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CM बनते ही विजय की मुश्किलें शुरू ?

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विजय मुख्यमंत्री बन गए और इस तरह तमिलनाडु में करीब हफ्ते भर चला राजनीतिक ड्रामा खत्म हो गया। ड्रामा तो खत्म हो गया पर अब यहां से शुरू होती है असल कहानी जो रील्स, भाषण और तालियों की गड़गड़ाहट से परे है। कहानी यह कि विजय ने जो बड़े-बड़े वादे चुनाव से पहले किए उसे पूरा करने के लिए पैसे कहां से आएंगे? विजय खुद ऐसी बात कह रहे हैं जो उन्हें उनके ही गेम में फंसा सकता है। विजय ने मुख्यमंत्री बनने के बाद कहा कि राज्य कीजो माली हालत है उस पर वह एक वाइट पेपर लाएंगे। मतलब दूध का दूध और पानी का पानी करेंगे। आवाम को दिखाएंगे कि स्टालिन की सरकार किस हाल में राज्य को छोड़कर गई है।

विजय का आरोप है कि ₹1 लाख करोड़ के कर्जा राज्य पर है। पर यही आता है कहानी में ट्विस्ट। अगर 10 लाख करोड़ का कर्जा है तो फिर आप अपनी योजनाओं के लिए करीब-करीब 1 लाख करोड़ कहां से लाएंगे। इंडिया टुडे के अविनाश कतील ने इस हवाले से एक स्टोरी की है। इसकी कुछ बातों से आपको समझ में आएगा कि क्यों कहानी काफी गड्ढ है।

पहले यह जान लीजिए कि विजय के वायदे किस तरह के हैं। विजय ने फ्री बिजली देने का वादा अपनी आवाम से किया है और दिलचस्प बात यह है कि मुख्यमंत्री बनते ही उसे लागू भी कर दिया। घरेलू उपभोक्ताओं को हर 2 महीने के लिए 200 यूनिट बिजली अब तमिलनाडु में फ्री हो चुकी है। इसके अलावा उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा के लिए विशेष रैपिड रिस्पांस पुलिस फोर्स और नशे पर लगाम लगाने के लिए एंटी नारकोटिक्स यूनिट बनाने का आदेश दे दिया है। एंटी नारकोटिक्स यूनिट और विशेष रैपिड रिस्पांस पुलिस फोर्स के लिए क्या खर्चा आएगा? इस पर तो जानकारी अभी सार्वजनिक तौर पर मौजूद नहीं है। पर बिजली फ्री करने में उनको करीब ₹1730 करोड़ सालाना की जरूरत होगी। यह वो बखूबी जानते होंगे। पर आप कहेंगे कि यह भी कोई रकम है तमिलनाडु जैसे बड़े और तुलनात्मक तौर पर समृद्ध राज्य के लिए? तो जवाब है कि यह तो बस एक उनका चुनावी वादा है। ऐसी लिस्ट काफी लंबी है। जैसे पहला सालाना छह एलपीजी सिलेंडर हर घर को मुफ्त देंगे।

दूसरा ₹15,000 सालाना उन बच्चों को देंगे जो पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते और ड्रॉप की कैटेगरी में चले जाते हैं। तीसरा शादी में मदद के नाम पर सोना और साड़ी का वादा। चौथा स्टार्टअप के लिए ₹5 लाख का लोन। तो बिजनेस के लिए ₹25 लाख तक के कर्ज का वादा। पांचवा और सबसे बड़ा वादा। वैसे बेरोजगार जो ग्रेजुएट हैं उन्हें ₹4000 हर महीने तो डिप्लोमा होल्डर्स को ₹500 प्रतिमाह देने की योजना और भी बहुत कुछ विजय ने कहा होगा पर हमने आपको मोटे में बड़े वादे बता दिए। इन वादों को पूरा करने के लिए विजय को पिछली सरकार की तुलना में करीब 52% और पैसे खर्च करने पड़ेंगे। स्टालिन की सरकार करीब 65,000 करोड़ वेलफेयर स्कीम्स में खर्च कर रही थी।

यानी अब कम से कम ₹35,000 करोड़ और की जरूरत होगी। कुल ₹1 लाख करोड़ सालाना विजय जुटाएंगे तो इन योजनाओं को चला पाएंगे। और जैसा विजय का कहना है कि राज्य पर ₹1 लाख करोड़ का कर्ज है तो सवाल है कि जो वाइट पेपर विजय ला रहे हैं वे उन्हीं के लिए रेड फ्लैग तो नहीं है। तमिलनाडु में वाइट पेपर लाने का इतिहास काफी पुराना है। 2021 में स्टालिन मुख्यमंत्री थे।

वो पिछली सरकार पर वाइट पेपर ले आए। बताया कि 5.7 लाख करोड़ के राजकोशीय घाटे में उन्होंने छोड़ा है। अब विजय का ही आरोप है कि राज्य को ₹1 लाख करोड़ के घाटे में छोड़कर स्टालिन गए हैं। तो विजय के वादे इस कर्ज को और बढ़ाएगी या कम करेगी। इस पर आप अंदाजा लगा सकते हैं। अब तो यह देश भर में छा गया है। पर तमिलनाडु की राजनीति में लोक लुभाववन वादे और चीजें देने की कहानी पुरानी है। पहले यह लोक कल्याण के इरादे से शुरू हुआ।

फिर इसमें एक प्रतिस्पर्धा सी होती चली गई। खासकर डीएमके और एआईडीएमके के बीच। मतलब यह कि आप 1000 देंगे तो लीजिए मैं 2000 दूंगा। विजय के ऐलान और वायदे भी उसी कड़ी में एक कदम है। कुछ जानकार पूछ रहे हैं कि जब तमिलनाडु का रेवेन्यू रिसीप्ट यानी राज्य का सालाना तौर पर होने वाला नियमित इनकम माने आय ही जब करीब ₹31,000 करोड़ है तो फिर क्या विजय इसका करीब 1/3 पैसा यानी ₹1 लाख करोड़ अपनी इन योजनाओं पर ही खर्च कर देंगे। फिर अस्पताल सड़क दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए पैसे कहां से आएंगे?

हालांकि यही विजय की एक परिपक्वता और बयान का भी जिक्र जरूरी समझ आता है जो यह दिखलाता है कि उन्हें भी शायद इस बात का अंदाजा है जो उन्होंने मुख्यमंत्री बनने के बाद अपने संबोधन में लोगों से यह इल्तजा की कि आपकी सरकार है। मुझे थोड़ा समय दीजिए और थोड़ा धैर्य भी दिखाइए। समय और धैर्य का मतलब यही समझ आता है कि वह योजनाओं को पूरा करने में वक्त मांग रहे हैं। पर स्टालिन विपक्ष में हैं। वे शायद समय देने के मूड में नहीं है। कहते हैं कि भले ही कोई कुछ भी आरोप लगाए पर उन्हें यह ध्यान रखना चाहिए कि कोविड आया, राज्य में बाढ़ आई। केंद्र सरकार ने हमारे साथ नाइंसाफी की। फिर भी हमने कई लोक कल्याणकारी योजनाएं चलाई।

विजय पर उनका इल्जाम है कि हमने फरवरी के बजट में यह बता दिया था कि राज्य की आर्थिक स्थिति कैसी है। बावजूद इसके विजय ने ऐसे बड़े-बड़े वादे कर लोगों के साथ धोखा किया। विजय ने धोखा किया है या फिर स्टालिन फिजूल खर्ची कर रहे हैं। विजय वादे पूरे कर पाएंगे या फिर उलझ जाएंगे।

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