Cli

24 घंटे में PM की दूसरी अपील, कुछ होने वाला है?

Uncategorized

तो 24 घंटे के भीतर दूसरी बार प्रधानमंत्री ने देशवासियों से फिर एक बार अपील की है और यह अपील इस बार विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिहाज से काफी अहम है। प्रधानमंत्री का पूरा फोकस इस बार का जो संबोधन है उसमें विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने को लेकर है। वडोदरा में वो रैली कर रहे थे और वहां उन्होंने ये बात कही इस पे पूरी ज्यादा जानकारी प्रधानमंत्री ने आज क्या कही है?

यह जानकारी लेकर हमारे साथ ऋतु हैं। पहले वह यह बताएंगी कि प्रधानमंत्री की आज की मुख्य बातें क्या हैं। हां ऋतु जी तो गुजरात के वड़ोदरा में सरदार धाम हॉस्टल का इनोगेशन था जिसके लिए प्रधानमंत्री वहां पे पहुंचे थे और वहां पर उन्होंने सोमनाथ टेंपल के बारे में भी काफी बातें कही। उसके लेगसी को भी हाईलाइट किया। साथ ही साथ जो एक इकोनॉमिक पॉइंट ऑफ व्यू से एक बहुत बात इंपॉर्टेंट सामने निकल कर आई कि उन्होंने फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व के बारे में बात की। जिसमें मुख्य रूप से दो चीजों पर उन्होंने फोकस किया कि हम वैसे चीजों को ना खरीद जो विदेशों से आई है। मतलब फॉरेन इंपोर्ट्स पर उन्होंने बेसिकली बोला और उन चीजों को ना खरीदें जिसके लिए हमें विदेशी मुद्रा का इस्तेमाल करना पड़ता है। तो बेसिकली उन्होंने फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व को प्रोटेक्ट करने के लिए कहा है।

बिकॉज़ वेस्ट एशिया में वॉर की वजह से क्राइसिस चल रहा है और कल आप सभी जानते होंगे। हम लगातार इस पर वीडियो कर रहे हैं कि सोने को लेकर उन्होंने क्या-क्या बात कही थी कि इनफैक्ट वेडिंग है या फेस्टिवल है या कोई भी ऑकेजन है तो आप सोने की खरीदारी बंद कर दें ताकि वॉर में और फ्यूल क्राइसिस में जो भी दिक्कतें आ रही हैं उससे देश को लड़ने में आसानी मिल सके। तो ये रहा बाकी इसके इकोनॉमिक इंप्लिकेशंस क्या है? एक बार आप बता दें शुभम। ऋतू देखिए जो कल भी प्रधानमंत्री बोल रहे हैं और जो आज भी बोल रहे हैं तो कल उन्होंने गोल्ड ना खरीदें कम खरीदें एक साल ना खरीदें। ये कहा दूसरी बात उन्होंने वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने की बात कही। इसका मतलब है कि एनर्जी कंजमशन बचाइए। ठीक है?

और तीसरी बात उन्होंने पेट्रोल डीजल कम खरीदने की वकालत की। तो बचाने की तो ये तीनों चीजें भी अल्टीमेटली एक तरह से अगर आप देखें तो वो विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने से ही जुड़ी हैं। क्योंकि ये तीनों चीज भी हम बाहर से ही इंपोर्ट करते हैं। ज्यादातर चीजें एनर्जी का जो हमारा कंजमशन है वो ज्यादातर एनर्जी हमारा बाहर से आता है और गोल्ड का इंपोर्ट भी है। तो इसमें विदेशी मुद्रा खर्च होता है।

तो इसका आर्थिक पक्ष ऋतु ये है कि जो विदेशी मुद्रा भंडार है भारत का वो 700 बिलियन डॉलर के नीचे चला गया है। करीब 690 बिलियन डॉलर के आसपास है। और यह जो हमारा कुल इंपोर्ट है उसका 10 से 11 महीने का तकरीबन है कि 10 से 11 महीने हम आराम से इंपोर्ट कर सकते हैं।

लेकिन मसला ये हो गया है कि पहले जो क्रूड बहुत ही सस्ता था अब वो $ के पार जा चुका है। और ईरान और अमेरिका के बीच में सुलह की अभी कम से कम हालांकि ट्रंप साहब का कोई भरोसा नहीं कब वो क्या कह दें लेकिन अभी कम से कम कोई सुलह की गुंजाइश नहीं लग दिखती रही दिख रही है। इसका मतलब क्या है? इसका मतलब ये है कि कच्चे तेल की कीमतें लगातार $ के अगर ऊपर रही तो हमें तेल, गैस या पेट्रोल डीजल जो भी क्रूड है हमारा उसके आयात में काफी पैसे काफी डॉलर खर्च करने पड़ेंगे। तो प्रधानमंत्री पहले से ही यह सतर्क रहने की वकालत कर रहे हैं कि आप बचे रह आप कम खर्च करें ताकि इससे जो चीजें हैं वो काबू में रहे।

सरकार के पास कहीं ऐसी स्थिति ना आ जाए कि उसका विदेशी मुद्रा भंडार कम पड़ जाए क्योंकि वो बहुत ही विकराल स्थिति होती है। आपको जानती हैं कि 90ज में ये चीज हुई थी कि विदेशी मुद्रा भंडार हमारा कमजोर पड़ गया था और फिर हमें एलपीजी और तमाम अह रिफॉर्म्स की तरफ आगे बढ़ने पड़े थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *