अयोध्या के राम मंदिर में गबन का मामला तूल पकड़ रहा है। मंदिर की दान पेटी से पैसे गिनने वाले कर्मचारी के घर जब पुलिस ने छापेमारी की तो गोबर के ढेर से लाखों रुपए कैश बरामद हुए। इस चौंकाने वाले खुलासे के बाद देश की सियासत गमा गई है और विपक्ष ने सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
अयोध्या के राम मंदिर में दान को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। भक्तों के करोड़ों रुपए के गमन के आरोपों ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। इस पूरे मामले में अब एक ऐसा चौंकाने वाला खुलासा हुआ है जिसने सबको हैरान कर दिया है। पुलिस की धरपकड़ के दौरान मंदिर की दान पेटी से पैसों की गिनती करने वाले एक कर्मचारी के घर पर छापेमारी हुई।
इस कर्मचारी के घर से गोबर में दबे ₹1 लाख कैश बरामद हुए हैं। यह कर्मचारी सीधे तौर पर मंदिर के दान पात्र से निकले कैश को गिनने के काम से जुड़ा हुआ था। इस खुलासे के बाद यह मामला और ज्यादा गंभीर हो गया। विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को पूरी तरह से घेर लिया। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर सीधे दावा किया कि भक्तों के चढ़ावे का गबन हुआ है। उन्होंने कोर्ट से इस मामले में स्वतः संज्ञान लेने की मांग की है।
सपा के पूर्व मंत्री पवन पांडे ने 7 जून को करोड़ों रुपए के गबन का आरोप लगाया था। उधर राज्यसभा के सांसद और सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा राम मंदिर में भक्तों के दान के कथित गमन का मामला आस्था जवाबदेही और विश्वास का सवाल है।
जब करोड़ों लोगों की भक्ति पर बनी कोई संस्था ऐसे गंभीर आरोपों का सामना करती है तो पारदर्शिता वैकल्पिक नहीं हो सकती। भाजपा जिसने मंदिर से राजनीतिक लाभ लिया अब सवाल उठने पर जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। एक स्वतंत्र विश्वसनीय जांच से सच्चाई सामने आनी चाहिए और जवाबदेही तय होनी चाहिए। प्रभुराम गोपनीयता और चुप्पी से बेहतर के हकदार हैं। उधर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय बचाव में उतर गए हैं। वह इसे साजिश बता रहे हैं और कह रहे हैं कि ऑडिट चल रहा है।
लेकिन सोशल मीडिया पर लोग याद दिला रहे हैं कि शंकराचार्य ने तो पहले दिन से ही यहां चोरी होने की बात कही थी। चारों तरफ से घिरने और दबाव बढ़ता देख यूपी सरकार ने एसआईटी बना दी है।
यह मामला इतना बड़ा हो गया है कि अब सीधे पीएमओ ने भी नोटिस भेजकर जवाब मांग लिया है। अब जनता यही पूछ रही है कि भगवान के दरबार में सेंधमारी करने वाले असली चेहरे आखिर कब बेनकाब होंगे?