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बुरे फंसे प्रणीत मौरे! बिरियानी के बाद लेडी डॉक्टर के कॉमेंट से हुआ हंगामा।

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यह शब्द किसी ट्रोल, किसी कॉमेडियन या किसी विवादित सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसरर के नहीं बल्कि एक महिला डॉक्टर के हैं जो प्रणीत मोरे के शो में मेडिकल कॉलेज के अनुभव बताते हुए यह बातें कहती सुनाई देती है। और यहीं से शुरू हो गया एक नया विवाद। क्योंकि सोशल मीडिया पर वायरल रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि बातचीत के दौरान डॉक्टर ने मेडिकल कॉलेज के दिनों से बॉडीज के ऑर्गन्स और उनके साइज को लेकर होने वाले मजाक का जिक्र किया।

कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि उन्होंने पुरुष की तुलना करने और उस पर जोक्स होने की बात कही। अब जरा सोचिए अगर किसी पुरुष डॉक्टर ने किसी महिला की बॉडी के को लेकर ऐसा बयान दिया होता तो क्या अब तक उसका लाइसेंस रद्द करने की मांग नहीं उठ रही होती? क्या सोशल मीडिया उसे दरिंदा, घटिया और शर्मनाक नहीं बता रहा होता।

क्या न्यूज़ चैनलों पर बहस नहीं चल रही होती? लेकिन जब ऐसा दावा एक महिला डॉक्टर की तरफ से आता है, तो बहस उतनी बड़ी क्यों नहीं दिखाई देती? यही सवाल इस वक्त इंटरनेट पर आग की तरह फैल रहा है।

₹370 वाली बिरयानी विवाद से घिरे कॉमेडियन प्रणीत मोरे अब एक और नए वीडियो को लेकर विवादों में हैं और इस बार मामला सिर्फ कॉमेडी का नहीं बल्कि मेडिकल एथिक्स डेड बॉडी के समान और कथित डबल स्टैंडर्ड्स का बन गया है। दरअसल कुछ दिन पहले प्रणीत मोरे का एक शो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना था और उस शो से जुड़ा एक और वीडियो अब वायरल हो रहा है।

इस वीडियो में प्रणीत मोरे एक युवक महिला डॉक्टर से मेडिकल कॉलेज के अनुभवों पर बातचीत करते नजर आते हैं। बातचीत के दौरान डॉक्टर मेडिकल कॉलेज में कैडेडवर डिसेक्शन यानी मेडिकल शिक्षा के लिए इस्तेमाल की जाने वाली डेड बॉडीज के बारे में बात करती है। यहीं पर वह कुछ ऐसी बातें कहती है जिन्हें लेकर सोशल मीडिया पर भारी विवाद खड़ा हो गया है।

वायरल क्लिप और उससे जुड़ी रिपोर्ट्स के मुताबिक डॉक्टर ने दावा किया कि मेडिकल छात्रों के बीच कभी-कभी डेड बॉडी के रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स और उनके साइज को लेकर भी मजाक होते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने पुरुष कैडेडवर्स के प्राइवेट पार्ट्स के साइज की तुलना करने और उस पर जोक्स होने का भी जिक्र किया है।

वीडियो में यह सुनकर खुद प्रनीत मोरे भी हैरान नजर आते हैं। वह यह कहते हुए दिखाई देते हैं कि किसी व्यक्ति ने मेडिकल साइंस और समाज के हित में अपनी बॉडी डोनेट की होती है। यानी जिस शरीर से डॉक्टर सीखते हैं, वह किसी परिवार का सदस्य रहा होता है और उसकी बॉडी मेडिकल एजुकेशन के लिए दान की गई होती है।

लेकिन वीडियो वायरल होने के बाद लोगों का गुस्सा किसी और वजह से फूट पड़ा है। सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग कह रहे हैं कि यहां सिर्फ मजाक का सवाल नहीं। सवाल उस सम्मान का है जो बॉडी डोनेशन करने वाले लोगों को मिलना चाहिए। यूज़र्स ने लिखा कि अगर मेडिकल छात्रों के बीच वास्तव में ऐसी बातें होती है तो यह बेहद चिंताजनक है।

कुछ लोगों ने यह चिंता भी जताई कि ऐसे विवादों में बॉडी डोनेशन जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों को नुकसान पहुंच सकता है क्योंकि अगर लोगों को यह लगे कि मृत्यु के बाद उनकी डेड बॉडी का सम्मान नहीं किया जाएगा तो वह या फिर उनके परिवार भविष्य में बॉडी डोनेट करने से हिचक सकते हैं। वहीं कहीं डॉक्टरों और मेडिकल प्रोफेशन से जुड़े लोगों ने भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। कुछ ने कहा कि मेडिकल शिक्षा के दौरान का सम्मान करना एक बुनियादी नैतिक जिम्मेदारी होती है। उनका कहना है कि किसी भी बॉडी का मजाक उड़ाना या फिर उसे मनोरंजन का विषय बनाना स्वीकार नहीं किया जा सकता।

कुछ लोग यह तर्क दे रहे हैं कि वायरल क्लिप पूरी बातचीत नहीं दिखाती। उनका कहना है कि कुछ सेकंड के एडिटेड वीडियो के आधार पर किसी व्यक्ति के पूरे इरादे या सोच को तय करना जल्दबाजी हो सकती है। सोशल मीडिया पर जिस हिस्से को लेकर विवाद है वह पूरी बातचीत का केवल एक छोटा भाग भी हो सकता है।

लेकिन इन सभी दलीलों के बीच सबसे बड़ा सवाल अभी भी वही बना हुआ है। क्या गलत बात गलत ही मानी जाएगी या फिर उसका मूल्यांकन इस आधार पर होगा कि वह बात किसने कही? यही वजह है कि अब विवाद केवल डॉक्टरों के बयान तक सीमित नहीं रहा।

बहस कथित डबल स्टैंडर्ड पर पहुंच चुकी है। एक पक्ष पूछ रहा है कि अगर यही बयान किसी पुरुष डॉक्टर ने दिया होता तो क्या प्रतिक्रिया आज जैसी होती? क्या तब भी लोग उतने ही शांत रहते या फिर पूरा नैरेटिव बिल्कुल अलग दिखाई देता। फिलहाल सोशल मीडिया पर बहस जारी है।

प्रनीत मोरे पहले से ₹370 वाली बिरयानी विवाद के कारण आलोचनाओं के घेरे में हैं। अब यह नया वीडियो उनके शो के कंटेंट और उसमें होने वाली बातचीत को लेकर भी नए सवाल खड़े कर रहा है। क्या यह महज एक मजाक था? क्या यह मेडिकल कॉलेज की संस्कृति को लेकर किया गया एक दावा था? या फिर यह एक ऐसी सोच है जिसे किसी भी कीमत पर सामान्य नहीं माना जाना चाहिए।

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