Cli

बॉलीवुड की यह मशहूर अभिनेत्री ने ठुकराया था सलमान का रिश्ता? नाम जानकर चौंक जाओगे

Uncategorized

से प्यार [संगीत] करते नींद तक उड़ा 90 के दशक की वो मुस्कान जिसे देखते ही पूरा हिंदुस्तान ठहर जाता था। [संगीत] या नागर तू है मेरी मासूम आंखें शरारती अदाएं और चेहरे पर ऐसी कशिश कि लोग सिर्फ फिल्म देखने नहीं जूही चावला को देखने सिनेमाघरों तक जाते थे मोहब्बत का इजहार लेकिन क्या जूही की कहानी सिर्फ खूबसूरती और मुस्कान की थी बिल्कुल नहीं तुम लोग मुझे ढूंढ रहे हो और मैं तुम्हारा यहां इंतजार कर रही हूं कम उम्र में मिस इंडिया बनने के बावजूद जूही को बॉलीवुड में लगातार रिजेक्शन झेलने पड़े। अरे कोई है हिट गानों और सुपरहिट फिल्मों के बीच कई फ्लॉप फिल्मों का बोझ भी आया। मेरी तिरछी नजर में है जादू। [संगीत] मेरी पतली कमर में है जान। होठों पे पिया तेरा [संगीत] नाम है। सबसे बड़ी मुश्किल थी उनकी क्यूट एक्ट्रेस वाली छवि जिसने उनकी गंभीर अभिनय क्षमता को कई बार पीछे कर दिया। ऐ मेरे [संगीत] हमसफर एक एक वक्त ऐसा भी आया जब इंडस्ट्री में माना जाने लगा कि जूही सिर्फ हल्के-फुल्के रोमांटिक किरदारों के लिए बनी है। धक्का लगा [चीखने की आवाज़] धक्का लगा रे। लेकिन क्या यही वजह थी कि उनके गंभीर किरदारों को वह पहचान नहीं मिली जिसकी वो हकदार थी। नहीं राम जी ऐसा मत कीजिए। हमारी अगली परीक्षा मत लीजिए। और फिर आता है एक चौंकाने वाला किस्सा। कहा जाता है कि दिग्गज फिल्मकार बी आर चोपड़ा की महाभारत में द्रोपदी की भूमिका के लिए जूही पर भी विचार किया गया था। लेकिन आखिर जूही ने यह भूमिका क्यों नहीं की? क्या इसके पीछे कोई व्यक्तिगत वजह थी या करियर से जुड़ी कोई मजबूरी? अगर समीर ना होते तो जरीना लुट चुकी होती। फिर आया उनकी जिंदगी का एक और चर्चित अध्याय।

खबरों के मुताबिक सलमान खान जूही के घर शादी का रिश्ता लेकर पहुंचे थे। लेकिन इसके बावजूद दोनों ने साथ में ज्यादा काम क्यों नहीं किया? मेहमान। [गाना गाने की आवाज़] [संगीत] क्या यह सिर्फ संयोग था या इसके पीछे कोई अनकही कहानी थी? और दोस्तों बॉलीवुड की उनकी सबसे पसंदीदा ऑन स्क्रीन जोड़ियों में से एक थी आमिर खान और जूही चावला की जोड़ी। [चीखने की आवाज़] दोनों ने कई हिट फिल्में दी लेकिन एक समय ऐसा भी आया जब दोनों के बीच बातचीत तक बंद हो गई। दिल्ली के रहने वाले हैं। आप कहां के हैं? दिल्ली। आखिर दोस्ती में ऐसी कौन सी दरार आई? क्या वजह अहंकार था? कोई गलतफहमी थी या फिर कोई ऐसी घटना जिसके बारे में दोनों ने कभी खुलकर बात नहीं की। गजब का है दिल [संगीत] सोचो जरा। इसके बाद जूही ने अपने करियर के शिखर पर जय मेहता से शादी कर ली। लेकिन उनकी शादी को लंबे समय तक निजी रखा गया। आखिर उन्होंने अपनी शादी को इतना गुप्त क्यों रखा? क्या सिर्फ यह प्यार था? निजी जिंदगी की सुरक्षा थी या फिर फिल्म इंडस्ट्री की चकाचौंध से दूर रहने का फैसला मन के अंदर [संगीत] मेरे समय बदला बॉलीवुड बदला और नई अभिनेत्रियां आई धीरे-धीरे जूही मुख्यधारा के लाइमलाइट से पीछे होती चली गई [संगीत] लेकिन उनकी कहानी यहीं खत्म नहीं होती जूही चावला की कहानी सिर्फ हिट गानों, रोमांटिक दृश्यों और खूबसूरत मुस्कान की कहानी नहीं है। यह कहानी है रिजेक्शन की, सफलता और असफलता की, अपनी छवि के बोझ की, दोस्ती में आई दरार की, निजी जिंदगी को छुपा कर रखने की और हर मुश्किल के बीच मुस्कुराते रहने की। जिस चेहरे को दुनिया ने हमेशा हंसते हुए देखा, उसके पीछे भी संघर्ष की एक लंबी कहानी थी। तो क्या जूही चावला सच में सिर्फ किस्मत की वजह से सफल हुई या उनकी उस प्यारी मुस्कान के पीछे वर्षों की मेहनत, संघर्ष और समझदारी छिपी थी। सावन आया बादल आए। आज हम उनकी जिंदगी के उन्हीं अनकहे पन्नों को जानेंगे जिन्हें अक्सर बॉलीवुड की चमकदमक ने ढक दिया। तो चलिए शुरू करते हैं जूही चावला की उस कहानी को जो उनकी मुस्कान से कहीं और ज्यादा गहरी है। तोड़ो [संगीत] लाज हमारा 13 नवंबर 1967 हरियाणा के अंबाला शहर में जन्मी जूही चावला पिता डॉक्टर एस चावला एक इनकम टैक्स ऑफिसर मां मोना चावला जो होटल ओबेराई के हाउस कीपिंग विभाग में काम करती थी एक मिडिल क्लास पढ़ा लिखा

अनुशासित परिवार ना कोई फिल्मी बैकग्राउंड ना कोई गॉड फादर भाई संजीव चावला बहन सोनिया चावला और दिलचस्प बात यह कि आगे चलकर इनके भाई संजीव चावला ने शाहरुख खान की कंपनी रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट में अहम भूमिका निभाई। लेकिन तब यह सब भविष्य था। बचपन से ही जूही बेहद खूबसूरत थी। स्कूल फोर्ट कॉन्वेंट मुंबई, कॉलेज, सिडनहम कॉलेज, मुंबई। कॉलेज से निकलते ही उन्होंने कुछ ब्रांड्स के लिए मॉडलिंग शुरू की और यहीं से कहानी ने अचानक मोड़ लिया। एक दिन उन्होंने अपने दोस्तों को मिस इंडिया का फॉर्म भरते देखा। मजाकमज़ाक में खुद भी भर दिया और फिर 17 साल की उम्र में साल 1984 में जूही चावला बन गई मिस इंडिया। सिर्फ ताज नहीं जीता एक पहचान जीत ली। उसी साल उन्होंने भारत की ओर से मिस यूनिवर्स में हिस्सा लिया। हालांकि वहां उन्हें सिर्फ बेस्ट कॉस्ट्यूम अवार्ड मिला। लेकिन भारत लौटते ही किस्मत ने नया दरवाजा खोल दिया। फिल्मों के ऑफर आने लगे। स्क्रिप्ट्स की लाइन लग गई और जूही ने बिना ज्यादा इंतजार किए कई फिल्में साइन कर ली। साल 1986 फिल्म सल्तनत उनकी डेब्यू फिल्म इस फिल्म में उनके साथ थे बड़े नाम धर्मेंद्र, सनी देओल और श्रीदेवी। उनके अपोजिट थे करण कपूर। पहली फिल्म बड़ा बैनर, बड़े सितारे। लेकिन बॉक्स ऑफिस पर फिल्म बुरी तरह फ्लॉप हो गई। और जूही ना कोई खास तारीफ ना कोई बड़ा ब्रेक ना कोई स्टारडम। सोचिए मिस इंडिया का ताज पहनने वाली लड़की जिसे लगा था कि फिल्मी दुनिया बाहें फैलाकर स्वागत करेगी उसे पहले ही कदम पर झटका मिल गया। क्या यह संकेत था कि रास्ता आसान नहीं होगा। क्या इंडस्ट्री सिर्फ खूबसूरती से नहीं चलती या जूही को अभी खुद को साबित करना बाकी था। यहीं से शुरू हुआ असली सफर जहां ताज था लेकिन ताज से ज्यादा जरूरी था पहचान बनाना। दोस्तों पहली हिंदी फिल्म फ्लॉप ऑफर्स कम और सपनों का शहर अचानक थोड़ा दूर लगने लगा। ऐसे में जूही ने हार नहीं मानी। उन्होंने रास्ता बदला। मुंबई से सीधा रुख किया साउथ फिल्म इंडस्ट्री की तरफ। साल 1987 में उन्होंने दो फिल्में की। प्रेमा लोका और पारुआ रागम। नया शहर, नई भाषा, नई टीम। लेकिन एक बात वही खुद को साबित करने की जिद। इसी दौरान टीवी की दुनिया में एक महा योजना आकार ले रही थी। दिग्गज निर्माता निर्देशक बी आर चोपड़ा बना रहे थे अपना ग्रैंड टीवी सीरियल महाभारत। उन्हें चाहिए था द्रोपदी के लिए एक नया खूबसूरत प्रभावशाली चेहरा। कहा जाता है लगभग 15,000 लड़कियों का ऑडिशन लिया गया और उनमें एक नाम था जूही चावला। ऑडिशन, रिहर्सल, स्क्रीन टेस्ट और जूही ने सबको पीछे छोड़ते हुए द्रौपदी का रोल जीत लिया। यह बात बाद में अर्जुन का किरदार निभाने वाले फिरोज खान ने भी एक इंटरव्यू में कही कि उन्होंने अपनी लाइंस जूही के साथ रिहर्सल की थी। जूही लगभग फाइनल थी। शूटिंग की तैयारियां शुरू हो चुकी थी। सोचिए टीवी इतिहास का सबसे बड़ा शो भारत के घर-घर में पहुंचने वाला किरदार द्रोपदी एक मजबूत जटिल भावनात्मक रोल लेकिन तभी किस्मत ने फिर करवट ली उधर फिल्म मेकर नासिर हुसैन अपने भतीजे आमिर खान को लॉन्च करने जा रहे थे। फिल्म का नाम कयामत से कयामत तक। और इस फिल्म के लिए उन्हें चाहिए थी नई ताजी मासूम लीड एक्ट्रेस। ऑफर पहुंचा जूही चावला के पास। अब जरा सोचिए एक तरफ महाभारत की द्रोपदी दूसरी तरफ एक बड़ी रोमांटिक फिल्म में लीड रोल। टीवी की ऐतिहासिक पहचान या बॉलीवुड का बड़ा लॉन्च। फिल्मी जानकार बताते हैं जूही ने यह दुविधा खुद बी आर चोपड़ा को बताई और हैरानी की बात चोपड़ा साहब ने खुद उन्हें सलाह दी कि वह फिल्म चुने। जूही ने वह सलाह मानी। द्रौपदी का रोल छोड़ दिया जो बाद में रूपा गांगुली ने निभाया और उन्हें उससे अपार पहचान मिली। लेकिन जूही का फैसला साल 1988 में रिलीज हुई कयामत से कयामत तक। फिल्म रिलीज हुई और फिर जो हुआ वो इतिहास है। रोमांस, संगीत, मासूमियत और जूही की मुस्कान। फिल्म जबरदस्त हिट, जूही और

आमीर रातों-रात सुपरस्टार। उसी साल जूही को मिला फिल्म फेयर का लक्स न्यू फेस ऑफ द ईयर अवार्ड। अब सबको लगा बस अब तो जूही का रास्ता साफ है। लेकिन यहीं से असली परीक्षा शुरू हुई। इसके बाद आई कई फिल्में आमिर के साथ लव लव लव। कुमार गौरव के साथ गूंज, सनी देओल के साथ काफिला और राजेश खन्ना व गोविंदा के साथ स्वर्ग। फिल्मों के सारे हीरो, मेरे आगे है जीरो। [चीखने की आवाज़] उम्मीदें हर फिल्म के साथ बढ़ती गई लेकिन कोई भी फिल्म कयामत से कयामत तक वाली कामयाबी दोहरा नहीं पाई। मेरी [संगीत] एक सुपरहिट के बाद लगातार औसत या फ्लॉप फिल्में। हर शुक्रवार उम्मीद, हर सोमवार निराशा और धीरे-धीरे एक इमेज बन गई स्माइलिंग बबली क्यूट। पहले यह तारीफ थी, फिर यह पहचान बनी और फिर यही पहचान दीवार बन गई। इंडस्ट्री ने उन्हें हल्के-फुल्के ग्लैमरस रोमांटिक रोल्स में फिट कर दिया और गंभीर गहराई वाली किरदार के बारे में किसी ने सोचा तक नहीं। उन पर एक अनकहा टैग चिपक गया। क्यूट बट नॉट इंटेंस। सोचिए एक अभिनेत्री जो खुद को चुनौती देना चाहती थी, लेकिन उसे बार-बार उसी फ्रेम में कैद किया जा रहा था। साल 1990 और जूही ने एक बड़ा कदम फिर उठाया। इस बार साथ था साउथ सिनेमा के मेगा स्टार चिरंजीवी का फिल्म प्रतिबंध। मेरे दिल में प्यार है जितना फिल्म हिट रही और पहली बार इंडस्ट्री ने जूही को सिर्फ क्यूट फेस नहीं बल्कि सीरियस परफॉर्मर की तरह देखना शुरू किया। उन्हें मिला फिल्म फेयर बेस्ट एक्ट्रेस का नॉमिनेशन। यह सिर्फ नामांकन नहीं था। यह संकेत था जूही सीमित नहीं है। फिर आया साल 1992 और रिलीज हुई बोल राधा बोल साथ थे ऋषि कपूर। फिल्म ब्लॉकबस्टर लेकिन असली जीत क्या थी? जूही ने साबित कर दिया वह सिर्फ रोमांटिक और इमोशनल रोल्स तक सीमित नहीं है। उनकी कॉमिक टाइमिंग कमाल की है। उसी साल एक और फिल्म आई राजू बन गया जेंटलमैन। साथ थे शाहरुख खान। यहां जूही ने एक मिडिल क्लास आत्मसम्मानी लड़की का किरदार निभाया। ना ज्यादा ग्लैमर ना बनावटी ड्रामा। सिर्फ सच्चाई। फिल्म सुपरहिट और जूही शाहरुख की जोड़ी दर्शकों की पसंद बन गई। अब इंडस्ट्री समझने लगी थी जूही सिर्फ मुस्कान नहीं वो वर्सटाइल है और फिर आई वो फिल्म जिसने जूही को करियर का पहला फिल्म फेयर बेस्ट एक्ट्रेस अवार्ड दिलाया। हम है राही प्यार के। साथ थे आमिर खान कॉमेडी इमोशन मासूमियत सब कुछ संतुलित। जूही ने साबित कर दिया वह फिल्म अपने कंधों पर उठा सकती है। लेकिन उसी साल एक और फिल्म आई जो बिल्कुल अलग थी। डर इस बार कहानी का केंद्र एक ऑब्सेसिव प्रेमी था। साथ थे शाहरुख खान और सनी देओल। जूही ने यहां डर, असुरक्षा और मानसिक तनाव को बेहद संवेदनशील तरीके से निभाया। उन्हें फिर फिल्म फेयर बेस्ट एक्ट्रेस का नॉमिनेशन मिला। अब तक जूही 90ज की टॉप एक्ट्रेसेस में शामिल हो चुकी थी। इसके बाद इनकी फिल्में आई आईना नाजायज राम जाने साजन का घर लोफर यश बॉस हर फिल्म में अलग रंग कहीं कॉमेडी कहीं इमोशन कहीं ग्लैमर कहीं परिपक्वता लेकिन इस चमक के पीछे एक और कहानी चल रही थी 90 का दशक जहां महिला कलाकारों के लिए जगह सीमित थी। कहानियां ज्यादातर हीरो के इर्द-गिर्द घूमती थी और जो थोड़ी जगह थी उसे मीडिया ने कंपटीशन बना दिया। सबसे ज्यादा तुलना होती थी जूही चावला और माधुरी दीक्षित के बीच। हेडलाइंस कहती थी कौन है नंबर वन? किसका दौर चल रहा है? लेकिन सच्चाई दोनों अपने-अपने ढंग से शानदार थी। एक की सफलता दूसरी की हार नहीं थी। लेकिन सिस्टम को हमेशा एक सिंहासन चाहिए और उस सिंहासन पर सिर्फ एक नाम। इस मानसिकता ने महिलाओं को प्रतिद्वंदी बना दिया। साथ ही नहीं जूही की नेचुरल स्ट्रेंथ थी शांत, कूल सहज अभिनय। लेकिन उस समय इंडस्ट्री ज्यादा सेलिब्रेट कर रही थी लाउड ड्रामा, हाई ग्लैमर, बड़ी प्रेजेंस। क्या यही वजह थी कि जूही को हमेशा खुद को साबित करना पड़ा। करीब दो दशक बाद साल 2014 में दोनों साथ दिखी गुलाब गैंग में। वक्त ने दिखा दिया राइवलरी कहानी से ज्यादा मीडिया की रचना थी। लेकिन समय किसी का इंतजार नहीं करता। उम्र बढ़ने के साथ लीड रोल्स कम होने लगे और जूही ने धीरे-धीरे फिल्मों की रफ्तार कम कर दी। कुछ मल्टीस्टारर फिल्में कुछ सीमित रोल्स जैसे आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया बस एक पल सलाम इश्क चौक एंड डस्टर भूतनाथ झंकार बीट्स अब सवाल यह नहीं था कि जूही कितनी हिट है सवाल यह था कि क्या वह अपनी शर्तों पर काम कर रही है क्या यह पीछे हटना था या एक परिपक्व निर्णय क्योंकि [नाक से की जाने वाली आवाज़] कभी-कभी करियर का असली ग्राफ बॉक्स ऑफिस से नहीं बल्कि आत्मसम्मान से तय होता है। दोस्तों अब कहानी पहुंचती है उस दौर में जहां जूही सिर्फ एक स्टार नहीं रही बल्कि एक प्रोफेशनल एक मां और एक बिजनेस वूमन के रूप में सामने आई। जून 2003 रिलीज हुई झकार बीट्स निर्देशक सुजॉय घोष इस फिल्म में जूही ने एक प्रेग्नेंट हाउसवाइफ का किरदार निभाया। लेकिन असली बात क्या थी? कैमरे के सामने जो किरदार था वह सिर्फ अभिनय नहीं था। क्योंकि उसी समय जूही खुद भी प्रेग्नेंट थी।

सोचिए लाइट्स, कैमरा, शूटिंग शेड्यूल और उसी के बीच अपनी सेहत का ध्यान। फिल्म जून में रिलीज हुई और 21 जुलाई 2003 को जूही ने अपने दूसरे बच्चे अर्जुन को जन्म दिया। यह सिर्फ प्रोफेशनलिज्म नहीं था। यह जुनून था। अब जब बात बच्चों की हो ही गई है तो चलिए उस पर्सनल लाइफ की तरफ जिसे जूही ने सालों तक बेहद सलीके से पर्दे के पीछे रखा। साल था 1995 जब जूही अपने करियर के पीक पर थी उन्होंने चुपचाप शादी कर ली। पति करोड़पति बिजनेसमैन जय मेहता। ना मीडिया को खबर ना इंडस्ट्री में शोर ना कोई भव्य घोषणा। [नाक से की जाने वाली आवाज़] करीब 6 साल तक यह शादी पूरी तरह सीक्रेट रही। खुलासा तब हुआ जब जूही पहली बार प्रेग्नेंट हुई। और यहां एक संवेदनशील पहलू भी है। जय मेहता की यह दूसरी शादी थी। उनकी पहली पत्नी सुजाता बिरला का निधन एक विमान दुर्घटना में हो गया था। जब जूही से पूछा गया शादी छुपाने की क्या वजह थी? तो उन्होंने साफ कहा उस समय उनका फिल्मी करियर बेहद शानदार चल रहा था और वह नहीं चाहती थी कि शादी की खबर से उनके करियर पर कोई नकारात्मक असर पड़े। क्या यह डर था या इंडस्ट्री की हकीकत की समझ? उनके दो बच्चे हुए। 2001 में बेटी जानवी और 2003 में बेटा अर्जुन। अब सवाल ये है क्या जूही ने शादी के बाद सिर्फ परिवार को चुना? नहीं। उन्होंने एक और बड़ा रिस्क लिया। साल 1999 जूही ने शाहरुख खान और निर्देशक अजीज मिर्जा के साथ मिलकर बनाई एक प्रोडक्शन कंपनी ड्रीम्स अनलिमिटेड। यह सिर्फ बिजनेस नहीं था। यह एक क्रिएटिव सपना था। इस बैनर के तहत बनी फिल्में फिर भी दिल है हिंदुस्तानी अशोक का चलते-चलते इन फिल्मों ने अलग पहचान बनाई लेकिन आर्थिक रूप से यह सफर आसान नहीं था। कुछ प्रोजेक्ट्स ने भारी दबाव डाला नुकसान भी हुआ। बहुत लोग यहां रुक जाते, पीछे हट जाते लेकिन जूही ने हार को अंत नहीं माना। उन्होंने सीखा एंटरटेनमेंट सिर्फ ग्लैमर नहीं यह रणनीति, धैर्य और समझ का खेल है। फिर आया साल 2008 इसी साझेदारी के तहत उन्होंने आईपीएल टीम कोलकाता नाइट राइडर्स में हिस्सेदारी ली। सिनेमा से क्रिकेट तक यह विस्तार सोच का था। बाद में यह साझेदारी विकसित होकर बनी रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट। जहां फैसले ज्यादा संतुलित थे। रिस्क ज्यादा सोच समझकर लिए गए। अब जूही सिर्फ अभिनेत्री नहीं थी। वह निर्माता थी, साझेदार थी, निवेशक थी। तो क्या यह कहना गलत होगा कि जूही चावला ने स्टारडम से ज्यादा अस्थायित्व को चुना। उन्होंने लाइमलाइट कम की लेकिन अपनी पहचान नहीं। एक समय था जब लोग उन्हें सिर्फ मुस्कान से पहचानते थे। आज उन्हें उनके निर्णयों, संतुलन और गरिमा से पहचाना जाता है। जूही का पूरा सफर एक बात साफ करता है। असफलता से डरकर रुक जाना आसान है। लेकिन असफलता के बावजूद आगे बढ़ना ही असली ताकत है। अब बात करते हैं उन रिश्तों और विवादों की जो अक्सर सुर्खियों में रहे।

आमिर खान और जूही चावला 90ज की सबसे पसंदीदा जोड़ियों में से एक। दोनों ने साथ में सात फिल्में की लेकिन 1997 में आई इश्क उनकी आखिरी फिल्म साबित हुई। कहा जाता है कि शूटिंग के दौरान छोटी-छोटी बातों को लेकर दोनों के बीच तनाव बढ़ने लगा। पहले बहस फिर दूरी और फिर सेट पर बातचीत तक बंद। इतना कि साथ बैठना भी मुश्किल हो गया। इसी वजह से जूही ने राजा हिंदुस्तानी में आमिर के साथ काम करने से मना कर दिया। बाद में उन्हें इस फैसले का मलाल भी रहा। फिल्म इश्क के बाद करीब 6 साल तक दोनों के बीच बात नहीं हुई। फिर 2002 में जब आमिर खान का तलाक हुआ, जूही ने खुद पहल की, उन्हें फोन किया, मुलाकात की। कभी-कभी समय अहंकार से बड़ा साबित होता है। अब बात एक और दिलचस्प पहलू की। जूही ने अपने करियर में लगभग हर बड़े स्टार के साथ काम किया। धर्मेंद्र, अनिल कपूर, ऋषि कपूर, सनी देओल, शाहरुख खान, आमिर खान, गोविंदा। लेकिन एक नाम जिसके साथ उन्होंने कभी लीड रोल नहीं किया सलमान खान। क्यों? इंडस्ट्री में चर्चा रही कि एक समय सलमान जूही को पसंद करते थे और रिश्ता लेकर उनके घर तक पहुंचे थे। लेकिन जूही के पिता ने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया। इसके बाद रिश्तों में दूरी आ गई। कुछ जानकार यह भी बताते हैं कि जब जूही करियर के शिखर पर थी और सलमान का करियर उतार-चढ़ाव में था तो एक फिल्म ऑफर हुई जिसमें सलमान को उनके अपोजिट लिया जाना था। बताया जाता है कि जूही ने निर्माता से कहा अगर आमिर को कास्ट किया जाए तो वह फिल्म करेंगी। यह बात सलमान तक पहुंची और फिर दोनों ने साथ काम ना करने का फैसला जैसे चुपचाप स्वीकार कर लिया। हालांकि दीवाना माना में निर्देशक डेविड धवन के कहने पर सलमान ने एक कैमियो किया जहां जूही भी फिल्म का हिस्सा थी। लेकिन एक पूर्ण रोमांटिक जोड़ी कभी नहीं बन पाई। अब बात छोटे पर्दे की। साल 1995 में जूही ने आदित्य पंचोली के साथ टीवी सीरियल महाशक्ति किया जो दूरदर्शन पर प्रसारित हुआ। फिर 2009 में वह रियलिटी शो झलक दिखलाजा में जज के रूप में नजर आई।

अब जब ओटीटी का दौर आया तो जूही ने वहां भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। साल 2017 में आई वेब सीरीज द [नाक से की जाने वाली आवाज़] टेस्ट केस में उन्होंने एक मजबूत कैमियो किया। तो क्या जूही चावला सिर्फ 90ज की याद है या एक ऐसी कलाकार जो समय के साथ खुद को ढालती रही। उनकी कहानी सिर्फ हिट फिल्मों की सूची नहीं है या कहानी है रिश्तों की जटिलता, फैसलों की कीमत, आवाज उठाने की हिम्मत और गरिमा के साथ आगे बढ़ने की। एक मुस्कान जो कैमरे के लिए थी और एक दृढ़ता जो जिंदगी के लिए। अब सवाल आपसे क्या जूही चावला को सिर्फ क्यूट कह देना उनके सफर के साथ न्याय है या वह 90ज की सबसे अंडर रेटेड लेकिन सबसे संतुलित अभिनेत्रियों में से एक हैं? [गला साफ़ करने की आवाज़] हमें कमेंट में जरूर बताइए। अगर आपको यह वीडियो और जूही चावला की कहानी पसंद आई हो तो वीडियो को ज्यादा से ज्यादा लाइक और शेयर जरूर करें और इसे अपने दोस्तों के साथ भी साझा करें। बॉलीवुड की ऐसी ही दिलचस्प, अनसुनी और रहस्यमई कहानियों के लिए हमारे चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूलें। मिलते हैं अगले वीडियो में एक और दिलचस्प कहानी के साथ। तब तक के लिए अपना ख्याल रखिए। बहुत-बहुत धन्यवाद और देखते रहिए हमारा चैनल। मैं तो उसी दिन बदसूरत हो गई थी। जिस दिन तुम जैसे औरत पर हाथ उठाने वाले कार के साथ मेरी शादी हुई। हम जैसा कहीं और दिलबर [संगीत] ना मिलेगा। खुदाओं की हर बुलंद [संगीत] लहरी जरा मुझको भी हमारे बस [संगीत] में क्या नहीं बस मेरे संग है तेरे

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *