शीशा हो या दिल हो आखिर टूट जाता [गाना गाने की आवाज़] है। जाने जाओ हरजाई देखी तेरी दिलदारी दिल देकर मैं कर बैठी दिल के दुश्मन थे यारी। जिस अभिनेत्री के पीछे कभी पूरा हिंदुस्तान पागल था। उसी अभिनेत्री की जिंदगी में एक दौर ऐसा आया जब हर तरफ सिर्फ धोखा, दर्द और बर्बादी थी। उन्हें एक बार नहीं बार-बार लूटा गया, प्यार के नाम पर भी और रिश्तों के नाम पर भी। हालात इतने बिगड़े कि जिस देश ने उन्हें स्टार बनाया, उसी भारत को छोड़कर उन्हें पाकिस्तान तक जाना पड़ा। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक कामयाब अभिनेत्री को अपना वतन छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा और इस पूरी कहानी में फिल्म इंडस्ट्री के कौन-कौन से बड़े नाम जुड़े थे? आज की कहानी में एक-एक राज सामने आएगा। और यकीन मानिए आखिरी सच सबसे चौंकाने [संगीत] वाला है। ऐसी वैसी ना समझ सजना [संगीत] जान दे दूंगी या जान ले लूंगी। [संगीत] रीना रॉय फिल्मों में तब आई जब उनकी उम्र महज 16 साल की थी। इनके डेब्यू फिल्म का नाम था जरूरत जो [संगीत] कि साल 1972 में रिलीज हुई जिसमें उनके कोस्टार थे विजय अरोड़ा और डेनी डेंगजोंपा। इस फिल्म को बनाया था बी आर इशारा ने और उन्होंने ही रीना रॉय का नाम सायरा अली से बदलकर रीना रखा था। इसी साल यानी कि 1972 में बी आर इशारा ने रीना को बतौर हीरोइन लेकर एक अन्य फिल्म बनाई जिसका नाम था मिलाप। फिल्म [संगीत] में रीना के नायक के तौर पर चुना गया शत्रुघ्न सिन्हा को जो कि उन दिनों अपने नकारात्मक और सहयोगी भूमिकाओं के लिए मशहूर थे। फिल्म मिलाप को लेकर शत्रु जी बताते हैं कि मिलाप बतौर लीड हीरो मेरी पहली फिल्म [संगीत] थी। उस दौर में मैं शराब को हाथ तक नहीं लगाता था और रात को जल्दी सो जाता था। इसी फिल्म के दौरान मेरी मुलाकात रीना रॉय से हुई जो उस वक्त महज 16 साल की थी। फिल्म के एक सीन में मुझे एक लंबा मोनोलॉग बोलना था। जबकि रीना का सिर्फ एक डायलॉग था। लेकिन हमें [संगीत] बार-बार रिटेक देना पड़ा क्योंकि रीना अपनी लाइन बार-बार भूल जाती थी। शत्रु आगे बताते हैं कि इस फिल्म में मैंने छह अलग-अलग किरदार निभाए थे और हमने पूरी फिल्म की शूटिंग सिर्फ 16 दिनों में ही पूरी [संगीत] कर ली थी। हालांकि फिल्म फ्लॉप रही लेकिन यह मेरी सबसे पसंदीदा फ्लॉप फिल्मों में से एक है। शत्रु जी की इस बात से तो यह साफ हो जाता है कि फिल्म में ऐसा कुछ खास जरूर था जिस कारण फ्लॉप होने के बाद भी यह उनकी पसंदीदा फिल्मों में शामिल रही। अगर बिना किसी लाग लपेट के कहा जाए तो यह साफ है कि इस फिल्म के दौरान शत्रुघन सिन्हा और रीना रॉय के बीच कोमल भावनाओं की शुरुआत हुई थी।
अगले कुछ समय में दोनों के बीच का यह आकर्षण प्यार में बदल गया और दोनों एक दूसरे के लिए बेताब रहने लगे। फिर शुरू हुई साल 1976 में आई फिल्म कालीचरण की शूटिंग जहां इन दोनों के रिश्तों को शूटिंग पर मौजूद हर किसी ने अनुभव किया। फिल्म [संगीत] कालीचरण के शूटिंग के दौरान इसके निर्देशक सुभाष घई दोनों के नजदीकियों को लेकर काफी तनाव में रहते थे। बताया जाता है कि शत्रुघ्न सिन्हा अक्सर रीना रॉय के मेकअप रूम में चले जाते और घंटों तक वहीं रहते। [संगीत] इस वजह से शूटिंग का माहौल भी काफी असहज हो जाता। दिलचस्प बात यह थी कि सुभाष ग शत्रुघन सिन्हा के उन दिनों की एक अन्य गर्लफ्रेंड पूनम के राखी भाई थे और संभव है कि किसी कारणवश शत्रुजी और रीना जी की नजदीकियां सुभाष घई को तनिक भी नहीं सुहाती थी। हालांकि कुछ रिपोर्ट्स यह भी कहती हैं कि सुभाष घई ने स्वयं भी रीना रॉय के साथ कथित तौर पर नजदीकियां बढ़ाने की कोशिश की थी। लेकिन रीना को यह स्वीकारी नहीं था और वह सुभाष घई से नाराज हो गई थी। रिपोर्ट्स यह भी कहती है कि रीना की नाराजगी के बाद सुभाष घई [संगीत] ने रीना की बहन बरखा को डेट करना शुरू कर दिया था। हालांकि इस बात में कितनी सच्चाई है इसकी पुष्टि [संगीत] या तो रीना कर सकती हैं या फिर सुभाष गई। खैर अभी कुछ देर पहले हमने शत्रुघ्न सिन्हा और पूनम जी के अफेयर की बात कही और इस अफेयर की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। इसकी शुरुआत हुई थी [संगीत] साल 1965 में एक ट्रेन के सफर के दौरान।
19 साल के शत्रुघन सिन्हा पटना से बंबई जा रहे थे क्योंकि उन्हें एफटीआईआई पुणे में दाखिला लेना था। उसी ट्रेन में उनकी नजर एक खूबसूरत लड़की पर पड़ी जिसका [संगीत] नाम था पूनम चंडीमानी। पूनम भी अपने अंकल और आंटी के साथ पटना से एक शादी समारोह में शामिल होकर बंबई लौट रही थी। शत्रुघन [संगीत] सिन्हा उनकी खूबसूरती देखकर इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने पहली बार किसी लड़की से बात करने की कोशिश की। उस समय किसी बात को लेकर पूनम रो रही थी। जिसे देखकर शत्रु जी ने एक कागज पर फिल्मी अंदाज में लिखा इन खूबसूरत आंखों में आंसू अच्छे नहीं [संगीत] लगते। रोइए मत। शत्रु जी ने उस पर्ची को एक मैगजीन में रखकर पूनम को दे दिया। लेकिन पूनम ने मैगजीन ही ट्रेन की खिड़की से बाहर फेंक दी। फिर भी उन्होंने शत्रुघन सिन्हा की शिकायत अपनी आंटी से नहीं की। [संगीत] 3 सालों बाद साल 1968 में पूनम ने मिस यंग इंडिया का खिताब जीता। उधर शत्रुघन सिन्हा अभी भी संघर्ष कर रहे थे। कुछ समय बाद एक फिल्म स्टूडियो में दोनों की अचानक मुलाकात हो गई। इस बार पूनम एक उभरती हुई अभिनेत्री थी और शत्रुघ्न काम की तलाश में संघर्ष कर [संगीत] रहे थे। पूनम ने उनसे बात की और यहीं से दोनों के बीच दोस्ती की शुरुआत हुई। धीरे-धीरे यह दोस्ती प्यार में बदल गई। 1971 में दोनों ने फिल्म धरती की गोद में साथ काम किया। दोनों के बीच सब कुछ सही चल रहा था। लेकिन पूनम की आंटी इस रिश्ते के खिलाफ थी। वह उनकी शादी अपने स्वजाती किसी सिंधी लड़के से करवाना चाहती थी।
इसके बाद दोनों की मुलाकातों पर पाबंदियां लगा दी गई। प्यार [संगीत] पर पहरा लगाना इतना आसान नहीं था। शत्रुघ्न और पूनम जी चोरी-चोरी मिलने लगे। कभी दोस्तों की मदद से, कभी घर के कर्मचारियों की मदद से और कभी वेश बदलकर। दोनों एक दूसरे को चिट्ठियां भी लिखा करते थे। इसी दौरान शत्रुघ्न सिन्हा का करियर भी तेजी से आगे बढ़ने लगा। फिल्में मिलने लगी, पहचान बढ़ने लगी और उनके चाहने वालों की संख्या भी बढ़ती चली गई। इसी स्टारडम के दौरान उनकी जिंदगी में आई रीना [संगीत] रॉय। दोनों ने कई फिल्मों में साथ काम किया और उनकी नजदीकियां बढ़ने लगी। शत्रुघन सिन्हा ने स्वयं स्वीकार किया है कि स्टारडम और गलत संगत ने उन्हें भटका दिया था। हालात यहां तक पहुंचे कि [संगीत] उन्होंने पूनम से रिश्ता तक खत्म कर लिया। इसके बाद दोनों करीब 3 सालों तक एक दूसरे से दूर रहे। लेकिन [संगीत] पूनम ने उनका साथ पूरी तरह से नहीं छोड़ा। वो शत्रुघन सिन्हा की मां के संपर्क में रही और उनकी देखभाल को लेकर चिंतित रहती थी। कहा जाता है कि इस दौरान पूनम बहुत परेशान रही। उनका वजन कम हुआ और उन्होंने अपनी जिंदगी में आध्यात्मिकता का सहारा लिया। फिर आया साल 1980 [संगीत] जब कहानी ने एक बार फिर करवट ली। पूनम अपनी आंटी के साथ शत्रुजी के बंगले रामायण जा पहुंची। जहां उनकी मुलाकात शत्रु जी की मां से हुई। इस मुलाकात का परिणाम यह निकला कि शत्रु जी की मां दोनों की शादी के लिए राजी हो गई और उसी दिन शत्रु जी ने पूनम को रामायण की छत पर बुलाया और घुटनों के बल बैठकर उनसे पूछा क्या तुम अब भी मुझसे शादी करने के लिए तैयार हो पूनम ने हां कह दिया और फिर 9 जुलाई 1980 को दोनों शादी के बंधन में बंध गए कहते हैं कि इस शादी के आसपास शत्रुघ्न सिन्हा लंदन में रीना रोई के साथ एक प्रोग्राम के लिए गए हुए थे। नतीजा यह हुआ कि शत्रुघ्घन अपनी शादी में करीब 3 घंटे देर से पहुंचे। पूनम को [संगीत] डर था कि कहीं वह आखिरी वक्त पर शादी से पीछे ना हट जाए लेकिन आखिरकार शादी हो गई। हालांकि यह प्रेम त्रिकोण यहीं पर खत्म नहीं हुआ। शादी के बाद भी शत्रुघ्न और रीना रॉय की मुलाकातें कई सालों तक जारी रही। शत्रु जी ने कथित तौर पर खुद माना कि उनका और रीना का रिश्ता करीब 7 सालों तक चला। एक बार उन्होंने इस रिश्ते को लेकर कथित तौर पर कहा था कि रीना मुझसे प्यार करती है लेकिन पूनम मेरी [संगीत] पूजा करती है। खैर इस प्रेम त्रिकोण ने रीना रॉय और पूनम जी को काफी दर्द दिया। बाद में शत्रुघन सिन्हा ने भी यह स्वीकार किया कि उन्होंने अपनी जिंदगी में कई अभिनेत्रियों के साथ करीबी रिश्ते बनाए और इस वजह से उन्होंने अपनी पत्नी पूनम को काफी दुख पहुंचाया। खैर एक समय बाद शत्रुज ने आखिरकार रीना रॉय से दूरी बना ली और अपने पारिवारिक जीवन में लौट आए। उधर रीना रॉय के जीवन में खालीपन बढ़ता चला गया। इसी दौरान उनके जीवन में एक और फिल्मी हीरो की एंट्री हुई। जी हां, यह कोई और नहीं बल्कि विनोद खन्ना थे। विनोद खन्ना अपने जवानी के दिनों में बॉलीवुड के सबसे दिलकश स्टार्स में गिने जाते थे। उनकी लंबी कद काठी व्यक्तित्व [संगीत] और स्क्रीन प्रजेंस ने उन्हें महिला दर्शकों के बीच खासा लोकप्रिय बना दिया था। हालांकि उनकी कैसोनवा छवि को आमतौर पर उनके 1987 में [संगीत] फिल्मों में वापसी के बाद की जिंदगी से जोड़ा जाता है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इससे काफी पहले उनका नाम रीना रॉय से जुड़ा। इन दोनों की यह कहानी और दिलचस्प इसलिए हो जाती है क्योंकि रीना रॉय उस समय शत्रुघ्न सिन्हा की गर्लफ्रेंड रह चुकी थी। रीना रॉय और विनोद खन्ना ने एक साथ कई फिल्मों में काम किया। जिनमें [संगीत] जेल यात्रा, इंसान और जन्म कुंडली जैसी फिल्में शामिल थी। साल 1983 में स्टार डस्ट मैगजीन को दिए एक इंटरव्यू में रीना रॉय के भाई राजा रॉय ने एक बेहद दिलचस्प [संगीत] दावा किया। उनके मुताबिक शत्रुघन सिन्हा के साथ रीना रॉय का रिश्ता खत्म होने के बाद वह विनोद खन्ना के करीब आ गई थी। लेकिन बात सिर्फ एक नए रिश्ते तक सीमित नहीं रहा। राजा रॉय के अनुसार रीना उस समय बॉलीवुड छोड़ने तक के बारे में भी सोच रही थी।
वह विनोद खन्ना के साथ अमेरिका जाना चाहती थी। [संगीत] जहां दोनों ओशो के आश्रम में समय बिताते और अध्यात्म को समझते। सोचिए [संगीत] एक ऐसी अभिनेत्री जिसका करियर उस वक्त बुलंदियों पर था जिसके पास फिल्मों की कोई कमी नहीं थी। वह अचानक [संगीत] फिल्म इंडस्ट्री छोड़कर विदेश जाने के बारे में सोच रही थी। आखिर क्यों? क्या इसकी वजह सिर्फ प्यार था या विनोद खन्ना के साथ उनका रिश्ता इतना गंभीर हो चुका था कि रीना रॉय अपनी पूरी जिंदगी बदलने के लिए तैयार थी। हालांकि [संगीत] यहां यह याद रखना भी जरूरी है कि उनके रिश्ते से जुड़ी इन बातों को प्रत्यक्ष रूप से दोनों कलाकारों ने कभी स्वीकार [संगीत] नहीं किया बल्कि यह कहानी उस दौर की मीडिया रिपोर्ट्स और रीना रॉय के भाई राजा रॉय के कथित बयान पर आधारित है। लेकिन इस कहानी को कई साल बाद एक और दिलचस्प संदर्भ तब मिला जब रीना रॉय कपिल शर्मा शो में मौसमी चटर्जी के साथ पहुंची जहां विनोद खन्ना का भी जिक्र हुआ। इस बातचीत [संगीत] के दौरान रीना ने विनोद खन्ना से जुड़ा एक किस्सा सुनाया कि शूटिंग के दौरान उनसे मिलने के लिए बहुत सारी लड़कियां आया करती थी। इसी दौरान मौसमी चटर्जी ने मजाकिया अंदाज में रीना की ओर इशारा करते हुए कहा था कि इसका भी दिल आ गया था। मौसमी चटर्जी का यह मजाकिया कमेंट भले ही हल्के-फुल्के अंदाज में था लेकिन इसने पुराने दौर की उन चर्चाओं को फिर से याद दिला दिया जिसमें [संगीत] रीना रॉय और विनोद खन्ना के कथित नजदीकियों का जिक्र मिलता रहा है। खैर जब विनोद खन्ना अपने फिल्मी करियर और रिश्तों को त्याग कर अमेरिका स्थित ओशो आश्रम चले गए तो एक बार फिर से रीना रॉय के जीवन में सूनापन आ गया। लेकिन कुछ ही समय बाद रीना पर किस्मत एक बार फिर से मेहरबान हुई और उनकी जिंदगी में आए पाकिस्तान के मशहूर क्रिकेटर मोहसिन खान। दोनों की पहली मुलाकात लंदन में हुई थी जब मोहसिन इंग्लैंड में क्रिकेट खेल रहे थे और रीना अपनी बहन के साथ लंदन घूमने गई थी। रीना की बहन ने ही दोनों की मुलाकात करवाई। दिलचस्प बात यह है कि मोहसिन के मुताबिक उस समय उन्हें फिल्मों में खास दिलचस्पी नहीं थी और उन्होंने शादी से पहले रीना की कोई फिल्म तक नहीं देखी थी। [संगीत] उनके मुताबिक वह रीना की खूबसूरती या स्टारडम से नहीं बल्कि उनके व्यवहार और व्यक्तित्व से प्रभावित हुए थे। पहली मुलाकात के बाद दोनों की दोस्ती धीरे-धीरे बढ़ी और फिर यही दोस्ती प्यार में बदल गई। उस दौर में दोनों को लंदन में साथ देखा जाने लगा और उनकी नजदीकियां मीडिया में भी चर्चा का विषय बनने लगी। मोहसिन के मुताबिक इस रिश्ते में उन्हें रीना की लोकप्रियता से ज्यादा उनका इंसान के तौर पर होना पसंद आया। [संगीत] उन्होंने बाद में कहा कि उन्हें रीना की कोई फिल्म देखने की जरूरत ही महसूस नहीं हुई थी। यानी [संगीत] उनके लिए रीना पहले एक अभिनेत्री नहीं बल्कि एक इंसान थी। आखिरकार दोनों ने अपने रिश्ते को शादी में बदलने का फैसला किया और साल [संगीत] 1983 में रीना रॉय और मोहसिन खान ने शादी कर ली। शादी कराची में हुई और इसके बाद रीना ने अपनी फिल्मी करियर से दूरी बना ली और मोसिन खान के साथ पाकिस्तान चली गई। उस समय रीना अपने करियर के शिखर पर थी। इसलिए उनका अचानक फिल्मों से दूर हो जाना उनके प्रशंसकों के लिए भी काफी चौंकाने वाला था।
शादी के बाद दोनों ने अपना परिवार शुरू किया और उनकी एक बेटी हुई जिसका [संगीत] नाम जन्नत रखा गया। शुरुआत में सब कुछ ठीक दिखाई दे रहा था लेकिन एक वक्त के बाद दोनों के बीच मतभेद बढ़ने लगा। रीना ने बाद के इंटरव्यूज में अपने वैवाहिक जीवन के बारे में बताया कि लंदन में रहना उनके लिए आसान नहीं था। मोहसीन क्रिकेट के सिलसिले में अक्सर बाहर रहते थे और रीना को अकेलापन महसूस होता था। इसके अलावा दोनों के जीवन शैली और सोच में भी काफी अंतर था। रीना ने यह भी बताया कि मोहसिन चाहते थे कि वह ब्रिटिश नागरिकता ले ले [संगीत] लेकिन वह इसके लिए तैयार नहीं थे। रीना ने एक इंटरव्यू में अपने उस दौर को याद करते हुए बताया कि एक समय उन्होंने लंदन से अपनी मां को फोन करके पूछा था कि शादी का मतलब आखिर क्या होता है? उनकी मां ने उन्हें सलाह दी कि शादी का मतलब रिश्ता निभाना होता है। रीना ने कहा कि उन्होंने अपनी मां की बात मानकर रिश्ता बचाने की भरपूर कोशिश की थी। लेकिन धीरे-धीरे दोनों को एहसास होने लगा कि उनके बीच काफी सांस्कृतिक और [संगीत] व्यक्तिगत अंतर है। आखिरकार यह रिश्ता टूटने की कगार पर पहुंच गया और साल 1990 के दशक के शुरुआत में दोनों का तलाक हो गया। रीना 1992 के आसपास भारत वापस आ चुकी थी। लेकिन तलाक के बाद रीना की सबसे बड़ी मुश्किल अभी बाकी थी। उनकी बेटी की कस्टडी। तलाक के बाद बेटी जन्नत की कस्टडी शुरू में मोसिन खान के पास चली गई और रीना को अपनी बेटी से दूर रहना पड़ा। एक मां के लिए यह दौर कितना मुश्किल था। इस बात का अंदाजा रीना के बयानों से लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि बेटी को वापस पाने के लिए उन्होंने हर संभव कोशिश की। यहां तक कि इस दौरान उन्होंने साधु संतों से भी मदद मांगी। रीना ने बताया कि बेटी की कस्टडी के लिए संघर्ष करते हुए उन्हें अलग-अलग लोगों ने तरह-तरह की सलाह दी। कुछ लोगों ने उन्हें विशेष पूजा पाठ और दूसरे उपाय करने को कहा। उन्होंने इन सबको भी आजमाया क्योंकि उस वक्त सबसे बड़ी चिंता सिर्फ एक ही थी अपनी बेटी को वापस पाना। आखिरकार रीना अपनी बेटी की कस्टडी हासिल करने में सफल रही और बेटी उनके साथ भारत में रहने लगी। इसी के बाद [संगीत] उन्होंने जन्नत का नाम बदलकर सनम कर दिया।
दिलचस्प बात यह है कि इतने दर्दनाक तलाक और कस्टडी विवाद के बावजूद बाद के वर्षों में रीना ने मोहसिन के बारे में कड़वाहट भरे शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया। उन्होंने बताया कि मोहसिन अपनी बेटी के संपर्क में रहते हैं और दोनों के बीच पिता बेटी का रिश्ता अच्छा है। रीना ने यहां तक कहा कि वह मोहसिन के लिए खुश हैं और चाहती हैं कि वह स्वस्थ और खुश रहें। उधर मोसिन खान ने भी वर्षों बाद अपनी शादी के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि उन्हें रीना रो से शादी करने का कोई पछतावा नहीं है। उनका कहना था कि उन्होंने रीना से उनकी खूबसूरती या प्रसिद्धि देखकर शादी नहीं की। उन्होंने एक इंसान के तौर पर उन्हें पसंद किया था। तलाक के बाद रीना रॉय भारत लौट आई और उन्होंने फिल्मों में दोबारा काम करना शुरू किया। साल 1993 में आदमी खिलौना है से उन्होंने फिल्मों में वापसी की। हालांकि वो अपने पुराने स्टारडम को दोबारा हासिल नहीं कर सकी लेकिन उन्होंने अपनी जिंदगी को नए सिरे से संभाला और अपनी बेटी की परवरिश पर ध्यान दिया। इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा मोड़ यही था कि जिस अभिनेत्री ने कभी अपने करियर के शिखर पर बॉलीवुड को अलविदा कहकर प्यार और परिवार को चुना था। उसी रिश्ते के टूटने के बाद उन्हें अपनी बेटी को पाने के लिए एक लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी। रीना रॉय और मोशन खान की कहानी एक ऐसी क्रॉस बॉर्डर लव स्टोरी थी [संगीत] जिसकी शुरुआत लंदन में हुई। शादी कराची में हुई। जिंदगी पाकिस्तान में शुरू हुई लेकिन अंत में रीना अपनी बेटी के साथ भारत लौट आई। तो यह थी रीना रॉय और उनके निजी जीवन के कड़वे अनुभवों पर हमारी एक विशेष प्रस्तुति। उम्मीद है कि यह आपको बेहद रोचक लगी होगी। अगर वीडियो पसंद आई हो तो इसे लाइक व शेयर भी कर दें तथा ऐसे ही अन्य दिलचस्प वीडियोस की नोटिफिकेशन पाने के लिए चैनल को सब्सक्राइब करके बेल आइकॉन में ऑल का बटन दबाना ना भूलें। धन्यवाद। को