भाई लोग कह रहे है कि समय रहना तो शकुनी मामा से भी तेज निकले। उन्होंने मां-बाप के नाम पर आंसू बहाकर अपने तो छोड़िए बलराज के भी। लोगों को अपनी साइड कर लिया है। भाई एक कहावत है, एक दोहा है। समय पाए फल होत है समय पाप झरी जात। सदा रहे नहीं एक सी का रहीम मन पछतात। हां। रहीम दास जी का यह दोहा बताता है कि हर चीज का एक मुश्किल वक्त होता है। समय-समय की बात है। वक्त आने पर फल पेड़ पर लगते भी हैं और फिर झड़ भी जाते हैं।
समयना ने अपने हिसाब से सही वक्त पर उनके ऊपर लगे हुए तमाम आरोपों को तो झाड़ दिया है। लेकिन उन्हें यह तक नहीं पता चला कि पिछला साल जितना बुरा उनका वक्त चल रहा था। अब और भी बुरा चल रहा है। जितनी गाली उन्हें तब नहीं पड़ी थी वो अब भी लोग दे रहे हैं। लेकिन अब अब एक बड़ा तबका है जो उनके साथ बिखड़ा हो गया है। जी हां सोशल मीडिया पर अब दो चीजें चल रही हैं। एक तबका है जो समय रहना के साथ है जो कह रहा है कि देखिए समय ने क्या कुछ झेला। समय की गलती भी नहीं थी। किसकी गलती, कहां की ईंट, कहां का रोड़ा, कहां ला के माथा फोड़ा। दूसरा एक तबका जो ये कह रहा है कि भाई ये नहीं सोचा था कि समय अपनी इमेज क्लीन करने के लिए अपने मां-बाप तक को ले आएगा। लोग कह रहे हैं कि उन्होंने तो अपने छोड़िए बलराज तक के मां-बाप को ले आए।
लेकिन मुझे नहीं लगता कि इसमें कुछ गलत है। एक बात बताओ उसने वो एक्सपीरियंस बताया और किसी के भी साथ वो एक्सपीरियंस होगा तो उसके मां-बाप पर क्या गुजरेगी? क्या इसमें गलत है कुछ? मुझे तो कुछ नहीं लगा। लोग कह रहे हैं कि इसने मूर्ख बना दिया है सबको। इसने इमोशनल एम्पथी ले ली सबसे। इस सिंपैथी वोट का एक खेल होता है इंडिया के अंदर जो खूब चलता है। यहां तो नेता लोग प्रधानमंत्री मंत्री बन जाते हैं। ये तो समय फिर भी कॉमेडियन था। इमोशनल सिंपैथी बड़ी इंपॉर्टेंट चीज होती है। जी हां। कहने वाले कह रहे हैं कि अश्लीलता थी इनके उसमें। ये औरतों को दिखाने का कई और तरीके के चीजें निकालते हैं। बातें करते हैं। रेबल किड अपूवा का नाम लिया। फिर उनकी तारीफ भी की। फिर घटिया जो हरकतें थी सारी रणवीर अलाबादिया पर डाल दी। अब तमाम चीजें आती हैं।
और फिर वो उसमें जो जोक था अपूवा वाला उसकी तारीफ कर रहे हैं भाई साहब। मतलब क्या ही कहा जाए। हां एक चीज तो है कि रणवीर की सोच जो जरूर सामने रखी है रणवीर के कंधे पर रखकर खूब बंदूक दागी है। उन्होंने क्लियर कर दिया 1 घंटे 21 मिनट के एपिसोड में 40 मिनट रणवीर अलाबादिया को ही लपेटा है। जैसे कि 100% सारी गलती रणवीर की हो। अब गलती थी लेकिन पूरी गलती रणवीर की थी क्या? हां। मतलब उन्होंने कहा कि देखो मेरा अमेरिका का जो शो था जो टूर था वो बड़ा कमाल का गया। है ना? रणवीर ने उसमें आठ बार वो बात बोली उसके अलावा घटिया चीजें बोली थी। रणवीर के खिलाफ एक अच्छी चीजें हो गई है। फिर थेरेपिस्ट वाला जिक्र हुआ और फिर जब उन्होंने जिस तरीके से मां का जिक्र किया वहां पर थोड़ा सा मैं भी इमोशनल हो गया।
चीजों के बारे में बात तो की है। बात फिर कश्मीर की भी आई। कश्मीरी पंडितों की भी आई। 1997 में कश्मीर के पलायन का भी जिक्र किया। उस 1 घंटा 21 मिनट के स्टैंड अप में समय रैना ने स्टैंड अप नहीं बल्कि एक इमेज क्लीनिंग का काम किया जिसमें कहीं-कहीं पर हंसी भी आती है, कहीं-कहीं पर रोना भी आता है। इसीलिए लोग कह रहे हैं कि दो तरीके मैंने बताया। कुछ लोग कह रहे हैं कि समय ने अपनी इमेज क्लीन की। अपने मां-बाप बलराज के मां-बाप का इस्तेमाल करके दूसरे लोग कह रहे हैं कि देखो समय पर क्या-क्या गुजरा है। आप बताइए आपका क्या कहना है? आप किस तरफ हैं? क्या आपको भी लगता है कि रणवीर अलाबादिया को जरूरत से ज्यादा बदनाम किया गया? अपूवा को जरूरत से ज्यादा नीचे लाया गया। क्या लगता है आपको? आपकी अपनी राय क्या है?