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मेलोडी के बाद अब ठेकुआ की चर्चा,PM मोदी ने वो किया जो कोई नहीं कर पाया।

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कहते हैं कि दिल का रास्ता पेट से होकर गुजरता है। लेकिन हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साबित कर दिया कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और मजबूत रिश्तों का रास्ता भी भारत के पारंपरिक स्वाद से होकर गुजर सकता है। याद है ना?

कुछ समय पहले इटली की धरती पर पीएम मोदी और जॉर्जिया मेलोनी की मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर मेलोडी का ट्रेंड छा गया था। लेकिन अब ग्लोबल मंच पर एक और देसी स्वाद का डंका बजा है। और इस बार बारी है हमारे अपने ठेवा की। महंगीदुनिया में अगर बिहारी स्वाद ना चखा तो फिर क्या खाया?

इटली में मेलोनी के साथ मेलोनी की गूंज के बाद अब बारी थी बिहार झारखंड के सबसे प्रसिद्ध और पारंपरिक स्वाद की। मौका था स्लोवाकिया के राष्ट्रपति और संसद के स्पीकर से प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात का और पीएम नरेंद्र मोदी के हाथों में था भारत की समृद्ध विरासत का प्रतीक हमारा अपना ठेकुआ। जी हां, पीएम मोदी ने जब स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेगिनी और वहां की संसद के स्पीकर रिचर्ड राशि को यह खास व्यंजन भेंट किया तो वे इसके स्वाद के कायल हो गए। आखिर स्वाद बिहारी हो तो कोई कैसे दीवाना ना बने।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस ठेकुआ का जिक्र हम कर रहे हैं उसकी खासियत क्या है? ठेकवा सिर्फ एक पकवान नहीं बिहार झारखंड की आस्था [संगीत] संस्कृति और सादगी का प्रतीक भी है। यह लोक आस्था के महापर्व छठ का मुख्य प्रसाद है। इसे पूरी शुद्धता के साथ तैयार किया जाता है। इसमें कोई मिलावट नहीं होती। गेहूं का आटा, देसी घी, सौंफ, ड्राई फ्रूट्स और गुड़ से बनाया जाता है। इसे लकड़ी के विशेष नक्काशीदार सांचों पर ठोक कर बनाया जाता है।

कभी लिट्टी चोखा का मुरीद बनाने वाले पीएम मोदी ने अब अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच पर ठेकुआ को पहुंचा दिया है। पहले मेलोडी रील्स ने इंटरनेट पर धूम मचाई थी और अब स्लोवाकिया में ठेकुआ की मिठास कूटनीति की नई कहानी लिख रही है।

साफ है बिहार का यह ठेकुआ अब लोकल से ग्लोबल हो चुका है। अब जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष ने पोस्ट कर बधाई दी है कि बिहार की इस विशिष्ट पहचान को विश्व मंच पर सम्मान मिलना हम सभी बिहार वासियों के लिए गर्व का विषय है।

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