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यहा रो!बॉट चला रहे है तबेला, गायों को खिलाते है चारा।

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इस गौशाला में कोई इंसान काम नहीं करता. 170 गायों की देखरेख यहां रोबोट करते हैं, वो भी हर वक्त. चारा दिन में चार बार दिया जाता है, वो भी द्वारा सटीक मात्रा में. ये फीडिंग सिस्टम करीब एक लाख यूरो का है, लेकिन ये जल्द ही इस खर्च को निकाल लेगा.

यूरोप में कामगारों की कमी के बीच, लंबी अवधि में रोबोट्स सस्ते पड़ेंगे. इस बाड़े में भूसे के बिस्तर भी है ताकि गायें आराम फरमा सकें. बाहर, खुराक ओटोमैटिकली तैयार की जाती है और फिर ताजा डिलीवर की जाती है. इस तकनीक की मदद से किसान अकेले भी पूरे फॉर्म को मैनेज कर सकता है. सबसे खास टूल है, सॉफ्टवेयर वाला स्मार्टफोन. हर गाय के गले में सेंसर वाला पट्टा है.

यह हर गाय का डेटा लगातार ऐप को भेजता रहता है. दुहने वाला रोबोट भी बड़ा अंतर पैदा करता है. सेंसरों की मदद से, ये उडर को मिल्किंग इक्विपमेंट्स से जोड़ता है. गायों को जल्द ही इसकी आदत पड़ जाती है और फिर वे दिन में कई बार स्टेशन तक खुद ही चली आती हैं. बिना तकनीक के, यह फॉर्म होगा ही नहीं, क्योंकि काम बहुत ज्यादा है. आपको कम से कम एक और इंसान की जरूरत पड़ेगी.

किसी पॉइंट पर आप खुद ही सवाल करेंगे कि क्या ये करना भी चाहिए क्योंकि आप जीना भी तो चाहते हैं. जब तक तकनीक आनंद दे और काम करे तो ये बढ़िया समाधान है. ये रोबोट टेक्नोलॉजी एक ऑस्ट्रियाई कंपनी की है. दुनिया भर में खेती में ऑटोमैशन की मांग बढ़ती जा रही है.

ब्राजील, मध्य पूर्व और ऑस्ट्रेलिया हर कोने में. यह ऑफिस, ग्लोबल कंट्रोल सेंटर का काम करता है. हम दुनिया की किसी भी डिवाइस को एक्सेस कर सकते हैं, बस इंटरनेट कनेक्शन स्टेबल होना चाहिए, फिर हम देख सकते हैं कि हर सिस्टम क्या कर रहा है और क्या नहीं. कई मवेशी फार्म, अब रोजमर्रा के थकाऊ कामों में एआई की मदद ले रहे हैं. किसान अब तकनीकी बादलों, यानी क्लाउड बेस्ड टेक्नोलॉजी को अपना रहे हैं.

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