प्रेमानंद महाराज बोले निंदा और अपमान से बेचैन ना हो इसे भगवान का कड़वा प्रसाद समझे। शिष्य की मौत और विराट कोहली विवाद के बीच आया बड़ा संदेश। वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज का एक वीडियो सामने आया है जिसमें उन्होंने निंदा, अपमान और विपरीत परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने की बात कही है। खास बात यह है कि उनका यह संदेश ऐसे समय आया है जब केलीकुंज आश्रम से जुड़े एक शिष्य की मौत और भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली को लेकर किए गए ₹5 करोड़ के दावे के बाद आश्रम चर्चा में है। प्रेमानंद महाराज ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति निर्दोष है और उसके बावजूद समाज में उसकी निंदा या तिरस्कार होने लगे तो उसे बेचैन नहीं होना चाहिए।
ऐसी परिस्थितियों को भगवान का कड़वा प्रसाद समझकर स्वीकार करना चाहिए। उनके मुताबिक मुश्किल समय इंसान के भीतर के अभिमान को खत्म करने और उसे भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ाने का माध्यम बन सकता है। यह वीडियो गुरुवार को सामने आया और इसे प्रेमानंद महाराज के YouTube चैनल भजन मार्ग पर अपलोड किया गया। प्रेमानंद महाराज ने कहा कि जब इंसान अपनी जिंदगी राधा कृष्ण को समर्पित कर देता है तो उसे हर परिस्थिति को भगवान की इच्छा मानकर स्वीकार करना चाहिए।
किसी की निंदा करने से बचना चाहिए और यदि कोई हमारी निंदा करता है तो उसका जवाब निंदा से नहीं देना चाहिए। उन्होंने कहा कि आलोचना और अपमान को भी मुस्कुराकर सहन करना चाहिए। इसे भगवान की कृपा मानकर धैर्य और सहनशीलता के साथ आगे बढ़ना चाहिए। संत ने भक्तों को संदेश दिया कि जीवन में परिस्थितियां हमेशा एक जैसी नहीं रहती।
कभी सुख आता है तो कभी दुख, कभी सम्मान मिलता है तो कभी अपमान का सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में मन को स्थिर रखना जरूरी है। उनके मुताबिक भक्ति के रास्ते पर आगे बढ़ने वाला व्यक्ति वही है जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी श्रद्धा और धैर्य को कमजोर नहीं होने देता। प्रेमानंद महाराज ने कहा कि बड़ी से बड़ी परेशानी आने पर भी व्यक्ति को मजबूत बने रहना चाहिए। यदि कोई आलोचना या अपमान करता है तो उसका प्रतिकार उसी भाषा में करने की बजाय संयम रखना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि निंदा और आलोचना सहने से व्यक्ति के भीतर का अभिमान कम होता है।
इसलिए दूसरों की गलतियां खोजने के बजाय व्यक्ति को अपने व्यवहार को बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहिए। व प्रेमानंद महाराज का यह संदेश ऐसे वक्त में सामने आया है जब केलीकुंज आश्रम पिछले कुछ दिनों से लगातार चर्चा में है। 25 सितंबर को प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण ने केलीकुंज ट्रस्ट की इमारत की चौथी मंजिल से कूदकर जान दे दी थी। अगले दिन यमुना किनारे उनका अंतिम संस्कार किया गया था। मृतक की मां ने आरोप लगाया था कि उनके बेटे को उनसे मिलने नहीं दिया जाता था। रसिक दुलारी शरण मूल रूप से मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले थे। उनका पहले नाम दीपक लोधी बताया गया था।
करीब 2 साल पहले वह वृंदावन आई थी और प्रेमानंद महाराज से दीक्षा लेने के बाद उन्होंने अपना नाम बदलकर रसिक दुलारी शरण रख लिया था। वहीं 2 अक्टूबर को हाथरस का एक परिवार भी केलीकुंज आश्रम के बाहर पहुंचा था। परिवार ने करीब 7 घंटे तक धरना दिया। उनका आरोप था कि उनके बेटे अनुज चौधरी ने करीब 3 महीने पहले प्रेमानंद महाराज से दीक्षा ली थी और इसके बाद वह घर वापस नहीं लौटा। मामला सामने आने के बाद अधिकारियों ने परिवार को अनुज की तलाश का भरोसा दिया।
3 अक्टूबर को पुलिस ने अनुज को बरसाना के एक आश्रम से बरामद किया और बाद में उसे परिवार को सौंप दिया। वहीं इसके बाद प्रेमानंद महाराज का आश्रम विराट कोहली को लेकर किए गए एक दावे के कारण भी सुर्खियों में आया। ऐसे समय में प्रेमानंद महाराज का यह संदेश सामने आना इसे और चर्चा में ले आया है। उन्होंने अपने सत्संग में किसी विवाद या व्यक्ति का नाम लिए बिना भक्तों को निंदा, अपमान और विपरीत परिस्थितियों में संयम रखने की सीख दी।