अगले 25 साल में इजराइल एग्ज़िस्ट नहीं करेगा। यह हमारे होश में या हमारे लाइफटाइम में पहली बार ऐसा हो रहा है कि अमेरिकनंस सिचुएशन को कंट्रोल नहीं कर। इराक को और ईरान को सिमिलर मान लेना इस वॉर की सबसे बड़ी स्ट्रेटेजिक भूल थी। क्या इसके बाद स्थितियां दोबारा यानी जंग 2.0 की तरफ जा रही हैं? हर आदमी एक बात कहता था कि वॉर इज कमिंग टू आवर होम। ईरान जो है वॉर से अभी निकलने के मूड में नहीं है क्योंकि उसको ज्यादा गेन हो रहा है इस वॉर से। मुझे नहीं लगता कि ईरानिया उसने पिछले 5 साल में इतना तेल बेचा हुआ है
जितना पिछले 40 दिन में उन्होंने 50 दिन में सेल आउट कर लिया। उसे एक मौका मिला। इस वॉर ने मौका दिया। इस वॉर से पहले मौका नहीं था। और वॉर में जो जीती हुई चीज़ है वो नहीं छोड़ी जाती। ये वॉर दो। तो अब दो लोग लड़ रहे हैं। या तो वो इधर इजराइल लड़ रहा है या जो बैंक रोल करने वाले यूएई और बहरीन लड़ रहे हैं। इजराइल ने भी इसी आधार को लेकर के मारा कि भ ये कहते हैं कभी कि हम मस्जिद अक्सा को आजाद करा के रहेंगे। कभी फिलिस्तीन की आजादी की बात करते हैं और अरब देशों को भी ये लगता है कि कहीं इनकी आईडियोलॉजी हम पर हावी ना हो जाए। अमेरिका हमसे बातचीत के टेबल पे वो नहीं ले सकता जो वो हमसे लड़ाई के मैदान में नहीं छीन पाया।
आप देख रहे हैं लाइव हिंदुस्तान। मैं हूं इमरान खान। ईरान, अमेरिका, इसराइल जंग नए-नए मोड़, नए-नए रास्ते अख्तियार कर रही है। भले ही एक तरह का सीज फायर है लेकिन ऐसा लगता है कि कभी भी दोबारा जंग शुरू हो सकती है। फिर कभी ऐसा महसूस होता है कि सब कुछ ठीक हो जाएगा। दोनों पक्ष दोनों फरीक अपनी-अपनी शर्तों को मनवा लेंगे किसी भी तरह से। बहुत सारे डेवलपमेंट हो रहे हैं और कुछ पल में क्या हो जाए या कुछ घंटों में क्या हो जाए यह कहना भी बड़ा मुश्किल होता है। कभी प्रेसिडेंट ट्रंप के बयान आप सुनते होंगे तो कभी ईरान का रुख भी आप देखते होंगे।
ऐसे में हमारे साथ एक ऐसी शख्सियत हैं जो इन सारे नेचर से वाकिफ हैं क्योंकि उन्होंने ईरान से लेकर मिडिल ईस्ट के कई देशों में रहकर पत्रकारिता की है और हिंदुस्तान में भी एक जाना माना नाम है वो है जैगम मुर्तजा साहब मेरे साथ मेरे स्टूडियो में है मेरी खुशनसीबी है कि आप मेरे साथ हैं सीनियर जर्नलिस्ट हैं और ईरान अमेरिका इसराइल जंग को बहुत करीब से देख रहे हैं साथ ही उस ख्ते से भी वाकिफियत रखते हैं बहुत करीब से जानते हैं वहां की सियासत को वहां के हालात को भी जागा मुर्तजा साहब स्वागत है आपका धन्यवाद लाइव हिंदुस्तान पर थैंक यू जैगम साहब बहुत दिनों से आपसे संपर्क करना चाह रहा था और आपने वक्त दिया इसके लिए तो आपका शुक्रिया
क्योंकि आपका एक्सपर्ट कम जो कमेंट है वो हमारे दर्शक बहुत जिज्ञासा के साथ बहुत उत्सुकता के साथ जानना चाह रहे थे और मेरे पास कई बार कमेंट बॉक्स में भी लोग कहते हैं कि जैगम साहब को भी आप बुलाइए और उनको उनसे हम सुनना चाहते हैं कि असलियत है क्या? दरअसल होगा क्या? तो मैं भी उन्हीं का सवाल आपके सामने रख देता हूं। कि दरअसल होगा क्या अब इस मोड़ पर आ गए अमेरिका इसराइल और ईरान कि यहां से अब क्या क्या हो सकता है एक तो आपका धन्यवाद और दर्शकों का कि भाई इतनी मोहब्बत के लायक नहीं है लेकिन ठीक है चलिए आपने पूछा कि क्या होगा या क्या हो रहा है हम तो 40 दिन की जो वॉर है जी उसके बाद में दो चीजें तो क्लियर हो गई हम एक कि अमेरिका का जो पहले वाला डोमिनेंस था हम वो इस वॉर के बाद उसमें डेंट लगा है। उसकी ग्लोबल इमेज में उसके इकबाल में हम उसके लिए जो एक परसेप्शन है कि सुपर पावर है और ही मतलब अमेरिकनंस कंट्रोल द वर्ल्ड या जो वर्ल्ड के जो जितने भी इवेंट्स होते हैं या तो कंट्रोल करते हैं या कंट्रोल करने की पोजीशन में रहते हैं। बिल्कुल। ये हमारे होश में या हमारे लाइफ टाइम में पहली बार ऐसा हो रहा है हम के अमेरिकनंस सिचुएशन को कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं। बहुत बड़ी बात है। अमेरिका इस सिचुएशन को कंट्रोल नहीं कर पा रहा है। ये पहली बार ऐसा हुआ है। और इसके लिए चाहे आप ईरानियंस की रेिलियंस को आप उसे क्रेडिट दे सकते हैं या उनका जो कमिटमेंट है उस वॉर के लिए या तैयारी जो भी आप कह लीजिए। हम देखिए जब वॉर होता है तो बहुत सारे लोग मैं खैर शुरू में ही क्लियर करता चलूं कि लोग कैजुअल्टीज को या ह्यूमन जो लॉसेस हैं हम या जो लीडरशिप लॉसेस हैं उसे वॉर को कनेक्ट कर आमतौर पे लोग ऐसा ही सोचते हैं कि कौन मारा गया कितने लोग मारे गए क्या नुकसान हुआ इसके लिए हमारा ये कहना है कि अब ये तलवारों वाला या बैटल फील्ड वाला वॉर तो है नहीं हम कि भाई दो फौजे आके और पानीपत के मैदान में या कहीं दूसरे मैदान में आके और आमनेसामने खड़ी हो गई हम और उनमें एक वॉर एक ने एक राजा ने दूसरे को डोमिनेट किया मार दिया और उसके जो है किले पर या उसके जो एसेट्स हैं या उसके राज्य पे जाकर कब्जा कर लिया। जी तो ये होता था अब थोड़ा सा चेंज हो गया। हम थोड़ा सा चेंज क्या हो गया? उसके बाद के भी फेसेस आए हैं। लोगों ने देखा कि एक जमाने में नेवल पावर जिनकी मजबूत होती थी। यूरोपियंस ने आधी दुनिया
अपने नेवल पावर के दम पे जीत ली। इस वॉर में हमने देखा कि अमेरिका ने कहा कि हम अपना आरमाडा ले आ रहे हैं। हम हम यूएसएस अब्राहम लेके आएंगे, जरा लेके आएंगे। त्रिपोली ये वो मतलब और अगर आप उन्हें देखेंगे वाकई में या उनके बारे में अब ऐसा लगता है कि कोई शिप शिप नहीं है हम अपने आप में एक पूरा चलता फिरता है वॉर मशीनरी कि उसके पास एक पूरा मरींस उस पे हैं। उसके पास एयर पावर है। उसके पास सर्विलांस नेटवर्क्स हैं। उसके पास जो बैटल फील्ड है उसे रियल टाइम में रीड करने का इवेंट्स को मॉनिटर करने का सब पूरा सेटअप है। जी और इतने सारे सेटअप आए और कोई भी सेटअप कामयाब नहीं हुआ। हम तो ये इस वॉर के बाद ये भी क्लियर हो गया कि जो नेवल पावर वाला जमाना था वो भी चला गया। हम एक वॉर के साथ में और जो आप कभी डिफेंस एक्सपर्ट से बात करेंगे तो अब से 510 साल पहले तक भी वो मुल्क बहुत मजबूत माने जाते थे जिनके पास एयर पावर बहुत साउंड था। जी और हम सुनते थे टेक्निकल जो लैंग्वेज हैज़ उसमें कि फोर्थ जनरेशन के फाइटर जेट्स 4 एंड हाफ जनरेशन के फिफ्थ जनरेशन सिक्स्थ जनरेशन इस वॉर में फोर फोर एंड हाफ फाइव एंड फाइव एंड हाफ जो भी जनरेशंस अभी तक हमने देखी हैं वॉर प्लेयर्स की जी हमने सबका इस्तेमाल भी देख लिया और सबको डेमोलिश होते हुए भी देख लिया तो ये भी पहली बार हमारे होश में हुआ तो ये जो हो रहा है ये मतलब ये इवेंट्स अपने आप में मतलब यूनिक है और मतलब उसे हिंदी में एक टर्म यूज़ करते हैं अतुलनीय कि अतुलनीय बोला हालांकि बड़ा पॉजिटिव वर्ड है वॉर के हिसाब से लेकिन अद्भुत और अतुलनीय जो वर्ड एक बोले सरप्राइजिंग एलिमेंट जो है वॉर का है वो हम देख रहे हैं और जाहिर सी बात है अब से 5 साल पहले कौन या 2 साल पहले कौन एक्सपेक्ट कर सकता था कि अमेरिका और वो भी इजराइल के साथ हम मतलब हमारे सबक्टिनेंट में तो इजराइल ही सुपर पावर है हम और हम बचपन से इस तरह के फेरिटेल्स उनके बड़े हुए के अकेले इजराइल ने पूरे पांच छह
कंट्रीज को छ दिन में हरा दिया। पूरे मिडिल ईस्ट के जो 56 मुल्क हैं उन्हें उन्हें उन्हें उसने रौंद रखा है। जिसे चाहता है मार देता है। जिसे चाहे घेर लेता है। लेकिन ये प्रोपेगेंडा और रियलिटी का जो जब सामना आमने-सामने हुआ पहली बार हम तो उसमें दो चीजें तो आपने नोटिस की होंगी और दर्शकों ने भी की होंगी। एक तो यह हुआ कि हम देख पा रहे हैं कि जो अभी तक डोमिनेंस वहां था जिनके पास एयर डिफेंसेस नहीं थे हम या जो डिफेंसलेस लोग थे हम या वो कंट्रीज जहां पर रूलर में और जनता के बीच में डिस्कनेक्ट था हम वहां पर आप गए और आपने वहां पर जाकर रिजीम चेंज कर दिया या वहां पर आपने बम बरसा के पूरा फ्लेटन कर दिया और आपको किसी ने रिटेलिएट नहीं किया हम तो वन साइडेड वॉर चीजें असेस नहीं हो पाती। हमने गल्फ वॉर देखा। गल्फ वॉर में भी मतलब हमारे होश में पहला वॉर था जो टेलीविज़ पे आना शुरू हुआ या जिसका लाइव हुआ और हमने देखा कि जो रिपब्लिकन गार्ड्स उनके पास थे सद्दाम हुसैन के पास उन्होंने वॉर के दूसरे तीसरे दिन उन्होंने वाइट फ्लैग्स लहराने शुरू कर दिए। या कुवैत से जो लौट रहे थे उन पे जैसे ही बम्बार्डमेंट शुरू हुआ। उन्होंने सरेंडर कर दिया और मतलब बल्क में डिफेक्शन हो गए जी और जो बड़े वफादार माने जाते थे फैमिली ज्यादातर भाई उस जमाने में सद्दाम हुसैन के इर्दगिर्द से फैमिली के लोग थे वो सब डिफेक्ट करके चले गए या सरेंडर कर दिया या भाग गए या छुप गए मारे गए हम और वहां आपने चेंज कर दिया यहां अमेरिका को दो दिक्कत हुई एक तो ज्योग्राफी हम इराक को और ईरान को सिमिलर मान लेना इस वॉर की सबसे बड़ी स्ट्रेटेजिक भूल थी हम उसका इसका रीज़न ये है कि इराक की जो ज्योग्राफी है वो ईरान की ज्योग्राफी सेम नहीं है। जी वहां रेतीले मैदान और रेगिस्तान और खुले मैदानों में आपने अच्छा वहां बसने का तरीका भी अलग है। जैसे ईरान में और इराक को अगर आप जाएंगे तो एक बड़ा लोगों के रहन-सहन में सबसे बड़ा फर्क तो ये दिखता है कि जो ईरानियन पापुलेशन है वो अर्बनाइज्ड है। अच्छा और उन्हें शहरों में 72% पापुलेशन वहां अर्बन है। हम और उन्हें शहरों में रहने की आदत है या ये अलग तरीके का उनका है। इराकी अलग तरीके से रहता है। इराक का बेचारा वो जंगल में घर बनाएगा। कितना ही मतलब बहुत सारे पैसे आएंगे तो वो कोशिश करेगा बड़ा सा फार्म हाउस बनाए। हम उसमें जाके आबादी से दूर बसने की कोशिश करता है। तो वहां दूरदराज के इलाकों में जंगल में जहां भी जो मिला उन्हें लूटा मारा और इराक में एक कल्चरली एक बड़ा अगर आप इराकी से बात करेंगे तो उन्हें बेचारों को फोना इकट्ठा करने का बड़ा शौक होता है। मतलब गोल्ड की एक इल्लुजन जो भी जैसे हमारे यहां हिंदुस्तान में है वो इराक में भी है। तो वो बड़ी लूटमार उसके लिए हुई। सब कुछ हुआ। मारे गए। लेकिन ईरान में थोड़ा सा मसला ये हुआ कि एक तो टेक्निकली ये लोग पहले से आईआरजीसी के लोग और आर्मी और ये सब लोग तैयारी में थे। जी और तैयारी को मैं ऐसे बताऊं कि मैं 2018 से नॉनस्टॉप ईरानियंस के कनेक्ट में किसी ना किसी फॉर्म में हूं। जी उस बीच में जिस भी पॉलिटिकल लीडर से या जो भी सोशल सेक्टर में जो लोग काम कर रहे हैं या जो जर्नलिज्म में भी जो लोग हमारे पेशे के लोग हैं हर आदमी एक बात कहता था कि वॉर इज कमिंग टू आवर होम। ये वॉर हमारे दरवाजे पे आने वाली है। हम हम और इसका एक दूसरा पर्सिव ये था पूछो कि भाई आप सीरिया में क्यों लड़ रहे हो लेबनान में? तो बोले यहां नहीं लड़ेंगे तो ये वॉर हम तेहरान में लड़ेंगे। कि ये वॉर हमें लड़ना है। हम तो दे वर मेंटली प्रिपयर्ड के वॉर होना है और ये पहली बार हुआ तो जो हम पहली बार पहली बार पहली बार क्योंकि हमारे यहां एक ये सोशल मीडिया का जब से दौर आया है हम तो हमारे यहां भी पॉलिटिक्स में बहुत सारी पॉलिटिकल पार्टीज या रीजनल पार्टीज सबका यही होता है पहली बार हम या सबसे बड़ा या सबसे पहले हम हम तो ये सबसे पहले वाले एलिमेंट्स इसलिए मैंने आपको पहले बताए थे कि पहली बार हम क्या देख रहे हैं हम तो अमेरिका को पहली बार इतना रेजिस्टेंस फेस नहीं किया था या इजराइल ने कभी वो वाला रेजिस्टेंस फेस नहीं किया था। फिलिस्तीन में गजा में और ईरानियन पापुलेशन में थोड़ा फर्क थोड़ा नहीं बहुत ज्यादा फर्क ऐसा लगता है और जिस तरह के हालात बने हैं हमने देखा कि बिल्कुल हटके थे और ये अब मैं आपसे जानना चाहूंगा कि क्या इसके बाद स्थितियां दोबारा यानी जंग 2.0 की तरफ जा रही हैं क्योंकि दोनों ही पक्ष अभी भी अपनी बातों पर अड़े हुए हैं। हालांकि यह बात है कि भ अमेरिका फंसा है वो निकलना चाहता है। लेकिन क्या इजराइल उसे जाने देगा या फिर दूसरे दौर की जो बातचीत होने जा रही है या होती है तो उसमें कोई फैसला कुन बात हो पाएगी निर्णायक बात हो पाएगी देखिए वॉर ऐसे स्टेज पर है जहां दोनों ही पार्टीज बातचीत भी चाहती हैं हम और दोनों में से कोई पार्टी एग्जिट करने का रिस्क नहीं ले सकती। अच्छा बड़ी बात है। हां। उसका रीज़न क्या है? उसका रीज़न ये है देखिए एग्जिट दोनों इसलिए चाहते हैं बातचीत से। जाहिर सी बात है वॉर महंगा एक खर्चे का भी और मतलब जान और माल दोनों तरीके से जी वो महंगा वेंचर है हम दुनिया में हर मुकदमा हर झगड़ा और हर फसाद आज तक कभी हमने नहीं सुना कि जंग से किसी झगड़े का हल निकला हो अल्टीमेटली जाके वो बातचीत की टेबल पर ही निकलता कोर्ट्स में भी आप मुकदमा लड़ते हैं तो आखिर में जाके फैसला ही होता है कि भाई फैसला कर लीजिए आप दोनों पार्टी या तो कोर्ट का मान लीजिए वरना अपना आपस में बैठ के कर लीजिए और कंक्लूड करके खत्म कर लीजिए। जी तो जाहिर सी बात है भाई अब महंगा आप इन द टर्म ऐसे मान लीजिए कि ठीक है अमेरिका के पास एक लग्जरी है कि डॉलर और पेट्रोल डॉलर इकॉनमी है हम तो जो खर्च है वो उधर से आ जाता है उनके पास या जहां वो वॉर लड़ रहा है उसने आपने सुना भी होगा कि उसने अरब वर्ड से कहा कि आप 10 जो है ट्रिलियन डॉलर आप हमें पे कीजिए या आप हमारे आम खरीदिए तो उसके लिए वो है हम ईरानियस के साथ भी ये कि ईरान का जाहिर सी बात है लीडर लॉस हुआ और भाई जो आवाम है क्योंकि अर्बन पापुलेशन मैंने आपसे पहले का ज्यादा है हम तो उनके लिए रिस्क फैक्टर तो है ही कि अर्बन पापुलेशन पे जाहिर सी बात है कहीं अगर मिसाइल गिरेगा तो वो ये देख के तो गिरेगा नहीं कि कहीं फौजी के घर पे गिर रहा है या आदमी के घर पे गिर रहा है तो उसमें सिविलियन लॉसेस ईरान के बहुत ज्यादा है और मिनाब वाले स्कूल से हम देख रहे हैं कि औरत और बच्चे उसमें टारगेट बहुत हुए हैं। जी तो वो महंगा है। हम तो बातचीत जाहिर सी बात है दोनों की जरूरत है और एक टाइम भी होता कि टाइम ये है कि भ आप लगातार 40 दिन लड़ लिए हम तो आपको एक सांस लेने का एक टाइम चाहिए होता है कि आपको अपने जो आर्म्स है उन्हें या जो अपने रिसोर्सेज हैं उन्हें रिकलेक्ट करके लाना है। अपने अपने अपने जो बैटल फील्ड में जो आपके लॉजिस्टिक हैं उन्हें रिस्ट्रक्चर करना है। अपने जो आपके लोग मर गए हैं उन्हें रिप्लेस करना है या उनकी जगह पे नए आदमियों को तो उसके लिए एक ब्रीदर चाहिए होता है। तो ये फीस फायर उसका काम कर गया। हम अभी फीस फायर के बाद क्या हम ये बड़ा बड़ा सवाल है। तो बड़ा सवाल ये है कि क्या दोनों में से कोई भी पार्टी वॉर में से निकल के जाने का रिस्क ले सकती है हम। तो ईरान के साथ तो दिक्कत ये है कि ईरान को ये अमेरिका और इजराइल ने अपॉर्चुनिटी दी है इन द फॉर्म ऑफ़ वॉर। हम और वो अपॉर्चुनिटी ऐसे दी है कि एक कंट्री 40 साल से लगातार सेंशंस में है। हम वो Swift सिस्टम से बाहर है। बैंकिंग उनका नहीं हो रहा। उनका ट्रेड नहीं हो रहा। उनका तेल कोई $15 पे खरीदने को तैयार नहीं है। उनके दुनिया जहान में एसेट्स फसे हुए हैं। ब्लॉक्ड हैं। वो निकल के नहीं आ रहे। हम और इस वॉर में मतलब मुझे नहीं लगता कि ईरानियास ने पिछले 5 साल में इतना तेल बेचा हुआ है जितना पिछले 40 दिन में उन्होंने 50 दिन में सेल आउट कर लिया। हम हम तो ये तो अपॉर्चुनिटी हो गई। जी। फिर दूसरी चीज जो इस वक्त सबसे ज्यादा जिस पे जिक्र हो रहा है इस वॉर से पहले हॉर्मोस ओपन था अब उस पर टॉल भी लग रहा है और उनका जो है उस पे सोवनिटी वो एस्टैब्लिश हो गई और वो सोवनिटी अलग चीज है वो जिओ जो लोकेशन है हरमूस की ईरान उसे पहले से भी कहता रहा है कि हमारा है हमारा है लेकिन उसे एजर्ट नहीं किया उसने उस अथॉरिटी को जी उस ऑथॉरिटी को एजर्ट करके वो एक साथ कई लोगों को सबक सिखा रहा है अमेरिका को नहीं सिखा रहा हम कुवैत का सामान वहीं से निकल के जाना कुवैत अमेरिका कहलाएगा। हम क़तर ने हालांकि सरेंडर सबसे पहले किया वो और वो झगड़े से निकल गए कि भ हम इस क्फ्लिक्ट में नहीं जाना चाहते। लेकिन यूएई अभी है हम हम उसे सारा वो कैसे जाएगा? जी या तो लैंड से जाए या फिर अब इधर से अगर सी रूट चाहिए तो यही है। हम और उसके अलावा कोई रास्ता रास्ता नहीं है। जी तो वो उसके पास एक एडवांटेज है और वो उस एडवांटेज को अब ईरान नहीं छोड़ना चाहता। और उसे एक मौका मिला इस वॉर ने मौका दिया। इस वॉर से पहले मौका नहीं था। और वॉर में जो जीती हुई चीजें हैं वो नहीं छोड़ी जाती। वो वो उसी को विक्ट्री मान रहे हैं कि हमने सब कुछ खो के अपना सुप्रीम लीडर अपने आदमी या हम जो कह रहे थे ना कि आदमी में लोग कैलकुलेट करते हैं। आदमियों में नहीं होता। हम स्ट्रेटेजिकली उसने वो गेन कर लिया यहां पे। उस रूट पे उसका कब्जा हो गया। वहां से उसका एक अर्निंग का एक वो भी साधन भी खुल गया। हम और एक अभी जो है इस वॉर के बीच में जो नए अलायसेस हैं जी नए अलायसेस और नए रिसेट जो बटन एक प्रेस हुआ इस वॉर की वजह से मतलब ब्रिटेन आपने देखा कि अमेरिका के कभी पहली बार वाला जो हमने थे पहली बार हमने देखा कि ब्रिटेन अमेरिका के इन्फ्लुएंस से बाहर चल रहा है। हम फ्रांस उसकी नहीं सुन रहा है। इटालियन तो आपने देखा कि बिल्कुल मतलब अपोजिट ही चले गए। अपोजिट ही चले गए। और खुद प्रेसिडेंट ट्रंप ने इटली के प्राइम मिनिस्टर के लिए क्या दिया था? स्पेन और आयरलैंड तो खैर पहले से उधर है लेकिन यूरोप पूरे यूरोप में एक चर्निंग है के अब हम अपना जो सोवनिटी है जो अपनी आजादी है उसे वो उसे वो जीना चाहते हैं। वो वो पीछे पिछलू बनना नहीं चाहते। हम हम तो ट्रंप को अब झल्लाहट भी दिख रही है आपको सब कुछ हो रहा है। अब अमेरिका वाली बात है तो ईरान तो इसलिए नहीं निकलना चाहता कि उसे अपॉर्चुनिटी है जितना यहां वो अब कहा भी उन लोगों ने अभी आप आरक्षी का बयान पढ़िए या बास आरक्षी साहब का है या जो वाहिदी साहब का कि अमेरिका हमसे बातचीत के टेबल पे वो नहीं ले सकता जो वो हमसे लड़ाई के मैदान में नहीं छीन पाया है। हम हम अब वॉर में नहीं छीन पाए तो बातचीत में कैसे ले लेंगे? ये आपने बहुत बड़ी बात कही कि ईरान जो है वॉर से अभी निकलने के मूड में नहीं है क्योंकि उसको ज्यादा गेन हो रहा है इस वॉर से उसे हम भाई आप आम ईरानी से बात कीजिए जो लोग प्रोटेस्ट कर रहे थे और एंटी गवर्नमेंट प्रोटेस्ट में शामिल थे उनके आप अब वीडियोस आ रहे हैं नॉट इन माय नेम या भाई मेरे नाम पे बॉम्बिंग मत कीजिए इस तरह यूरोप यूरोप में सब चला एक पूरा वो चल रहा है हम आम ईरानी ये कह रहा है कि सारी दिक्कत तो इकोनमी की थी जी और वो इससे निकल रही है तो अच्छा आम ईरानी का भी था कि आज नहीं कल लड़ना ही है एक बार लड़ ही लीजिए। आप रोज उसका वो कहते हैं ना घुटघुट के मरने से एक बार लड़ लेना बेहतर है। तो एक बार वो ईरानी के लिए तो वो वॉर जो है अपॉर्चुनिटी की तरह आया और उन्होंने उसे गस्प कर लिया। जी अमेरिका के साथ दिक्कत क्या है कि अमेरिका अगर इस वॉर से निकल जाता है तो कहां जाएगा? हम अवल तो इजराइल और यूएई कम से कम दो एक जो फाइनेंसर है मेन फाइनेंसर कुवैत। हम इस वॉर को तीन लोगों का वॉर हम इसे मान रहे हैं। हम यूएई का वॉर इसलिए कि यूएई ने इस वॉर को फंड किया है। अच्छा ये बड़ी बात आप कह रहे हैं। हम और आप देखिए मिनाब के स्कूल से लेकर शुरुआत के जितने एयर स्ट्राइक से नहीं जितना नुकसान ईरान में हुआ जितना जमीन से ल्च हुई मिसाइल से हुआ और वो सब यूएई की तरफ से आई हैं। कुवैत ने इस वॉर को ऐसे ही फाइनेंस किया है जैसे एक जमाने में ईरान के अगेंस्ट सद्दाम हुसैन की वॉर को कुवैत ने फाइनेंस किया था। जी और फिर उसके बाद में सद्दाम हुसैन के अगेंस्ट अमेरिकनंस को फाइनेंस किया था। सऊदीज ने कुछ किया हो लेकिन सऊदीज डिप्लोमेटिक हैं। वो बहरीन ने भी कुछ बहुत काम किया। वो वो फ्रंट सऊदी फ्रंट पे नहीं आ रहे। लेकिन बहरीन अगर कुछ बोल रहा है हम तो बहुत सारे लोग कहते हैं सऊदी नहीं बोल रहा है। हम वो डिप्लोमेसी ठीक है उसकी कि वो उसके साथ दिक्कत क्या भी इन्वेस्टमेंट किए बैठा हुआ है। उसे उसे सबसे ज्यादा लॉसेस का रिस्क उसके पास है। दुबई के बाद जो सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है या पड़ेगा या पड़ सकता है वो सऊदी को है। जी बहरीन सऊदी के बिना कुछ भी नहीं है। मतलब उसका एक्सटेंशन काउंटर है। हम तो बहरीन दो चीजों पे बोल रहा है। बहरीन के साथ एक तो ये है कि ईरान का जो दावा है अगर आप हिस्ट्री में जाएंगे तो हिस्ट्री से पहले जो बहरीन है वो वो लैंड मास ही ईरान का था। जी जी शाह के जमाने में और बल्कि उनका जो फॉरेन मिनिस्टर हुआ करते थे एक साहब वो अर्धशर करके उनका मैं एक्सैक्ट नाम मिस कर रहा हूं वो बड़ा रिग्रेट करते थे कि हमने ये अपना जो जजीरा है क्यों उधर दे दिया और क्यों हम बातों में आ गए हम और वो शाह को भी जबकि उसके मतलब दामादी थे लेकिन वो शाह को बड़ा उस पे कर्स करते थे कि यार इसने ये बहुत गलत काम किया हम हम अच्छा बहरीन के साथ मसला क्या है कि बहरीन में जो पापुलेशन है वो डेमोग्राफी वहां के शाह के या जो रूलर के अगेंस्ट है। जी जी और ये बीज वहां की पापुलेशन वो है ये जिन लोगों ने जिस ग्राउंड पे मिडिल ईस्ट में एक तरीके से आपने डिस्ट्रक्शन के दरवाजे खोले हैं हम हम तो उसमें अल्टीमेटली आपको घूम के आना है। आप सीरिया में आपका लॉजिक ये था कि अलावीस जो है वो माइनॉरिटी है हम और बशर अल असद रूल कर रहे हैं। हाउ कैन ही और जो जब डोमिनेंट तो अब जब आप यह कहेंगे तो फिर जाहिर सी बात है बहरीन में भी पपुलेशन आपके अगेंस्ट है अब हालांकि पिछले पांच 20 साल में बहरीन में पाकिस्तानियों को बलोचों को बड़ी सिटीजनशिप दी गई हम और डेमोग्राफी चेंज करने की कोशिश हुई लेकिन नहीं कर सकते आप कुवैत का भी यही हाल है कुवैत में एक अच्छी खासी पापुलेशन जो है हम वो शिया पापुलेशन तो कुवैत के साथ भी ये अच्छा जब लास्ट इलेक्शन हुए थे तो वहां वहां ये हुआ कि हाउस में 100 102 सीट में वो मेजॉरिटी शियास की आ गई वो पार्लियामेंट ही डिॉल्व करनी पड़ी वो सरकार नहीं बनने दी जी तो यही तो आरोप फिर इजराइल लगाता है कि भ हमको ईरान से यही तो खतरा है एक तो न्यूक्लियर पावर ना बन जाए ठीक है और दूसरा ये अपने प्रॉक्सी अपने लोगों के जरिए और कहीं ना कहीं उस पर अरब देश भी चुप रहते हैं क्योंकि अरब देश भी ये मानते हैं कि ये ईरान अपना वर्चस्व अपनी आइडियोलॉजी के लिए अह ये पूरी तरह से इस जंग को लड़ रहा है या पिछले पिछले 47 सालों से 45 सालों से उसको बढ़ा रहा है। उसने अपना पूरी तैयारियां कर रखी है। ऐसा वो आरोप लगाते हैं। और कहीं ना कहीं इजराइल ने भी इसी आधार को लेकर के मारा कि भ ये कहते हैं कभी कि हम मस्जिद अक्सा को आजाद करा के रहेंगे। कभी फिलिस्तीन की आजादी की बात करते हैं। और अरब देशों को भी ये लगता है कि कहीं इनकी आईडियोलॉजी हम पर हावी ना हो जाए या इनके जो संगठन है जिन्हें एक्सेस ऑफ रेजिस्टेंस वो कहता है वो हमारी शासन व्यवस्था को हमारी आईडियोलॉजी को चैलेंज ना करने लगे। तो ऐसा लगता है इसलिए ये जंग क्या उस आइडियोलॉजी की भी थी क्या इस बार? देखिए जंतो आइडियोलॉजी की आपने जो बातें कही उसमें तीन अलग-अलग चीज़ हैं। हम एक जो अरबों का डर है उसकी रूट्स मैं बता उसकी हिस्टोरिकल रूट्स हैं। मतलब उनका डर जो है वो ठीक है। मतलब वो जस्टिफाई कर सकते हैं। क्योंकि उनके पास उसे जस्टिफाई करने का एक रीजन है। एक रीज़न ये है कि 79 में जब ईरान में इस्लामिक रेवोल्यूशन आया। जी। तो शाह रजा पहलवी जो थे वो अमेरिका के सबसे बड़े एलाई थे। जी और उसके बाद में जाहिर सी बात है मतलब तहरान अमेरिका और इजराइल का कोर था। हम और इजराइल का जो क्फ्लिक्ट है रूट भी वही है। हम रूट इसलिए है कि अगर आप देखेंगे अगर आप किसी आम ईरानी से पूछेंगे तो शाह के जमाने में जो उसकी एक इंटेलिजेंस सर्विस हुआ करती थी सवाक। हां सवाग वह मतलब या किशोर समथिंग मतलब उसका एग्जैक्ट नाम मुझे पर्शियन नाम नहीं याद आ रहा है अभी हम तो सवाग का ये काम था कि वो लोगों को जो भी शाह के या एंटी अमेरिका या एंटी जो भी वेस्टर्न जो भी थॉट्स वाले लोग थे उन्हें टारगेट किया उठाया और जेल में डाल दिया हम तो ईरानियस में इजराइल के अगेंस्ट जो पहला और इंपेरलिज्म के अगेंस्ट जो पहली जो नफरत है उसका रूट वहां से है। जी और अमेरिका ने फिर उसका एम्बेसी पे कब्जा फिर उसके बाद में उसे जो है छुड़ाने के लिए फिर वो फिर वो मतलब अमेरिका जो है सामने खड़ा हो गया बिल्कुल उस जमाने में जो क्रांति के जो लीडर्स हैं खासतौर पे ऐतुल्लाह खुमैनी साहब ऐतुल्ला रूहल्लाह खुमैनी खामनी साहब नहीं खुमेनी साहब खुनी साहब जी तो उन्होंने दो-तीन बार ये पब्लिकली कहा कि आवाम को इस रीजन की आवाम को इन शाहों को उखाड़ के फेंक देना चाहिए। जो वेस्टर्न वर्ल्ड की गुलामी कर रहे हैं। उनकी सोवनिटी उन्होंने वेस्टर्न वर्ल्ड में ले जा के गिरवी रख दी है। हम और उनके पैसे के लिए या उनके उसके लिए अपने अपनी इंडिपेंडेंस को लोगों की इन्होंने खत्म कर दिया। और उनके सामने रोल मॉडल हम हैं। अगर हम शाह को उखाड़ के फेंक सकते हैं तो ये तो बहुत कमजोर जमीन पे खड़े हुए लोग हैं। तो जाहिर सी बात है जीसीसी कंट्रीज में पूरा एक महाज बना। ईरान इराक वॉर की रूट यही थी। सद्दाम हुसैन ने बाद में रिग्रेट किया इसे। जी। हालांकि ये बड़ा पॉलिटिकल वो है और लोग बड़ा उसे सुन्नी शिया वाली बाइनरी में रख देते हैं। हम हम लेकिन आप फाइनल डेज में खासतौर पे जब ये गल्फ वॉर हुआ है और उस जमाने के आप सद्दाम हुसैन के इंटरव्यूज आप सुनिए। अरेबिक में बहुत सारे के ट्रांसलेशंस अवेलेबल है। सब कुछ है। लोग देखते नहीं है। पढ़ते नहीं है। लिखा छपा है। हम सद्दाम हुसैन ने रिग्रेट किया इसको कि मैं इन लोगों के चढ़ाई में आके ईरान से जाके लड़ गया। और मैंने अपने आप को भी कमजोर किया और एक ऐसे इलाही को कमजोर कर दिया जो मेरा एक मजबूत साथी हो सकता था इस इंपेरलिज्म से लड़ने के लिए। जी हम और जब तक वो चीज समझ में उन्हें आई तब तक वो देर हो चुकी थी। तब तक वो अपनी आवाम से भी बिगाड़ चुके थे। तब तक पड़ोसियों से उनकी लड़ाई हुई। कुवैत आपका दुश्मन हो चुका था। आपने सऊदी पे मिसाइल मार दी। सऊदी आपका दुश्मन था। सऊदी आपके वॉर के अगेंस्ट। इजराइल आपके खिलाफ खड़ा ही हो गया। ईरान साहब की नियुक्ति नहीं थी। ईरान साहब आठ साल वॉर लड़ चुके थे। हम तो अकेले थे तो कोई वॉर में वहां था नहीं। हम ईरान ने वो वाली गलतियां अभी नहीं की है। अपने एलई उन्होंने बना के रखे हैं। और आप उसे शिया सुन्नी वाली बैनरी से बाहर लेके गया ईरान पहली बार। जो आपने कहा ना कि उनके अलाय हैं और प्रॉक्सी का डर है। प्रॉक्सी का डर नहीं है। वो उन पावर्स के साथ खड़े होने का हिम्मत है जो लोग डेमोलिश किए जा रहे हैं और और पिछले 50 60 70 साल से जो लोग कहीं ना कहीं जुल्म का शिकार हैं। हम हम फिलिस्तीन ईरान की लड़ाई लोग कहते हैं नहीं है। हम हम लेकिन ईरान की अगर रेवोल्यूशन की अगर आप हिस्ट्री पढ़ेंगे तो वह उस ज़माने से वह फ़िलिस्तीनियों को मोरल सपोर्ट क्योंकि शाह इजराइल के साथ खड़ा हुआ। जी जी हम तो हर वो चीज जो प्रो अमेरिकन थी वो वो एंटीला एंटी इंकलाब जी जी जी और जो जितनी एंटी अमेरिकन है वो सब प्रो इंकलाब है और खुनी साहब से लेके उसके बाद में और फिर वो बार-बार एक ये हुआ कि जो ईरान रेवोल्यूशन के जो रूट्स था हम अगर आप उसके आईलॉग्स को पढ़े अली शरियती एक साहब गुजरे हैं वो या मुर्तजा मुताहिरी साहब उसके एक मोबिलाइजर थे एक बड़े नेता थे अली लहरीदानी साहब के ससुर हुआ करते थे मुर्तजा मुताहरी साहब अच्छा तो ये थे और ये खामनी साहब उस जमाने में जेल में रहे बाकी जेल में भी रहे। ये ये रेवोल्यूशन का मेंबर थे। इवन ये आपका महमूद अहमद निजाद स्टूडेंट पॉलिटिक्स में उस जमाने में थे जब रेवोल्यूशन चल रही थी और ये अमेरिकन एंबेसी पे कब्जा हुआ तो ये सब लोग रेवोल्यूशन से निकले हुए लोग हैं। जी। तो उस जमाने में अली लारी जैनी ने जो रेवोल्यूशन की जो आत्मा है या जो रूह है या जो उसकी जो सोल है उसे बनाया। उन्होंने कहा कि हम कर्बला से निकल के आए हुए लोग। जी और कर्बला को उन्होंने ईरानियन रेवोल्यूशन का कोर बना दिया। जी और खाली कोर नहीं बनाया। उन्होंने पूरी ग्लोबल जो शिया आइडियोलॉजी है उसमें एक मेजर शिफ्ट लेके आए। वो शिफ्ट ऐसे लेके आए अगर आप किसी मौलवी से या किसी शिया से पूछेंगे। हम हम तो शियाज़ में 79 तक एक जनरल परसेप्शन यह था कि हम सफर करने के लिए पैदा हुए हैं। हम जुल्म सहने के लिए पैदा हुए हैं। और इसके बदले में हमें कयामत के रोज अजर अजर मिलेगा। जी और हमारी तो इसलिए खुदा ने एक वादा किया कि कर्बला में जो लोग मर गए एक एक मेज़रनामा एक करके एक शहादतनामा घरोंघरों में पढ़ाया सुन्नी मतलब वो शिया सुन्नी उसके मोहताज नहीं है। घरों में पढ़ाया जाता है। आशूर पे वो पहले पुरानी किताबें खोती थी। हम तो उसमें किस्सा आता था कि साहब वो नबी आए और उन्होंने मतलब इमाम हुसैन और हसन अपनी मां के पास गए और उन्होंने शिकायत की कि आज मेरे भाई का गला चूमा, मेरा दहन चूमा। तो उस उन्होंने कहा कि यार ये तो पार्शियलिटी हुई तो बाप से शिकायत की बाप ने कहा नहीं नहीं ये इसलिए कि इसे जहर देके मारेंगे तो ये वो वो उसे इनकर्पोरेट करके कहानी एक तरीके से वो वो सुनते चले आ रहे थे जी तो उसके कमिटमेंट में तो उन्होंने कहा बोले आपके होते हुए कोई बच्चों को कैसे मार देगा अली नहीं होंगे तो तो नबी ने कहा कि ना अली होंगे ना तुम होंगे ना मैं होंगे बोले फिर कौन होगा हम बोले कोई नहीं होगा ये तनो तना मर जाएंगे और फिर मैं फिर अल्लाह एक कौम पैदा करेगा जिसके जवान इनके जवानों को रोएंगे जिनके बच्चे वो तो इनकर्पोरेट हो गया शिया वर्ल्ड में कि हम रोने के लिए पैदा हुए हैं हम और बस कर्बला को याद करना हमारा तो मकसद कर्बला है और जिंदा तो कर्बला शिया वर्ड का एक कोर तो था जी लेकिन उसका रेवोल्यूशनरी कलर नहीं था हम हम अली शरीयत ने क्या करा उसमें एक हल्का सा टेक दिया बोले कब तक हम हम बोले इमाम हुसैन की जो लड़ाई थी वो गर्दन कटाने की नहीं थी हम हम वो जुल्म के खिलाफ खड़े होने की थी हम उन्होंने उन्होंने अपने वक्त के सबसे बड़े अंपायर को चैलेंज किया कि नहीं हम आपका डोमिनेंस बर्दाश्त नहीं करेंगे। राइट टू से नो का एक झगड़ा था कि हम आप जो कह रहे हैं सब कुछ सही नहीं है। हमें ना करने का अधिकार है। हम हम ह्यूमन फ्री विल की बात थी। जी ये अली शयती ने इनकर्पोरेट का एक नारा भी दिया। बोले कुल्लू अर्ज दिन कर्बला कुल यमिन आशुरा के हर दिन कर्बला है जहां जुल्म हो रहा है जिस जगह पे वो कर्बला है बिल्कुल और जिस दिन जुल्म हो रहा है और आप उस जुल्म को सह रहे हैं वो वो दिन आशूरा है मला आशुरा द डे ऑफ़ मट जिस दिन आपकी शहादत तो वो ईरानियन रेवोल्यूशन का कोर बन गया हम वहां से शिया वर्ड ने ये देखना शुरू किया कि नहीं जुल्म सहना भी उतना ही बुरा है। जुल्म होते हुए देखना भी बुरा है। हम ये ईरानियन रेवोल्यूशन का कोड था। जी और जब आप आपने यह कह दिया कि नहीं कोई भी कमजोर पिट रहा है हम उसके साथ खड़े होंगे जैसे हुसैन जाके खड़े हो गए जुल्म के खिलाफ हम तो फिर आप फिलिस्तीन को भी नहीं छोड़ सकते हम आप यमनीस को भी नहीं छोड़ सकते आप अफगानियों को भी नहीं छोड़ के भाग सकते जो पिट रहे हैं आप क्रोएशिया में आप देखिए ना बोसिया हरसे हुए ना हर जगह ईरानियस जहांजहां गया और अभी बल्कि इसी वॉर के बीच में जी जब ये कहा कि साहब सीरिया में इतने मार दिए इतने मार दिए इस तरह का प्रोप प्रोपगेंडा चला तो सुन्नी वर्ड से इसके लिए जो है बकायदा रिटेलिशन आया हम क्रोट्स ने कहा और वहां वहां बोजनिया में लोगों ने कहा कि अगर ईरानियस नहीं होते तो हम हम यहां बचते भी नहीं हम खत्म कर देते चेच ने ये बात कही कि आज हम है तो इनकी वजह से ना खत्म हो गए होते जी ये यासिनवार के आप लास्ट स्पीचेस सुनिए उन्होंने कहा अगर ये नहीं होते तो हम खत्म हो जाते हम आज हमारा जो रेजिस्टेंस है जो भी है वो वो ईरानियस की वजह से है यमनाइट्स या अलावीस जो भी है जो कमजोर तबके हैं वो के दम पे खड़े हैं मेरा सवाल ये है कि अभी तक ईरान जो एक तरह से रेजिस्टेंस की ताकत था दुनिया में जो खुद आप बता रहे हैं क्या इन 40 दिनों की जंग के बाद वो एक बड़ी शक्ति के रूप में एक पावर के रूप में या यूं कहें कि चौथे पावर के रूप में क्योंकि कुछ अमेरिकन रिपोर्ट्स भी कह रही है वहां के अखबारों में भी इस बात को छापा गया है कि अब हमें मान लेना चाहिए कि एक चौथी ताकत है। अगर अमेरिका है, रूस है, चीन है तो एक ईरान भी है। आप उससे नहीं निपट सकते। आप उसको हल्के में नहीं ले सकते। क्या इस रूप में उभरा है? अगर आप उसे पावर ना भी माने तो कम से कम उसे नेगलेक्ट करके आप नहीं चल सकते। हम अभी आज की आज की जो कंडीशन है कल क्या होगा मुझे नहीं पता। हम् भाई वॉर है और वॉर में एक छोटा सा डिसीजन एक गलती पूरी हिस्ट्री चेंज कर देती है। हमारे हमने हमारे सामने कई सारे एग्जांपल है हम मान लीजिए मैंने शुरू में पानीपत का जिक्र किया हम तो हेमु एक तीर एक आके लगा और उसमें पूरी तारीख बदल गई। जी और जो मुगल भागने की तैयारी कर रहे थे वो रूलर बन गए। एक इंसिडेंट था। हम तो इंसिडेंट ऐसे भी हो जाते हैं। मतलब हम खुदा या नजूमी तो नहीं है या ज्योतिषी नहीं है कि हम भविष्य बाज दें। हम लेकिन हां आज के तारीख में ईरानियंस ड्राइविंग सीट में है। और खाली ईरानियन नहीं है। मैं आपको एक एनकडोट और बताता चलूं। अभी लास्ट अगस्त की बात है। हम हम फॉर्मर इराकी प्राइम मिनिस्टर थे आदिल अब्दुल महदी तो उनके साथ हम एक डिनर पे एक दिन थे तो बगदाद में तो वो रेजिस्टेंस के लिए बड़े सिंपैथेटिक आदमी है इसलिए तो उनसे मैं मतलब जो शुरू में आपसे कह रहा था ना कि वॉर की तैयारियां बहुत पहले से चल रही है और ये वॉर आ रहा था। हम हम तो इराकीज़ वर सेइंग कि वॉर इज़ कमिंग और वहां वहां एकदम वहां मोबिलाइजेशन चल रहा था। सारा तैयारियां चल रही थी क्योंकि उन्हें लग रहा था कि वॉर ईरान का होगा और भुगतेंगे हम। हम हम और भुगतान उन्होंने मतलब ये तो पड़ोसियों पे वो सब कुछ एक हमने देख ही लिया कि उन्होंने दो चीजें बड़ी अहम कही थी। मतलब मैं उनकी जो अरब वर्ल्ड की या उनकी जो जुबान है उनके मुंह से कहलवाना थोड़ा बेहतर है क्योंकि हम तो यहां बैठ के दूर से एक अलग उन्होंने कहा अमेरिकनंस और इजराइली को ये ज़म है कि हम टेक्निकली बहुत साउंड हैं। हम वेयर दे आर उनके पास ड्रोंस हैं। उनके पास सर्िलेंस नेटवर्क है। उनके पास पेगासिस है। उनके पास मोबाइल उनके पास सब कुछ है। हम हम एंड दे कैन और उनके पास जो इंटेलिजेंस की जो कैपेबिलिटीज हैं वो टेक्निकल रीज़ से ज्यादा है। हम हम और उन्होंने लेबनॉन में दिखाया पेजर और यह सब इंसिडेंट मतलब दे वर लाइक अ शॉक फॉर द रेिस्टर्स जी दो चीज़ आदिल अब्दुल महदी ने हमसे कही कि एक तो दो चीजें हमें ड्राइव कर रही हैं। एक तो आइडियोलॉजी हम हम और एक सप्रेशन हम क्योंकि हमें मालूम है आईडियोलॉजी हमें ये ड्राइव कर रही है कि वो मौत का डर हमसे निकल गया। बिल्कुल क्योंकि हम इतना कूट चुके हैं, पिट चुके हैं कि अब लगता है कि अब इसके बाद खोने के लिए हमारे पास कुछ नहीं बचा है। और एक एग्जांपल है कि एक मतलब वो नजुल बलागा से एक कोट है कि अगर आप किसी बांस पे किसी चिड़िया को झपटता देखो हम ये इमाम अली ने कहा कि अगर आप बांस पे चिड़िया को झपटता देखो जी तो ये समझ जाओ कि ये इसके बच्चों को खा के आ रहा है। हम तो उसकी जो तशरी है वो ये है कि चिड़िया के पास अब खोने के लिए कुछ नहीं बचा है। वो बाज से टकराने की जो कुवत उसमें आ रही है उसमें खोने के लिए कुछ है ही नहीं। हम हम बाज उसे इसलिए बच रहा है बाज उसे एक पंजे का शिकार कर सकता है। लेकिन बाज क्योंकि बाज गिल्ट में है। उसने उसके बच्चे खाए हैं। वो गिल्ट उसे कमजोर कर रहा है। ये सुपर पावर्स के साथ दिक्कत है। हम हम वो जो गिल्ट है जी। इजराइल के साथ ना हो। वो ज़ॉमब में कह सकता है कि भ हम जो चाहे कर सकते हैं। लेकिन अमेरिका इजराइल नहीं है। जी उनके पास आप आम अमेरिकी से बात करें तो आम अमेरिकी आवाम भी हम अभ्य है। जी तो मतलब मैं ह्यूमन लेवल पे या नेशनल लेवल पे नफरतों को फेवर नहीं करता। हम हम कम से कम डेमोक्रेसी के मामले में कम से कम ह्यूमैनिटेरियन जो एक ग्लोबल एक मूवमेंट्स हैं उसमें हम अमेरिकनंस इतना तो समझ रखते हैं कि ये जुल्म हो रहा है ये गलत हो रहा है ये सही हो रहा है। जी उस गिल्ड को फील भी करते हैं। यही रीज़न भी है कि वॉर मंगर्स भी अमेरिका से आती हैं। लेकिन उसके अगेंस्ट जो सबसे पहली आवाें उठती है वो अमेरिकनंस में भी उठती हैं। ऐसा नहीं कि वहां बिल्कुल पूरी सोसाइटी और उसका एक एग्जांपल यह है कि जो जॉय बाइडन की जो पार्टी डेमोक्रेटिक पार्टी उसकी हार को पिछले इलेक्शन में सभी सर्वेज ने और पोस्ट पोल सर्वेज के बाद और बाद में जो सर्वेज़ हुए सब में दो अहम रीज़ आए उनकी हार का। एक तो गजा में उनका इनक्टिवनेस। लोगों ने कहा कि यार गजा में जुल्म हो रहा है और ये लोग देखते रहे काहे के सुपर पावर? हम जो हमने कहा ना कि अमेरिका वर्ल्ड के कंडीशंस को कंट्रोल करता है। कॉन्फ्लिक्ट को कंट्रोल करता है। पहली बार वहां लाचार नजर आया था। यहां लाचार नजर नहीं आया। यहां तो ये है कि ये तो हाथ से निकल चुका। हम और वो हाथ से अमेरिकनंस ने निकाला है। जी वो जॉय बाइडन निकाल के गए थे जो ट्रंप के अब काबूज में नहीं है चीज। जी इजराइल का वॉर है ये। हम मतलब मैं पूरी बात घूम के अगर आप देखें यह वॉर दो अब दो लोग लड़ रहे हैं या तो वह इधर इजराइल लड़ रहा है हम या जो बैंक रोल करने वाले यूएई और बहरीन लड़ रहे हैं। बहुत बड़ी बात इजराइल लड़ रहा है और यूएई और बहरीन लड़ रहे हैं। जी इनके साथ तो मसला क्या हो गया कि वो लड़ाई में उस हद तक चले गए जहां वापसी का रास्ता दिखाई नहीं देता। हम इन्हें ये डर है अगर अमेरिका चला गया हम तो दे विल बी एट द मर्स ऑफ़ ईरानियंस। अब ये ईरानियंस की इंसानियत पे है। अगर वो शैतान बन जाए, इजराइल बन जाए तो वो जुल्म पे आमादा हो तो उनकी मर्जी पे सारा मामला है। हम हम और वो अब कैसे टैकल करेंगे? ये ये ईरानियों का भी इम्तिहान है। जी। मतलब ये जिस आइडियोलॉजी पे या अली शरीयती की आइडियोलॉजी पे वो लोग लड़ रहे हैं या या इमाम अली की आईडियोलॉजी या कर्बला की अगर बात करते हैं तो उस आईडियोलॉजी में एक चीज और भी है कि आपका जो असली जो रूप है ये जो आपकी असलियत तब वाज़ होती है जब आप पावर में होते हैं। हम आप माफ़ करने की जो कुत है वो तब देखी जाती है जब आप माफ़ करने की पोजीशन में है। मैं कह दूं कि मैंने साहब ट्रंप को माफ़ कर दिया। तो यार मैं कौन हूं? वह एमआई हम लेकिन अगर ट्रंप जे मतलब अगला अमेरिकन प्रेसिडेंट कह के मैंने माफ़ कर दिया तो ये माना जा सकता है कि हां यार ये ही इज़ अ वेरी बिग हार्ट वाला मामला। हम तो अपने पड़ोसियों के साथ कैसे रिश्ते के पड़ोसी नहीं बदल सकते आप। जी जितनी जल्दी ईरानियंस इस क्फ्लिक्ट से बाहर निकलेंगे और जितना लोगों को मिला के बना के चलेंगे उतना उनके पास अब एक ओपोरर्चुनिटी आई है। जी इस वॉर ने ये अपॉर्चुनिटी जो आप कह रहे हैं अमेरिकनंस कह रहे हैं कि हम उसे नेगलेक्ट नहीं कर सकते और सुपर पावर वाला जो क्लब है उसमें उसे काउंट करना शुरू कर दें। हम तो ईरानियस के पास एक अपॉर्चुनिटी आ रही है या आ गई है या लकीली उन्हें लड़ के उन्होंने ले ली है। हम हम ये सब कहां तक लेके जाते हैं? अब ये उनके जो बदहजमी और हज़ हज़ हज़मा करने की जो कुत है उस पे डिपेंड है। हम वो अच्छा बर्ताव कर लेंगे। नए लाइफ क्रिएट कर लेंगे दे विल लीड द रीज़। क्फ्लिक्ट में जाएंगे तो अभी लंबा चलेगा तो नुकसान सभी का है। जगम मुर्तजा साहब आपके साथ एक बड़ी अच्छी बात जो मैंने भी नोट की कि जो इंटरनल चीजें हैं उस उस जंग के पीछे इस जंग के पसेपर्दा उससे बहुत पहले वो हमें बहुत अच्छे से आज समझने के लिए मिल रहा है और और यह भी कि आगे क्या होगा और क्यों होगा और क्या-क्या हो सकता है ये एक बड़ी बात है और यह आपकी स्टडी है जो आपने वहां रह के खुद इस अनुभव को हासिल किया जिसके चलते आप इस बात को कह पा आ रहे हैं तो आप खुद यह मानते हैं कि मानना पड़ेगा कि ईरान यहां से एक पावर बनकर उभर सकता है। इसको हम इस तरह से समझे। देखिए रीजनल पावर का तो टैग उनके ऊपर है ही। जी और सबसे बड़ी चीज रेजिस्टेंस का जो उनका कांसेप्ट है हम उसमें दो चीजें तो उन्होंने दिखाई दी। एक तो ये कि तारीख में हमने कभी देखा नहीं कि अमेरिका किसी कंट्री में एंटर हुआ हो और बिल्कुल रिजीम चेंज किए बिना वहां से निकल गया हो। हम जीत के दावे बहुत सारे हमने सुने हैं। अफगानिस्तान में भी देखा, इराक में भी देखा, वियतनाम का भी है। लेकिन उससे पहले 10 साल 15 साल लोगों ने सैक्रिफाइस किया है अपने को, अपनी लाइफ को, अपनी सोसाइटी को, अपना सब कुछ ईरानियांस ने वहां तक बात नहीं जाने दी। इसका मतलब वो मजबूत थे कम से कम वॉारफेयर में। हम हम और टेक्नोलॉजी के मामले में भी उन्होंने दिखाया कि भाई जो दुनिया की सबसे मजबूत जो आर्म्स एंड एमिनेशन है उनका सामना भी कर सकते हैं हम और उनकी कैपेबिलिटीज भी कैपेबिलिटीज में मैं एक आपको टेक्निकल चीज बहुत कोई डिफेंस एक्सपर्ट कभी कोई आए तो उससे भी आप इसे तस्दीक कर लीजिए जिस पे लोग बात कम करते हैं। मिसाइल बनाना मुश्किल नहीं है। हम या रॉकेट बनाना मुश्किल नहीं है। लेकिन उसमें टेक्निकली एक बहुत बड़ा एक उसके अंदर झोल होता है। आपने देखा होगा बहुत सारे कंट्रीज हैं जिनके पास स्पेस में रॉकेट भेजने की कैपेबिलिटी है। लेकिन मिसाइल्स उनके उतने कैपेबल नहीं है। हम हम इवन इराक में जब पिछले वॉर में स्कर्ट मिसाइल्स थे उनके साथ भी ये गलत मुश्किल थी। एक बार एनवायरमेंट से बाहर चला गया या जो ट्रोपोस्फीयर है या जो हमारा जो वातावरण है उससे एक बार मिसाइल बाहर निकली। जब वो री एरी एंटर करती है जी तो आपने देखा होगा जो आसमान से जो रॉकेट लौट के आते हैं उनमें भी जो है दोबारा लौट के आने के लिए मेटल और वो सब चीजें मेटलर्जी एक पूरा एक साइंस है अपने आप बिल्कुल मिसाइल्स के साथ दिक्कत यही है हम हम उन्हें उतना कैपेबल बनाना कि वो एक बार आपके लांचर से गया और फिर वापस जब वो दोबारा वातावरण में पृथ्वी के दाखिल हो हम तो बर्न आउट ना करें हम और अपने टारगेट तक पहुंच जाए आधे मिसाइल्स ये होता है मिसाइल्स बहुत सारे कंट्रीज बनाते हैं और ये कहने की बातें होती है लेकिन टारगेट हिट करने की जो कैपेबिलिटी है वो कितने परसेंट है वो 100% कैपेबिलिटीज बहुत कम नेशंस की बड़ी बात ईरानियंस ने उस कैपेबिलिटी पेस्ट्री हासिल की हम और हाइपरसोनिक मतलब एक स्पीड तक तो ठीक है लेकिन जब हाइपरसोनिक और सुपरसोनिक की जब बातें करते हैं जी उन मिसाइल्स को उन्हें हिट कराना बहुत टफ है। और हमने देखा इस पूरी जंग में हमने देखा कि वो काम किया और इसका इसका नतीजा निकला परिणाम निकला। एक और सवाल चलते-चलते कि इजराइल क्या अमेरिका को इतनी आसानी से जाने देगा? इजराइल क्या इस जंग को खत्म होने देगा? इसराइल क्या ईरान के वर्चस्व को इतना आसानी से स्वीकार कर पाएगा? इसराइल क्या सब कुछ इतना शांत हो जाने देगा ख्ते में? जबकि उसकी अपनी महत्वाकांक्षाएं हैं और यह बात किसी से छिपी नहीं कि उनका ख्वाब है और कई बार उनके कई लीडर्स ने बोला भी है कि भाई हम ग्रेटर इसराइल का ख्वाब देखते हैं तो क्या ये मुमकिन इतना आसानी से हो पाएगा? गालिबन 2017 या 18 की बात है। जी एक प्रोग्राम में जी आयतुल्लाह खामेनी साहब ने जो भी जिनका भी इंतकाल हुआ खुनी नहीं खामनी साहब कहा कि अगले 25 साल में इजराइल एकिस्ट नहीं करेगा। हम हालांकि मर्गबर अमेरिका मर्गबर इजराइल के मुर्दाबाद वाले नारे लगते रहते हैं। लेकिन टेक्निकल एस्पेक्ट में इस तरीके से किसी ने ये वाली बात नहीं कही थी। इस बात की तशरी फिर बाद में जो सेकंड रंग जो लीडरशिप है जी रही साहब ने इस पे बकायदा पूरा एक लेक्चर दिया है। हम इसके बाद में अमीर अब्दुल अयान जो फॉरेन मिनिस्टर थे उन्होंने बकायदा पूरा ग्रेटर इजराइल और उसके ऊपर उनका बड़ा जबरदस्त काम था। हम लिखा पढ़ा वो मतलब वो सब करते थे। जी तो एक बातचीत में ऐसे ही हमने पूछा कि क्यों नहीं रहेगा हम तो उन्होंने दो चीजें कही थी कि एक तो इजराइल के साथ दिक्कत क्या है वो अपने ज़म में इतना पगलाया हुआ नेशन है कि वो अपने पड़ोस में किसी से बनके उसके रहने वाले नहीं है। अच्छा और जब आप अपने हर बॉर्डर पे दुश्मन खड़ा कर लेते हैं तो एक लिमिट है हम बोले ठीक है मिस्री अमेरिका के दबाव में है फाइनशियली कमजोर है आज उसमें है जी या इराक को आपने या सीरिया में आपने अपना डोमिनेंस दिखा दिया कि वहां कमजोरी हो गई कुछ हो गया लेकिन ये हमेशा चलने वाली चीजें नहीं है हम हम और हमेशा चलने वाली चीजें यूं नहीं है कि आप हमेशा टेक्नोलॉजी पे या हथियारों के दम पे रूल नहीं कर सकते। जी आवाम को मेंटेन करना अलग है हथियारों से और डर बैठा के रखना एक अलग चीज है। बोले एक तो दुश्मन इतने ज्यादा हैं। बोले उनके दुश्मन कमजोर हैं। और दूसरा ये है कि लड़ते-लड़ते एक टाइम आएगा कि इजराइल के लोग भी उसे उतारने लगेंगे कि वॉर कब तक लड़े? जी। वो अभी हम देख रहे हैं। हम इजराइल की पापुलेशन का एक बड़ा हिस्सा डुअल सिटीजंस का है। जो सेटलर्स हैं वो ज्यादातर ड्यूल सिटीजन है। जी। आपने एयरपोर्ट से भीड़ देखी होगी लौट के भाग रहे हैं नहीं है अक्सर देखा है और जो और जो उनकी जो एक मैंडेटरी डिफेंस सर्विज हैं उसमें लोग हिस्सा नहीं लेना चाहते हैं क्योंकि लड़ाई का एक लिमिट है हम ईरानिया से अभी लड़ रहे हैं वो वो लगातार वॉर में है पहले फिलिस्तीन के साथ उससे लेबनान फिर उससे पहले लेबनान उससे पहले लेबनान और सीरिया और ये सब एक तो ये हो गया जी और ईरानियस दूसरी चीज ये कहते थे कि हम अपने चाहे एलई को या जो भी उनके नेबर में जिन लोगों से उनका क्फ्लिक्ट है हम उन्हें इतना एमावर कर देंगे कि ये अगले 10 साल बाद देखना वो लोग खड़े होंगे और ये उन्हें रेजिस्ट नहीं कर पाएगा। हम हम दूसरी चीज इजराइल के साथ जो आपने कहा ग्रेटर इजराइल वाला ये ये वाले जो ओटोपियन जो कांसेप्ट्स हैं ये बड़ा मतलब अहमकाना है उस दौर में जब पूरी दुनिया तलवार वाली लड़ाई से या नेवल ब्लॉकेड वाली लड़ाईयों से बाहर निकल के आ चुकी है। मॉडर्न सिविलाइज्ड वर्ल्ड में हम जी रहे हैं। जी इस दुनिया में लड़ाईयां खाली हथियारों से नहीं होती। लोगों पे या अलायसेस पे या या आपका कितना इन्फ्लुएंस है कितनी सोसाइटीज पे कितने नेशंस पे वो मैटर करता है या कहां आपके बिनेस अलायसेस हैं कहां आपके स्ट्रेटेजिक अलायसेस हैं वो वो मायने रखता है ये हथियारों वाला जमाना या तलवारों वाला जमाना नहीं है अगर टेक्निकली टर्म पे हम कहें हम जो ग्रेटर इजराइल वाला जो मसला है उसमें एक तो ग्रेटर इजराइल वाला है ही है हम आप अगर इजराइल की हिस्ट्री देखेंगे और अमेरिका की हिस्ट्री देखेंगे उसने हर उस कंट्री को हम चाहे वो ग्रेटर इजराइल के नक्शे में है या नहीं है। हम उसे डिस्टेबलाइज कर दिया है जो उसकी विसिनिटी में है और इसके पास अपनी रेगुलर आर्म फर्सेस हैं या मिलिट्री या स्ट्रेटेजिक डेटरेंस पावर है। जी उन्होंने इराक को इसलिए डिस्टेबलाइज नहीं किया कि सद्दाम हुसैन उनका दुश्मन था या तेल खाली तेल चाहिए तेल वैसे भी ले लेते। ले भी रहे थे। अब भी ले रहे हैं। हम इसलिए डिस्टेबलाइज़ किया कि एलआई जरूर था लेकिन उसके पास एक रेगुलर आर्मी थी और एलआई आज का एलआई कल एलआई रहेगा। यह बड़ी बात जरूरी नहीं है। जी जो आज मेरा दोस्त है वो कल दुश्मन नहीं हो। यह कोई पॉलिटिक्स में या जियोपॉलिटिक्स में मायने नहीं रखता है। जैसे अज़र भाईजान का एग्जांपल मैंने आपको दिया था। वॉर से पहले एंटी ईरानियन था। हम इस वक्त अला ही है। हम रूस से रास्ता कैस्पियन सी वाला रास्ता अज़रबजान हो के जाता है। जी चाइना को लोग कह रहे हैं कि ईरान का बड़ा नुकसान हो गया। ब्लॉकेड से कोई नुकसान नहीं हो रहा। हम उसका जाहिदान से जिंजयान तक रेल लिंक है ईरान के पास। हम हम बाय रोड कनेक्टिविटी कजाकिस्तान है। दिन में छह फ्रेट ट्रेन आती है जाती है। उसे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। वो अपना बिज़नेस दो ही कंट्री से कर रहा है। वो दोनों से उसका हो रहा है। हम अज़र भाईजान उसका नया इलाई है। जी इधर दिक्कत है इनके साथ। ये अपने अलाय खो रहे हैं। हम अभी आपने देखा टर्की इजराइल का अच्छा खासा बिनेस भी और डिफेंस की जितनी मैन्युफैक्चरिंग है जो इजराइल में हथियार इस्तेमाल हो रहे हैं। भले ही कितना ही अर्दगन बयान देते रहे लेकिन वो मेड इन टर्की हथियार वहां यूज़ होते हैं। जी आप उसे नहीं बदल पाए। चाहे नाटो की वजह से कहिए चाहे आप कहिए कि हम मजबूर हैं और यह उनकी सप्लाई लाइन तक वहां से जा रही है। देखिए सप्लाई लाइन वहां से जा रही है। जी लेकिन टर्की को अल्टीमेटली इंटेंशंस पे इजराइल की बोलना पड़ा। हम के या हमसे वॉर का ना सोचे क्योंकि उसे मालूम है हम एलाई जरूर है। कल को इजराइल हमें टारगेट कर सकता है क्योंकि उनके पास रेगुलर आर्मीज़ हैं। जी ये इजिप्ट को भी खतरा है। अगला हम अगला टारगेट जॉर्डन भी हो सकता है। जी तो आपके अलाय आपसे डर में है। हम एक दूसरी तरफ वाले जो अलाइ है उन्हें यकीन है कि अपना नुकसान उठा लेगा। हम ठीक है हम लॉसेस में चले जाएंगे मर जाएंगे। लेकिन ये है कि मरते दम तक ये साथ खड़ा रहेगा। हम याहया सनवार मर गए। हम लेकिन उनके आखिरी बयान भी अगर आप देखें तो कहेंगे बोले नहीं ईरान से हमारा जो अलायंस है वो मतलब अनब्रेकेबल है। उसे भरोसा था। हम हम अब वह कई बार हो सकता है कि सरकमस्ट्ससेस हो या उसका भरोसा उस आपको लग रहा हो दुनिया में कि भाई भरोसा नहीं पूरा हुआ या हुआ। लेकिन जो मरा उसे तो मालूम था कि उसे भरोसा था। जी लेबनीज़ हैं। हम ईरानियंस आज कहते हैं लड़ लेंगे मना कर देते हैं। वो सी फायर में चले जाते हैं। उन्हें यकीन है कि हमारा अलय है। ठीक है। हम हम सफर कर रहे हैं इनकी वजह से। लेकिन ये है कि हमारा बुरे वक्त का साथी है। हम और ये मैं वॉर से हट जाइए। या नेशन से निकल आइए। मैं आपको पर्सनल लाइफ में भी या आपके जो दर्शक हैं उन्हें एक सलाह है। हम पैसे से कभी भी आप लॉयल्टी नहीं खरीद सकते। हम आप लोगों पे छोटे-छोटे एहसान कर दीजिए। आपको जिंदगी भर आपके साथ खड़ा होता है। जी आप सबके लिए लाठी लेके लड़ने नहीं जाते। लेकिन आप उसके बुरे वक्त में आप उसे मोरल सपोर्ट दे दीजिए। वो हमेशा आपका दोस्त रहेगा। बहुत बड़ी बात है। बड़ी बात है। आप अपनी जिंदगी में जितने लोगों के साथ अच्छाई कर देंगे भलाई लौट के आ जाती है। हम पैसा आदमी राइट समझता है। बोले बहुत पैसा कमा रखा है। लूट के कमाया होगा। चोरी करके वो 50 बातें कह देगा। सही बात है। एहसान फरामोशी होती है। लोग कहते हैं ना बोले खा भी रहा है और बेईमानी भी कर रहा है। और नमक जैसे एक टर्म है। लेकिन एहसान आदमी नहीं भूलता। सही कह रहे हैं आप। तो अलायसेस एहसान से बनते हैं। ईरान कहीं जाके बहुत बड़े वो काम नहीं कर रहा है जहां उसने कोई रेवोल्यूशन नहीं ला दिए। हम लेकिन जो छोटे छोटे छोटे जो उसके जो ग्चर्स हैं जो बुरे वक्त में खड़ा होने का मिलिट्री हेड पहुंचा दिया उसने फाइनशियल एड दे दिया अपनी परेशान लोग जानते हैं सेंशंस में परेशान है हम उसके बाद भी राशन पहुंचा दिया कहीं इवन कहीं आप देखिए के जो दो ऑर्गेनाइजेशन ईरान के पूरे दुनिया में सोमालिया से लेके और आप अफ्रीकन नेशंस में घनाना में जाके देखिएगा कभी अगर जाना हो हम इमाम खुमेनी रिलीफ फंड आई के आरिएफ हम हम और इमाम इमाम रजा शाइन बोर्ड अच्छा इनके जो सोशल वर्क्स हैं मतलब इमाम रजा शाइन बोर्ड वाले क्योंकि हमारे यहां और वहां एक बड़ा हम तोकि हमारे यहां दरगाह और सूफी कल्चर बहुत ज्यादा हम देखते हैं। हमारे यहां चढ़ावे वाला कल्चर है ईरान में कल्चर नहीं था। हम हम लेकिन वो ईरान इराक वॉर के बाद जब पाकिस्तानी वहां जाना शुरू हुए हिंदुस्तानी पिल्गिम जाना तो वहां चढ़ावा चढ़ने लगा। हम हम वो उनके लिए बड़ा नई चीज थी। ये मैं चलते-चलते एक बात बता दें। तो इमाम रजा शाही बोर्ड में मुझे किसी साहब ने बताया था कि बोले शुरू में जब ये पैसे आने शुरू हम बड़े परेशान थे इसका क्या करें हम तो हमने बोले ठीक है किसी को खाना खिला दिया थोड़े बहुत अमाउंट थे किसी को दे दिया लेकिन अमाउंट बढ़ता ही जा रहा था फिर यूरोपियंस आने शुरू हुए फिर पैसे और बढ़ गया जी तो फिर बोले हमने पॉवर्टी एलिवेशन में लगाया लोगों को घर खरीदवा दिए किसी को कुछ दे दिया क्योंकि हमारे किसी यूज़ का पैसा नहीं था हम बोले फिर वो बाद में वो एंटरप्राइज में लगा रजवी अपने आप में एक ब्रांड है ईरान में अच्छा आटा बनाता है कोल्ड ड्रिंक्स बनाता है एफएमसीजी प्रोडक्ट्स बनाता है। उनके फॉर्म्स हैं। पिस्ता के फॉर्म है। मार्केटिंग कर रहा है। 16 17000 एम्प्लाइज हैं उसके। अच्छा। उसकी जो अर्निंग्स है वो फिर वो जाहिर सी बात है इधर से पैसा गया है। फिर एक नई अर्निंग आ रही है। फिर इतना पैसा है। जी। वो ग्लोबली उन्होंने सोशल सेक्टर में स्कूल्स उनके चलते हैं। उनके हॉस्पिटल चलते हैं। उन्होंने बड़ा इन्वेस्ट किया है। जी जी। उससे उनके जो अलायंसेस हैं हम हम अफ्रीकन वर्ल्ड में ईरान के लिए बहुत सिंपैथी है। जी। सेंट्रल एशिया में भले ही वो अमेरिका ना अलाय हो कुछ हो लेकिन ईरान के लिए बड़ी सिंपैथी है। तो आप ये कहना चाह रहे हैं कि ईरान का जो किया हुआ है वो उसके काम आ रहा है या आएगा आता जा रहा है और इजराइल ने एक तरह से अपने आप को अलग थलग कर लिया दुनिया से उसके वजूद के लिए आगे आके संकट डेंजर खतरा है। खतरा पैदा यह बहुत बड़ी बात आपने कही और खुद इमाम आयतुल्लाह अली खामई साहब को आपने कोट किया कि एक वक्त आएगा जब इजराइल का वजूद ही खत्म हो जाएगा या वो अपने आप में खत्म अपने आप खत्म होगा अपने अपने बोझ में दब के मर जाएगा बड़ी बहुत बड़ी बात बहुत बड़ी बात है तो इसी मोड़ पर हम लोग कल क्या हो इसको लेकर तो आपने खुद कह दिया कि कोई भी भविष्यवक्ता नहीं होता लेकिन इस मोड़ पर इस बातचीत को खत्म कर सकते हैं कि जो कुछ अभी हुआ है उसने ईरान को ताकतवर बनाया है भरोसेमंद बनाया गेन करवाया है। बड़ी बात यह है और यहां से आगे चीजें बेहतर हो सकती है। खास तौर से ईरान के नजरिए से हम देखें तो खाली ईरान नहीं रीजन के लिए पूरे रीजन के लिए पूरे ख्ते के लिए। ये बड़ी बात हम हम दुआ करेंगे कि ये क्फ्लिक्ट खत्म हो। जी। इसके बाद में कम से कम अमेरिका किसी और कंट्री में इंटरवीन करने का ना सोचे। और सोचे भी तो 100 बार सोचे। और इस तरह डिस्टेबलाइज करने का रीजन को कोई और एफर्ट ना हो। जी। और इजराइल का भी जो ग्रेटर इजराइल वाला जो ख्वाब है उसे वो अब शेलफ कर दे और अपने वजूद के लिए ध्यान दे और दूसरों को डिस्टर्बलाइज करने से हटे बड़ी बात बड़ी बात बहुत शुक्रिया चैन से रहें और चैन से जीने से जीने जियो और जीने दो बहुत शुक्रिया जग मुर्तजा साहब आपने वक्त दिया और बहुत डीप बहुत अच्छी तरह से बड़े सुकून के साथ जानने को मिला क्योंकि जब हम वॉर के हवाले से बात करते हैं तो जंग के अलग-अलग पहलुओं पे बात होती है लेकिन यहां हमें में और उसकी डीप हकीकत मालूम चली, सच्चाई मालूम चली। क्या वजूहात रही और कैसे चीजों से निकला जा रहा है, कैसे चीजों को कवर अप किया जा रहा है। बहुत कुछ आपसे जानने को मिला और उसकी वजह है कि आप खुद उस ख्ते में रह चुके हैं। करीब से सारी चीजों को देख चुके हैं। बहुत-बहुत शुक्रिया लाइव हिंदुस्तान के साथ जुड़ने के लिए। तो कैसी लगी ये बातचीत? हमें कमेंट बॉक्स पर जरूर बताइएगा और जैगम मुर्तजा साहब को हम और भी दावत देते रहेंगे। उनसे कहेंगे कि हमारे साथ शामिल होते रह और आपकी जो गिरा कद राय है जो आपका अनुभव है हमारे साथ जरूर शेयर करते रहिएगा तो हमें जरूर कमेंट बॉक्स में बताइएगा इमरान खान के साथ आखिर तक कनेक्ट रहने के लिए शुक्रिया वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर कीजिए आगे बढ़ाइए और गुजारिश रहेगी कि अपनी दुआओं में भी हमें याद रखिए