बॉलीवुड के मशहूर कॉमेडियन राजपाल यादव के परिवार से एक विवाद जुड़ा है। शाहजहांपुर से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने सबको चौंका दिया है। मामला जमीन के कब्जे का है और इल्जाम यह है कि राजपाल यादव के तीन सगे भाइयों ने एक गरीब किसान की झोपड़ी में वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। हैं दोनों पक्ष? घटना उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के बंडा थाना क्षेत्र के पपरिया हरिश्चंद्र गांव की है। रविवार की रात करीब 10:00 बजे का वक्त था। किसान प्रदीप यादव जो रामपाल के बेटे हैं उनका कहना है कि वह किसी काम से यानी लेने कस्बे गए हुए थे।
खेत पर उनके छोटे-छोटे बच्चे अकेले मौजूद थे। आरोप यह है कि उसी दौरान राजपाल यादव के तीन भाई श्रीपाल यादव, राजेश यादव और सत्यपाल यादव अपनी गाड़ी से वहां पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने बच्चों के सामने ही बच्चों की पुकार सुनकर आसपास के लोग दौड़े तब जाकर मामला थोड़ा शांत हुआ। लेकिन तब तक सब कुछ चुका था। अब सवाल यह उठता है कि आखिर यह झगड़ा है किस बात का?
गांधी में चर्चा है कि पूरा विवाद करीब 1/2 बीघा जमीन को लेकर है। प्रदीप यादव का कहना है कि राजेश यादव ने उनके परिवार से कुछ हिस्सा खरीदा था। लेकिन अब वह लोग पूरे खेत पर कब्जा जमाना चाहते हैं। पिछले कई महीनों से दोनों पक्षों के बीच तनाव चल रहा है। राजपाल यादव के भाई श्रीपाल यादव ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
उनका कहना है कि जिस जमीन को लेकर विवाद है उसकी रजिस्ट्री उनके भाई राजेश यादव के नाम पर पूरे 17 साल पहले हो चुकी है। श्रीपाल का दावा है कि कुछ दिन पहले ही प्रदीप के परिवार ने उस खेत पर झोपड़ी डाल ली थी। जब एक बाहरी खरीदार ने कागजात चेक किए तो जमीन राजेश के नाम पर निकली। उनका आरोप है कि प्रदीप पक्ष ने खुद ही ताकि उनके परिवार को झूठा जा सके।
श्रीपाल का कहना है कि पुलिस जमीन की पैमाइश यानी कि नापझोंक करवा ले तो सारा सच सामने आ जाएगा। इस पूरे मामले पर जब हमने परिवार का पक्ष जानने की कोशिश की तो राजपाल यादव की बहन का रिएक्शन भी सामने आया है।
मेरा नाम है मेषा देवी। मैं पपरिया हरीश से बोल रही हूं। मेरा पापा की बहुत है। हम दवा लेने चले गए। बच्चा घर पर थे। वहां पूरी गिरती रखी थी
जोर मेरा बच्चा चिल्लाने लगे कपड़ापड़ा हम निकालने लगे बुड्ढे को छोड़ दिया वहीं पे लेके आए रहे थे घर पर और उसी टाइम पे उसने भाग गए सब लोग और गरीब आदमी ही झोपड़िया डाल के रहते हैं मेरी घर भी नहीं जगह बनी है बाहर रह रहे और मुख्य जमीन थी मेरी रोड पे मुख्य जमीन थी.
उसने देने की कोशिश की कल ने लेखपाल को भेजा कि आज कुछ नहीं करना और कल यहां से भाग जाओ कल हम आएंगे नाप करेंगे आज मेरी मां है कल रविवार है कल छुट्टी है मैं पर ना पकडूंगा आके और हम सब लोग साहब उनके इंतजार में रहे जब मेरी कोई नहीं थी
कोई कोर्ट कचहरी नहीं थी तो ऑर्डर नहीं आया तो लेखपाल को उन्हें राजेश ने पैसा देके उन्हें हम लोगों को जो है गुप्त करवा दिया कि कुछ नहीं बोलना उस समय झोपड़ी में कोई था नहीं था
हां सब लोग थे पूरा परिवार से ऐसे नहीं जब झोपड़ी को । ये सब कुछ बचाने बचाते हैं। तो मामला पूरी तरह से उलझ गया है। एक तरफ वीडियो है तो दूसरी तरफ 17 साल पुरानी रजिस्ट्री और खुद अध्यक्ष बृजेश सिंह का कहना है कि पुलिस को दोनों पक्षों की तरफ से तहरीर मिल चुकी है। पुलिस ने मौके पर जाकर मुआयना भी कर लिया है।
अब राजस्व विभाग की टीम खेत की पैमाइश करेगी जिसके बाद ही दूध का दूध और पानी का पानी हो पाएगा और आखिरकार सच कौन बोल रहा है और आग किसने लगाई यह पता चलेगा। फिलहाल पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और गांव में तनाव को देखते हुए नजर रखी जा रही है। अब देखना यह होगा कि पैमाइश के बाद पुलिस की जांच में क्या निकल कर आता है।