वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के साधक रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई की गु्थी लगातार उलझती जा रही है। एक तरफ सीसीटीवी फुटेज में साधक से दिखाई दे रहे हैं तो दूसरी तरफ रिपोर्ट में शरीर पर छह जगह चोट के निशान मिलने की बात सामने आई है। कमरे से मिला मामले को और रहस्यमय बना दिया है। आखिर से पहले साधक के कमरे में क्या हुआ था?
क्या उन्होंने खुद को चोट पहुंचाई थी? क्या छत से छलांग लगाने के पीछे कोई दूसरी वजह थी या फिर इस पूरी घटना में कोई ऐसा पहलू छिपा है जो अभी तक जांच में सामने नहीं आया है? फिलहाल यह सवाल हैं जिनके जवाब पुलिस तलाश रही है। हालांकि अभी तक किसी दूसरे व्यक्ति की इनवॉल्वमेंट या की पुष्टि नहीं हुई है।
इस पूरे मामले में सीसीटीवी फुटेज एक अहम कड़ी बनकर सामने आया है। पुलिस जांच में मिले फुटेज में रसिक दुलारी शरण छत से कूदते दिखाई दे रहे हैं। लेकिन तस्वीरों में जो नजर आ रहा है वो अपने आप में पूरी कहानी नहीं बताता। सबसे बड़ा सवाल यही है कि से पहले आखिर उनके कमरे में क्या हुआ था? क्या वे अकेले थे? क्या किसी से उनकी बातचीत हुई थी?
क्या घटना से पहले कुछ ऐसा हुआ जिसने उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर किया? फिलहाल इन सवालों के जवाब साफ नहीं है। पुलिस आश्रम परिसर में लगे कई सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग भी खंगाल रही है ताकि मृतक के अंतिम गतिविधियों के हिसाब से चीजों को कनेक्ट किया जा सके। जांच का फोकस अब सिर्फ से लगाने की घटना तक सीमित नहीं है बल्कि उससे पहले की परिस्थितियों को समझने पर भी है। इस मामले का सबसे रहस्यमय पहलू साधक के प्राइवेट पार्ट पर चोट लगने का है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि यह चोट किन परिस्थितियों में आई और क्या यह चोट खुद पहुंचाई गई थी या इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका हो सकती है?
यही वह सवाल है जिसका जवाब जांच की दिशा को साफ करने में अहम साबित हो सकता है। हालांकि अभी तक इस केस में कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। सिर्फ चोट के मिलने के आधार पर किसी दूसरे व्यक्ति का इनवॉल्वमेंट या किसी अपराध की पुष्टि नहीं की जा सकती। पुलिस वैज्ञानिक साक्ष्यों और दूसरे जांच रिपोर्टों के आधार पर इस पहलू को समझने की कोशिश कर रही है। जांच के दौरान साधक के कमरे से एक मिलने की जानकारी सामने आई है। पुलिस ने इस उपकरण को कब्जे में लेकर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है।
अब इस ग्राइंडर से जुड़े वैज्ञानिक साक्ष्यों की पड़ताल की जा रही है। इसके फिंगरप्रिंट और अन्य संभावित साक्ष्यों का जांच किया जा रहा है ताकि पता लगाया जा सके कि इसका इस्तेमाल किसने और कब किया था। क्या ग्राइंडर का इस घटना से कोई संबंध है?
क्या इससे जुड़ा कोई ऐसा सबूत मिल सकता है जो साधक की मौत से पहले की परिस्थितियों को साफ कर सके। फिलहाल इन सवालों पर जांच जारी है। ग्राइंडर का मिलना अपने आप में किसी अपराध का प्रमाण नहीं है। इसकी वास्तविक भूमिका जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो सकेगी।
रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की रिपोर्ट ने भी कई सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट में शरीर पर छह स्थानों पर चोट के निशान मिलने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि रिपोर्ट में पैर की सिर में गंभीर चोटों का भी जिक्र है। अब जांच अधिकारियों के सामने यह समझने की चुनौती है कि शरीर पर मिली इन चोटों का घटना से क्या संबंध है। कौन सी चोट किस परिस्थिति में आई और उनका से क्या संबंध है?
इन पहलुओं की जांच की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज में छत से छलांग लगाने की तस्वीर और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आई चोटों को आपस में जोड़कर देखा जा रहा है। लेकिन इन दोनों तथ्यों के आधार पर अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। पुलिस ने एकत्र करके फॉरेंसिक साइंस लैब यानी एफएसएल भेजा है।
इस जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि घटना से पहले या घटना के समय इस मामले की जांच में एक अहम कड़ी साबित हो सकती है। अगर रिपोर्ट में कोई संदिग्ध पदार्थ सामने आता है तो उसके आधार पर पुलिस घटना से पहले की परिस्थितियों को बेहतर ढंग से समझने की कोशिश कर सकती है। वहीं रिपोर्ट में क्या सामने आता है यह अभी साफ नहीं है।
पुलिस अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के सा रिपोर्ट का भी इंतजार कर रही है। पुलिस अब आश्रम से जुड़े कुछ प्रमुख सेवादारों और घटना के समय आसपास मौजूद लोगों से पूछताछ करने की तैयारी कर रही है। जांचकर्ताओं की कोशिश है कि मृतक की मौत से पहले की गतिविधियों का पूरा क्रम सामने आ सके। पुलिस यह जानना चाहती है कि उनका व्यवहार कैसा था। क्या उन्होंने किसी परेशानी या तनाव का जिक्र किया था और घटना से पहले उनकी किन लोगों से बातचीत हुई थी। आसपास मौजूद लोगों के बयान, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और साक्ष्यों को एक साथ रखकर घटना को समझने की कोशिश की जा रही है। जांच का मकसद यह पता लगाना है कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और क्या उपलब्ध साक्ष्य किसी एक निष्कर्ष की ओर इशारा करते हैं। वृंदावन के सीईओ संदीप कुमार के मुताबिक शुरुआती तौर पर ज्यादा यानी अत्यधिक रक्त स्राव का प्रमुख कारण नजर आ रहा है। उन्होंने कहा कि मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे वास्तविक वजह क्या थी, यह जांच पूरी होने के बाद ही साफ हो सकेगा। पुलिस सभी तथ्यों की गहनता से पड़ताल कर रही है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की स्थिति साफ होगी।
फिलहाल इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि छत से छलांग लगाने से पहले आखिर क्या हुआ था? क्या पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच इस सवाल का जवाब दे पाएंगी या फिर इस मामले की गु्थी सुलझाने के लिए पुलिस को कुछ और अहम सबूतों का इंतजार करना पड़ेगा। इन सवालों के जवाब जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आ सकेंगे। ब्यूरो रिपोर्ट यूपी तक।