे लिए और शिप डूब रहा है। पानी आ गया है। पता नहीं कैसे आ गया उसके अंदर। तो बस इतना बोला।
फिर उसके बाद फोन कल कर रहे हैं तो कॉल नहीं जा रही है। फोन बिल्कुल बंद हो गया। फ़ बिल्कुल बंद। जी। उसके बाद बात। हां। उसके बाद बात नहीं हुई। उसके बाद थोड़ी देर के बाद फिर हमने कोशिश करी। मेरे पास कॉल आया डैडी का मेरे पास और कोई शायद नौका वाला था जिसने निकाला था। उसने बताया कि आपसे बात करना चाह रहे हैं। मैंने बात करी और बात करने के बाद मैंने पूछा मम्मी कह रहा बेटा मम्मी तो नहीं है यहां। चली गई मम्मी। तूने नहीं बचाया। बाद में सब लोग मिसिंग थे। सिस्टर का पता नहीं था कहां है वो। हम वेट कर रहे थे कि शायद बच जाएंगी बच जाएंगी। जो नौका थी वो फ्लोट कर रही थी।हमें यह नहीं पता था कि वो बेचारी उसी के अंदर हैं। हमने सोचा कि शायद जो उन्होंने जैकेट पहनी थी और जहान को भी उसी के अंदर कर रखा था जो छोटा बेटा था। हो सकता है कि वो कहीं बह के कहीं इधर आसपास गए हो। लेकिन उसके अंदर देखा नहीं।
किसी ने ढूंढा नहीं। और सुबह जाके जब टीम आई है तब जाके उन्होंने वहां देखा है तो वो बेचारे उसी के अंदर थे। उसी के अंदर फस गए। बोट के बोट के अंदर फंस गए अगर टाइम रहते वहां पे पहुंच जाते जैसे शाम का टाइम था जो जब हम वीडियो में भी देख रहे थे कि वोट बोट जो है फ्लोट कर रही थी उस टाइम जाके उसमें देखते तो शायद वो उसमें मिलते और और लोग भी मिल पाते उसमें यानी लापरवाही तो है.आपकी सर लापरवाही बिल्कुल है और जब यह हादसा हुआ उस टाइम जो वहां के गांव वाले जो लोग थे उन्होंने ही सारा रस्सी फेंक फेंक के बचाया प्रशासन की तरफ से बहुत ही लेट बचाव की नौका वगैरह कुछ नहीं की बचाव की नौका एक एक बोट आई थी वहां वहां पे मैं मैं वहां पे नहीं था। मैं नहीं कह सकता कैसे आई वहां पे कि जो घूम रहे थे वही थे कि कोई और आया था वहां पे। लेकिन उस टाइम जिन्होंने बचाया वो आसपास वाले ही थे। गांव वाले लोकल जो थे उन्होंने ही बचाया प्रशासन की तरफ से कोई भी बहुत देर में कारवाई हुई है सारी जितनी भी हुई है।
जो जैसे लोकल लोगों ने कुर्ती दिखा के उनको बचाने का प्रयास किया। अगर वो एनडीआरएफ की टीम जो बचाव दल है वो अगर पहले आ जाता समय से जिस समय थोड़ा रोशनी भी उजाला भी था तो शायद बहुत सारे लोगों की जान बचाई जा सकती थी क्योंकि तब तक तो जो बोट थी वो दिख रही थी पानी के ऊपर और उसको जाने से पहले उस क्रूज को बोला भी गया था कि आपका मौसम खराब हो रहा है प्लीज प्लीज बैक कर लीजिए उसको किसने बोला वो छोटी छोटी बेटी जो है जो बच गई है उसने भी ये बात बताई है कि हमने बताया था.लेकिन उन्होंने नहीं मानी और जो किनारे और वो अगर वो वो नहीं लेके जाते तो ये इंसिडेंस नहीं होता। ये थे किनारे पे वो भी बोल रहे थे कि भाई किनारे पे लगा लो इसको साइड में। मौसम आगे खराब है। लेकिन वो शायद उसने अपनी मनमानी करी वो आगे को ले गया। शायद दूसरे किनारे पे ले जाना चाह रहा होगा वो। उसके बाद जो जब बोट जब गिर गई थी पानी में तो वहां तो एक ड्राइवर और जो हेल्पर था उन्होंने कोई हेल्प नहीं करी। चिंटू भैया प्रदीप भैया थे। उन्होंने वो नीचे की तरफ गए। वहां सेफ्टी जैकेट थी। उन्होंने और एक दो जनों ने और हेल्प करके जो और जा रहे थे कूद रहे थे उनके तरफ फेंकी थ्रो करी उन्होंने पहनी और जितने भी लोग बचे हैं सेफ्टी जैकेट की वजह से अगर वो नहीं होते तो शायद वो सेफ्टी जैकेट नहीं होती तो और ज्यादा लोग और लोग जाते आपकी कब बात हुई उनसे जिन्होंने कहा कि हमने बोला कि मौसम हमने वीडियोस देखे थे।