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राजा मुराद ने कंगना राणावत को ये क्या कह दिया?

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में दो एक्ट्रेस हैं। एक सांसद है कंगना रणावत और दूसरी है कीर्ति सेनन। दोनों के बीच में ड्रेस को लेके एक विवाद हुआ है। कैसे देखते हैं सर इसको? देखिए ये डेमोक्रेसी है। हर इंसान को हक है। वो कैसा लिबास पहन रहा है वो उसका निजी मामला है। लेकिन लिबास अश्लील ना हो। किसी को वो लिबास अश्लील दिखाई देगा। किसी को उस लिबास में फैशन दिखाई देगा। किसी को उस लिबास जो है वो नॉर्मल दिखाई देगा। तो ऐसी टिप्पणियां करने से विवाद बढ़ता है। हर वार पे पलटवार होता है। हर एक्शन पर रिएक्शन होता है। तो अगर आप ऐसी कोई टिप्पणी करते हैं अगर आपको कहने की आजादी है तो फिर आपको सुनने में भी आजादी होनी चाहिए। सामने वाला क्या कह रहा है? सामने वाले ने कैसे रीड किया? अब कोई क्या पहन रहा है? क्या खा रहा है? उसके घर में क्या बन रहा है? ये उसका अपना निजी मामला है।

किसी के किचन में घुसना, किसी की किसी के लिबास के बारे में कोई टिप्पणी करना। यह जो बात है वह कहा जाता है कि झगड़ा और छाछ में आप जितना पानी मिलाएं वो उतना ही बढ़ता रहता है। तो इसकी तो कोई हद ही नहीं है। विवाद की और झगड़े की कोई हद ही नहीं है। और झगड़ा बहुत बुरी चीज है। आपकी पूरी ताकत, आपकी पूरी एनर्जी झगड़े में निकल जाती है। तो आप काम कब करेंगे? काम के लिए भी आप थोड़ी ऊर्जा अपनी बचा कर रखिए। तो ऐसे मामलों पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए कि उसने क्या पहना है और वो क्या खा रहा है और वो क्या पी रहा है। वो उसका अपना जाती मामला है।

तो मैं ऐसी बातों पर टिप्पणी करना मैं मुनासिब नहीं समझता। और अगर मैं करता हूं तो फिर सुनने की भी मुझ में ताकत होनी चाहिए। में दो एक्ट्रेस हैं। एक सांसद है कंगरा रणावत और दूसरी है कीर्ति सेनन। दोनों के बीच में ड्रेस को लेके एक विवाद हुआ है। कैसे देखते हैं सर? देखिए ये डेमोक्रेसी है। हर इंसान को हक है। वो कैसा लिबास पहन रहा है वो उसका निजी मामला है। लेकिन लिबास अश्लील ना हो। किसी को वो लिबास अश्लील दिखाई देगा। किसी को उस लिबास में फैशन दिखाई देगा। किसी को उस लिबास जो है वो नॉर्मल दिखाई देगा। तो ऐसी टिप्पणियां करने से विवाद बढ़ता है। हर वार पर पलटवार होता है।

हर एक्शन पर रिएक्शन होता है। तो अगर आप ऐसी कोई टिप्पणी करते हैं अगर आपको कहने की आजादी है तो फिर आपको सुनने में भी आजादी होनी चाहिए। सामने वाला क्या कह रहा है? सामने वाले ने कैसे रीड किया? अब कोई क्या पहन रहा है? क्या खा रहा है? उसके घर में क्या बन रहा है? ये उसका अपना निजी मामला है। किसी के किचन में घुसना, किसी की किसी के लिबास के बारे में कोई टिप्पणी करना। यह जो बात है वह कहा जाता है

कि झगड़ा और छाछ में आप जितना पानी मिलाएं वो उतना ही बढ़ता रहता है। तो इसकी तो कोई हद ही नहीं है। विवाद की और झगड़े की कोई हद ही नहीं है। और झगड़ा बहुत बुरी चीज है। आपकी पूरी ताकत, आपकी पूरी एनर्जी झगड़े में निकल जाती है। तो आप काम कब करेंगे? काम के लिए भी आप थोड़ी ऊर्जा अपनी बचा कर रखिए। तो ऐसे मामलों पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए कि उसने क्या पहना है और वो क्या खा रहा है और वो क्या पी रहा है। वो उसका अपना जाती मामला है। तो मैं ऐसी बातों पर टिप्पणी करना मैं मुनासिब नहीं समझता। और अगर मैं करता हूं तो फिर सुनने की भी मुझ में ताकत होनी चाहिए।

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