फिल्म में हीरोइन रानी मुखर्जी थी। चेहरा उनका था। एक्टिंग उनकी थी। [संगीत] लेकिन जब उन्होंने बोलना शुरू किया तो आवाज उनकी थी ही नहीं। आखिर ऐसा क्यों हुआ? यह किस्सा है 1998 की फिल्म गुलाम का जिसमें रानी के साथ थे आमिर खान। जिस भारी अलग सी आवाज से आज आप रानी को तुरंत पहचान लेते हैं।
उसी आवाज को इस फिल्म में डब करवा दिया गया था। रानी ने खुद बताया कि इस फैसले की जानकारी उन्हें आमिर खान ने दी थी। उन्होंने समझाया कि श्रीदेवी की भी शुरुआती फिल्मों में आवाज डब हुई थी। फिर भी वह बड़ी स्टार बनी। लेकिन रानी को दुख तो हुआ। वह नई थी और आमिर के साथ फिल्म मिलना ही बहुत बड़ा मौका था।
इसलिए अपनी निराशा को उन्होंने काम के बीच नहीं आने दिया। मगर उसी साल एक दूसरी फिल्म में उनकी आवाज को लेकर बिल्कुल अलग फैसला हुआ। और वह फिल्म थी कुछ-कुछ होता है। करण जौहर ने उनकी असली आवाज पर भरोसा किया। टीना के किरदार में दर्शकों ने रानी का चेहरा भी देखा
और उनकी अपनी आवाज भी सुनी। सालों बाद इस भरोसे के लिए कर्ण का शुक्रिया अदा करते हुए रानी भावुक हो गई। सोचिए अगर उनकी आवाज हर फिल्म में बदल दी जाती तो रानी की वह खास पहचान हमें कैसे मिलती? आप बताओ। गुलाम देखते वक्त आपको पता चला था कि आवाज रानी की नहीं है।