प्रकृति और पर्यावरण का बहुत बड़ा संकट है। हम मूल प्रकृति को ही अपनी मूल संस्कृति मानते हैं। सा प्रथमा संस्कृति विश्व आ रहा जो कुछ नेपाल में घटित हुआ और बहुत बड़ी त्रासदी आई हमारे श्रद्धेय सद्गुरु जगी वासुदेव जी के विदेशी शिष्यों से लेकर के अपने देश के भी कुछ भाई उसमें सम्मिलित थे।
कितने और नेपाल के हमारे भाइयों से लेकर के कितने हमारे स्वजन हमसे बिछड़ गए। बहुत गहरा दुख है इस हृदय कांप उठता है। जब उसको दृश्य को देखते हैं और तो हृदय विदर्ण हो जाता है। तो हम सब मिलकर के सामूहिक रूप से इस उत्तरदायित्व को निभाएं कि हम विध्वंसकारी विनाशकारी विकास नहीं करेंगे और सब देश चाइना है, नेपाल है, भारत है।
प्रकृति हम सबकी साथ ही है और हम सब मिलकर के प्रकृति और संस्कृति के उपासक इस रूप में बने कि मनुष्य मनुष्य एक दूसरे से कोई किसी का नुकसान ना करें। प्रकृति का पर्यावरण के कारण से किसी भी देश का किसी भी जाति वर्ग समुदाय का किसी भी प्रकार का कोई भी नुकसान ना हो और इन में तो लोगों के जीवन ही खत्म हो जाते हैं। इस त्रासदी से मानवता को बचाने के लिए प्रकृति और पर्यावरण के प्रति बहुत ज्यादा सजगता की जरूरत है। जिनके अह अपने सदा सदा के लिए इस अह में बिछड़ गए उनको भगवान ठाढस दे और जो दिवंगत आत्माएं हैं उनको प्रभु अपनी शरणागति दे बहुत ही दुख की घड़ी है ये सबके लिए में हमारे जितने भी कार्यकर्ता भाई बहन हैं पतंजलि समिति के कार्यकर्ता पतंजलि पीठ के कार्यकर्ता वहां उस में सेवा के लिए सन्लग है लक्ष्मी ने बलि को और द्रोपदी ने भगवान कृष्ण को राखी बांधी और ब्राह्मणों ने क्षत्रियों को राखी बांधी अर्थात ज्ञान और शौर्य का यह देश उपासक रहा है और भाई और बहन के प्रीति का यह त्यौहार राखी मैं तो कहूंगा ये सब भारतवासी आज ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र दलित ऐसी सी एसटी जिनको सवर्ण कहते हैं, पिछड़ा कहते हैं और समाज में यह जो जाति वर्ग समुदायों के नाम पर भेद दृष्टि है। हमारी वेद दृष्टि रहनी चाहिए। वेद की दृष्टि है अभेद दृष्टि। कोई जाति वर्ग समुदाय का भेद नहीं। स्त्री पुरुष का भेद नहीं।
कोई लिंग का भेद नहीं। आप यहां देखिए यहां हमारे सभी ऋषुका कुमार और हमारी सभी श्रद्धामई ब्रह्मवादिनी योगिनी बेटियों का एक साथ यजोपवित्र संस्कार हो रहा है। यहां पर सब बेटियों का भी अर्थात बहनों का भी मातृशक्ति का भी यजोपवि संस्कार हो रहा है। बच्चों का भी यजोपवि संस्कार हो रहा है। श्रावणी उपाय कर्म रक्षाबंधन का हमारा सांस्कृतिक ऐतिहासिक पर्व है। तो हमारे यहां पर ना स्त्री का भेद है ना पुरुष का भेद है। हमारे यहां पर ना कोई जाति वर्ग समुदाय का भेद है। अभेद दृष्टि ही मूलत वेद दृष्टि है। वेद में कोई भेद नहीं है। वेद के नाम पर सनातन के नाम पर कुछ लोग आपस में समाज में जो भेदभाव ऊंचनीच कर रहे हैं.
वो सनातनी नहीं है। वो सनातनी संस्कृति के उपासक हैं। सनातनी संस्कृति है। एकत्व अनुपसता सहना तो सहन भक्त एकत्व सह अस्तित्व संगद्वम संदम एकत्व में अस्तित्व और सामूहिकता में जीना यह हमारी सनातन संस्कृति का संदेश आज लेकर के रक्षाबंधन में सब आपस में प्रीति के सूत्र में बंधे रहे सब नर कर परस्पर प्रीति चले स्वधर्म निरत श्रुत नीति उसका पर्व ये श्रावणी उपाकर्म है तो मैं तो आज पक्ष और विपक्ष से भी कहूंगा एक दूसरे को राखी बांध दो। संसद से लेकर के सड़कों तक सड़कों से लेकर के अलग-अलग इंस्टीटशंस में यह जो हंगामा मचा पड़ा है तो लोकतंत्र और देश का संविधान हमें एक सूत्र में बांधता है। तो लोकतांत्रिक, संवैधानिक, नैतिक, आध्यात्मिक, मानवीय मूल्यों का यह तकाजा है कि हम सब पक्ष और विपक्ष भी निष्पक्ष होकर के देश के लोकतंत्रजाने वाली और संविधान को बचाने के लिए लोकतांत्रिक, संवैधानिक, मानवीय, नैतिक, आध्यात्मिक मूल्यों की प्रतिष्ठा के लिए राष्ट्र की एकता, अखंडता और संप्रभुता के लिए राष्ट्र को एक सूत्र में बांधने के लिए जरूरी है। सम अभेद दृष्टि रखें।
यही आज के रक्षाबंधन का सबसे बड़ा संदेश है। कोई भेदभाव किसी भी नाम पर देश में ना हो और किसी भी प्रकार से ना दलित शोषित वंचितों का अपमान हो ना ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य का अपमान हो और इसलिए मैंने कहा था दलित शोषित वंचित शूद्र अछूत जिनको समाज में कहा गया उनका भी अपमान अलोकतांत्रिक असंवैधानिक वह भी एक बहुत बड़ा पाप और अधर्म अन्याय है तो ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य का भी अपमान भी असंवैधानिक अलोक है।
वह भी एक सामाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक दृष्टि से पाप और अपराध है। सब मिलकर के राष्ट्र को केंद्र में रख के राष्ट्र धर्म, राष्ट्रित सर्वोपरि है। इस भाव से आगे बढ़ेंगे तो रक्षाबंधन इस देश को एक सूत्र में बांधने का एक बहुत बड़ा सेतु बनेगा। बहन कंगना रनौत को भी आज हम राखी पर उपहार भी भेज रहे हैं और उनको यह मिठाई भी भेज रहे हैं जिससे कि रिश्तों में मिठास बनी रहे।
बहुत से ऐसे प्रवाह होते हैं। हमारी बहन कंगना रनौत से कुछ बोला गया। हमने कुछ बोला सब गिला शिकवा भुला करके हम एक दूसरे के साथ प्रीति से आगे बढ़े यही रक्षाबंधन का संदेश है। किसी भी प्रकार की किसी भी कारण से नफरत देश में नहीं होनी चाहिए। एक दूसरे के प्रति बैर भाव नहीं होना चाहिए। इसलिए हमने सब बैर का परित्याग करें और पिछले दिनों एक विवाद उठा कि भाई स्वामी रामदेव में और हमारी श्रद्धामई बहन कंगना रनौत में भी कहीं विवाद तो नहीं हो गया है। विवाद को संवाद से खत्म करें।