हिंदी सिनेमा में जब भी पहले सुपरस्टार का नाम लिया जाता है तो सबसे पहले याद आते हैं राजेश खन्ना। एक ऐसा स्टार जिसकी फिल्मों के बाहर भीड़ टूट पड़ती थी। जिसकी कार पर लड़कियां लिपस्टिक से किस के निशान छोड़ देती थी और जिसके घर के बाहर हजारों फैंस सिर्फ एक झलक के लिए घंटों खड़े रहते थे। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि वही सुपरस्टार जिसके नाम का इंडस्ट्री में सिक्का चलता था। धीरे-धीरे अकेला पड़ गया।
अब दिग्गज अभिनेत्री मौसमी चैटर्जी ने राजेश खन्ना को लेकर कुछ ऐसे खुलासे किए हैं जिन्होंने एक बार फिर काका की जिंदगी के कई अनसुने पहलुओं को चर्चा में ला दिया है। 70 का दशक भारतीय सिनेमा का गोल्डन एरा माना जाता है और उस दौर में अगर किसी अभिनेता का सबसे ज्यादा जलवा था तो वह थे राजेश खन्ना। आराधना, आनंद, कटी पतंग और अमर प्रेम जैसी फिल्मों ने उन्हें ऐसी लोकप्रियता दिलाई जो उस समय किसी सपने से कम नहीं थी।
कहा जाता है कि लगातार 15 सुपरहिट फिल्में देने का रिकॉर्ड आज तक कोई नहीं तोड़ पाया। उनकी मुस्कान, उनकी आवाज और उनका रोमांटिक अंदाज लाखों दिलों की धड़कन बन चुका था। लेकिन यहीं से शुरू हुई उस स्टारडम की दूसरी कहानी जहां सफलता के साथ आया घमंड और दूरी। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में मौसमी चैटर्जी ने बताया कि सुपरस्टार बनने के बाद राजेश खन्ना का व्यवहार काफी बदल गया था। उनके मुताबिक काका को अपनी लोकप्रियता पर इतना भरोसा हो गया था कि वह सेट पर किसी की भावनाओं की ज्यादा परवाह नहीं करते थे।
मौसमी ने कहा कि उस दौर में इंडस्ट्री में वही कलाकार नियम तय करता था जो सबसे बड़ा स्टार होता था और राजेश खन्ना खुद को उसी मुकाम पर देखते थे। लेकिन बॉलीवुड में हर दौर हमेशा एक जैसा नहीं रहता। फिर एंट्री हुई एक ऐसे अभिनेता की जिसने हिंदी सिनेमा की पूरी दिशा ही बदल दी। वो नाम था अमिताभ बच्चन। जहां राजेश खन्ना रोमांटिक हीरो की छवि में थे, वहीं अमिताभ बच्चन एंग्री यंग मैन बनकर सामने आए। देश का माहौल बदल रहा था। दर्शकों की पसंद बदल रही थी और धीरे-धीरे बॉलीवुड भी बदलने लगा। अब दर्शकों को सिर्फ रोमांस नहीं गुस्सा, बगावत और दमदार डायलॉग चाहिए थे। यहीं से शुरू हुआ राजेश खन्ना के स्टारडम का ढलान।
मौसमी चैटर्जी के मुताबिक यह बदलाव काका के लिए स्वीकार करना आसान नहीं था। क्योंकि जिस इंसान ने सालों तक खुद को इंडस्ट्री का सबसे बड़ा सितारा माना हो उसके लिए अचानक लोगों का ध्यान किसी और की तरफ चला जाना बहुत बड़ा झटका था। उन्होंने कहा कि स्टारडम हमेशा नहीं रहता और इंसान को अपने कर्मों का फल जरूर मिलता है। बात सिर्फ प्रोफेशनल लाइफ तक सीमित नहीं रही। मौसमी चैटर्जी ने बातचीत में एक ऐसा किस्सा भी सुनाया जिसने सभी को चौंका दिया। उन्होंने बताया कि एक बार फिल्म के सेट पर राजेश खन्ना ने उनकी बेटी के पिता को लेकर निजी सवाल पूछ लिया था। इस सवाल से मौसमी काफी नाराज हो गई। लेकिन उन्होंने चुप रहने के बजाय उसी अंदाज में जवाब दिया और उनके मुताबिक उस जवाब के बाद राजेश खन्ना कुछ देर तक बिल्कुल शांत हो गए थे। यह किस्सा सिर्फ एक बहस नहीं था बल्कि यह दिखाता है कि स्टारडम कभी-कभी इंसान को इतना बदल देता है
कि वह दूसरों की निजी सीमाओं को भी नजरअंदाज करने लगता है। हालांकि इन सब बातों के बावजूद मौसमी चैटर्जी ने यह भी माना कि राजेश खन्ना जैसा अभिनेता शायद ही दूसरा हुआ हो। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस, उनकी आंखों की मासूमियत और डायलॉग बोलने का अंदाज आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है। यही वजह है कि दशकों बाद भी उनके गाने रेडियो पर बजते हैं। उनकी फिल्में टीवी पर दिखाए जाती हैं और नई पीढ़ी भी उन्हें उतनी ही दिलचस्पी से देखती है। लेकिन राजेश खन्ना की कहानी सिर्फ एक सुपरस्टार की कहानी नहीं है। यह कहानी है उस सच की जो हर चमकती हुई दुनिया के पीछे छिपा होता है। शोहरत जितनी तेजी से इंसान को आसमान तक पहुंचाती है, उतनी ही तेजी से उसे जमीन पर भी ला सकती है। तो आप क्या सोचते हैं? क्या स्टार्टम सच में इंसान को बदल देता है या फिर बॉलीवुड की बदलती दुनिया ने राजेश खन्ना को अकेला कर दिया? अपनी राय कमेंट में जरूर दें। वीडियो पसंद आई हो तो वीडियो को लाइक, शेयर और चैनल को सब्सक्राइब जरूर