राष्ट्रपति भवन में आयोजित पद्म पुरस्कार समारोह का एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने हर किसी का दिल छू लिया। झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबु सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
लेकिन इस सम्मान समारोह की सबसे खास बात वो क्षण रहा जब राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू स्वयं मंच से उतर कर शिवू सोरेन की पत्नी रूपी सोरेन के पास पहुंची और उन्हें यह सम्मान सौंपा।
यह दृश्य देखते ही पूरा सभागार भावुक हो उठा। मंगलवार शाम राष्ट्रपति भवन में देश के प्रतिष्ठित [संगीत] पद्म पुरस्कार प्रदान किए जा रहे थे। इसी दौरान झारखंड के वरिष्ठ आदिवासी नेता झारखंड आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किए जाने की घोषणा हुई। शिबु सोरेन अब इस दुनिया में नहीं है। ऐसे में उनकी ओर से यह सम्मान ग्रहण करने के लिए उनकी पत्नी रूपी सोरेन समारोह में पहुंची। उम्र और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के कारण रूपी सोरेन व्हीलचेयर पर थी।
जब उनका नाम पुकारा गया तो सभी की नजरें उस ओर टिक गई। आमतौर पर ऐसे समारोहों में सम्मान ग्रहण करने वाला व्यक्ति मंच तक पहुंचता है। लेकिन इस बार एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली।
राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने स्थिति को देखते हुए संवेदनशीलता और सम्मान का परिचय दिया। वे स्वयं मंच से नीचे उतरी और रूपी सोरेन के पास जाकर उन्हें पद्म भूषण सम्मान प्रदान किया। यह पल केवल एक औपचारिक पुरस्कार [संगीत] वितरण का नहीं था बल्कि सम्मान, संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों का भी प्रतीक बन गया। समारोह में मौजूद लोगों ने इस दृश्य को भावुक होकर देखा। कई लोगों ने इसे राष्ट्रपति की सादगी और संवेदनशील नेतृत्व का उदाहरण बताया। शिबू सोरेन का नाम झारखंड के इतिहास में एक बड़े जननेता के रूप में दर्ज है। उन्हें लोग प्यार से गुरु जी कहकर पुकारते थे।
आदिवासियों, किसानों और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए उनका संघर्ष दशकों तक चलता रहा। 1970 के दशक में उन्होंने महाजनी प्रथा और आदिवासियों की जमीनों पर कब्जे के खिलाफ आंदोलन शुरू किया। बाद में उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा को मजबूत राजनीतिक पहचान दी और झारखंड अलग राज्य की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाया। 15 नवंबर 2000 को जब झारखंड एक अलग राज्य [संगीत] बना तो इसे शिबु सोरेन के लंबे संघर्ष की बड़ी उपलब्धि माना गया। वे तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रहे और केंद्र सरकार में भी मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दी।
इसी लंबे सामाजिक और राजनीतिक योगदान को देखते हुए उन्हें देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित कियागया है।
हालांकि समारोह के बाद चर्चा सिर्फ पद्म भूषण की नहीं हुई बल्कि उस मानवीय क्षण की भी हुई जब राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू मंच से उतर कर रूपी सोरेन के पास पहुंची।
सोशल मीडिया पर भी इस दृश्य की काफी चर्चा हो रही है और लोग इसे सम्मान देने की एक संवेदनशील मिसाल बता रहे हैं। शिबू सोरेन को मिला यह सम्मान उनके दशकों लंबे संघर्ष और योगदान की पहचान है। वहीं राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू का यह कदम इस समारोह को और भी यादगार बना गया। एक ऐसा दृश्य जिसने यह दिखाया कि सम्मान केवल पुरस्कारदेने में नहीं बल्कि उसे देने के तरीके में भी झलकता है।