बॉलीवुड में दोस्ती और दुश्मनी की कई कहानियां आपने सुनी होंगी लेकिन क्या कभी आपने सोचा है एक झगड़ा किसी फिल्म मेकर का पूरा करियर रोक सकता है। एक ऐसा डायरेक्टर जिसने कांटे जिंदा शूट आउट एट वडाला जैसी फिल्में बनाई। उन्होंने एक वक्त ऐसा भी देखा जब लोगों ने उनका फोन उठाना तक बंद कर दिया। नौबत यहां तक आ गई कि उसे अपना ऑफिस बंद करना पड़ा और घर चलाने के लिए होटल में काम करना पड़ा। हम बात कर रहे हैं फिल्म मेकर संजय गुप्ता की जिनका हाल ही में निधन हो गया। उनके जाने के बाद संजय दत्त के साथ उनके पुराने झगड़े की कहानी एक बार फिर चर्चा में है।
दरअसल संजय दत्त और संजय गुप्ता ने एक साथ कई फिल्मों में काम किया। दोनों की जोड़ी ने बॉलीवुड को कांटे मुसाफिर जिंदा जैसी फिल्में दी। एक वक्त ऐसा था जब दोनों के बीच काफी अच्छी दोस्ती थी। लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ कि दोनों के रिश्ते में दूरी आ गई। करीब 4 साल तक दोनों ने एक दूसरे से बात तक नहीं की। इस विवाद के बारे में संजय गुप्ता ने खुद एक इंटरव्यू में खुलकर बात की। उन्होंने बताया था कि उनके और संजय दत्त के बीच असल में कोई ऐसी बड़ी गलती नहीं हुई थी बल्कि उनके आसपास मौजूद लोगों ने दोनों के बीच गलतफहमियां पैदा करने की कोशिश की।
संजय गुप्ता ने बताया था कि 4 साल तक दोनों ने एक दूसरे के खिलाफ कोई बयान नहीं दिया। ना उन्होंने संजय दत्त के बारे में कुछ गलत कहा और ना ही संजय दत्त ने उनके खिलाफ कुछ कहा। लेकिन इस खामोशी के बीच उन्हें अपने करियर में बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। डायरेक्टर ने बताया कि वह करीब 3 साल तक बेरोजगार रहे। इंडस्ट्री के लोगों ने उनसे बात करना बंद कर दिया। उनके फोन तक उठाए नहीं जाते थे। उन्हें ऐसा महसूस होता था जैसे अब उनके लिए काम के रास्ते बंद हो चुके हैं। संजय गुप्ता ने अपने इंटरव्यू में एक और दर्द भरी कहानी बताई थी। उन्होंने कहा था कि एक वक्त ऐसा भी आया जब उन्हें अपना ऑफिस बंद करना पड़ा। वो ऑफिस किराए पर देने के बारे में सोच रहे थे क्योंकि उन्हें लगा था कि अब फिल्म मेकिंग का काम उनका खत्म हो चुका है। उस टाइम पर उनकी पत्नी प्रेग्नेंट थी और घर चलाने की जिम्मेदारी भी उनके ऊपर थी। ऐसे में उन्होंने अपने दोस्त के लोनावला होटल में काम करना शुरू कर दिया ताकि परिवार का खर्चा चल सके। सोचिए जिस इंसान ने बड़े-बड़े सेलेब्स के साथ फिल्में बनाई हो उसे एक वक्त अपने परिवार को संभालने के लिए इस तरीके से काम करना पड़ा।
संजय गुप्ता के लिए दौर कितना मुश्किल रहा होगा इसका अंदाजा उनकी बातों से लगाया जा सकता है। लेकिन इस कहानी में दिलचस्प मोड़ भी आया। करीब 4 साल की दूरी के बाद संजय दत्त और संजय गुप्ता की मुलाकात अमिताभ बच्चन के 70वें जन्मदिन की पार्टी में हुई। संजय गुप्ता ने बताया कि उस वक्त जॉन अब्राहम से बात कर रहे थे। तभी पीछे से आवाज आई हाय गुप्स। यह संजय दत्त थे। वह उनके पास आए। उन्हें गले लगाया और दोनों की आंखें भर आई। इसी मुलाकात के साथ ही दोनों के बीच पुरानी गलतफहमियां दूर हो गई। हालांकि इस मुलाकात के बाद दोनों ने फैसला भी लिया। संजय गुप्ता के मुताबिक दोनों ने तय किया कि अब वह दो साथ में काम नहीं करेंगे। पहला साथ बैठकर शराब नहीं पिएंगे और दूसरा साथ में फिल्में नहीं बनाएंगे। यानी जिस झगड़े ने कभी दोनों को एक दूसरे से दूर कर दिया था उस कहानी का अंत एक भावुक मुलाकात के साथ हुआ। आज संजय गुप्ता हमारे बीच नहीं है। लेकिन उनके निधन के बाद उनका यह पुराना इंटरव्यू और संघर्ष का दौर फिर से चर्चा में आ गया।
कांटे जिंदा मुसाफिर शूट आउट एंड वडाला जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी जिंदगी की यह कहानी बताती है कि पर्दे पर सफल दिखने वाले फिल्म मेकर्स को भी निज जिंदगी और करियर में कितने मुश्किल दौर से गुजरना पड़ता है। संजय दत्त का जाना फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है। अब उनके चाहने वाले उनकी फिल्मों और उनके काम के जरिए उन्हें याद कर रहे हैं।