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भारत में शामिल होगा PoK? पाकिस्तानी फौज से भिड़े कश्मीरी

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नारा तकबीर तेरी भूल में इंकलाब आएगा। इस समय पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके से जो तस्वीरें और खबरें सामने आ रही हैं वो बेहद डराने वाली है। जगह-जगह हिंसक झड़पें हो रही हैं। टायर जलाए जा रहे हैं और लोग सड़कों पर उतर कर पाकिस्तानी हुकूमत के खिलाफ खुलकर बगावत कर रहे हैं। इस उथल-पुथल की शुरुआत हुई रविवार को जब पीओके विधानसभा में शरणार्थियों के लिए सीट आरक्षण के मुद्दे पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। देखते ही देखते इस विरोध प्रदर्शन ने हिंसा का रूप ले लिया। अब तक इस खूनी संघर्ष में कम से कम 15 लोगों की मौत हो चुकी है

और सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हैं। आइए जानते हैं मौजूदा बवाल के पीछे की वजह क्या है और वहां के लोग भारत में शामिल होने की मांग क्यों कर रहे हैं। साथ ही जानेंगे कि पीओके कैसे पाकिस्तान के कब्जे में आया। नमस्कार, मैं हूं आदित्य। भारत फैक्ट्स के आज के एपिसोड में आपका स्वागत है। इस पूरी हिंसा का मुख्य केंद्र बना हुआ है रावलकोट। दरअसल इस आंदोलन को हवा दी जॉइंट आवामी एक्शन कमिटी यानी जेएसी नाम के संगठन ने जिसे पाकिस्तानी सरकार ने आननफानन में एक प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया है। सरकार इतनी घबरा गई है कि उसने इंटरनेट तक बंद कर दिया है और इस संगठन के बड़े नेताओं के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है। इस हिंसा को लेकर दोनों तरफ से अलग-अलग बातें कही जा रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सुरक्षा बल हम पर बेवजह गोलियां चला रहे हैं और हम पर जुल्म ढा रहे हैं।

पाकिस्तानी प्रशासन का दावा है कि प्रदर्शनकारियों ने सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया और संस्थानों पर हमले किए जिसके बाद मजबूरन बल प्रयोग करना पड़ा। हैरानी की बात यह है कि इस्लामाबाद इस हिंसा और प्रतिबंधों को सही ठहरा रहा है। कुछ पाकिस्तानी अधिकारी तो हमेशा की तरह इस आंदोलन के पीछे दुश्मन विदेशी ताकतों का हाथ बता रहे हैं जिसे वहां के स्थानीय नेताओं ने सिरे से खारिज कर दिया है। इस बर्बरता की वजह से पूरी दुनिया में पाकिस्तानी सरकार और उसकी सेना की थू-थू हो रही है। अब बात करते हैं इस पूरे मामले पर भारत का क्या स्टैंड है। भारत और पाकिस्तान के बीच इस मुद्दे पर तीखी जुबानी जंग छिड़ गई है। सच तो यह है कि पीओके की आम जनता अब पाकिस्तानी हुकूमत से तंग आ चुकी है। अब वहां के लोग और भारत के कई बड़े नेता समय-समय पर यह मांग उठाने लगे हैं कि पीओके को भारत का हिस्सा बन जाना चाहिए। जम्मू कश्मीर में धारा 370 हटने के बाद जो विकास हुआ चाहे वो शानदार सड़कें हो, एम्स अस्पताल हो या बढ़ता हुआ पर्यटन उसे देखकर पीओके के लोगों की आंखें खुल गई हैं। साथियों, भारत के गृह मंत्री सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने पहले ही साफ संकेत दिए हैं कि वह दिन दूर नहीं जब पीओके बहुत ही शांतिपूर्ण तरीके से भारत के साथ वापस मिल जाएगा।

खुद वहां के कई कश्मीरी नेता खुलकर भारत में शामिल होने की इच्छा जता चुके हैं। साथियों अब जानते हैं कि आखिर कैसे बना पीओके। दोस्तों इस पूरी कहानी को समझने के लिए हमें इतिहास के पन्नों को पलटना होगा। साल 1947 में जब भारत और पाकिस्तान का बंटवारा हुआ तब जम्मू कश्मीर राज्य की बनावट बहुत अलग थी। कश्मीर घाटी में मुस्लिम आबादी ज्यादा थी। जम्मू संभाग के पूर्वी जिलों में हिंदू बहुसंख्यक थे और पश्चिमी जिलों जैसे कोटली पूछ और मीरपुर में भी मुस्लिम आबादी अच्छी खासी थी। विवाद की शुरुआत हुई सन 1947 में जब पूछ इलाके के लोग महाराजा हरि के खिलाफ एक विद्रोह में आ गए। ठीक उसी समय पाकिस्तान की सेना के समर्थन से उत्तर पश्चिमी सीमांत प्रांत के हजारों पश्तून कबिलाइयों ने कश्मीर पर हमला बोल दिया। उनके पास आधुनिक हथियार थे। महाराजा हर सिंह की सेना ने उन्हें रोकने की बहुत कोशिश की। लेकिन 24 अक्टूबर तक हमलावरों ने लगभग पूरे पूंछ, मुजफराबाद और बरमुला पर कब्जा कर लिया।

यह हमलावर श्रीनगर से महज 20 मील दूर रह गए थे। उन्होंने शहरों को लूटा बेकसूर लोगों का कत्ल किया और महिलाओं और बच्चियों के साथ दरिंदगी की। हालात हाथ से निकलता देख 24 अक्टूबर 1947 को महाराजा हर सिंह ने भारत से सैन्य मदद मांगी। भारत ने साफ कहा कि हम सैनिक तभी भेज सकते हैं जब जम्मू कश्मीर कानूनी तौर पर भारत का हिस्सा बने। इसके बाद 26 अक्टूबर 1947 को महाराजा हर सिंह ने शेख अब्दुल्ला की सहमति से पंडित जवाहरलाल नेहरू के साथ मिलकर भारत के साथ विलय के समझौते पर दस्तखत कर दिए। समझौता होते ही भारतीय सेना तुरंत श्रीनगर उतरी और उसने पाकिस्तानी सेना और कबलाइयों को पीछे खदेड़ना शुरू कर दिया।

भारतीय सेना पूरी ताकत के साथ आगे बढ़ रही थी। लेकिन तभी इस मामले में यूएन की एंट्री हुई और सीज फायर की घोषणा कर दी गई। दोनों देशों के बीच जो जहां था वहीं रुक गया। नतीजा यह हुआ कि कश्मीर का जो हिस्सा पाकिस्तानी हमलावरों ने हथिया लिया वो उन्हीं के पास रह गया। इसी अवैध कब्जे वाले हिस्से को आज हम पीओके यानी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर कहते हैं। जिसे पाकिस्तान झूठा नाटक बताते हुए आजाद कश्मीर कहता है। पाकिस्तान ने इसे दो प्रशासनिक भागों में बांट रखा है। एक को वह जम्मू कश्मीर कहता है और दूसरे को गिल्गित बाल्तिस्तान। आज 1947 की उस ऐतिहासिक भूल का खामियाजा वहां की जनता भुगत रही है। लेकिन आज की जागरूक जनता और वहां के सुलगते हालात यह बता रहे हैं कि इतिहास जल्द ही करवट लेने वाला है और जल्द ही पीओके भारत का हिस्सा बन सकता है। साथियों आपको क्या लगता है? क्या पीओके का भारत में विलय जल्द होगा? कमेंट करके जरूर बताएं। बने रहिए इंडिया.com के साथ। शुक्रिया।

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