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शोले में संजीव कुमार को हेमा मालिनी के साथ क्यों एक भी सिन नहीं मिला? यह थी असली वजह!

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हेलो दोस्तों, स्वागत है आपका फिल्मी जाड गर्ल पर। मैं हूं सुहानी और आज कहानी बड़ी इंटरेस्टिंग है। यह सच है कि शोले में ठाकुर और बसंती एक साथ नहीं दिखे ऐसा क्यों हुआ? इसे बस अभी बताती हूं, लेकिन पहले कहानी सुनो। शोले की शूटिंग चल रही थी। एक सीन बार-बार फेल हो रहा था। सीन में गोलियां निकलने वाला वो मुश्किल शॉट धर्मेंद्र बार-बार ट्राई कर रहे थे। बार-बार गलती हो रही थी और आखिर में फ्रस्ट्रेशन इतना बढ़ जाता है कि उन्होंने असली गन भर दी और चला दी। ऊपर पहाड़ी पर खड़े थे अमिताभ बच्चन गोली उनके कान के पास से निकल गई। खुद अमिताभ ने बरसों बाद केबीसी में ये बताया कि मैं बच गया उस दिन। यार जरा सोचो शोले के सेट पर वो गोली अगर 1 इंच भी इधर-उधर हो जाती तो हिंदी सिनेमा की पूरी हिस्ट्री कुछ और ही होती। लेकिन सवाल ये नहीं कि उस वक्त धर्मेंद्र का दिमाग कहां था? किस उलझन में था? और किस वजह से वो अपना एक्ट नहीं कर पा रहे थे? उसको समझने के लिए हमें थोड़ा सा पहले जाना पड़ेगा। बसंती इन कुत्तों के सामने मत नाचना संभाल। जब तक तेरे पैर चलेंगे उसकी सांस जलेगी। याद करो शोले के सीन में ठाकुर और बसंती एक साथ नहीं दिखे। किसी में भी नहीं बल्कि शोले में बसंती सब जानती है। जयवी को वही रामनगर लेकर जाती है। ठाकुर के घर तक पहुंचाती है। पूरा गांव तांगे पर घुमाती है। लेकिन दूसरी तरफ उन दोनों का कहां मिलना तक नहीं दिखाया गया। संजीव कुमार हेमा मालिनी आमने-सामने खड़े हो कोई बातचीत हो यह दूर की बात है। यहां तक कि ठाकुर पूरी फिल्म में बसंती का नाम तक शायद नहीं लेते।

अब कहने को यह कहा जा सकता है कि यह स्क्रीनप्ले की वजह से हुआ। लेकिन असल में इसके पीछे भी धर्मेंद्र को ही बताया जाता है। तो एक तरफ हेमा मालिनी को संजीव कुमार यानी ठाकुर के पास ना जाने देना और अमिताभ यानी जय पर असली गोली चला देना। यह है शोले की वो कहानी जो आज मैं तुम्हें बताने वाली हूं। तो शोले से जुड़ी इन बातों के पीछे बॉलीवुड में पिछले कई दशकों से कुछ राज छिपे हैं। वही सुनाऊंगी तुम्हें। एक कहानी सुनाई जाती है हमें और उस कहानी में शोले के गब्बर से भी ज्यादा खतरनाक चीज है और वो है प्यार में पड़ा हुआ धर्मेंद्र। कहा जाता है कि धर्मेंद्र पाजी नहीं चाहते थे कि संजीव और हेमा मालिनी का एक भी सीन साथ में रखा जाए। अब सवाल तो आएगा ही ना। क्यों नहीं चाहते धर्मेंद्र ऐसा? आखिर क्यों? तो बताया जाता है कि पर्दे पर ठाकुर और बसंती के बीच भले ही कहानी नहीं थी लेकिन पर्दे के पीछे धर्मेंद्र हेमा मालिनी और संजीव कुमार अपनी लव ट्रायंगल की कहानी चला रहे थे और यहां पर शोले की फिल्म वाली कहानी थोड़ी देर के लिए छोड़ो असली पिक्चर अब शुरू होती है। संजीव कुमार के हेमा मालिनी के लिए फीलिंग्स होने की बात लंबे समय से लिखी जाती रही है। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने हेमा के सामने शादी का प्रपोजल भी रखा था। दोनों के परिवारों तक भी बात पहुंची थी। लेकिन रिश्ता नहीं बन पाया कि शोले की शूटिंग के दौरान संजीव ने हेमा को दोबारा प्रपोज किया। लेकिन प्रॉब्लम यह थी कि तब तक कहानी बदल चुकी थी। हेमा की जिंदगी में धर्मेंद्र आ चुके थे और धर्मेंद्र कोई चुपचाप कॉर्नर में बैठकर अपनी फीलिंग्स छिपाने वाले आदमी नहीं थे। शोले की कास्टिंग का एक दमदार मजेदार किस्सा है। धर्मेंद्र पाजी शुरुआत में वीरू नहीं थे। ठाकुर का कैरेक्टर चाहते थे। लेकिन जब रमेश सिप्पी ने उन्हें मजाकमज़ाक में समझाया कि अगर वह ठाकुर बनेंगे तो वीरू का रोल संजीव कुमार कर सकते हैं और फिर हेमा मालिनी के अपोजिट संजीव कुमार होंगे। तो धर्मेंद्र ने वीरू बनना स्वीकार कर लिया। इस किस्से को शोले की कास्टिंग हिस्ट्री में बार-बार दर्ज किया गया है। मतलब जब भी बात होती है

शोले की शूटिंग की तो यह बात अपने आप आ जाती है। मतलब आदमी रोल भी देख रहा था और यह भी देख रहा था कि हीरोइन के साथ कौन रहेगा। अब इसी बैकग्राउंड में संजीव कुमार वाला दूसरा प्रपोजल को समझते हैं जरा। संजीव कुमार की जिंदगी पर किताब लिखने वाले हनीफ ज़बेरी के मुताबिक संजीव कुमार दूसरी बार प्रपोज करने से हेमा और धर्मेंद्र दोनों अपसेट हुए थे। और यहीं से वो फेमस कहानी आ जाती है। कहा जाता है कि इस प्रपोज के बाद धर्मेंद्र ने रमेश सिरी से कहा कि सेट पर डेकोरम रखा जाए और हेमा मालिनी और संजीव कुमार के साथ सीनंस ना दिए जाएं। धर्मेंद्र उस समय फिल्म के सबसे बड़े स्टार में से एक थे और जानने वाले कहते हैं कि उनकी बात मान ली गई और रिजल्ट्स हमारे सामने हैं। ठाकुर अलग, बसंती अलग, पूरी शोले निकल गई। दोनों मिले ही नहीं। अब यार जरा और गहराई से देखो। भारत और हिंदी सिनेमा के सबसे मशहूर और सक्सेसफुल फिल्म शो लेके हर पहलू पर बात होती रही है। कास्टिंग पर, स्टोरी पर, स्क्रीन प्ले पर। आज शो लेके हम सलीम जावेद की राइटिंग रमेश सिप्पी के डायरेक्शन गब्बर जयवी की दोस्ती ठाकुर के रिवेंज और बसंती की कॉमेडी पर है। लेकिन इस कहानी के हिसाब से देखें तो फिल्म का सबसे बड़ा क्रिएटिव डिसीजन शायद जेलेसी ने लिया था। इसमें क्रिएटिविटी का कोई रोल नहीं था। और उससे भी मजेदार बात यह है कि कहानी पर इसका कोई खास असर भी नहीं पड़ा। आपने शोले देखी, पसंद की शायद 10 बार देखी, डायलॉग याद किए। कितने आदमी थे बसंती इन कुत्तों के सामने वश नाचना क्या होगा तेरा कालिया सब याद रह गया लेकिन बहुत लोगों को कभी लगा ही नहीं। अरे बसंती और ठाकुर तो मिले ही नहीं। लेकिन यार यहां एक कहानी में प्रॉब्लम है क्योंकि धर्मेंद्र वाली कहानी बहुत फेमस जरूर है। लेकिन क्या हम इसे 100% फैक्ट मान सकते हैं? यही मामला थोड़ा सा उलझ जाता है क्योंकि शोले के डायरेक्टर रमेश सिप्पी ने हाल ही में एक इंटरव्यू में सेट के माहौल को लेकर कुछ अलग कहा। उनसे धर्मेंद्र और हेमा अमिताभ जया की पर्सनल रिलेशनशिप के बारे में पूछा गया।

तो उनका कहना था कि सेट पर काम सबसे बड़ी प्रायोरिटी था और किसी स्टार ने अपनी पर्सनल फीलिंग्स को शूटिंग के बीच में नहीं आने दिया। अब जरा सोचो एक तरफ दशकों से चला आ रहा एक किस्सा कहता है कि धर्मेंद्र की पर्सनल फीलिंग्स ने हेमा और संजीव के सींस तक प्रभावित किए। दूसरी तरफ फिल्म का डायरेक्टर कह रहा है कि पर्सनल फीलिंग्स ने शूटिंग को प्रभावित नहीं किया। तो क्या है सच? और यार यही कहानी गॉसिप से इंटरेस्टिंग बन जाती है क्योंकि हो सकता है कि धर्मेंद्र ने रिक्वेस्ट की हो क्योंकि उसका असर बाद में बढ़ा चढ़ाकर दिखाया गया हो। हो सकता है कि स्क्रीन प्ले में वैसे ही ठाकुर और बसंती के सींस की जरूरत ही ना हो। हो सकता है कि दोनों बातें कुछ हद तक सच हो। लेकिन एक चीज जो हमारे सामने है संजीव और हेमा मालिनी जैसे दो बड़े स्टार एक ही फिल्म में हैं। दोनों इंपॉर्टेंट कैरेक्टर हैं। एक ही गांव में है। फिर भी प्रैक्टिकली उनकी दुनिया अलग-अलग चलती है। और फिर जब आप पर्दे के पीछे का ट्रायंगल जानते हो तो कोइंसिडेंस को इग्नोर करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। लेकिन कहानी में धर्मेंद्र का एक और साइड है और मेरे हिसाब से यह उससे ज्यादा इंटरेस्टिंग है। अगर धर्मेंद्र सिर्फ इनसिक्योर सुपरस्टार होते तो शायद हर दूसरे मेल एक्टर से प्रॉब्लम होती। लेकिन ऐसा तो नहीं था। उसी शोले में एक और एक्टर था अमिताभ बच्चन। आज सुनने में अजीब लगता है लेकिन उस वक्त अमिताभ धर्मेंद्र से बड़े स्टार नहीं थे बल्कि जय के रोल को अमिताभ को देने के लिए धर्मेंद्र पाजी की ही रिकमेंडेशन थी। उनके लिए रमेश सिप्पी से बात की और धर्मेंद्र ने भी की। अब जरा कंट्रास्ट देखो। एक तरफ थे संजीव कुमार जिनके साथ हेमा का सीन करने का मामला आया तो धर्मेंद्र अलर्ट बताए जाते हैं और दूसरी तरफ धर्मेंद्र के साथ अमिताभ जिनके करियर का मामला आया तो वहीं धर्मेंद्र उनके यानी दूसरे को एक्टर को आगे बढ़ने के लिए मदद कर रहे हैं और आगे क्या हुआ?

हम सब जानते हैं अमिताभ बच्चन सबसे बड़े सुपरस्टार बन गए। खुद धर्मेंद्र से भी बड़े। लेकिन मैं यहां यह नहीं कहूंगी कि धर्मेंद्र को पता नहीं था कि अमिताभ आगे चलकर उनसे बड़े स्टार बन जाएंगे यार। यह कौन जान सकता है? 1970 में कोई फ्यूचर नहीं देख सकता था। मेरे हिसाब से इंटरेस्टिंग बात दूसरी है। धर्मेंद्र की इनसिक्योरिटी करियर को शायद उतनी थी ही नहीं जितनी हेमा को लेकर थी। और शायद इसी वजह से शोले का सेट उनकी पर्सनालिटी के दो बिल्कुल अलग-अलग साइड दिखाता है। एक धर्मेंद्र वो जो प्यार में पज़ेसिव थे। दूसरे धर्मेंद्र वो जो करियर में इतने सिक्योर थे कि उन्हें एक स्ट्रगलिंग एक्टर के लिए रिकमेंडेशन कर सकते थे। और हेमा के मामले में उनका हाल क्या था? उसका एक और मशहूर किस्सा सुनो। कहा जाता है कि धर्मेंद्र हेमा के साथ रोमांटिक सीन्स के दौरान लाइफ बॉयज को पैसे दिया करते थे ताकि शूट में कोई गड़बड़ हो जाए और रिटेक करने पड़े। मतलब डायरेक्टर सोच रहा है शूट खराब है और धर्मेंद्र पाजी अंदर ही अंदर खुश हैं कि चलो हेमा के साथ दो मिनट और मिल जाए। अब आप खुद बताओ ऐसे आदमी के बारे में अगर कोई कहे कि उसने हेमा और संजीव को एक फ्रेम में नहीं आने दिया तो कहानी बिलीवेबल जरूर लगती है। लेकिन बिलीवेबल होने और प्रूवन होना दो अलग चीजें हैं। और शायद शोले के इस राज की सबसे मजेदार बात यही है। हमारे पास फिल्म है। हम अपनी आंखों से देख सकते हैं कि ठाकुर और बसंती साथ नहीं है। हमारे पास उस दौर की लव स्टोरी है। हमें पता है कि संजीव कुमार के हेमा मालिनी के लिए फीलिंग्स की बात आम सामने आती रही है। हमें पता है कि धर्मेंद्र और हेमा के रिलेशनशिप शोले के दौरान आगे बढ़ रहे थे और हमारे पास एक ऐसा किस्सा है जो इन सारी चीजों को और खूबसूरती से जोड़ देता है।

लेकिन फिर डायरेक्टर रमेश सिप्पी की बात आकर कहानी में एक नया क्वेश्चन मार्क लगा देती है। और यार शायद इसी वजह से 50 साल बाद भी शोले खत्म नहीं होती। हर जनरेशन गब्बर और जयवी की जोड़ी देखती है। फिर कोई पीछे जाकर शूटिंग के किस्से खोजता है। कोई पूछता है गब्बर के लिए पहले कौन था? कोई पूछता है जय का रोल किसे अमिताभ बच्चन को मिलने वाला था? और फिर कोई अचानक फिल्म रोक कर पूछता है कि एक मिनट ठाकुर और बसंती कभी मिले क्यों नहीं? और उस छोटे से सवाल के जवाब निकल कर आते हैं बॉलीवुड की पूरी लव स्टोरी से। संजीव कुमार को हेमा पसंद थी। हेमा की जिंदगी में धर्मेंद्र आ चुके थे। धर्मेंद्र प्यार में थे लेकिन संजीव कुमार भी शायद उम्मीद नहीं छोड़ रहे थे और इन सबके बीच रमेश सिप्पी बना रहे थे शोले। तो अगली बार जब शोले देखो तो एक काम जरूर करना बसंती के हर सीन को ध्यान से देखना। ठाकुर के हर सीन को ध्यान से देखना और फिल्म को डिसाइड करना कि यह सिर्फ स्क्रीन प्ले का कोइंसिडेंस था या फिर धर्मपाजी ने सच में रमेश सिी से कहा था हेमा और संजीव को एक साथ मत रखना। आपको क्या लगता है यह सिर्फ बॉलीवुड की 50 साल पुराना किस्सा है या पर्दे के पीछे की लव स्टोरी सच है मुझे कमेंट करके जरूर बता देना। फिल्मी जाटल को सब्सक्राइब जरूर करना।

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