27 साल की सरला भट्ट श्रीनगर के शेर कश्मीर इंस्टट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में एक नर्स थी। 18 अप्रैल 1990 को ने इसी इंस्टट्यूट के पास मौजूद एक हॉस्टल से सरला भट्ट का किया और फिर 5 दिन तक सरला को टॉर्चर किया और बाद में मारकर सरला भट्ट की कर दी। तब ने उन्हें सेना का जासूस बताया था और यह कहकर की कि यह सेना की जासूस है। यह भारतीय सेना की जासूस है जो वहां जासूसी करने आई है।
यह वो समय था जब कश्मीर में किसी भी कश्मीरी पंडित पर ऐसे ही झूठे आरोप लगाकर उनकी हत्या कर दी जाती थी। क्योंकि उस समय जो कश्मीरी आतंकवादी थे, वह चाहते थे कि जितने भी हिंदू वहां रहते हैं कश्मीर में जो वहां के लोग हैं कश्मीरी पंडित हैं। वह सब इतने डर जाएं कि वह यहां से भाग जाए और बाद में हुआ भी यही। सरला भट्ट उस समय अनमैरिड थी।
उनकी शादी नहीं हुई थी और वो उन गिनी चुनी कश्मीरी पंडित महिलाओं में से एक थी जिन्होंने कश्मीर छोड़ने के बदले अपनी नौकरी जारी रखी। यानी सरला भट्ट ने तय किया कि वह नहीं जाएगी और अपनी नौकरी यहीं रहकर करती रहेगी। इसके बाद ने जम्मू कश्मीर के ही अनंतनाग में उनके घर पर भी ग्रेनेड से पहले हमला किया था। जिसके बाद उनका परिवार कश्मीर छोड़ने के लिए मजबूर हो गया और भाग गया कश्मीर से। चार्जशीट के मुताबिक यासीन मलिक ने ही सरला भट्ट के और की साजिश की थी।
एक और आतंकवादी खुर्शीद अहमद ने सरला भट्ट पर गोली चलाई थी और वह इस समय पाकिस्तान में है यानी पाकिस्तान भाग गया। इसके अलावा तीन और आतंकवादियों की पहले ही हो चुकी है। अब आपको बताते हैं कि इस मामले में चार्जशीट दाखिल करने में 36 वर्षों का इतना लंबा समय क्यों लगा। वर्ष 2014 में मोदी सरकार बनने के बाद कश्मीरी पंडितों से जुड़े इन पुराने मुद्दों पर खास ध्यान दिया गया। अगस्त 2019 में जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटने के बाद इस मामले में गंभीरता से जांच शुरू हुई। मार्च 2024 में लगभग 34 वर्षों के बाद जम्मू कश्मीर की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी को यह केस दिया गया और लगभग 2 साल की जांच के बाद अब यह चार्जशीट दाखिल की गई है।
हम आपसे अक्सर यह कहते हैं कि कोई भी सरकार के साथ कैसा बर्ताव करती है। उससे आतंकवाद पर उस सरकार की सोच का पता चलता है। भारत में एक वो दौर भी था जब यासीन मलिक जैसे जो आतंकवादी थे यह कश्मीर में लोगों की हत्याएं कर रहे थे। आतंकवाद फैला रहे थे। लेकिन तब भी यहां दिल्ली में इन्हें कश्मीर का प्रतिनिधि माना जाता था। कश्मीर का युवा नेता माना जाता था। कहा जाता था कि एक ऐसा युवा नेता है जो कश्मीर में बदलाव चाहता है और जम्मू कश्मीर में शांति स्थापित करने के लिए यासीन मलिक से बातचीत की जाती थी। लेकिन अब वही यासीन मलिक आतंकवादी फंडिंग के मामले में दिल्ली की तिहाड़ जेल में उम्र कैद की सजा काट रहा है और अब उसके हर गुनाह का हिसाब हो रहा है।
यासीन मलिक पर यह भी आरोप था कि वर्ष 1989 में उसने पूर्व गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद का अपहरण किया था। फिर 1990 में ही भारतीय वायुसेना के चार अधिकारियों की इसी आतंकवादी ने हत्या की थी और वर्ष 2006 में इसी यासीन मलिक से उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने तब मुलाकात की थी। यह तस्वीरें आप देखिए।
यही है वो यासीन मलिक। इन तस्वीरों में यह प्रधानमंत्री से मुलाकात कर रहा है। शांति का दूत बना हुआ है। कश्मीर का प्रतिनिधि बना हुआ है। कश्मीरियों का यह प्रतिनिधि है। दिल्ली बुलाकर प्रधानमंत्री इससे मिलते हैं। इसका सम्मान करते हैं। फोटो खिंचवाते हैं इसके साथ। बाकायदा वहां प्रेस के लोगों को बुलाया जाता है और देखिए कितने शौक से डॉक्टर मनमोहन सिंह हाथ मिलाते हुए देखिए फोटो खिंचवा रहे हैं कैमरे में लेंस में देखते हुए हालांकि डॉ मनमोहन सिंह आज जिंदा नहीं है इसलिए उनके बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता लेकिन कांग्रेस के बारे में तो हम कह ही सकते हैं।
यह थी कांग्रेस पार्टी की नीतियां। कांग्रेस पार्टी कांग्रेस की सरकारों की जो नीति थी पर उससे को ग्लोरिफाई करने में मदद मिली। यह अपने आप को हीरो समझने लगे थे। और आज आप सोचिए आज सरला भट्ट इस दुनिया में नहीं है। लेकिन उनकी आत्मा आज भी इंसाफ के लिए तड़प रही होगी। आज भी सरला भट्ट की आत्मा यह चाहती होगी कि उसे इंसाफ मिले। और जिस दरिंदे ने जिन दरिंदों ने उसकी की सिर्फ इसलिए क्योंकि वो एक कश्मीरी हिंदू थी कश्मीरी पंडित थी और वहां पर रहकर अपना काम कर रही थी और उसने कश्मीर छोड़ने से इंकार कर दिया था। सिर्फ इसलिए उसकी की गई। किया। पांच दिन तक टॉर्चर किया और मैं कह नहीं सकता। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि और पांच दिन क्या-क्या किया होगा। कैसे टॉर्चर किया होगा.
इस महिला को जो सिर्फ 27 साल की थी और फिर इसकी हत्या कर दी। आज सरला भट्ट की आत्मा इंसाफ मांग रही है और वो यह जरूर चाहती होगी कि इस प्रकार के जो दरिंदे हैं यासीन मलिक जैसे इन पर सख्त से सख्त कार्यवाही इन्हें सख्त से सख्त सजा जरूर मिलनी चाहिए। है।